यूपी के बाहुबलियों की 10 कहानियां:अपराध की दुनिया से जो सत्ता के गलियारों तक आए, संगीन आरोपों के बावजूद सरकारों ने मंत्री पद से भी नवाजा

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  • Uttar Pradesh (UP) Election Result 2022; UP Bahubali Raja Bhaiya, Karwaria Brothers Vijay Mishra Dhananjay Singh

यूपी में बाहुबलियों का बल हमेशा चुनावों का परिणाम बदलने में कामयाब रहा है। सरकार बनने से पहले चर्चा कर लेते हैं उनकी, जिनके बिना यूपी में चुनाव भी पूरे नहीं होते। भास्कर ने चुनाव के दौरान यूपी के बाहुबलियों पर लगातार रिपोर्ट्स की हैं। जो बेहद दिलचस्प हैं। यहां वे दस कहानियां, जिनको पढ़कर आप इनके बल का अंदाजा लगा सकते हैं।

पहली कहानी
प्रयागराज में सबसे बड़े बाहुबली को गोलियों से भूनकर नए बाहुबली बने थे करवरिया, अब दोनों की पत्नियां चुनाव लड़ रहीं हैं। प्रयागराज की प्रतापपुर से सपा ने विजमा यादव को उतारा, तो मेजा से BJP ने नीलम करवरिया को टिकट दे दिया। विधायकी लड़ रही ये दोनों महिलाएं शहर के पैलेस सिनेमा के सामने हुए एक कत्लेआम के चलते नेता बनी हैं। वरना ये घर पर बच्चे खिलाती थीं। क्या हुआ था पैलेस सिनेमा पर, पढ़ें पूरी खबर…

दूसरी कहानी
इस कहानी के किरदार हैं, अतीक अहमद, उनका भाई अशरफ, राजू पाल और उनकी पत्नी पूजा पाल। प्रयागराज का सुलेमसराय यानी वो जगह जहां पर तीन नेताओं की पॉलिटिक्स खत्म हो गई थी।17 साल बीते पर लोग वो दर्दनाक 8 मिनट नहीं भूले। एक साधारण सी लड़की जो अस्पताल में झाड़ू-पोछा करती थी वह विधायक बन गई। इस बार फिर से चुनाव में है। बहुत भूमिका पढ़ने के बजाय सीधे पूरी खबर पढ़ें…

तीसरी कहानी
कुंडा के राजा भैया के खौफ की दास्तान ऐसी है कि दिलेरगंज में घर जलते रहे, 100 मीटर दूर तालाब से कोई 1 बाल्टी पानी नहीं निकाल सका। प्रतापगढ़ जिले में एकमात्र बाहुबली हैं। नाम रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया है। कहावत है कि जहां से कुंडा की सीमा शुरू होती है, वहां से राज्य सरकार की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं। पढ़ें राजा भैया के खौफ की पूरी खबर…

चौथी कहानी
पूर्वांचल का वो डॉन जिसके खौफ से सीबीआई ने भी केस वापस कर दिया था। आतंक का वो चैप्टर अब बंद हो गया। बाहुबली जेल गए और उनके बच्चे चुनाव में आ गए। इन्हीं में से एक नाम है पूर्वांचल के सबसे बड़े डॉन मुख्तार अंसारी का। बेटा अब्बास अंसारी मऊ की सदर सीट से प्रत्याशी हैं। पढ़ें मुख्तार अंसारी के अपराध की खबर…

पांचवी कहानी
भदोही जिले की एक सीट है ज्ञानपुर। विधायक हैं विजय मिश्रा। जितना क्षेत्र में रहते हैं उससे अधिक वक्त जेल में, लेकिन प्रभाव इतना कि किसी भी पार्टी से आ जाएं चुनाव जीत जाते हैं।विजय मिश्रा को कभी मुलायम बेटे की तरह मानते थे। विजय मिश्रा के अपराधों की वे कहानियां, जिस पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। पढ़ें पूरी खबर…

छठी कहानी
UP का एक बाहुबली ऐसा भी रहा, जो Y कैटेगरी सुरक्षा के बीच भी अपराध करता रहा; एनकाउंटर में मार देने का दावा हुआ, लेकिन वह जिंदा निकला। जौनपुर में जैसे ही आपकी जुबान से रॉबिनहुड शब्द निकलेगा लोग खुद-बा-खुद धनंजय सिंह बोल देंगे। धनंजय कौन हैं? कहानी रोचक है​​​​, पढ़ें पूरी खबर…

सातवीं कहानी
पूर्वांचल को बादशाहत की बीमारी लगी है। बादशाहत की इस कड़ी में ब्रजेश सिंह का भी नाम है। ब्रजेश सिंह की जिंदगी में ट्रेजडी, क्राइम, इमोशन, ड्रामा सब है। पूरी कहानी सुनने में कान लाल हो जाते हैं। जेल में बंद ब्रजेश PM नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से MLC हैं। पढ़ें पूरी खबर…

आठवीं कहानी
गोरखपुर के बाहुबली हरिशंकर तिवारी के गुर्गे ऐलान करते थे, ‘आज घर से नहीं निकलना, गोलियां चलेंगी लाशें गिरेंगी’। इन्होंने ही राजनीति में अपराधीकरण की शुरुआत की और फिर उसे स्थापित किया। माफिया से माननीय और फिर मंत्री बन गए। चुनाव हारे तो विरासत बेटे विनय शंकर तिवारी को सौंप दी। पढ़ें पूरी खबर...

नौवीं कहानी
डीपी यादव कोई मामूली व्यक्ति नहीं बल्कि वो बाहुबली हैं जो घर से दूध बेचने निकले थे और देश के सबसे बड़े शराब माफिया बन गए। पार्टियों ने बुला-बुलाकर विधायक-सांसद और मंत्री बनाया। इनकी कच्ची शराब पीकर 350 लोग मर गए थे। लेकिन इस बार नामांकन भरने के बाद भी पर्चा वापस ले लिया। पढ़ें इसके पीछे की वजह…

दसवीं कहानी
UP का नेता बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी, जो लव-सेक्स और मर्डर के आरोप में जेल में है। सबूत बना गर्भवती के पेट में मरे बच्चे का DNA टेस्ट। फिलहाल अमरमणि और उसकी पत्नी जेल में हैं​​​​​​​। लेकिन ये सब कैसे हुआ कि 4 बार का विधायक, अलग-अलग सरकार में मंत्री रहा नेता आज राजनीतिक पार्टियों के लिए ‘अछूत’ बन गया? ​​​​​​​पढ़ें पूरी खबर…

Hindi NewsNationalUttar Pradesh (UP) Election Result 2022; UP Bahubali Raja Bhaiya, Karwaria Brothers Vijay Mishra Dhananjay Singhयूपी में बाहुबलियों का बल हमेशा चुनावों का परिणाम बदलने में कामयाब रहा है। सरकार बनने से पहले चर्चा कर लेते हैं उनकी, जिनके बिना यूपी में चुनाव भी पूरे नहीं होते। भास्कर ने चुनाव के दौरान यूपी के बाहुबलियों पर लगातार रिपोर्ट्स की हैं। जो बेहद दिलचस्प हैं। यहां वे दस कहानियां, जिनको पढ़कर आप इनके बल का अंदाजा लगा सकते हैं।पहली कहानीप्रयागराज में सबसे बड़े बाहुबली को गोलियों से भूनकर नए बाहुबली बने थे करवरिया, अब दोनों की पत्नियां चुनाव लड़ रहीं हैं। प्रयागराज की प्रतापपुर से सपा ने विजमा यादव को उतारा, तो मेजा से BJP ने नीलम करवरिया को टिकट दे दिया। विधायकी लड़ रही ये दोनों महिलाएं शहर के पैलेस सिनेमा के सामने हुए एक कत्लेआम के चलते नेता बनी हैं। वरना ये घर पर बच्चे खिलाती थीं। क्या हुआ था पैलेस सिनेमा पर, पढ़ें पूरी खबर…दूसरी कहानीइस कहानी के किरदार हैं, अतीक अहमद, उनका भाई अशरफ, राजू पाल और उनकी पत्नी पूजा पाल। प्रयागराज का सुलेमसराय यानी वो जगह जहां पर तीन नेताओं की पॉलिटिक्स खत्म हो गई थी।17 साल बीते पर लोग वो दर्दनाक 8 मिनट नहीं भूले। एक साधारण सी लड़की जो अस्पताल में झाड़ू-पोछा करती थी वह विधायक बन गई। इस बार फिर से चुनाव में है। बहुत भूमिका पढ़ने के बजाय सीधे पूरी खबर पढ़ें…तीसरी कहानीकुंडा के राजा भैया के खौफ की दास्तान ऐसी है कि दिलेरगंज में घर जलते रहे, 100 मीटर दूर तालाब से कोई 1 बाल्टी पानी नहीं निकाल सका। प्रतापगढ़ जिले में एकमात्र बाहुबली हैं। नाम रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया है। कहावत है कि जहां से कुंडा की सीमा शुरू होती है, वहां से राज्य सरकार की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं। पढ़ें राजा भैया के खौफ की पूरी खबर…चौथी कहानीपूर्वांचल का वो डॉन जिसके खौफ से सीबीआई ने भी केस वापस कर दिया था। आतंक का वो चैप्टर अब बंद हो गया। बाहुबली जेल गए और उनके बच्चे चुनाव में आ गए। इन्हीं में से एक नाम है पूर्वांचल के सबसे बड़े डॉन मुख्तार अंसारी का। बेटा अब्बास अंसारी मऊ की सदर सीट से प्रत्याशी हैं। पढ़ें मुख्तार अंसारी के अपराध की खबर…पांचवी कहानीभदोही जिले की एक सीट है ज्ञानपुर। विधायक हैं विजय मिश्रा। जितना क्षेत्र में रहते हैं उससे अधिक वक्त जेल में, लेकिन प्रभाव इतना कि किसी भी पार्टी से आ जाएं चुनाव जीत जाते हैं।विजय मिश्रा को कभी मुलायम बेटे की तरह मानते थे। विजय मिश्रा के अपराधों की वे कहानियां, जिस पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। पढ़ें पूरी खबर…छठी कहानीUP का एक बाहुबली ऐसा भी रहा, जो Y कैटेगरी सुरक्षा के बीच भी अपराध करता रहा; एनकाउंटर में मार देने का दावा हुआ, लेकिन वह जिंदा निकला। जौनपुर में जैसे ही आपकी जुबान से रॉबिनहुड शब्द निकलेगा लोग खुद-बा-खुद धनंजय सिंह बोल देंगे। धनंजय कौन हैं? कहानी रोचक है​​​​, पढ़ें पूरी खबर…सातवीं कहानीपूर्वांचल को बादशाहत की बीमारी लगी है। बादशाहत की इस कड़ी में ब्रजेश सिंह का भी नाम है। ब्रजेश सिंह की जिंदगी में ट्रेजडी, क्राइम, इमोशन, ड्रामा सब है। पूरी कहानी सुनने में कान लाल हो जाते हैं। जेल में बंद ब्रजेश PM नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से MLC हैं। पढ़ें पूरी खबर…आठवीं कहानीगोरखपुर के बाहुबली हरिशंकर तिवारी के गुर्गे ऐलान करते थे, ‘आज घर से नहीं निकलना, गोलियां चलेंगी लाशें गिरेंगी’। इन्होंने ही राजनीति में अपराधीकरण की शुरुआत की और फिर उसे स्थापित किया। माफिया से माननीय और फिर मंत्री बन गए। चुनाव हारे तो विरासत बेटे विनय शंकर तिवारी को सौंप दी। पढ़ें पूरी खबर…नौवीं कहानीडीपी यादव कोई मामूली व्यक्ति नहीं बल्कि वो बाहुबली हैं जो घर से दूध बेचने निकले थे और देश के सबसे बड़े शराब माफिया बन गए। पार्टियों ने बुला-बुलाकर विधायक-सांसद और मंत्री बनाया। इनकी कच्ची शराब पीकर 350 लोग मर गए थे। लेकिन इस बार नामांकन भरने के बाद भी पर्चा वापस ले लिया। पढ़ें इसके पीछे की वजह…दसवीं कहानीUP का नेता बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी, जो लव-सेक्स और मर्डर के आरोप में जेल में है। सबूत बना गर्भवती के पेट में मरे बच्चे का DNA टेस्ट। फिलहाल अमरमणि और उसकी पत्नी जेल में हैं​​​​​​​। लेकिन ये सब कैसे हुआ कि 4 बार का विधायक, अलग-अलग सरकार में मंत्री रहा नेता आज राजनीतिक पार्टियों के लिए ‘अछूत’ बन गया? ​​​​​​​पढ़ें पूरी खबर…

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