कोरोना से मौत… मुआवजा पाने लिए समय सीमा तय, फर्जी क्लेम पर मिलेगी सजा

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Edited by पंकज सिंह | नवभारत टाइम्स | Updated: Mar 24, 2022, 9:15 PM

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि कोविड से मौत के मामले में मुआवजा दावा के लिए जो आवेदन दिया जाता है उसके लिए समय सीमा तय होना चाहिए नहीं तो यह अंतहीन सिलसिला हो जाएगा। मेहता ने कहा कि चार हफ्ते की समय सीमा तय होनी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार हफ्ते का वक्त कम रहेगा।

supreme court on corona death claim

हाइलाइट्स

  • फर्जी मुआवजा मामले में केंद्र से सुप्रीम कोर्ट ने जांच को कहा
  • पांच फीसदी को रैंडम वेरिफाई करे जिससे सच्चाई का पता चले
  • मुआवजा दावे के लिए समय सीमा तय, फर्जी क्लेम पर होगी कार्रवाई
नई दिल्ली: कोरोना से मौत में मुआवजे (Covid Death Compensation) को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फर्जी मुआवजा दावा के मामले को गंभीरता से लिया है और केंद्र सरकार से इस मामले की जांच करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमबी शाह की अगुवाई वाली बेंच ने कहा है कि सरकार चार राज्यों महाराष्ट्र, केरल, गुजरात और आंध्र प्रदेश से कुल दावों में पांच फीसदी को रैंडम वेरिफाई करे कि दावे की सच्चाई क्या है। इन चारों राज्यों में सरकारी मौत के आंकड़े और दावे में काफी अंतर पाया गया है।

मुआवजा के लिए टाइम फिक्स, गलत क्लेम पर होगी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा है कि कोविड से मौत के मामले में मुआवजा दावे के लिए 60 दिन की मियाद होगी यानी अभी तक के हुए मौत के मामले में मुआवजे के लिए परिजनों को 60 दिन का वक्त दिया गया है जिस दौरान वह मुआवजे के लिए दावा कर सकता है। जबकि भविष्य में कोविड से होने वाले मौत के मामले में मुआवजा दावे के लिए 90 दिनों की अवधि तय की गई है यानी 90 दिनों में मृतक के परिजन मुआवजे के लिए दावा कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हम नैशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी/ केंद्र सरकार को इस बात की इजाजत देते हैं कि वह चार राज्यों आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल और महाराष्ट्र से रैंडम पांच फीसदी केस को ले और उसकी स्क्रूटनी करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच में अगर यह बात सामने आती है कि किसी ने भी गलत और फर्जी क्लेम लिया है तो फिर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा-2005 के तहत वह जिम्मेदार ठहराया जाएगा और सजा होगी।

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साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा दावे के लिए टाइम लिमिट भी तय कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भविष्य में कोई भी मौत होती है तो वैसे मामले में 90 दिनों के भीतर मुआवाजे के लिए दावा किया जा सकता है। साथ ही कहा है कि यह सही होगा कि 20 मार्च से पहले हुई मौत के मामले में 60 दिनों के भीतर मुआवजे के लिए दावा किया जा सकेगा।

लोगों को इस बारे में बताएं कब तक करें दावा
सुप्रीम कोर्ट ने मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ और होम मिनिस्ट्री के साथ-साथ सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वह मौजूदा आदेश के बारे में विस्तार से लोगों को जानकारी उपलब्ध कराएं। इसके लिए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सहारा लिया जाए। ताकि लोगों को पता चल सके कि सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा दावे के लिए समय सीमा तय कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बारे में लोगों को जानकारी छह हफ्ते तक हर पंद्रह दिनों में दी जाए।

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सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पहले जजमेंट के बाद 9 महीने बीत चुके हैं और अभी तक संबंधित राज्यों में 7 लाख 38 हजार 610 कोविड मौत से मुआवजा के दावे आ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की उस बात पर सहमति जताई कि जितने भी सही दावे हैं वह अथॉरिटी तक पहुंचने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की उस दलील पर भी सहमति जताई है जिसमें कहा गया था कि अगर मुआवजा दावे के लिए कोई समय सीमा तय नहीं होगी तो यह प्रक्रिया अंतहीन हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा था कि कई राज्यों में मुआवजे के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए जा रहे हैं। तब सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की थी। जिन चार राज्यों में सबसे ज्यादा मौत और दावे में अंतर है उन चार राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और केरल में 5 फीसदी डाटा उठाएं और उसका सर्वे करें।

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गौरतलब है कि 22 सितंबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोविड से हुई मौत के मामले में मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपये अनुग्रह राशि दिए जाने का फैसला किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में 14 सितंबर 2021 को केंद्र सरकार के खिलाफ कंटेप्ट अर्जी दाखिल की गई थी और कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून 2021 को अपने आदेश में कहा था कि कोविड से होने वाले मौत के मामले में एनडीएमए मुआजवा के लिए गाइडलाइंस तैयार करे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक उस पर केंद्र ने अमल नहीं किया है।

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Web Title : supreme court fix deadline covid death compensation allow centre to conduct inquiry fake claims
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Authored by राजेश चौधरी | Edited by पंकज सिंह | नवभारत टाइम्स | Updated: Mar 24, 2022, 9:15 PMसॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि कोविड से मौत के मामले में मुआवजा दावा के लिए जो आवेदन दिया जाता है उसके लिए समय सीमा तय होना चाहिए नहीं तो यह अंतहीन सिलसिला हो जाएगा। मेहता ने कहा कि चार हफ्ते की समय सीमा तय होनी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार हफ्ते का वक्त कम रहेगा।हाइलाइट्सफर्जी मुआवजा मामले में केंद्र से सुप्रीम कोर्ट ने जांच को कहापांच फीसदी को रैंडम वेरिफाई करे जिससे सच्चाई का पता चलेमुआवजा दावे के लिए समय सीमा तय, फर्जी क्लेम पर होगी कार्रवाईनई दिल्ली: कोरोना से मौत में मुआवजे (Covid Death Compensation) को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फर्जी मुआवजा दावा के मामले को गंभीरता से लिया है और केंद्र सरकार से इस मामले की जांच करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमबी शाह की अगुवाई वाली बेंच ने कहा है कि सरकार चार राज्यों महाराष्ट्र, केरल, गुजरात और आंध्र प्रदेश से कुल दावों में पांच फीसदी को रैंडम वेरिफाई करे कि दावे की सच्चाई क्या है। इन चारों राज्यों में सरकारी मौत के आंकड़े और दावे में काफी अंतर पाया गया है।मुआवजा के लिए टाइम फिक्स, गलत क्लेम पर होगी कार्रवाईसुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा है कि कोविड से मौत के मामले में मुआवजा दावे के लिए 60 दिन की मियाद होगी यानी अभी तक के हुए मौत के मामले में मुआवजे के लिए परिजनों को 60 दिन का वक्त दिया गया है जिस दौरान वह मुआवजे के लिए दावा कर सकता है। जबकि भविष्य में कोविड से होने वाले मौत के मामले में मुआवजा दावे के लिए 90 दिनों की अवधि तय की गई है यानी 90 दिनों में मृतक के परिजन मुआवजे के लिए दावा कर सकता है।सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हम नैशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी/ केंद्र सरकार को इस बात की इजाजत देते हैं कि वह चार राज्यों आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल और महाराष्ट्र से रैंडम पांच फीसदी केस को ले और उसकी स्क्रूटनी करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच में अगर यह बात सामने आती है कि किसी ने भी गलत और फर्जी क्लेम लिया है तो फिर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा-2005 के तहत वह जिम्मेदार ठहराया जाएगा और सजा होगी।हिजाब विवाद: ‘मामले को संवेदनशील न बनाएं’ सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया जल्द सुनवाई से इनकार?साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा दावे के लिए टाइम लिमिट भी तय कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भविष्य में कोई भी मौत होती है तो वैसे मामले में 90 दिनों के भीतर मुआवाजे के लिए दावा किया जा सकता है। साथ ही कहा है कि यह सही होगा कि 20 मार्च से पहले हुई मौत के मामले में 60 दिनों के भीतर मुआवजे के लिए दावा किया जा सकेगा।लोगों को इस बारे में बताएं कब तक करें दावासुप्रीम कोर्ट ने मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ और होम मिनिस्ट्री के साथ-साथ सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वह मौजूदा आदेश के बारे में विस्तार से लोगों को जानकारी उपलब्ध कराएं। इसके लिए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सहारा लिया जाए। ताकि लोगों को पता चल सके कि सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा दावे के लिए समय सीमा तय कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बारे में लोगों को जानकारी छह हफ्ते तक हर पंद्रह दिनों में दी जाए।कब तक डिटेंशन कैंप में बंद रहेगा पाकिस्तानी नागरिक? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछासुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पहले जजमेंट के बाद 9 महीने बीत चुके हैं और अभी तक संबंधित राज्यों में 7 लाख 38 हजार 610 कोविड मौत से मुआवजा के दावे आ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की उस बात पर सहमति जताई कि जितने भी सही दावे हैं वह अथॉरिटी तक पहुंचने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की उस दलील पर भी सहमति जताई है जिसमें कहा गया था कि अगर मुआवजा दावे के लिए कोई समय सीमा तय नहीं होगी तो यह प्रक्रिया अंतहीन हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा था कि कई राज्यों में मुआवजे के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए जा रहे हैं। तब सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की थी। जिन चार राज्यों में सबसे ज्यादा मौत और दावे में अंतर है उन चार राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और केरल में 5 फीसदी डाटा उठाएं और उसका सर्वे करें।Farm Laws: साथ थे ज्यादातर किसान तो क्या कृषि कानूनों को वापस लेने में जल्दबाजी कर बैठे पीएम मोदी?गौरतलब है कि 22 सितंबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोविड से हुई मौत के मामले में मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपये अनुग्रह राशि दिए जाने का फैसला किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में 14 सितंबर 2021 को केंद्र सरकार के खिलाफ कंटेप्ट अर्जी दाखिल की गई थी और कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून 2021 को अपने आदेश में कहा था कि कोविड से होने वाले मौत के मामले में एनडीएमए मुआजवा के लिए गाइडलाइंस तैयार करे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक उस पर केंद्र ने अमल नहीं किया है।Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : supreme court fix deadline covid death compensation allow centre to conduct inquiry fake claimsHindi News from Navbharat Times, TIL Network

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