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क्रिकेट, हॉकी का खेल हो या फिर सिनेमा और पर्यावरण हर क्षेत्र में बेटियां दिखा रही हैं दम
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर की और अपने आसपास की उपलब्धियों और सफलता को सेलिब्रेट करने का मौका है। हमारे देश में अलग-अलग फील्ड में एक्टिव रही ऐसी पांच महिलाओं से रू-ब-रू करा रहे हैं जिन्होंने पुरुषों के दबदबे को तोड़ते हुए दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है।
मिताली राज; अपने काम से पुरानी सोच और जकड़न पर किया प्रहार
मिताली राज क्रिकेट की दुनिया में ऐसा नाम है जिसने देश में लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी को तैयार किया है, जो क्रिकेट खेल रही हैं और खेलना चाहती हैं। कई ऐसी भी हैं, जो अभी टीम इंडिया का हिस्सा हैं और मिताली को ही अपना आइडल मानती हैं। मिताली ने पुरुषों के खेल में महिलाओं को पहचान दिलाई। दो दशक के अपने करिअर में मिताली को कई उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ा। लेकिन उन्होंने अभी तक इन सबको बड़े ही बेहतर ढंग से पार किया है।

मिताली राज ने 6 वर्ल्ड कप खेले और 10 हजार से ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया
एक बार मिताली से पूछा गया कि आपको कौन-सा क्रिकेटर बहुत पसंद है तो उन्होंने बेबाक तरीके से जवाब दिया कि यही सवाल आपने किसी पुरुष क्रिकेटर से पूछा है कि आपको कौन-सी महिला क्रिकेटर बहुत पसंद है? मिताली का ये जवाब समाज की उस सोच, जकड़न और दुश्वारियों को तोड़ता नजर आता है जो कि सदियों से समाज में मजबूत हुई है।
स्नेहा दुबे: संयुक्त राष्ट्र में की पाकिस्तान की बोलती बंद, बढ़ाया देश का मान
यूएन में फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में पहली ही कोशिश में में कामयाबी हासिल की थी। यूएन में पाकिस्तान पर उनके शानदार अंदाज का सोशल मीडिया मुरीद हो गया। उन्होंने कहा, पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत के अभिन्न हिस्से हैं और रहेंगे।

भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी स्नेहा दुबे ने संयुक्त राष्ट्र में ऐसा किया जिसके चर्चे अभी तक सोशल मीडिया से लेकर राजनीति के गलियारों में होते हैं।
पाकिस्तान को पीओके को फौरन छोड़ देना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, वाह, मजा आ गया…आपने बेहद संतुलित और सधे अंदाज में पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी। आईएफएस के लिए चुनी गई स्नेहा को भारतीय विदेश मंत्रालय ने 2014 में स्पेन की राजधानी मैड्रिड दूतावास भेजा था। पुणे के प्रतिष्ठित फर्गुसन कॉलेज से हायर एजुकेशन और दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से एम फिल करने वाली स्नेहा ने 12 साल की उम्र में सिविल सेवा में जाने का फैसला किया था।
रानी रामपाल: तांगा चलाने वाले की बेटी ने हॉकी में बनाई पहचान
15 साल की उम्र में हॉकी वर्ल्ड कप खेलने वाली रानी रामपाल के पिता बेशक तांगा चलाते थे लेकिन रानी को इस बात की जरा भी हिचक नहीं रही कि उनके पिता मजदूरी करते हैं। उन्हें अपने पिता पर गर्व है और इसलिए उन्होंने अपने नाम के साथ पिता का भी नाम लगा रखा है।

रानी अभी तक 212 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं और उन्होनें करीब 134 गोल किए हैं।
अर्जुन व भीम अवार्ड से सम्मानित रानी बताती हैं कि घर में इतने पैसे भी नहीं थे कि पिता मेरे लिए हॉकी खरीद सकें, लेकिन मेरे सपनों में उड़ान थी और उन्हीं सपनों और इच्छाओं को देखते हुए पिता ने मुझे गांव की अकादमी में डाल दिया। भाई कारपेंटर थे तो पिता और भाई दोनों के साथ की वजह से मेरी प्रैक्टिस किसी तरह चलती रही। रियो ओलंपिक में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली महिला हॉकी टीम का रानी हिस्सा रहीं और आपनी भूमिका को बेहतरीन ढंग से निभाया।
दीया मिर्जा: वाइब्रेंट एक्टर और गुडविल एंबेस्डर की दमदार भूमिका
ब्यूटी क्वीन से लेकर एक्टर, प्रोड्यूसर और यूएन के गुडविल एंबेस्डर बनने तक के सफर में दीया मिर्जा ने कई तरह से खुद को साबित किया। दीया की आज वाइब्रेंट एक्टर के तौर पर पहचान है। परिवार में अपनी भूमिका निभाने के साथ ही साथ दिया पर्यावरण समस्याओं पर भी यूएन एंबेस्डर होने के नाते काम करती रही हैं।

एक्टिंग, सोशल वेलफेयर सहित परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने में भी पीछे नहीं हैं दिया मिर्जा
अपने 40वें जन्म दिवस पर दिया ने फ्रंटलाइन वर्कर के परिवारों को 40 लाख रुपये डोनेट किए। इसके अलावा दिया ने लकड़ी के खिलौने शूमी और पर्यावरण के अनुकूल होम केयर ब्रांड में भी इन्वेस्ट किया। हाल में, दिया ने खुद को स्टारडम के अलावा चेंजमेकर के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की है।
सुप्रिया पाटिल: नौ लाख पेड़ लगाने वाली पर्यावरणविद
सुप्रिया पाटिल को पर्यावरण से खास लगाव है। ग्रो-ट्रीज डॉट कॉम में इको-प्लानर और पर्यावरण की विशेषज्ञ के तौर पर जानी जाने वाली सुप्रिया 8,70,000 पौधे लगाने की पहल करवा चुकी हैं। सुप्रिया पौधे लगाने के लिए जागरुकता कैंप भी चलाती रहती हैं।

पर्यावरण और पेड़-पौधों से बेहद लगाव रखती हैं सुप्रिया। उनकी टीम अब तक करीब 9 लाख पौधे लगा चुकी है।
सुप्रिया का मानना है कि बहुत सारी प्राकृतिक आपदाएं इसलिए होती हैं, क्योंकि प्रकृति से जो हम लेते हैं और जो हम उसे वापस देते हैं, उसके बीच असंतुलन है। इसी असंतुलन को खत्म करने के लिए सुप्रिया का मंच काम कर रहा है।
Hindi NewsWomenRani Rampal Hockey Became Mithali’s Cricket Idol, Sneha Showed The Mirror To PAKक्रिकेट, हॉकी का खेल हो या फिर सिनेमा और पर्यावरण हर क्षेत्र में बेटियां दिखा रही हैं दमअंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर की और अपने आसपास की उपलब्धियों और सफलता को सेलिब्रेट करने का मौका है। हमारे देश में अलग-अलग फील्ड में एक्टिव रही ऐसी पांच महिलाओं से रू-ब-रू करा रहे हैं जिन्होंने पुरुषों के दबदबे को तोड़ते हुए दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है।मिताली राज; अपने काम से पुरानी सोच और जकड़न पर किया प्रहारमिताली राज क्रिकेट की दुनिया में ऐसा नाम है जिसने देश में लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी को तैयार किया है, जो क्रिकेट खेल रही हैं और खेलना चाहती हैं। कई ऐसी भी हैं, जो अभी टीम इंडिया का हिस्सा हैं और मिताली को ही अपना आइडल मानती हैं। मिताली ने पुरुषों के खेल में महिलाओं को पहचान दिलाई। दो दशक के अपने करिअर में मिताली को कई उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ा। लेकिन उन्होंने अभी तक इन सबको बड़े ही बेहतर ढंग से पार किया है।मिताली राज ने 6 वर्ल्ड कप खेले और 10 हजार से ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड बनायाएक बार मिताली से पूछा गया कि आपको कौन-सा क्रिकेटर बहुत पसंद है तो उन्होंने बेबाक तरीके से जवाब दिया कि यही सवाल आपने किसी पुरुष क्रिकेटर से पूछा है कि आपको कौन-सी महिला क्रिकेटर बहुत पसंद है? मिताली का ये जवाब समाज की उस सोच, जकड़न और दुश्वारियों को तोड़ता नजर आता है जो कि सदियों से समाज में मजबूत हुई है।स्नेहा दुबे: संयुक्त राष्ट्र में की पाकिस्तान की बोलती बंद, बढ़ाया देश का मानयूएन में फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में पहली ही कोशिश में में कामयाबी हासिल की थी। यूएन में पाकिस्तान पर उनके शानदार अंदाज का सोशल मीडिया मुरीद हो गया। उन्होंने कहा, पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत के अभिन्न हिस्से हैं और रहेंगे।भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी स्नेहा दुबे ने संयुक्त राष्ट्र में ऐसा किया जिसके चर्चे अभी तक सोशल मीडिया से लेकर राजनीति के गलियारों में होते हैं।पाकिस्तान को पीओके को फौरन छोड़ देना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, वाह, मजा आ गया…आपने बेहद संतुलित और सधे अंदाज में पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी। आईएफएस के लिए चुनी गई स्नेहा को भारतीय विदेश मंत्रालय ने 2014 में स्पेन की राजधानी मैड्रिड दूतावास भेजा था। पुणे के प्रतिष्ठित फर्गुसन कॉलेज से हायर एजुकेशन और दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से एम फिल करने वाली स्नेहा ने 12 साल की उम्र में सिविल सेवा में जाने का फैसला किया था।रानी रामपाल: तांगा चलाने वाले की बेटी ने हॉकी में बनाई पहचान15 साल की उम्र में हॉकी वर्ल्ड कप खेलने वाली रानी रामपाल के पिता बेशक तांगा चलाते थे लेकिन रानी को इस बात की जरा भी हिचक नहीं रही कि उनके पिता मजदूरी करते हैं। उन्हें अपने पिता पर गर्व है और इसलिए उन्होंने अपने नाम के साथ पिता का भी नाम लगा रखा है।रानी अभी तक 212 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं और उन्होनें करीब 134 गोल किए हैं।अर्जुन व भीम अवार्ड से सम्मानित रानी बताती हैं कि घर में इतने पैसे भी नहीं थे कि पिता मेरे लिए हॉकी खरीद सकें, लेकिन मेरे सपनों में उड़ान थी और उन्हीं सपनों और इच्छाओं को देखते हुए पिता ने मुझे गांव की अकादमी में डाल दिया। भाई कारपेंटर थे तो पिता और भाई दोनों के साथ की वजह से मेरी प्रैक्टिस किसी तरह चलती रही। रियो ओलंपिक में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली महिला हॉकी टीम का रानी हिस्सा रहीं और आपनी भूमिका को बेहतरीन ढंग से निभाया।दीया मिर्जा: वाइब्रेंट एक्टर और गुडविल एंबेस्डर की दमदार भूमिकाब्यूटी क्वीन से लेकर एक्टर, प्रोड्यूसर और यूएन के गुडविल एंबेस्डर बनने तक के सफर में दीया मिर्जा ने कई तरह से खुद को साबित किया। दीया की आज वाइब्रेंट एक्टर के तौर पर पहचान है। परिवार में अपनी भूमिका निभाने के साथ ही साथ दिया पर्यावरण समस्याओं पर भी यूएन एंबेस्डर होने के नाते काम करती रही हैं।एक्टिंग, सोशल वेलफेयर सहित परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने में भी पीछे नहीं हैं दिया मिर्जाअपने 40वें जन्म दिवस पर दिया ने फ्रंटलाइन वर्कर के परिवारों को 40 लाख रुपये डोनेट किए। इसके अलावा दिया ने लकड़ी के खिलौने शूमी और पर्यावरण के अनुकूल होम केयर ब्रांड में भी इन्वेस्ट किया। हाल में, दिया ने खुद को स्टारडम के अलावा चेंजमेकर के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की है।सुप्रिया पाटिल: नौ लाख पेड़ लगाने वाली पर्यावरणविदसुप्रिया पाटिल को पर्यावरण से खास लगाव है। ग्रो-ट्रीज डॉट कॉम में इको-प्लानर और पर्यावरण की विशेषज्ञ के तौर पर जानी जाने वाली सुप्रिया 8,70,000 पौधे लगाने की पहल करवा चुकी हैं। सुप्रिया पौधे लगाने के लिए जागरुकता कैंप भी चलाती रहती हैं।पर्यावरण और पेड़-पौधों से बेहद लगाव रखती हैं सुप्रिया। उनकी टीम अब तक करीब 9 लाख पौधे लगा चुकी है।सुप्रिया का मानना है कि बहुत सारी प्राकृतिक आपदाएं इसलिए होती हैं, क्योंकि प्रकृति से जो हम लेते हैं और जो हम उसे वापस देते हैं, उसके बीच असंतुलन है। इसी असंतुलन को खत्म करने के लिए सुप्रिया का मंच काम कर रहा है।