मन की बात मे बोले पीएम मोदी:पिछले सात साल में 200 से ज्यादा बहुमूल्य प्रतिमाओं को भारत लाया गया, मूर्तियों को वापस लाना हमारा दायित्व

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नई दिल्ली12 घंटे पहले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ कार्यक्रम से देश-विदेश की जनता से अपने विचार साझा कर रहे हैं। PM मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ में फिर एक बार आप सबका स्वागत है | आज ‘मन की बात’ की शुरुआत हम, भारत की सफलता के ज़िक्र के साथ करेंगे | इस महीने भारत, इटली से अपनी एक बहुमूल्य धरोहर को लाने में सफल रहा। ये धरोहर अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की हजारों साल पुरानी मूर्तियां हैं।

ऐसे ही कुछ वर्ष पहले तमिलनाडु के वेल्लूर से भगवान आंजनेय्यर, हनुमान जी की प्रतिमा चोरी हो गई थी। हनुमान जी की ये मूर्ति भी 600-700 साल पुरानी थी। इस महीने की शुरुआत में, ऑस्ट्रेलिया में हमें ये प्राप्त हुई, हमारे मिशन को मिल चुकी है।

मूर्तियों को वापस लाना हमारा दायित्व
PM मोदी ने कहा कि हजारों वर्षों के हमारे इतिहास में, देश के कोने-कोने में एक-से-बढ़कर एक मूर्तियां हमेशा बनती रहीं, इसमें श्रद्धा भी थी, सामर्थ्य भी था, कौशल्य भी था और विवधताओं से भरा हुआ था और हमारे हर मूर्तियों के इतिहास में तत्कालीन समय का प्रभाव भी नजर आता है। ये भारत की मूर्तिकला का नायाब उदहारण तो थीं हीं, इनसे हमारी आस्था भी जुड़ी हुई थी।

लेकिन, अतीत में बहुत सारी मूर्तियां चोरी होकर भारत से बाहर जाती रहीं। कभी इस देश में, तो कभी उस देश में ये मूर्तियां बेचीं जाती रहीं और उनके लिए वो तो सिर्फ कलाकृति थी। न उनको उसके इतिहास से लेना देना था, श्रद्धा से लेना देना था। इस दायित्व को समझते हुए भारत ने अपने प्रयास बढ़ाए और इसका कारण ये भी हुआ कि चोरी करने की जो प्रवृति थी, उसमें भी एक भय पैदा हुआ। इन मूर्तियों को वापस लाना, भारत माँ के प्रति हमारा दायित्व है। इन मूर्तियों में भारत की आत्मा का, आस्था का अंश है।

पिछले सात साल में 200 से ज्यादा बहुमूल्य प्रतिमाओं को भारत लाया गया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि साल 2013 तक करीब-करीब 13 प्रतिमाएं भारत आयी थीं। लेकिन, पिछले सात साल में 200 से ज्यादा बहुमूल्य प्रतिमाओं को भारत वापस ला चुका है।अमेरिका, ब्रिटेन, हॉलैंड, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, सिंगापुर, ऐसे कितने ही देशों ने भारत की इस भावना को समझा है और मूर्तियां वापस लाने में हमारी मदद की है।
मैं पिछले साल सितम्बर में जब अमेरिका गया था, तो वहां मुझे काफी पुरानी-पुरानी कई सारी प्रतिमाएँ और सांस्कृतिक महत्व की अनेक चीजें प्राप्त हुई |”

देश की जब कोई बहुमूल्य धरोहर वापस मिलती है, तो स्वाभाविक है इतिहास में श्रद्धा रखने वाले, archaeology में श्रद्धा रखने वाले, आस्था और संस्कृति के साथ जुड़े हुए लोग, और एक हिन्दुस्तानी के नाते, हम सबको, संतोष मिलना बहुत स्वाभाविक है।

महिलाओं के नेतृत्व से आ रहे परिवर्तन
PM मोदी ने कहा कि आप एक और बड़ा बदलाव भी होते देख रहे होंगे ! ये बदलाव है – हमारे सामाजिक अभियानों की सफलता |”ये इतने सारे बदलाव इतने कम समय में कैसे हो रहे हैं? ये परिवर्तन इसलिए आ रहा है क्योंकि हमारे देश में परिवर्तन और प्रगतिशील प्रयासों का नेतृत्व अब खुद महिलायें कर रहीं हैं। आज, हमारे देश में पार्लियामेंट से लेकर पंचायत तक अलग-अलग कार्यक्षेत्र में, महिलायें, नई ऊँचाई प्राप्त कर रही हैं | सेना में भी बेटियाँ अब नई और बड़ी भूमिकाओं में ज़िम्मेदारी निभा रही हैं, और, देश की रक्षा कर रही हैं |”

उन्होंने आगे कहा कि मैं सी.वी. रमन जी के साथ उन सभी वैज्ञानिकों को आदरपूर्वक श्रद्दांजलि देता हूँ, जिन्होंने हमारी सांटिफिक जर्नी को समृद्ध बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मेरे प्यारे देशवासियों, कल 28 फरवरी को ‘नेशनल साइंस डे’ है। ये दिन रमन इफेक्ट की खोज के लिए भी जाना जाता है।

Hindi NewsNationalMann Ki Baat ; Pm Modi ; Statue Of 600 700 Years Old Hanuman Ji Found From Australia, PM Modi Said In Mann Ki Baatनई दिल्ली12 घंटे पहलेकॉपी लिंकप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ कार्यक्रम से देश-विदेश की जनता से अपने विचार साझा कर रहे हैं। PM मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ में फिर एक बार आप सबका स्वागत है | आज ‘मन की बात’ की शुरुआत हम, भारत की सफलता के ज़िक्र के साथ करेंगे | इस महीने भारत, इटली से अपनी एक बहुमूल्य धरोहर को लाने में सफल रहा। ये धरोहर अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की हजारों साल पुरानी मूर्तियां हैं।ऐसे ही कुछ वर्ष पहले तमिलनाडु के वेल्लूर से भगवान आंजनेय्यर, हनुमान जी की प्रतिमा चोरी हो गई थी। हनुमान जी की ये मूर्ति भी 600-700 साल पुरानी थी। इस महीने की शुरुआत में, ऑस्ट्रेलिया में हमें ये प्राप्त हुई, हमारे मिशन को मिल चुकी है।मूर्तियों को वापस लाना हमारा दायित्वPM मोदी ने कहा कि हजारों वर्षों के हमारे इतिहास में, देश के कोने-कोने में एक-से-बढ़कर एक मूर्तियां हमेशा बनती रहीं, इसमें श्रद्धा भी थी, सामर्थ्य भी था, कौशल्य भी था और विवधताओं से भरा हुआ था और हमारे हर मूर्तियों के इतिहास में तत्कालीन समय का प्रभाव भी नजर आता है। ये भारत की मूर्तिकला का नायाब उदहारण तो थीं हीं, इनसे हमारी आस्था भी जुड़ी हुई थी।लेकिन, अतीत में बहुत सारी मूर्तियां चोरी होकर भारत से बाहर जाती रहीं। कभी इस देश में, तो कभी उस देश में ये मूर्तियां बेचीं जाती रहीं और उनके लिए वो तो सिर्फ कलाकृति थी। न उनको उसके इतिहास से लेना देना था, श्रद्धा से लेना देना था। इस दायित्व को समझते हुए भारत ने अपने प्रयास बढ़ाए और इसका कारण ये भी हुआ कि चोरी करने की जो प्रवृति थी, उसमें भी एक भय पैदा हुआ। इन मूर्तियों को वापस लाना, भारत माँ के प्रति हमारा दायित्व है। इन मूर्तियों में भारत की आत्मा का, आस्था का अंश है।पिछले सात साल में 200 से ज्यादा बहुमूल्य प्रतिमाओं को भारत लाया गयाकार्यक्रम को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि साल 2013 तक करीब-करीब 13 प्रतिमाएं भारत आयी थीं। लेकिन, पिछले सात साल में 200 से ज्यादा बहुमूल्य प्रतिमाओं को भारत वापस ला चुका है।अमेरिका, ब्रिटेन, हॉलैंड, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, सिंगापुर, ऐसे कितने ही देशों ने भारत की इस भावना को समझा है और मूर्तियां वापस लाने में हमारी मदद की है।मैं पिछले साल सितम्बर में जब अमेरिका गया था, तो वहां मुझे काफी पुरानी-पुरानी कई सारी प्रतिमाएँ और सांस्कृतिक महत्व की अनेक चीजें प्राप्त हुई |”देश की जब कोई बहुमूल्य धरोहर वापस मिलती है, तो स्वाभाविक है इतिहास में श्रद्धा रखने वाले, archaeology में श्रद्धा रखने वाले, आस्था और संस्कृति के साथ जुड़े हुए लोग, और एक हिन्दुस्तानी के नाते, हम सबको, संतोष मिलना बहुत स्वाभाविक है।महिलाओं के नेतृत्व से आ रहे परिवर्तनPM मोदी ने कहा कि आप एक और बड़ा बदलाव भी होते देख रहे होंगे ! ये बदलाव है – हमारे सामाजिक अभियानों की सफलता |”ये इतने सारे बदलाव इतने कम समय में कैसे हो रहे हैं? ये परिवर्तन इसलिए आ रहा है क्योंकि हमारे देश में परिवर्तन और प्रगतिशील प्रयासों का नेतृत्व अब खुद महिलायें कर रहीं हैं। आज, हमारे देश में पार्लियामेंट से लेकर पंचायत तक अलग-अलग कार्यक्षेत्र में, महिलायें, नई ऊँचाई प्राप्त कर रही हैं | सेना में भी बेटियाँ अब नई और बड़ी भूमिकाओं में ज़िम्मेदारी निभा रही हैं, और, देश की रक्षा कर रही हैं |”उन्होंने आगे कहा कि मैं सी.वी. रमन जी के साथ उन सभी वैज्ञानिकों को आदरपूर्वक श्रद्दांजलि देता हूँ, जिन्होंने हमारी सांटिफिक जर्नी को समृद्ध बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मेरे प्यारे देशवासियों, कल 28 फरवरी को ‘नेशनल साइंस डे’ है। ये दिन रमन इफेक्ट की खोज के लिए भी जाना जाता है।

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