‘स्किन टू स्किन टच’ मामले में दिया था विवादित फैसला:रिटायरमेंट से एक दिन पहले जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने अपने पद से इस्तीफा दिया

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मुंबई3 घंटे पहले

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जस्टिस गनेडीवाला के हाल में POCSO के दो मामलों को लेकर दिए गए फैसलों की वजह से काफी आलोचना हुई थी। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

जस्टिस गनेडीवाला के हाल में POCSO के दो मामलों को लेकर दिए गए फैसलों की वजह से काफी आलोचना हुई थी। (फाइल फोटो)

स्किन टू स्किन टच मामले में फैसला देकर सुर्खियों में आईं बॉम्बे हाईकोर्ट की महिला अतिरिक्त जज जस्टिस पुष्पा वी गनेडीवाला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आज यानी 11 फरवरी को उनके कार्यकाल का आखिरी दिन है। हैरत यह है कि वे 12 फरवरी को रिटायर होने वाली थीं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस इस्तीफे के बाद वे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस कर सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस गनेडीवाला के नाम की स्थायी जज के रूप में सिफारिश नहीं करने का फैसला किया था।

इन दो फैसलों को लेकर हुई थी आलोचना

12 साल की लड़की के साथ यौन अपराध मामले में आरोपी को बरी करते हुए जस्टिस गनेडीवाला ने कहा था कि स्किन-टू-स्किन संपर्क में आए बिना किसी को छूना POCSO एक्ट के तहत यौन हमला नहीं माना जाएगा। यही नहीं, 5 साल की बच्ची का हाथ पकड़ने और पैंट खोलने को भी जस्टिस गनेडीवाला ने यौन उत्पीड़न नहीं माना था। ये फैसला 19 जनवरी 2020 को दिया गया था।

एक अन्य फैसले में उन्होंने पत्नी से पैसे की मांग करने को उत्पीड़न करार नहीं दिया था। साथ ही आत्महत्या के लिए उकसाने वाले आरोपी को रिहा कर दिया। इसके बाद उनका प्रमोशन रोक दिया गया था। जस्टिस गनेडीवाला के फैसलों पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि उनके आदेश खतरनाक मिसाल कायम करेंगे।

केंद्र सरकार ने भी सेवा विस्तार देने पर जताई थी असहमति
इसके पहले भी केंद्र सरकार ने अतिरिक्त जज के रूप में जस्टिस गनेडीवाला को जज के तौर पर 2 साल का एक्सटेंशन देने के कॉलेजियम के फैसले पर असहमति जताई थी। इसके बाद यौन शोषण का सामना करने वाले बच्चों के प्रति उनकी असंवेदनशीलता को देखते हुए सेवा में केवल एक साल का विस्तार दिया था।

जस्टिस गनेडीवाला के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने किया था रद्द
बीते 18 नवंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न प्रावधानों की जानकारी देते हुए जनवरी 2020 में दिए जस्टिस गनेडीवाला के दो फैसलों को रद्द कर दिया था।

ऐसा रहा जस्टिस गनेडीवाला का करियर
1969 में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के परतवाड़ा में जन्मी, जस्टिस गनेडीवाला को 2007 में जिला न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 2019 में उन्हें नागपुर में बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

मुंबई3 घंटे पहलेकॉपी लिंकजस्टिस गनेडीवाला के हाल में POCSO के दो मामलों को लेकर दिए गए फैसलों की वजह से काफी आलोचना हुई थी। (फाइल फोटो)स्किन टू स्किन टच मामले में फैसला देकर सुर्खियों में आईं बॉम्बे हाईकोर्ट की महिला अतिरिक्त जज जस्टिस पुष्पा वी गनेडीवाला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आज यानी 11 फरवरी को उनके कार्यकाल का आखिरी दिन है। हैरत यह है कि वे 12 फरवरी को रिटायर होने वाली थीं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस इस्तीफे के बाद वे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस कर सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस गनेडीवाला के नाम की स्थायी जज के रूप में सिफारिश नहीं करने का फैसला किया था।इन दो फैसलों को लेकर हुई थी आलोचना12 साल की लड़की के साथ यौन अपराध मामले में आरोपी को बरी करते हुए जस्टिस गनेडीवाला ने कहा था कि स्किन-टू-स्किन संपर्क में आए बिना किसी को छूना POCSO एक्ट के तहत यौन हमला नहीं माना जाएगा। यही नहीं, 5 साल की बच्ची का हाथ पकड़ने और पैंट खोलने को भी जस्टिस गनेडीवाला ने यौन उत्पीड़न नहीं माना था। ये फैसला 19 जनवरी 2020 को दिया गया था।एक अन्य फैसले में उन्होंने पत्नी से पैसे की मांग करने को उत्पीड़न करार नहीं दिया था। साथ ही आत्महत्या के लिए उकसाने वाले आरोपी को रिहा कर दिया। इसके बाद उनका प्रमोशन रोक दिया गया था। जस्टिस गनेडीवाला के फैसलों पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि उनके आदेश खतरनाक मिसाल कायम करेंगे।केंद्र सरकार ने भी सेवा विस्तार देने पर जताई थी असहमतिइसके पहले भी केंद्र सरकार ने अतिरिक्त जज के रूप में जस्टिस गनेडीवाला को जज के तौर पर 2 साल का एक्सटेंशन देने के कॉलेजियम के फैसले पर असहमति जताई थी। इसके बाद यौन शोषण का सामना करने वाले बच्चों के प्रति उनकी असंवेदनशीलता को देखते हुए सेवा में केवल एक साल का विस्तार दिया था।जस्टिस गनेडीवाला के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने किया था रद्दबीते 18 नवंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न प्रावधानों की जानकारी देते हुए जनवरी 2020 में दिए जस्टिस गनेडीवाला के दो फैसलों को रद्द कर दिया था।ऐसा रहा जस्टिस गनेडीवाला का करियर1969 में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के परतवाड़ा में जन्मी, जस्टिस गनेडीवाला को 2007 में जिला न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 2019 में उन्हें नागपुर में बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

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