अध्यक्ष रहते सौरव गांगुली ने तोड़ा बीसीसीआई का संविधान, विराट कोहली को हटाने वाले निर्णय सहित टीम चयन की कई बैठकों में बैठे

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Sourav Ganguly BCCI President: बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली को लेकर कुछ पूर्व और मौजूदा सेलेक्टर्स ने सेलेक्शन मीटिंग में मौजूद रहने के आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित संविधान के मुताबिक, अध्यक्ष को सेलेक्शन मीटिंग में मौजूद रहने व उसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अध्यक्ष सौरव गांगुली एक बार फिर से विवादों में घिर गए हैं। हाल ही में भारतीय विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा का श्रीलंका सीरीज के लिए टीम में चयन नहीं होने के बाद साहा ने पूर्व कप्तान और मौजूदा अध्यक्ष को लेकर कुछ बातें बताई थीं। अब तीन पूर्व और मौजूदा सेलेक्टर्स ने इस बात पर पुष्टि की है कि जब से गांगुली ने अध्यक्ष पद संभाला है उनका सेलेक्शन मीटिंग में हस्तक्षेप रहता है।

अगर बीसीसीआई के संविधान की बात करें तो उसमें साफतौर पर कहा गया है कि अध्यक्ष का राष्ट्रीय टीम के चयन में कोई भी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस संविधान को अनुमोदित भी किया है। इसके अनुसार सिर्फ बीसीसीआई के सचिव को मीटिंग में मौजूद रहने का अधिकार है वह भी संयोजक के तौर पर चयन प्रक्रिया में बिना किसी हस्तक्षेप के।

हमारे सहयोगी इंडियन एक्सप्रेस ने जब बीसीसीआई के तीन पूर्व और मौजूदा सेलेक्टर्स से बात की तो उन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि, सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) लगातार सेलेक्शन मीटिंग में मौजूद रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, जबसे अक्टूबर 2019 में गांगुली ने अध्यक्ष पद संभाला वह हर सेलेक्शन मीटिंग का हिस्सा रहे हैं।

पहचान छिपाने की शर्त पर दो सेलेक्टर्स ने इतना तक कहा कि, गांगुली ऑनलाइन सेलेक्शन मीटिंग में भी मौजूद रहते हैं। उनकी मौजूदगी और उनके कद को ध्यान में रखते हुए कोई भी आपत्ति नहीं जता सकता। इनमें से एक ने यह तक कहा कि, गांगुली के वहां होने से उन्हें काफी दबाव महसूस होता है। साथ ही कमेटी के कई सदस्य भी इस कारण अपने विचारों को आगे रखने में सहज महसूस नहीं करते हैं।

सौरव गांगुली के कार्यकाल में सेलेक्शन कमेटी द्वारा कई बड़े फैसले लिए गए हैं। उनमें से एक है विराट कोहली की कप्तानी जाना और रोहित शर्मा को सभी फॉर्मेट में कप्तान बनाना। बीसीसीआई के कई सूत्रों ने यह भी बताया कि, गांगुली की सेलेक्शन मीटिंग में मौजूदगी से कम अनुभव वाले सेलेक्टर्स दवाब में रहते हैं। उनके अनुभव के आगे वह अपने विचार नहीं रख पाते हैं। इसके कारण भारतीय क्रिकेट की अहम निर्णय लेने वाली कमेटी का महत्व कम हो गया है।

इससे पहले भी यह मामला उठ चुका है। सबसे पहले गांगुली के अध्यक्ष चुने जाने के अगले दिन 24 अक्टूबर 2019 को बोर्ड ने एक फोटो ट्वीट की थी। इस फोटो के कैप्शन में लिखा था कि, ‘सीनियर सेलेक्शन कमेटी ने आज दोपहर मीटिंग की और बांग्लादेश सीरीज के लिए टी20 और टेस्ट टीम का चयन किया।’ इस फोटो में बीच में सौरव गांगुली बैठे दिख रहे थे।

उनके अलावा इसमें मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद, सचिव जय शाह, कप्तान विराट कोहली, उपकप्तान रोहित शर्मा समेत अन्य चयनकर्ता मौजूद थे। हाल ही में जब इसको लेकर विवाद खड़ा हुआ तो दादा ने इस पर सफाई दी। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि वह फोटो सेलेक्शन मीटिंग की नहीं है।’

अब अगर ताजा आरोपों की बात करें तो इसके बाद बीसीसीआई अध्यक्ष एक बार फिर से विवादों के घेरे में आ गए हैं। सेलेक्टर्स से बातचीत के बाद जब इंडियन एक्स्प्रेस ने सौरव गांगुली को इस पूरी बातचीत की प्रश्नावली (Questionnaire) को भेजा तो दादा ने अभी तक उसका कोई भी जवाब नहीं दिया है।

Sourav Ganguly BCCI President: बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली को लेकर कुछ पूर्व और मौजूदा सेलेक्टर्स ने सेलेक्शन मीटिंग में मौजूद रहने के आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित संविधान के मुताबिक, अध्यक्ष को सेलेक्शन मीटिंग में मौजूद रहने व उसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अध्यक्ष सौरव गांगुली एक बार फिर से विवादों में घिर गए हैं। हाल ही में भारतीय विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा का श्रीलंका सीरीज के लिए टीम में चयन नहीं होने के बाद साहा ने पूर्व कप्तान और मौजूदा अध्यक्ष को लेकर कुछ बातें बताई थीं। अब तीन पूर्व और मौजूदा सेलेक्टर्स ने इस बात पर पुष्टि की है कि जब से गांगुली ने अध्यक्ष पद संभाला है उनका सेलेक्शन मीटिंग में हस्तक्षेप रहता है। अगर बीसीसीआई के संविधान की बात करें तो उसमें साफतौर पर कहा गया है कि अध्यक्ष का राष्ट्रीय टीम के चयन में कोई भी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस संविधान को अनुमोदित भी किया है। इसके अनुसार सिर्फ बीसीसीआई के सचिव को मीटिंग में मौजूद रहने का अधिकार है वह भी संयोजक के तौर पर चयन प्रक्रिया में बिना किसी हस्तक्षेप के। हमारे सहयोगी इंडियन एक्सप्रेस ने जब बीसीसीआई के तीन पूर्व और मौजूदा सेलेक्टर्स से बात की तो उन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि, सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) लगातार सेलेक्शन मीटिंग में मौजूद रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, जबसे अक्टूबर 2019 में गांगुली ने अध्यक्ष पद संभाला वह हर सेलेक्शन मीटिंग का हिस्सा रहे हैं। पहचान छिपाने की शर्त पर दो सेलेक्टर्स ने इतना तक कहा कि, गांगुली ऑनलाइन सेलेक्शन मीटिंग में भी मौजूद रहते हैं। उनकी मौजूदगी और उनके कद को ध्यान में रखते हुए कोई भी आपत्ति नहीं जता सकता। इनमें से एक ने यह तक कहा कि, गांगुली के वहां होने से उन्हें काफी दबाव महसूस होता है। साथ ही कमेटी के कई सदस्य भी इस कारण अपने विचारों को आगे रखने में सहज महसूस नहीं करते हैं। सौरव गांगुली के कार्यकाल में सेलेक्शन कमेटी द्वारा कई बड़े फैसले लिए गए हैं। उनमें से एक है विराट कोहली की कप्तानी जाना और रोहित शर्मा को सभी फॉर्मेट में कप्तान बनाना। बीसीसीआई के कई सूत्रों ने यह भी बताया कि, गांगुली की सेलेक्शन मीटिंग में मौजूदगी से कम अनुभव वाले सेलेक्टर्स दवाब में रहते हैं। उनके अनुभव के आगे वह अपने विचार नहीं रख पाते हैं। इसके कारण भारतीय क्रिकेट की अहम निर्णय लेने वाली कमेटी का महत्व कम हो गया है। इससे पहले भी यह मामला उठ चुका है। सबसे पहले गांगुली के अध्यक्ष चुने जाने के अगले दिन 24 अक्टूबर 2019 को बोर्ड ने एक फोटो ट्वीट की थी। इस फोटो के कैप्शन में लिखा था कि, ‘सीनियर सेलेक्शन कमेटी ने आज दोपहर मीटिंग की और बांग्लादेश सीरीज के लिए टी20 और टेस्ट टीम का चयन किया।’ इस फोटो में बीच में सौरव गांगुली बैठे दिख रहे थे। उनके अलावा इसमें मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद, सचिव जय शाह, कप्तान विराट कोहली, उपकप्तान रोहित शर्मा समेत अन्य चयनकर्ता मौजूद थे। हाल ही में जब इसको लेकर विवाद खड़ा हुआ तो दादा ने इस पर सफाई दी। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि वह फोटो सेलेक्शन मीटिंग की नहीं है।’ अब अगर ताजा आरोपों की बात करें तो इसके बाद बीसीसीआई अध्यक्ष एक बार फिर से विवादों के घेरे में आ गए हैं। सेलेक्टर्स से बातचीत के बाद जब इंडियन एक्स्प्रेस ने सौरव गांगुली को इस पूरी बातचीत की प्रश्नावली (Questionnaire) को भेजा तो दादा ने अभी तक उसका कोई भी जवाब नहीं दिया है।

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