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पटियाला7 घंटे पहले
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हाथ नहीं तो क्याा दिल में कुछ कर गुजरने का जोश और जनून हो तो पैरों से भी हाथों का काम किया जा सकता है। ये कहना है पंजाब के दिव्यांग साइकिलिस्ट जगविंदर का, जिन्होंने आज पटियाला के शुतराना में पैरों से साइन करके वोट डाला। इसके लिए उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
कौन हैं दिव्यांग जगविंदर सिंह
साइकिलिस्ट जगविंदर सिंह पंजाब के पटियाला जिले में पड़ने वाले पताड़ां के रहने वाले हैं। वह दोनों हाथों से दिव्यांग हैं, फिर भी साइकिलिंग करते हैं। नेशनल और स्टेट लेवल पर कई मेडल जीत चुके हैं।

बचपन से ही दोनों हाथों से दिव्यांग होने की वजह से जगविंदर सिंह का जीवन चुनौतियों से भरा रहा। हालांकि अपनी दिव्यांगता को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनाया।

छह साल की उम्र में उन्होंने पिता को देखकर ड्राइंग करनी सीखी। साइकिलिंग उन्होंने हमेशा से एक इंटरनेशनल खिलाड़ी बनने के लिए की।

212 किलोमीटर की रेस उन्होंने मात्र नौ घंटे में पूरी की थी, जबकि 48 सामान्य साइकिलिस्ट ने इसे 20 घंटे में पूरा किया था। इसके अलावा उन्होंने 300 किलोमीटर, 212 किलोमीटर और 208 किलोमीटर रेस में भी हिस्सा लिया है।

पेंटिंग कंपीटिशन में जगविंदर ने दो बार नेशनल लेवल पर, 3 बार स्टेट लेवल पर और 3 बार जिला स्तर पर टॉप किया।
पटियाला7 घंटे पहलेकॉपी लिंकहाथ नहीं तो क्याा दिल में कुछ कर गुजरने का जोश और जनून हो तो पैरों से भी हाथों का काम किया जा सकता है। ये कहना है पंजाब के दिव्यांग साइकिलिस्ट जगविंदर का, जिन्होंने आज पटियाला के शुतराना में पैरों से साइन करके वोट डाला। इसके लिए उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।कौन हैं दिव्यांग जगविंदर सिंहसाइकिलिस्ट जगविंदर सिंह पंजाब के पटियाला जिले में पड़ने वाले पताड़ां के रहने वाले हैं। वह दोनों हाथों से दिव्यांग हैं, फिर भी साइकिलिंग करते हैं। नेशनल और स्टेट लेवल पर कई मेडल जीत चुके हैं।बचपन से ही दोनों हाथों से दिव्यांग होने की वजह से जगविंदर सिंह का जीवन चुनौतियों से भरा रहा। हालांकि अपनी दिव्यांगता को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनाया।छह साल की उम्र में उन्होंने पिता को देखकर ड्राइंग करनी सीखी। साइकिलिंग उन्होंने हमेशा से एक इंटरनेशनल खिलाड़ी बनने के लिए की।212 किलोमीटर की रेस उन्होंने मात्र नौ घंटे में पूरी की थी, जबकि 48 सामान्य साइकिलिस्ट ने इसे 20 घंटे में पूरा किया था। इसके अलावा उन्होंने 300 किलोमीटर, 212 किलोमीटर और 208 किलोमीटर रेस में भी हिस्सा लिया है।पेंटिंग कंपीटिशन में जगविंदर ने दो बार नेशनल लेवल पर, 3 बार स्टेट लेवल पर और 3 बार जिला स्तर पर टॉप किया।