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2 घंटे पहलेलेखक: आशीष उरमलिया
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भिंड जिले के बिलाव गांव की 75% से ज्यादा जमीन पर एक पुरोहित परिवार का कब्जा था। ज्यादातर जमीन गरीबों से छीनी गई थी। पुरोहित परिवार की पहुंच सरकार के मंत्री तक थी इसलिए उसे किसी का खौफ नहीं था। जो मन आता वो करता, पुलिस भी उस परिवार का हुक्म बजाती थी। इसी रौब के चलते परिवार ने कई सालों से गांव की सरपंची पर भी कब्जा कर रखा था। जो उनके खिलाफ जाता पीटा जाता। ये बात उस गांव के निचली समाज के एक 17 साल के लड़के को बहुत चुभती थी, उसने भयंकर विद्रोह कर दिया।
आज डकैत की कहानी 7 में कहानी उसी लड़के मलखान सिंह की जिसने जुल्म के खिलाफ बंदूक उठाई और फिर चंबल का शेर कहलाने लगा। मलखान सिंह ने ऐसा क्या किया था कि चंबल से सटे 5 जिलों में रेप होने बंद हो गए थे? आइए जानते हैं…

चंबल में अपनी गैंग के साथ मलखान सिंह
पुरोहित परिवार ने पुलिस से मरवाया और जेल में डलवा दिया
मलखान 17 साल का था तभी उसने गांव के पुरोहित परिवार की मनमानी के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी। गांव वालों को जागरूक करने लगा। इसके बाद पुरोहित परिवार का मुखिया कैलाश पंडित मलखान का दुश्मन बन गया और एक दिन पुलिस से कह कर उसे जेल में बंद करवा दिया।
पुलिस ने मलखान को जेल में बंद कर खूब मारा। कुछ दिनों बाद मलखान जमानत पर जेल से छूटा तो उसने सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए फॉर्म भर दिया और खुलकर कैलाश पंडित के खिलाफ बोलने लगा। एक दिन भरी पंचायत में उसने सिंध नदी के किनारे मंदिर की 100 बीघा जमीन का मुद्दा उठा दिया जिस पर कैलाश पंडित ने कब्जा कर रखा था। मंदिर की जमीन को कैलाश के कब्जे से छुड़ाने के लिए मलखान ने मुहिम छेड़ दी थी। कैलाश इस बात से परेशान हुआ तो उसने नई चाल चली।

मौजूदा समय में मलखान कुछ ऐसे दिखते हैं।
कैलाश पंडित ने दोस्त की हत्या करवा दी, पुलिस मलखान को मारते हुए ले गई
पुरोहित कैलाश पंडित पैसे वाला था। उसका चाचा मंत्री था इसलिए पुलिस भी उसकी बात मानती थी। कैलाश पंडित ने मलखान पर आरोप लगाया कि मलखान कुख्यात डाकू गिरदारिया के साथ संपर्क में रहता है। वो उसका पता ठिकाना जनता है और कई वारदातों में उसका साथ भी देता है।
इन आरोपों के बाद पुलिस ने बिना देरी किए मलखान के घर पर छापा मार दिया और उसे गांव वालो के सामने से पीटते हुए अपने साथ ले गई। ये सब जानबूझ कर किया जा रहा था ताकि मलखान फिर कभी कैलाश के खिलाफ मुंह न खोले। मलखान नहीं माना। इसी बीच मलखान पर कैलाश पंडित के एक खास आदमी की हत्या का आरोप लगा दिया गया। अब मलखान परेशान हो चुका था इसी बीच होली के दिन उसके एक बेहद करीब दोस्त की हत्या कर दी गई। यहां मलखान की बर्दास्त की सारी हदें पार हो जाती हैं और मलखान बीहड़ की तरफ निकल पड़ता है।
मलखान के सबसे बड़े दुश्मन को गांव छोड़ कर भागना पड़ा
चंबल पहुंचने के बाद मलखान ने अपने चचेरे भाई और दोस्तों के साथ मिल कर एक गैंग बना ली लेकिन उसके पास हथियार नहीं थे। मलखान की गैंग ने दर्जनों अपहरण और लूट की घटनाओं को अंजाम दिया और पैसे इकट्ठे कर हथियार खरीदे।

मलखान सिंह अपनी हथियारों से लेस गैंग के साथ
अपनी गैंग मजबूत करने के बाद एक रात मलखान कैलाश के घर पहुंच जाता है। हाथ वाले स्पीकर से कैलाश पंडित को ललकारता है। जैसे ही कैलाश बाहर आता है, मलखान और उसकी गैंग उस पर गोलियां बरसाना शुरू कर देती है। हालांकि कई गोलियां लगने के बाद भी कैलाश भागने में सफल रहता है और बच निकलता है। इसके बाद मलखान के खौफ से कैलाश पंडित गांव ही छोड़ कर भाग जाता है।
मलखान की गैंग बीहड़ की सबसे अमीर और बड़ी गैंग बन जाती है
कैलाश के घर गोलीबारी करने के बाद पुलिस लगातार मलखान को ढूंढ रही होती है इसलिए मलखान के पास वापस गांव जाने का कोई ऑप्शन नहीं बचता। मलखान अपनी गैंग के साथ लूट, अपहरण और हत्याएं जारी रखता है। कहते हैं, मलखान ने कुछ ही समय में इतने अपहरण कर लिए थे कि जितने चंबल के इतिहास में किसी डाकू ने नहीं किये थे।
अब मलखान की गैंग अमीर हो चुकी थी। धीरे-धीरे उसकी गैंग के सदस्यों की संख्या भी बढ़ती जा रही थी। पूर्व पुलिस अधिकारी अशोक भदौरिया ने एक इंटरव्यू में बताया, “उसकी गैंग के सदस्यों की संख्या 100 से ज्यादा हो चुकी थी। लेकिन इन 100 लोगों में ऊंची जाती का एक भी व्यक्ति नहीं था।” गैंग बड़ी होने के साथ मलखान का दायरा तीन राज्यों तक फैल जाता है। उसकी गैंग भिंड, मुरैना, इटावा, जालौन, आगरा और धौलपुर तक एक्टिव रहने लगती है और एक से बढ़कर एक वारदातों को अंजाम देने लगती है।

मलखान की गैंग का एक डाकू
मलखान के पास विदेशी हथियारों का भंडार था
70 के दशक में मलखान सिंह और उसकी गैंग के पास सेल्फ लोडिंग अमेरिकन राइफल थी। इटालियन दूरबीन थी जिससे वह दूर बैठ कर पुलिस की गतिविधि को देख पाता था। इसके अलावा उसके पास AK-47, कार्बाइन जैसे हथियारों की भरमार थी। मलखान अपने एक हाथ में अमेरिकन राइफल और दूसरे हाथ में लाउडस्पीकर लेकर चलता था। उसकी गैंग में 20 ऐसे लोग थे जो मलखान के लिए किसी भी वक्त जान देने के लिए तैयार रहते थे। मलखान का जो भी सदस्य उससे गद्दारी करता था मलखान उसे मौत के घाट उतार देता था।
फूलन समेत बीहड़ के सारे डाकू उसे ‘दस्यु किंग’ नाम दे देते हैं
70 के दशक में चंबल में और भी कई डाकुओं की गैंग एक्टिव हुआ करती थीं। उन सभी को मलखान के बढ़ते वर्चस्व से इनसिक्योरिटी फील होने लगी थी। इसी के चलते आये दिन दूसरे डाकुओं के साथ मलखान की मुठभेड़ होने लगी। मलखान उन डाकुओं को हाथ-पैर में गोली मार कर जिंदा छोड़ देता था। इसके चलते बाकी डकैतों के दिल में भी मलखान के लिए इज्जत बढ़ने लगी और सब मिल कर उसे ‘दस्यु किंग’ कह कर बुलाने लगे।

अपनी ऑटोमैटिक अमेरिका राइफल लिए मलखान सिंह
उसी दौरान नई-नई डाकू बनी फूलन देवी भी मलखान की इज्जत किया करती थी। दरअसल, मलखान सिंह उसूलों पर चलने वाला और दरियादिल इंसान था। मलखान से जुड़ा एक वाकया भी बहुत चर्चित है, “एक दिन मलखान की पुलिस से मुठभेड़ होती है। पुलिस का एक सिपाही उसकी पकड़ में आ जाता है। गैंग उस सिपाही को मारने को आतुर थी। दशहरे का दिन था। मलखान गैंग से कहता है, ‘इसको मारने से इसके बीवी बच्चे बिना मारे मर जाएंगे। इसे छोड़ दो।’ बाद में वो सिपाही ट्रांसफर ले लेता है ताकि उसे मलखान के खिलाफ किसी कार्यवाई का हिस्सा न बनना पड़े।”
“कोई बलात्कार करेगा तो उसे चौराहे पर खड़ा कर के गोली मार दी जाएगी”
मलखान ने अपनी गैंग के लिए कायदे-कानून भी तैयार किए थे जो बाकी डाकुओं की गैंग से बिलकुल अलग थे। सबसे बड़ा नियम तो ये था कि वो और उसकी गैंग का कोई भी सदस्य किसी लड़की पर गंदी नजर नहीं डालेगा। उसकी गैंग के लोग बहन-बेटियों को देखते थे तो गर्दन झुकाते और उनके पैर छू कर आगे चले जाते थे।
मलखान ने ये ऐलान भी कर दिया था कि चंबल के 5 जिलों में अगर कोई बहन-बेटी को छेड़ता भी है तो वो उसी दिन खुद को मलखान की गोली से मरा मान ले। मलखान ने बलात्कारी को चौराहे पर खड़ा करके गोली मारने का ऐलान किया था। बलात्कार के कई मामलों में मलखान ने ऐसा किया भी। इसके बाद उन इलाकों में रेप होने बंद हो गए थे।
पुलिस वालों को मारने के लिए फेमस था, उसके पास हथियार भी पुलिस से ज्यादा थे
साल 1980 तक तक मलखान पर 94 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके थे। जिसमें 17 हत्याएं, 18 डकैती, 28 अपहरण और 19 हत्या के प्रयास के मामले शामिल थे। मलखान पर ये आरोप भी लगे कि उसने मुठभेड़ के दौरान दर्जनों पुलिस वालों की हत्याएं भी कीं। बदनामी के डर से पुलिस ने ये बात सामने नहीं आने दी। 1982 में मलखान की गैंग से मिले पत्रकारों ने बताया मलखान के पास इतने हथियार थे जितने 4-5 जिलों की पुलिस के पास कुल मिलकर भी नहीं थे। सबसे बड़ा फर्क तो ये था कि मलखान के पास आधुनिक हथियार थे और पुलिस के पास नहीं।

उन दिनों मलखान की घुमावदार मूछों की भी खूब चर्चा थी।
जो भी पुलिस वाला मलखान को डाकू कहता वो उसे गोली मार देता था। दरअसल, मलखान को डाकू कहा जाना पसंद नहीं था वो खुद को बागी कहलवाना पसंद करता था।
मलखान को पकड़ने में तीन राज्यों की पुलिस के पसीने छूट गए थे
मलखान का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा था। वह लगातार हत्याएं करने लगा था। दर्जनों जिलों के व्यापारी, रसूखदार लोग उससे खौफ खाने लगे थे। लोगों दिन के वक्त भी घर से निकलने में कतराने लगे थे। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था।
केंद्र सरकार के साथ एमपी, यूपी और राजस्थान की सरकार ने एसटीएफ टीमों का गठन किया और मलखान को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए जंगल में उतार दिया। टीमें महीनों तक बीहड़ में भटकती रहीं कईयों मुठभेड़ हुईं। बार-बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी। मलखान उनके हत्थे कभी नहीं चढ़ पाया।
दरअसल, मलखान हर रात अपना अड्डा बदल देता था। 6 लाख एकड़ में फैले बीहड़ के चप्पे-चप्पे पर उसके लोग तैनात रहते थे जो पुलिस के एक-एक मूवमेंट की जानकारी थे। एसटीएफ की नाकामी के बाद सरकार ने उस पर 70 हजार का इनाम रख दिया जो आज के करीब 6 लाख रुपए के बराबर हैं।
मलखान ने अपने सबसे बड़े दुश्मन कैलाश पंडित को ढूंढ निकाला
मलखान के एक हमले के बाद ही कैलाश पंडित गांव छोड़ कर भाग गया था। मलखान की गैंग ने उसे ढूंढ निकाला और उसकी हत्या कर दी। मलखान ने अपने सबसे बड़े दुश्मन को तो मार गिराया लेकिन जिस जमीन की वजह से ये विवाद शुरू हुआ था उसका मामला अभी नहीं सुलझा था। मलखान किसी भी हालत में उस 100 बीघा जमीन को पुरोहित परिवार के कब्जे से मुक्त कराना चाहता था। पुलिस के बड़े आला अफसरों को इस बात की जानकारी लग चुकी थी।
मलखान का आत्म समर्पण देखने 30 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई थी
मलखान पर रिपोर्ट तैयार कर रहे 3 पत्रकारों ने मलखान के दिल की ये बात सरकार तक पहुंचाई। उस समय एमपी के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह थे। पत्रकार कल्याण बनर्जी और 2 अन्य पत्रकारों के जरिए सरकार और मलखान के बीच बातों का सिलसिला शुरू हुआ।

पत्रकारों से बात करते हुए मलखान सिंह।
उसी समय भिंड में एक एसपी विजय रमन की एंट्री होती है। विजय डकैतों के लिए खौफ बनते जा रहे थे। उन्होंने कुछ ही दिनों में दर्जनों छोटे-बड़े डकैतों का एनकाउंटर कर दिया था। इसके चलते मलखान के अंदर भी थोड़ा खौफ पैदा हो गया था।
मलखान पत्रकारों के जरिए मंदिर की 100 बीघा जमीन का मामला सुलझाने की शर्त रखता है। इधर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह इंदिरा गांधी से बात करते हैं। इंदिरा गांधी की हरी झंडी मिलते ही अर्जुन सरकार मंदिर की जमीन का मामला सुलझती है। उसे वापस मंदिर के नाम कर देती है। 15 साल बीहड़ में बिताने के बाद मलखान सिंह सरेंडर करने को तैयार हो जाता है।

एमपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष सरेंडर करते हुए मलखान
15 जून 1982 में मलखान सिंह और उसकी गैंग मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की मौजूदगी में समर्पण करते हैं। पुलिस की वर्दी पहने मलखान माता दुर्गा की मूर्ति के सामने अपने हथियार डाल दिए। ये सरेंडर देखने के लिए मैदान में 30 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई थी। पुलिस के लिए भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया था। इसके बाद मलखान 6 साल जेल में रहे। साल 1989 में सभी मामलों में बरी करके उन्हें रिहा कर दिया गया।
राजनीति में भी हाथ आजमाया, 2014 में नरेंद्र मोदी के लिए प्रचार किया
जेल से छूटने के बाद भी यूपी-एमपी और राजस्थान के 5 जिलों में मलखान की धाक कायम थी। इसलिए कई राजनीतिक पार्टियों ने उनसे संपर्क साधा। मलखान भारतीय जनता पार्टी से प्रभावित हुए और उसके लिए प्रचार करना शुरू कर दिया। साल 2014 के चुनावों में नरेंद्र मोदी का प्रचार करने के लिए वो कई मंचों का चेहरा बने। अपने भाषणों में कांग्रेस को कोसा और नरेंद्र मोदी को जिताने की अपील की।

2014 में भाजपा के लिए प्रचार करते हुए मलखान सिंह
साल 2019 में भाजपा ने टिकट ना मिलने पर वो भाजपा से खफा हुए और पार्टी छोड़ दी। बाद में उन्होंने अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया का दामन थम लिया। धौरहरा लोकसभा सीट चुनाव लड़े लेकिन हार गए। मलखान सिंह हमेशा कहते हैं, “अन्याय नहीं होने देंगे, यही मेरा मिशन है।”
2 घंटे पहलेलेखक: आशीष उरमलियाकॉपी लिंकवीडियोभिंड जिले के बिलाव गांव की 75% से ज्यादा जमीन पर एक पुरोहित परिवार का कब्जा था। ज्यादातर जमीन गरीबों से छीनी गई थी। पुरोहित परिवार की पहुंच सरकार के मंत्री तक थी इसलिए उसे किसी का खौफ नहीं था। जो मन आता वो करता, पुलिस भी उस परिवार का हुक्म बजाती थी। इसी रौब के चलते परिवार ने कई सालों से गांव की सरपंची पर भी कब्जा कर रखा था। जो उनके खिलाफ जाता पीटा जाता। ये बात उस गांव के निचली समाज के एक 17 साल के लड़के को बहुत चुभती थी, उसने भयंकर विद्रोह कर दिया।आज डकैत की कहानी 7 में कहानी उसी लड़के मलखान सिंह की जिसने जुल्म के खिलाफ बंदूक उठाई और फिर चंबल का शेर कहलाने लगा। मलखान सिंह ने ऐसा क्या किया था कि चंबल से सटे 5 जिलों में रेप होने बंद हो गए थे? आइए जानते हैं…चंबल में अपनी गैंग के साथ मलखान सिंहपुरोहित परिवार ने पुलिस से मरवाया और जेल में डलवा दियामलखान 17 साल का था तभी उसने गांव के पुरोहित परिवार की मनमानी के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी। गांव वालों को जागरूक करने लगा। इसके बाद पुरोहित परिवार का मुखिया कैलाश पंडित मलखान का दुश्मन बन गया और एक दिन पुलिस से कह कर उसे जेल में बंद करवा दिया।पुलिस ने मलखान को जेल में बंद कर खूब मारा। कुछ दिनों बाद मलखान जमानत पर जेल से छूटा तो उसने सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए फॉर्म भर दिया और खुलकर कैलाश पंडित के खिलाफ बोलने लगा। एक दिन भरी पंचायत में उसने सिंध नदी के किनारे मंदिर की 100 बीघा जमीन का मुद्दा उठा दिया जिस पर कैलाश पंडित ने कब्जा कर रखा था। मंदिर की जमीन को कैलाश के कब्जे से छुड़ाने के लिए मलखान ने मुहिम छेड़ दी थी। कैलाश इस बात से परेशान हुआ तो उसने नई चाल चली।मौजूदा समय में मलखान कुछ ऐसे दिखते हैं।कैलाश पंडित ने दोस्त की हत्या करवा दी, पुलिस मलखान को मारते हुए ले गईपुरोहित कैलाश पंडित पैसे वाला था। उसका चाचा मंत्री था इसलिए पुलिस भी उसकी बात मानती थी। कैलाश पंडित ने मलखान पर आरोप लगाया कि मलखान कुख्यात डाकू गिरदारिया के साथ संपर्क में रहता है। वो उसका पता ठिकाना जनता है और कई वारदातों में उसका साथ भी देता है।इन आरोपों के बाद पुलिस ने बिना देरी किए मलखान के घर पर छापा मार दिया और उसे गांव वालो के सामने से पीटते हुए अपने साथ ले गई। ये सब जानबूझ कर किया जा रहा था ताकि मलखान फिर कभी कैलाश के खिलाफ मुंह न खोले। मलखान नहीं माना। इसी बीच मलखान पर कैलाश पंडित के एक खास आदमी की हत्या का आरोप लगा दिया गया। अब मलखान परेशान हो चुका था इसी बीच होली के दिन उसके एक बेहद करीब दोस्त की हत्या कर दी गई। यहां मलखान की बर्दास्त की सारी हदें पार हो जाती हैं और मलखान बीहड़ की तरफ निकल पड़ता है।मलखान के सबसे बड़े दुश्मन को गांव छोड़ कर भागना पड़ाचंबल पहुंचने के बाद मलखान ने अपने चचेरे भाई और दोस्तों के साथ मिल कर एक गैंग बना ली लेकिन उसके पास हथियार नहीं थे। मलखान की गैंग ने दर्जनों अपहरण और लूट की घटनाओं को अंजाम दिया और पैसे इकट्ठे कर हथियार खरीदे।मलखान सिंह अपनी हथियारों से लेस गैंग के साथअपनी गैंग मजबूत करने के बाद एक रात मलखान कैलाश के घर पहुंच जाता है। हाथ वाले स्पीकर से कैलाश पंडित को ललकारता है। जैसे ही कैलाश बाहर आता है, मलखान और उसकी गैंग उस पर गोलियां बरसाना शुरू कर देती है। हालांकि कई गोलियां लगने के बाद भी कैलाश भागने में सफल रहता है और बच निकलता है। इसके बाद मलखान के खौफ से कैलाश पंडित गांव ही छोड़ कर भाग जाता है।मलखान की गैंग बीहड़ की सबसे अमीर और बड़ी गैंग बन जाती हैकैलाश के घर गोलीबारी करने के बाद पुलिस लगातार मलखान को ढूंढ रही होती है इसलिए मलखान के पास वापस गांव जाने का कोई ऑप्शन नहीं बचता। मलखान अपनी गैंग के साथ लूट, अपहरण और हत्याएं जारी रखता है। कहते हैं, मलखान ने कुछ ही समय में इतने अपहरण कर लिए थे कि जितने चंबल के इतिहास में किसी डाकू ने नहीं किये थे।अब मलखान की गैंग अमीर हो चुकी थी। धीरे-धीरे उसकी गैंग के सदस्यों की संख्या भी बढ़ती जा रही थी। पूर्व पुलिस अधिकारी अशोक भदौरिया ने एक इंटरव्यू में बताया, “उसकी गैंग के सदस्यों की संख्या 100 से ज्यादा हो चुकी थी। लेकिन इन 100 लोगों में ऊंची जाती का एक भी व्यक्ति नहीं था।” गैंग बड़ी होने के साथ मलखान का दायरा तीन राज्यों तक फैल जाता है। उसकी गैंग भिंड, मुरैना, इटावा, जालौन, आगरा और धौलपुर तक एक्टिव रहने लगती है और एक से बढ़कर एक वारदातों को अंजाम देने लगती है।मलखान की गैंग का एक डाकूमलखान के पास विदेशी हथियारों का भंडार था70 के दशक में मलखान सिंह और उसकी गैंग के पास सेल्फ लोडिंग अमेरिकन राइफल थी। इटालियन दूरबीन थी जिससे वह दूर बैठ कर पुलिस की गतिविधि को देख पाता था। इसके अलावा उसके पास AK-47, कार्बाइन जैसे हथियारों की भरमार थी। मलखान अपने एक हाथ में अमेरिकन राइफल और दूसरे हाथ में लाउडस्पीकर लेकर चलता था। उसकी गैंग में 20 ऐसे लोग थे जो मलखान के लिए किसी भी वक्त जान देने के लिए तैयार रहते थे। मलखान का जो भी सदस्य उससे गद्दारी करता था मलखान उसे मौत के घाट उतार देता था।फूलन समेत बीहड़ के सारे डाकू उसे ‘दस्यु किंग’ नाम दे देते हैं70 के दशक में चंबल में और भी कई डाकुओं की गैंग एक्टिव हुआ करती थीं। उन सभी को मलखान के बढ़ते वर्चस्व से इनसिक्योरिटी फील होने लगी थी। इसी के चलते आये दिन दूसरे डाकुओं के साथ मलखान की मुठभेड़ होने लगी। मलखान उन डाकुओं को हाथ-पैर में गोली मार कर जिंदा छोड़ देता था। इसके चलते बाकी डकैतों के दिल में भी मलखान के लिए इज्जत बढ़ने लगी और सब मिल कर उसे ‘दस्यु किंग’ कह कर बुलाने लगे।अपनी ऑटोमैटिक अमेरिका राइफल लिए मलखान सिंहउसी दौरान नई-नई डाकू बनी फूलन देवी भी मलखान की इज्जत किया करती थी। दरअसल, मलखान सिंह उसूलों पर चलने वाला और दरियादिल इंसान था। मलखान से जुड़ा एक वाकया भी बहुत चर्चित है, “एक दिन मलखान की पुलिस से मुठभेड़ होती है। पुलिस का एक सिपाही उसकी पकड़ में आ जाता है। गैंग उस सिपाही को मारने को आतुर थी। दशहरे का दिन था। मलखान गैंग से कहता है, ‘इसको मारने से इसके बीवी बच्चे बिना मारे मर जाएंगे। इसे छोड़ दो।’ बाद में वो सिपाही ट्रांसफर ले लेता है ताकि उसे मलखान के खिलाफ किसी कार्यवाई का हिस्सा न बनना पड़े।”“कोई बलात्कार करेगा तो उसे चौराहे पर खड़ा कर के गोली मार दी जाएगी”मलखान ने अपनी गैंग के लिए कायदे-कानून भी तैयार किए थे जो बाकी डाकुओं की गैंग से बिलकुल अलग थे। सबसे बड़ा नियम तो ये था कि वो और उसकी गैंग का कोई भी सदस्य किसी लड़की पर गंदी नजर नहीं डालेगा। उसकी गैंग के लोग बहन-बेटियों को देखते थे तो गर्दन झुकाते और उनके पैर छू कर आगे चले जाते थे।मलखान ने ये ऐलान भी कर दिया था कि चंबल के 5 जिलों में अगर कोई बहन-बेटी को छेड़ता भी है तो वो उसी दिन खुद को मलखान की गोली से मरा मान ले। मलखान ने बलात्कारी को चौराहे पर खड़ा करके गोली मारने का ऐलान किया था। बलात्कार के कई मामलों में मलखान ने ऐसा किया भी। इसके बाद उन इलाकों में रेप होने बंद हो गए थे।पुलिस वालों को मारने के लिए फेमस था, उसके पास हथियार भी पुलिस से ज्यादा थेसाल 1980 तक तक मलखान पर 94 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके थे। जिसमें 17 हत्याएं, 18 डकैती, 28 अपहरण और 19 हत्या के प्रयास के मामले शामिल थे। मलखान पर ये आरोप भी लगे कि उसने मुठभेड़ के दौरान दर्जनों पुलिस वालों की हत्याएं भी कीं। बदनामी के डर से पुलिस ने ये बात सामने नहीं आने दी। 1982 में मलखान की गैंग से मिले पत्रकारों ने बताया मलखान के पास इतने हथियार थे जितने 4-5 जिलों की पुलिस के पास कुल मिलकर भी नहीं थे। सबसे बड़ा फर्क तो ये था कि मलखान के पास आधुनिक हथियार थे और पुलिस के पास नहीं।उन दिनों मलखान की घुमावदार मूछों की भी खूब चर्चा थी।जो भी पुलिस वाला मलखान को डाकू कहता वो उसे गोली मार देता था। दरअसल, मलखान को डाकू कहा जाना पसंद नहीं था वो खुद को बागी कहलवाना पसंद करता था।मलखान को पकड़ने में तीन राज्यों की पुलिस के पसीने छूट गए थेमलखान का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा था। वह लगातार हत्याएं करने लगा था। दर्जनों जिलों के व्यापारी, रसूखदार लोग उससे खौफ खाने लगे थे। लोगों दिन के वक्त भी घर से निकलने में कतराने लगे थे। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था।केंद्र सरकार के साथ एमपी, यूपी और राजस्थान की सरकार ने एसटीएफ टीमों का गठन किया और मलखान को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए जंगल में उतार दिया। टीमें महीनों तक बीहड़ में भटकती रहीं कईयों मुठभेड़ हुईं। बार-बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी। मलखान उनके हत्थे कभी नहीं चढ़ पाया।दरअसल, मलखान हर रात अपना अड्डा बदल देता था। 6 लाख एकड़ में फैले बीहड़ के चप्पे-चप्पे पर उसके लोग तैनात रहते थे जो पुलिस के एक-एक मूवमेंट की जानकारी थे। एसटीएफ की नाकामी के बाद सरकार ने उस पर 70 हजार का इनाम रख दिया जो आज के करीब 6 लाख रुपए के बराबर हैं।मलखान ने अपने सबसे बड़े दुश्मन कैलाश पंडित को ढूंढ निकालामलखान के एक हमले के बाद ही कैलाश पंडित गांव छोड़ कर भाग गया था। मलखान की गैंग ने उसे ढूंढ निकाला और उसकी हत्या कर दी। मलखान ने अपने सबसे बड़े दुश्मन को तो मार गिराया लेकिन जिस जमीन की वजह से ये विवाद शुरू हुआ था उसका मामला अभी नहीं सुलझा था। मलखान किसी भी हालत में उस 100 बीघा जमीन को पुरोहित परिवार के कब्जे से मुक्त कराना चाहता था। पुलिस के बड़े आला अफसरों को इस बात की जानकारी लग चुकी थी।मलखान का आत्म समर्पण देखने 30 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई थीमलखान पर रिपोर्ट तैयार कर रहे 3 पत्रकारों ने मलखान के दिल की ये बात सरकार तक पहुंचाई। उस समय एमपी के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह थे। पत्रकार कल्याण बनर्जी और 2 अन्य पत्रकारों के जरिए सरकार और मलखान के बीच बातों का सिलसिला शुरू हुआ।पत्रकारों से बात करते हुए मलखान सिंह।उसी समय भिंड में एक एसपी विजय रमन की एंट्री होती है। विजय डकैतों के लिए खौफ बनते जा रहे थे। उन्होंने कुछ ही दिनों में दर्जनों छोटे-बड़े डकैतों का एनकाउंटर कर दिया था। इसके चलते मलखान के अंदर भी थोड़ा खौफ पैदा हो गया था।मलखान पत्रकारों के जरिए मंदिर की 100 बीघा जमीन का मामला सुलझाने की शर्त रखता है। इधर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह इंदिरा गांधी से बात करते हैं। इंदिरा गांधी की हरी झंडी मिलते ही अर्जुन सरकार मंदिर की जमीन का मामला सुलझती है। उसे वापस मंदिर के नाम कर देती है। 15 साल बीहड़ में बिताने के बाद मलखान सिंह सरेंडर करने को तैयार हो जाता है।एमपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष सरेंडर करते हुए मलखान15 जून 1982 में मलखान सिंह और उसकी गैंग मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की मौजूदगी में समर्पण करते हैं। पुलिस की वर्दी पहने मलखान माता दुर्गा की मूर्ति के सामने अपने हथियार डाल दिए। ये सरेंडर देखने के लिए मैदान में 30 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई थी। पुलिस के लिए भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया था। इसके बाद मलखान 6 साल जेल में रहे। साल 1989 में सभी मामलों में बरी करके उन्हें रिहा कर दिया गया।राजनीति में भी हाथ आजमाया, 2014 में नरेंद्र मोदी के लिए प्रचार कियाजेल से छूटने के बाद भी यूपी-एमपी और राजस्थान के 5 जिलों में मलखान की धाक कायम थी। इसलिए कई राजनीतिक पार्टियों ने उनसे संपर्क साधा। मलखान भारतीय जनता पार्टी से प्रभावित हुए और उसके लिए प्रचार करना शुरू कर दिया। साल 2014 के चुनावों में नरेंद्र मोदी का प्रचार करने के लिए वो कई मंचों का चेहरा बने। अपने भाषणों में कांग्रेस को कोसा और नरेंद्र मोदी को जिताने की अपील की।2014 में भाजपा के लिए प्रचार करते हुए मलखान सिंहसाल 2019 में भाजपा ने टिकट ना मिलने पर वो भाजपा से खफा हुए और पार्टी छोड़ दी। बाद में उन्होंने अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया का दामन थम लिया। धौरहरा लोकसभा सीट चुनाव लड़े लेकिन हार गए। मलखान सिंह हमेशा कहते हैं, “अन्याय नहीं होने देंगे, यही मेरा मिशन है।”