राजधानी का सबसे गंदा नाला फिर बनेगा ‘साहिबी नदी’, बढ़ेगी दिल्‍ली की शान

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Edited by दीपक वर्मा | नवभारत टाइम्स | Updated: Mar 27, 2022, 9:25 AM

नजफगढ़ ड्रेन करीब 96 एमजीडी पानी हरियाणा के बदशाहपुर ड्रेन से लेकर आती है जो सीधा जाकर यमुना में गिर जाता है। इस पानी में सीवेज के साथ औद्योगिक कचरा भी होता है। नजफगढ़ नाले की लंबाई 57 किलोमीटर के करीब है।

Sahibi-River
अब नजफगढ़ नाले के रूप में है साहिबी नदी की पहचान

हाइलाइट्स

  • अलवर से निकलकर नजफगढ़ से होते हुए यमुना में मिलती थी साहिबी नदी
  • अब यह दिल्‍ली का सबसे प्रदूषित नाला यानी नजफगढ़ ड्रेन बन चुकी है
  • दिल्‍ली सरकार ने उठाया बीड़ा, नाले को साहिबी नदी के रूप में दिलाएंगे पहचान
नई दिल्ली: राजधानी में पिछले कुछ दशकों के दौरान साहिबी नदी की पहचान नजफगढ़ नाले के तौर पर हो गई है। जो लोग 40 से 50 साल पुराने हैं वह जानते हैं कि साहिबी नदी अलवर से आकर नजफगढ़ से होते हुए सीधे यमुना में जाती थी। लेकिन, पिछले कुछ सालों में यह राजधानी का सबसे प्रदूषित नाला बन चुकी है। अब दिल्ली सरकार ने इस नाले को वापस साहिबी नदी के तौर पर पहचान दिलाने के प्रयास शुरू किए हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार ने बजट में 705 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

इस बजट से न सिर्फ नजफगढ़ नाले के जहरीले पानी को साफ किया जाएगा और उस पानी में जीवों को वापस लाने की कोशिशें होंगी, बल्कि इसके दोनों तरफ सड़कों का सौंदर्यीकरण भी होगा। मकसद है कि सबसे प्रदूषित नजफगढ़ ड्रेन आने वाले समय में रिवर फ्रंट बनकर उभरे और राजधानी का प्रमुख पर्यटन स्थल बने। इस नाले को तैरते टापू (फ्लोटिंग वेटलैंड) और फ्लोटिंग एयरेटर लगाकर साफ किया जाएगा। इन-सीटू सफाई का काम और दोनों तरफ सड़कों के सौंदर्यीकरण का काम भी साथ साथ शुरू होगा। गौरतलब है कि 1977 में इस नदी में बाढ़ भी आई थी। ढांसा बांध पर पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। आसपास के करीब 72 गांव और 33 अर्बन कॉलोनियों में बाढ़ का पानी भर गया था।

ऐसे साफ होगा राजधानी का सबसे प्रदूषित नाला
अधिकारियों के अनुसार, नजफगढ़ नाले के अंदर बह रहे प्रदूषित पानी को ‘तैरते टापू’ की मदद से साफ किया जाएगा। इन तैरते टापू में ऐसे पेड़-पौधे लगे होते हैं तो पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ करते हैं और उनमें ऑक्सिजन का स्तर बढ़ाते हैं। इस प्रक्रिया से पानी फिल्टर होने के साथ ट्रीट भी होता चला जाता है। अहम यह है कि एसटीपी के मुकाबले यह प्रक्रिया कम खर्चीली भी है। इससे पानी में डिजॉल्व ऑक्सिजन का स्तर भी सुधरता है जो पानी में रहने वाले जीवों के लिए अच्छा है। गंदे पानी की वजह से पानी में ऑक्सिजन की मात्रा कम हो जाती है। इसके अलावा फ्लोटिंग वेटलैंड से पानी में अच्छे माइक्रोब भी घुल जाते हैं। इस प्रक्रिया से पानी यमुना तक पहुंचने से पहले ही साफ हो जाएगा।

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Web Title : najafgarh drain to become sahibi river again
Hindi News from Navbharat Times, TIL Network

Reported by पूनम गौड़ | Edited by दीपक वर्मा | नवभारत टाइम्स | Updated: Mar 27, 2022, 9:25 AMनजफगढ़ ड्रेन करीब 96 एमजीडी पानी हरियाणा के बदशाहपुर ड्रेन से लेकर आती है जो सीधा जाकर यमुना में गिर जाता है। इस पानी में सीवेज के साथ औद्योगिक कचरा भी होता है। नजफगढ़ नाले की लंबाई 57 किलोमीटर के करीब है।अब नजफगढ़ नाले के रूप में है साहिबी नदी की पहचानहाइलाइट्सअलवर से निकलकर नजफगढ़ से होते हुए यमुना में मिलती थी साहिबी नदीअब यह दिल्‍ली का सबसे प्रदूषित नाला यानी नजफगढ़ ड्रेन बन चुकी हैदिल्‍ली सरकार ने उठाया बीड़ा, नाले को साहिबी नदी के रूप में दिलाएंगे पहचाननई दिल्ली: राजधानी में पिछले कुछ दशकों के दौरान साहिबी नदी की पहचान नजफगढ़ नाले के तौर पर हो गई है। जो लोग 40 से 50 साल पुराने हैं वह जानते हैं कि साहिबी नदी अलवर से आकर नजफगढ़ से होते हुए सीधे यमुना में जाती थी। लेकिन, पिछले कुछ सालों में यह राजधानी का सबसे प्रदूषित नाला बन चुकी है। अब दिल्ली सरकार ने इस नाले को वापस साहिबी नदी के तौर पर पहचान दिलाने के प्रयास शुरू किए हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार ने बजट में 705 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।इस बजट से न सिर्फ नजफगढ़ नाले के जहरीले पानी को साफ किया जाएगा और उस पानी में जीवों को वापस लाने की कोशिशें होंगी, बल्कि इसके दोनों तरफ सड़कों का सौंदर्यीकरण भी होगा। मकसद है कि सबसे प्रदूषित नजफगढ़ ड्रेन आने वाले समय में रिवर फ्रंट बनकर उभरे और राजधानी का प्रमुख पर्यटन स्थल बने। इस नाले को तैरते टापू (फ्लोटिंग वेटलैंड) और फ्लोटिंग एयरेटर लगाकर साफ किया जाएगा। इन-सीटू सफाई का काम और दोनों तरफ सड़कों के सौंदर्यीकरण का काम भी साथ साथ शुरू होगा। गौरतलब है कि 1977 में इस नदी में बाढ़ भी आई थी। ढांसा बांध पर पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। आसपास के करीब 72 गांव और 33 अर्बन कॉलोनियों में बाढ़ का पानी भर गया था।ऐसे साफ होगा राजधानी का सबसे प्रदूषित नालाअधिकारियों के अनुसार, नजफगढ़ नाले के अंदर बह रहे प्रदूषित पानी को ‘तैरते टापू’ की मदद से साफ किया जाएगा। इन तैरते टापू में ऐसे पेड़-पौधे लगे होते हैं तो पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ करते हैं और उनमें ऑक्सिजन का स्तर बढ़ाते हैं। इस प्रक्रिया से पानी फिल्टर होने के साथ ट्रीट भी होता चला जाता है। अहम यह है कि एसटीपी के मुकाबले यह प्रक्रिया कम खर्चीली भी है। इससे पानी में डिजॉल्व ऑक्सिजन का स्तर भी सुधरता है जो पानी में रहने वाले जीवों के लिए अच्छा है। गंदे पानी की वजह से पानी में ऑक्सिजन की मात्रा कम हो जाती है। इसके अलावा फ्लोटिंग वेटलैंड से पानी में अच्छे माइक्रोब भी घुल जाते हैं। इस प्रक्रिया से पानी यमुना तक पहुंचने से पहले ही साफ हो जाएगा।Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : najafgarh drain to become sahibi river againHindi News from Navbharat Times, TIL Network

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