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- Preparations For Entry Into Power From South In 2024, BJP Will Make Inroads In 5 States Through These 6 Issues.
नई दिल्ली2 घंटे पहलेलेखक: प्रदीप पाण्डेय
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2024 के लोकसभा चुनाव में अभी भले दो साल बाकी हैं, लेकिन भाजपा ने अभी से सियासी किलेबंदी शुरू हो कर दी है। भाजपा उत्तर, मध्य और पूर्वोत्तर के बाद अब दक्षिण की ओर कूच करने की तैयारी में है। भाजपा की अभियान को देखते हुए विपक्षी पार्टियां भी अपनी-अपनी लामबंदी शुरू कर दी है।
पिछले दिनों दिल्ली में DMK कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर विपक्षी नेताओं के जमावड़े को 2024 की तैयारी बताया जा रहा है। तेलंगाना के CM केसीआर गैर-कांग्रेसी दलों के नेताओं से मिलकर विपक्षी एकजुटता की मुहिम चला रहे हैं। दरअसल, पूर्वोत्तर और उत्तर में हालिया जीत से उत्साहित भाजपा दक्षिण भारत में तेजी से जमीन मजबूत कर रही है। दक्षिण के पांच राज्यों में लोकसभा की 129 सीटें हैं, जिनमें भाजपा के पास अभी 28 सीटें ही हैं। इनमें भी 25 कर्नाटक की हैं, जो भाजपा के लिए दक्षिण का प्रवेश द्वार है।

दक्षिण के कर्नाटक में भाजपा की सरकार है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 28 में से 25 सीटों पर जीत हासिल की थी।
भाजपा चलाएगी सामाजिक न्याय अभियान
तेलंगाना भाजपा प्रभारी और पार्टी महासचिव तरुण चुघ कहते हैं कि राज्य विधानसभा में हमारी एक सीट थी, लोकसभा में चार सीटें जीतीं। इसीलिए, तेलंगाना के सीएम दूसरे राज्यों में घूम रहे हैं। भाजपा के हिंदीभाषी क्षेत्र की पार्टी होने के सवाल पर आंध्रप्रदेश भाजपा के सह-प्रभारी सुनील देवधर कहते हैं कि कभी यही पूर्वोत्तर के लिए कहा जाता था। आज पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा है। 6 अप्रैल को भाजपा का 42वां स्थापना दिवस है। 7 अप्रैल से 20 अप्रैल तक दक्षिण सहित पूरे देश में सामाजिक न्याय पखवाड़ा मनाया जाएगा।
ग्राफिक्स से समझिए कैसे भाजपा दक्षिण के राज्यों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है…

तेलंगाना: हर गांव तक कमल निशान
लोकसभा चुनाव में विधानसभा के मुकाबले वोट शेयर 12% बढ़ा था। पार्टी ने मंडल स्तर तक कार्यालय बना लिए हैं। यहां कार्यक्रमों में 100 लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है। वॉल राइटिंग के जरिए हर गांव तक कमल पहुंचा रहे हैं। 6 महीने में हर जिले में राष्ट्रीय नेता का दौरा होगा।
आंध्र प्रदेश: 4 गुना नए मेंबर बनाए
विधानसभा चुनाव में 0.84% वोट मिले थे। 3 साल में पार्टी हर जिले और मंडल तक पहुंची। हर तीन-चार बूथ पर एक शक्ति केंद्र है। यहां युवा मोर्चा, महिला मोर्चा सहित सभी संगठनों की टीम है। 8 लाख से ज्यादा वेरीफाइड सदस्य।
कर्नाटक: हिंदुत्व का आक्रामक मुद्दा
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 28 में से 25 सीटें जीती थीं। सीएम बदलकर एंटी इंकंबेंसी रोकी। हिजाब और हलाल जैसे मुद्दे पार्टी के लिए मुफीद हैं। धर्मांतरण विरोधी बिल, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने पर पार्टी आक्रामक है।

कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होना है। ऐसे में भाजपा के लिए इस राज्य पुराने परफॉर्मेंस दोहराने की चुनौती है।
तमिलनाडु: निकाय चुनाव से ताकत
भाजपा स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ी। ज्यादातर युवाओं को टिकट दिया। 5000 से ज्यादा ऐसे युवाओं की पहचान की, जो पार्टी को मजबूत कर सकते हैं। इस चुनाव में भाजपा को 5.4% वोट मिले, पिछले विधानसभा चुनाव में 2.62% वोट मिले थे।
Hindi NewsNationalPreparations For Entry Into Power From South In 2024, BJP Will Make Inroads In 5 States Through These 6 Issues.नई दिल्ली2 घंटे पहलेलेखक: प्रदीप पाण्डेयकॉपी लिंक2024 के लोकसभा चुनाव में अभी भले दो साल बाकी हैं, लेकिन भाजपा ने अभी से सियासी किलेबंदी शुरू हो कर दी है। भाजपा उत्तर, मध्य और पूर्वोत्तर के बाद अब दक्षिण की ओर कूच करने की तैयारी में है। भाजपा की अभियान को देखते हुए विपक्षी पार्टियां भी अपनी-अपनी लामबंदी शुरू कर दी है।पिछले दिनों दिल्ली में DMK कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर विपक्षी नेताओं के जमावड़े को 2024 की तैयारी बताया जा रहा है। तेलंगाना के CM केसीआर गैर-कांग्रेसी दलों के नेताओं से मिलकर विपक्षी एकजुटता की मुहिम चला रहे हैं। दरअसल, पूर्वोत्तर और उत्तर में हालिया जीत से उत्साहित भाजपा दक्षिण भारत में तेजी से जमीन मजबूत कर रही है। दक्षिण के पांच राज्यों में लोकसभा की 129 सीटें हैं, जिनमें भाजपा के पास अभी 28 सीटें ही हैं। इनमें भी 25 कर्नाटक की हैं, जो भाजपा के लिए दक्षिण का प्रवेश द्वार है।दक्षिण के कर्नाटक में भाजपा की सरकार है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 28 में से 25 सीटों पर जीत हासिल की थी।भाजपा चलाएगी सामाजिक न्याय अभियानतेलंगाना भाजपा प्रभारी और पार्टी महासचिव तरुण चुघ कहते हैं कि राज्य विधानसभा में हमारी एक सीट थी, लोकसभा में चार सीटें जीतीं। इसीलिए, तेलंगाना के सीएम दूसरे राज्यों में घूम रहे हैं। भाजपा के हिंदीभाषी क्षेत्र की पार्टी होने के सवाल पर आंध्रप्रदेश भाजपा के सह-प्रभारी सुनील देवधर कहते हैं कि कभी यही पूर्वोत्तर के लिए कहा जाता था। आज पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा है। 6 अप्रैल को भाजपा का 42वां स्थापना दिवस है। 7 अप्रैल से 20 अप्रैल तक दक्षिण सहित पूरे देश में सामाजिक न्याय पखवाड़ा मनाया जाएगा।ग्राफिक्स से समझिए कैसे भाजपा दक्षिण के राज्यों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है…तेलंगाना: हर गांव तक कमल निशानलोकसभा चुनाव में विधानसभा के मुकाबले वोट शेयर 12% बढ़ा था। पार्टी ने मंडल स्तर तक कार्यालय बना लिए हैं। यहां कार्यक्रमों में 100 लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है। वॉल राइटिंग के जरिए हर गांव तक कमल पहुंचा रहे हैं। 6 महीने में हर जिले में राष्ट्रीय नेता का दौरा होगा।आंध्र प्रदेश: 4 गुना नए मेंबर बनाएविधानसभा चुनाव में 0.84% वोट मिले थे। 3 साल में पार्टी हर जिले और मंडल तक पहुंची। हर तीन-चार बूथ पर एक शक्ति केंद्र है। यहां युवा मोर्चा, महिला मोर्चा सहित सभी संगठनों की टीम है। 8 लाख से ज्यादा वेरीफाइड सदस्य।कर्नाटक: हिंदुत्व का आक्रामक मुद्दालोकसभा चुनाव में भाजपा ने 28 में से 25 सीटें जीती थीं। सीएम बदलकर एंटी इंकंबेंसी रोकी। हिजाब और हलाल जैसे मुद्दे पार्टी के लिए मुफीद हैं। धर्मांतरण विरोधी बिल, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने पर पार्टी आक्रामक है।कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होना है। ऐसे में भाजपा के लिए इस राज्य पुराने परफॉर्मेंस दोहराने की चुनौती है।तमिलनाडु: निकाय चुनाव से ताकतभाजपा स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ी। ज्यादातर युवाओं को टिकट दिया। 5000 से ज्यादा ऐसे युवाओं की पहचान की, जो पार्टी को मजबूत कर सकते हैं। इस चुनाव में भाजपा को 5.4% वोट मिले, पिछले विधानसभा चुनाव में 2.62% वोट मिले थे।