BJP टू TMC वाया कांग्रेस:भाजपा में 28 और कांग्रेस में 3 साल रहे शत्रुघ्न सिन्हा; कहा

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नई दिल्ली2 घंटे पहले

अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने हाल ही में कांग्रेस का हाथ छोड़कर TMC का दामन थाम लिया। शत्रुघ्न सिन्हा के मुताबिक, उनके TMC ज्वाइन करने में प्रशांत किशोर और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का अहम रोल रहा। कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा- मुझे नहीं लगता कि यह इस बारे में बात करने का सही समय है, इस पर फिर कभी बात करेंगे।

BJP के साथ सियासी सफर की शुरू करने वाले सिन्हा ने कहा- ममता बनर्जी की पार्टी के साथ जुड़ना सम्‍मान की बात है। वो मुझसे काफी दिनों से पार्टी में शामिल होने के लिए कह रही थीं। ममता ने ट्वीट किया था कि मुझे तृणमूल कांग्रेस में होना चाहिए और आसनसोल संसदीय सीट से चुनाव लड़ना चाहिए। आगे पढ़ने से पहले पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दें।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर बताया कि शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल सीट से हमारे उम्मीदवार हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर बताया कि शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल सीट से हमारे उम्मीदवार हैं।

आसनसोल से लड़ेंगे चुनाव
सिन्हा के पार्टी में जुड़ने के साथ ही TMC ने लोकसभा और विधानसभा की एक-एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। TMC ने आसनसोल लोकसभा उपचुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा को मैदान में उतारा है। वहीं, बालीगंज विधानसभा उपचुनाव में बाबुल सुप्रियो उम्मीदवार हैं।

बंगाल में कोलकाता के बाद आसनसोल ही सबसे बड़ा शहर है। इसलिए इस सीट पर होने वाले उपचुनाव पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

बंगाल में कोलकाता के बाद आसनसोल ही सबसे बड़ा शहर है। इसलिए इस सीट पर होने वाले उपचुनाव पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

आसनसोल सीट बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे से खाली हुई थी। सुप्रियो भाजपा छोड़ तृणमूल कांग्रेस में आ गए हैं। बाबुल लगातार दो बार आसनसोल से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। पश्चिम बंगाल में कोलकाता के बाद आसनसोल ही सबसे बड़ा शहर है। इसलिए इस सीट पर होने वाले उपचुनाव पर सभी की नजरें हैं।

2019 में बीजेपी से अलग हुए
सिन्हा 1991 में बीजेपी से जुड़े थे। पार्टी में उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां दी गईं। राज्यसभा सदस्य बनाया और केन्द्र में मंत्री रहे। पटना साहिब से टिकट दिया और वे लोकसभा चुनाव भी जीते। 2014 में उन्हें केन्द्र में मंत्री पद नहीं मिला तो भाजपा से संबंधों में खटास आ गई।

2019 में भाजपा ने उनकी जगह रविशंकर प्रसाद को पटना साहिब से उम्मीदवार बना दिया तो शत्रु ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वे भाजपा में करीब 28 साल रहे। इसके साथ ही कांग्रेस में भी उनका सफर मात्र तीन साल का ही रहा।

2019 लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी ने शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट नहीं दिया तो वे भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए।

2019 लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी ने शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट नहीं दिया तो वे भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए।

पटना साहिब से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। भाजपा पर शत्रुघ्न इतने भड़के कि बेटे लव सिन्हा को कांग्रेस के टिकट पर भाजपा के नितिन नवीन के खिलाफ बांकीपुर से चुनाव लड़वाया, लेकिन बेटे की भी हार हो गई। शत्रुघ्न की पत्नी पूनम केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ सपा के टिकट पर लखनऊ से चुनाव लड़ीं और हारीं।

बिहारी बाबू का राजनीतिक सफरनामा

  • दो बार बिहार से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं
  • 2003 से 2004 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रहे
  • 2004 में अटल सरकार में जहाजरानी मंत्री बने
  • 2009 में पहली बार पटना साहिब से लोकसभा पहुंचे
  • 2014 में दोबारा पटना साहिब से लोकसभा सांसद चुने गए

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