
Authored by गौरव खरे | Edited by आशीष कुमार | नवभारत टाइम्स | Updated: Oct 10, 2021, 10:51 AM
Ravana Effigy during Corona Period: कोरोना काल से पहले दशहरे के दौरान जिस तितारपुर की मुख्य सड़क पर रावण के बड़े-बड़े पुतले नजर आते थे, वहीं अब छोटे कद के रावण ही देखने को मिल रहे हैं। कोरोना के बीच रावण का कद घटने के पीछे कई वजहे हैं।
रामलीला में अयोध्या के मंच पर नजर आईं भाग्यश्री
हाइलाइट्स
- कोरोना ने 30 फुट का रावण कर दिया 5 फुट का
- कॉलोनियों से आ रही छोटे रावणों की मांग
- रावण दहन पर इस बार स्पीकर में बजेंगे पटाखे!
बड़ी-बड़ी मूछें, रंग-बिरंगे कपड़े और चेहरे पर डराने वाले भाव। दशहरा आते ही तितारपुर की सड़कों पर रावण के कुछ ऐसे ही पुतले हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हाल ही में सरकार ने कुछ शर्तों के साथ रामलीला के आयोजन के लिए मंजूरी दी थी। ऐसे में कारीगरों को बड़े साइज के पुतलों के ऑर्डर मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हमने जब मार्केट का दौरा किया तो नजारा कुछ और ही था। वहां रावण के पुतले तो दूर, कारीगर भी गिने-चुने ही नजर आ रहे थे। ऐसे में, हमने रावण बनाने वाले कारीगरों से बात कर हालात के बारे में जाना।
बढ़ी है रावण के छोटे पुतले की मांग
कोरोना काल से पहले दशहरे के दौरान जिस तितारपुर की मुख्य सड़क पर रावण के बड़े-बड़े पुतले नजर आते थे, वहीं अब छोटे कद के रावण ही देखने को मिल रहे हैं। कोरोना के बीच रावण का कद घटने के पीछे कई वजहे हैं। इस बारे में रावण का पुतला बनाने वाले नवीन सारसर बताते हैं, ‘इस बार रामलीला में ना ही मेला लगा है और ना ही खाने-पीने के स्टॉल। वहीं कोरोना के कारण कम ही लोग रामलीला देखने जा रहे हैं। ऐसे में, ज्यादातर सोसायटी वाले ही पुतले की बुकिंग कर रहे हैं। वहीं कोविड की वजह से माता-पिता भी बच्चों को रावण दहन देखने के लिए बाहर नहीं भेजना चाहते हैं। ऐसे में कॉलोनियों में रहने वाले पैरंट्स अपने बच्चों के लिए 2 से 5 फुट के पुतले की बुकिंग कर रहे हैं। इस वजह से हमारे यहां छोटे कद के पुतलों की बिक्री में इजाफा हुआ है।’ कारीगर दीपक कश्यप बताते हैं, ‘पिछले साल स्थिति काफी खराब थी। लेकिन इस बार हमें काफी उम्मीद है। अभी हमारे पास छोटे रावण के पुतले की बुकिंग ज्यादा आ रही है। सोसायटी वालों की तरफ से कई बुकिंग हैं। गली-मोहल्ले के बच्चों के लिए भी इस बार हमने छोटे साइज के रावण ज्यादा बनाए हैं।’ उधर रावण का पुतला बनाने वाले अमित बताते हैं, ‘रामलीला में बच्चे-बड़े सभी मेला देखने और खाने-पीने जाते थे। लेकिन इस बार की रामलीला में इसकी इसकी नहीं है। वहीं कोरोना के चलते माता-पिता भी किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। इस वजह से रावण के छोटे पुतले की मांग बढ़ी है।’
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बड़े पुतलों को नहीं मिल रही इजाजत
दिल्ली में तितारपुर ही एक ऐसी जगह है, जहां सबसे ज्यादा रावण के पुतले बनाए जाते हैं। यही वजह है कि नवरात्रि का यहां के कारीगर पूरे साल इंतजार करते हैं। लेकिन अगर बड़े पुतलों की बिक्री कम होती है, तो इसका बड़ा प्रभाव उनकी कमाई पर पड़ता है। बकौल नवीन सारसर, ‘अब स्थिति बदल चुकी है। कोरोना के बाद रामलीला के ज्यादा आयोजन नहीं हो रहे हैं। इसलिए अब बड़े पुतले की मांग बहुत कम हो गई है। इस बार 20 से 30 फुट के रावण के कुछ ही ऑर्डर हमें मिले हैं। बड़े पुतले को बेचकर ही हम अच्छा पैसा कमाते थे, लेकिन अब वो कमाई नहीं रही। वहीं छोटे पुतले बनाने में पैसा और समय दोनों ही ज्यादा लगते हैं। उम्मीद है कि इस बार छोटे पुतलों को बेचकर हम थोड़ा-बहुत कमा पाएंगे।’ वहीं अमित बताते हैं, ‘ऑर्डर कम मिलने की एक बड़ी वजह ये भी है कि रामलीला को लेकर जो इजाजत मिली है, उसमें रावण जलाने की इजाजत को लेकर असमंजस है। ऐसे में बहुत से लोग इसलिए भी बुकिंग नहीं करा रहे हैं कि पता नहीं वे रावण दहन कर पाएंगे भी या नहीं। दूसरी तरफ पटाखों पर भी बैन है, तो बिना पटाखों के रावण कौन जलाएगा। हालांकि हम बिना पटाखे के ही रावण बेचते हैं, लेकिन इसका खरीद पर तो असर पड़ता ही है।’
पुराने और नए अंदाज में स्टेज पर उतरा ‘श्री राम’ का खास अवतार
रावण दहन पर स्पीकर में बजेंगे पटाखे!
जहां एक तरफ दिल्ली में पटाखों पर बैन है, वहीं यह सवाल भी है कि आखिर रामलीला वाले इस बार रावण दहन करने वाले हैं? इस बारे में लव-कुश रामलीला के प्रेसिडेंट अशोक अग्रवाल बताते हैं, ‘इस बार हम 30 फुट का पुतला जलाएंगे। जबकि इससे पहले हम 150 फुट का पुतला जलाते थे। वहीं हम किसी भी पुतले में पटाखों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उसकी जगह पर हम डिजिटल साउंड का इस्तेमाल करेंगे। यानी पुतला दहन होते ही साउंड के जरिए पटाखों की आवाज आएगी। लेकिन अगर हमें पटाखों की परमिशन मिल जाती है, तो पुतले में पटाखे लगाए जाएंगे।’ वहीं इंद्रप्रस्थ रामलीला कमेटी के डायरेक्टर सुमन प्रकाश बताते हैं, ‘इस बार हम रामलीला ग्राउंड में नहीं कर रहे हैं। सरकार की तरफ से परमिशन नहीं मिली है, आतिशबाजी की इजाजत नहीं है, इसलिए हम रावण दहन नहीं करेंगे।’ वहीं आदर्श रामलीला कमेटी अशोक विहार-2 के प्रचार अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह बताते हैं, ‘दिल्ली में कोरोना और प्रदूषण दोनों बड़ी परेशानी हैं। वहीं रावण दहन के समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हमने कोरोना महामारी को देखते हुए रावण दहन न करने का फैसला किया है।’ उधर बालाजी रामलीला से भगवत रस्तोगी बताते हैं, ‘हम तीन पुतलों के साथ इस बार तालिबानी आतंकवादी का एक पुतला जलाने वाले हैं। वहीं पुतलों में हम ग्रीन पटाखों को लगाने वाले हैं।’
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Web Title : coronavirus made the 30 feet effigy of ravana to 5 feet suspense on firecrackers in delhi
Hindi News from Navbharat Times, TIL Network
Authored by गौरव खरे | Edited by आशीष कुमार | नवभारत टाइम्स | Updated: Oct 10, 2021, 10:51 AMRavana Effigy during Corona Period: कोरोना काल से पहले दशहरे के दौरान जिस तितारपुर की मुख्य सड़क पर रावण के बड़े-बड़े पुतले नजर आते थे, वहीं अब छोटे कद के रावण ही देखने को मिल रहे हैं। कोरोना के बीच रावण का कद घटने के पीछे कई वजहे हैं। रामलीला में अयोध्या के मंच पर नजर आईं भाग्यश्रीहाइलाइट्सकोरोना ने 30 फुट का रावण कर दिया 5 फुट काकॉलोनियों से आ रही छोटे रावणों की मांगरावण दहन पर इस बार स्पीकर में बजेंगे पटाखे!नई दिल्लीबड़ी-बड़ी मूछें, रंग-बिरंगे कपड़े और चेहरे पर डराने वाले भाव। दशहरा आते ही तितारपुर की सड़कों पर रावण के कुछ ऐसे ही पुतले हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हाल ही में सरकार ने कुछ शर्तों के साथ रामलीला के आयोजन के लिए मंजूरी दी थी। ऐसे में कारीगरों को बड़े साइज के पुतलों के ऑर्डर मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हमने जब मार्केट का दौरा किया तो नजारा कुछ और ही था। वहां रावण के पुतले तो दूर, कारीगर भी गिने-चुने ही नजर आ रहे थे। ऐसे में, हमने रावण बनाने वाले कारीगरों से बात कर हालात के बारे में जाना।बढ़ी है रावण के छोटे पुतले की मांगकोरोना काल से पहले दशहरे के दौरान जिस तितारपुर की मुख्य सड़क पर रावण के बड़े-बड़े पुतले नजर आते थे, वहीं अब छोटे कद के रावण ही देखने को मिल रहे हैं। कोरोना के बीच रावण का कद घटने के पीछे कई वजहे हैं। इस बारे में रावण का पुतला बनाने वाले नवीन सारसर बताते हैं, ‘इस बार रामलीला में ना ही मेला लगा है और ना ही खाने-पीने के स्टॉल। वहीं कोरोना के कारण कम ही लोग रामलीला देखने जा रहे हैं। ऐसे में, ज्यादातर सोसायटी वाले ही पुतले की बुकिंग कर रहे हैं। वहीं कोविड की वजह से माता-पिता भी बच्चों को रावण दहन देखने के लिए बाहर नहीं भेजना चाहते हैं। ऐसे में कॉलोनियों में रहने वाले पैरंट्स अपने बच्चों के लिए 2 से 5 फुट के पुतले की बुकिंग कर रहे हैं। इस वजह से हमारे यहां छोटे कद के पुतलों की बिक्री में इजाफा हुआ है।’ कारीगर दीपक कश्यप बताते हैं, ‘पिछले साल स्थिति काफी खराब थी। लेकिन इस बार हमें काफी उम्मीद है। अभी हमारे पास छोटे रावण के पुतले की बुकिंग ज्यादा आ रही है। सोसायटी वालों की तरफ से कई बुकिंग हैं। गली-मोहल्ले के बच्चों के लिए भी इस बार हमने छोटे साइज के रावण ज्यादा बनाए हैं।’ उधर रावण का पुतला बनाने वाले अमित बताते हैं, ‘रामलीला में बच्चे-बड़े सभी मेला देखने और खाने-पीने जाते थे। लेकिन इस बार की रामलीला में इसकी इसकी नहीं है। वहीं कोरोना के चलते माता-पिता भी किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। इस वजह से रावण के छोटे पुतले की मांग बढ़ी है।’बड़े पुतलों को नहीं मिल रही इजाजतदिल्ली में तितारपुर ही एक ऐसी जगह है, जहां सबसे ज्यादा रावण के पुतले बनाए जाते हैं। यही वजह है कि नवरात्रि का यहां के कारीगर पूरे साल इंतजार करते हैं। लेकिन अगर बड़े पुतलों की बिक्री कम होती है, तो इसका बड़ा प्रभाव उनकी कमाई पर पड़ता है। बकौल नवीन सारसर, ‘अब स्थिति बदल चुकी है। कोरोना के बाद रामलीला के ज्यादा आयोजन नहीं हो रहे हैं। इसलिए अब बड़े पुतले की मांग बहुत कम हो गई है। इस बार 20 से 30 फुट के रावण के कुछ ही ऑर्डर हमें मिले हैं। बड़े पुतले को बेचकर ही हम अच्छा पैसा कमाते थे, लेकिन अब वो कमाई नहीं रही। वहीं छोटे पुतले बनाने में पैसा और समय दोनों ही ज्यादा लगते हैं। उम्मीद है कि इस बार छोटे पुतलों को बेचकर हम थोड़ा-बहुत कमा पाएंगे।’ वहीं अमित बताते हैं, ‘ऑर्डर कम मिलने की एक बड़ी वजह ये भी है कि रामलीला को लेकर जो इजाजत मिली है, उसमें रावण जलाने की इजाजत को लेकर असमंजस है। ऐसे में बहुत से लोग इसलिए भी बुकिंग नहीं करा रहे हैं कि पता नहीं वे रावण दहन कर पाएंगे भी या नहीं। दूसरी तरफ पटाखों पर भी बैन है, तो बिना पटाखों के रावण कौन जलाएगा। हालांकि हम बिना पटाखे के ही रावण बेचते हैं, लेकिन इसका खरीद पर तो असर पड़ता ही है।’पुराने और नए अंदाज में स्टेज पर उतरा ‘श्री राम’ का खास अवताररावण दहन पर स्पीकर में बजेंगे पटाखे!जहां एक तरफ दिल्ली में पटाखों पर बैन है, वहीं यह सवाल भी है कि आखिर रामलीला वाले इस बार रावण दहन करने वाले हैं? इस बारे में लव-कुश रामलीला के प्रेसिडेंट अशोक अग्रवाल बताते हैं, ‘इस बार हम 30 फुट का पुतला जलाएंगे। जबकि इससे पहले हम 150 फुट का पुतला जलाते थे। वहीं हम किसी भी पुतले में पटाखों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उसकी जगह पर हम डिजिटल साउंड का इस्तेमाल करेंगे। यानी पुतला दहन होते ही साउंड के जरिए पटाखों की आवाज आएगी। लेकिन अगर हमें पटाखों की परमिशन मिल जाती है, तो पुतले में पटाखे लगाए जाएंगे।’ वहीं इंद्रप्रस्थ रामलीला कमेटी के डायरेक्टर सुमन प्रकाश बताते हैं, ‘इस बार हम रामलीला ग्राउंड में नहीं कर रहे हैं। सरकार की तरफ से परमिशन नहीं मिली है, आतिशबाजी की इजाजत नहीं है, इसलिए हम रावण दहन नहीं करेंगे।’ वहीं आदर्श रामलीला कमेटी अशोक विहार-2 के प्रचार अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह बताते हैं, ‘दिल्ली में कोरोना और प्रदूषण दोनों बड़ी परेशानी हैं। वहीं रावण दहन के समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हमने कोरोना महामारी को देखते हुए रावण दहन न करने का फैसला किया है।’ उधर बालाजी रामलीला से भगवत रस्तोगी बताते हैं, ‘हम तीन पुतलों के साथ इस बार तालिबानी आतंकवादी का एक पुतला जलाने वाले हैं। वहीं पुतलों में हम ग्रीन पटाखों को लगाने वाले हैं।’Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : coronavirus made the 30 feet effigy of ravana to 5 feet suspense on firecrackers in delhiHindi News from Navbharat Times, TIL Network
