जब सती बोलीं-मैं राम को प्रणाम नहीं करूंगी, परीक्षा लूंगी:तब शिव ने पत्नी का किया मानसिक त्याग, बाद में पिता के यज्ञकुंड में किया आत्मदाह

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2 घंटे पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता

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कहानी

शिव जी की पहली पत्नी थीं माता सती। त्रेतायुग की घटना है। एक दिन शिव जी और माता सती रामकथा सुनकर लौट रहे थे। उस समय सीता जी का अपहरण रावण ने कर लिया था। राम सीता के वियोग में थे और हा सीते, हा सीते पुकार कर सीता की खोज कर रहे थे।

शिव जी ने दूर से ही राम का ये दृश्य देखा और विचार किया कि जिन श्रीराम की कथा सुनकर हम आ रहे हैं, उन्हीं की लीला के दर्शन हो गए। शिव जी ने सोचा कि अगर राम के पास जाएंगे तो लीला में भंग पड़ेगा, इसलिए उन्होंने दूर से ही श्रीराम को प्रणाम किया। शिव जी ने देवी सती से कहा कि आप भी श्रीराम को प्रणाम कीजिए।

सती प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। उनका जीवन तर्क प्रधान था। वे हर बात में तर्क देखती थीं। उन्होंने शिव जी से कह दिया कि मैं इन्हें प्रणाम नहीं करूंगी, क्योंकि मैं तो पहले परीक्षा लूंगी। ये रोता हुआ युवक भगवान कैसे हो सकता है?

शिव जी ने बहुत समझाया कि भगवान जिज्ञासा का विषय हैं, संदेह का नहीं, लेकिन देवी सती ने शिव जी की बात नहीं मानी। देवी सती ने सीता का रूप धारण किया और श्रीराम के सामने पहुंच गईं।

श्रीराम ने देवी सती को पहचान लिया तो वे लज्जित होकर अपने पति शिव जी के पास पहुंचीं। शिव जी उस समय आंखें बंद करके विचार कर रहे थे कि इस संसार में बहुत कुछ ऐसा होता है, जिसको होना ही होता है। इसलिए हमें आपस में तर्क नहीं करना चाहिए। मैंने अपनी पत्नी को बहुत समझाया था, लेकिन वह नहीं मानी और श्रीराम की परीक्षा लेने गई। इस घटना के बाद शिव जी ने सती का मानसिक त्याग कर दिया था। कुछ समय बाद देवी सती ने पिता दक्ष के यहां यज्ञ कुंड में कूदकर आत्म दाह करके देह त्याग दी थी। शिव जी अकेले रह गए।

सीख

जब देवी सती ने शिव जी की बात नहीं मानी तो शिव जी ने कहा था कि पति-पत्नी के बीच बहुत ज्यादा तर्क, बहस अच्छी नहीं होती है। एक हद तक पति-पत्नी को एक-दूसरे को समझाना चाहिए, लेकिन जब बात बढ़ जाए तो धैर्य बनाए रखें और हालात परमात्मा पर छोड़ दें। वैवाहिक जीवन में कलह होगा तो पूरे परिवार को नुकसान हो सकता है।

Hindi NewsNationalAaj Ka Jeevan Mantra By Pandit Vijayshankar Mehta, Story Of Goddess Sati And Shiva Then Shiva Did The Mental Sacrifice Of His Wife, Later Self immolation In The Father’s Yagyakund2 घंटे पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहताकॉपी लिंककहानीशिव जी की पहली पत्नी थीं माता सती। त्रेतायुग की घटना है। एक दिन शिव जी और माता सती रामकथा सुनकर लौट रहे थे। उस समय सीता जी का अपहरण रावण ने कर लिया था। राम सीता के वियोग में थे और हा सीते, हा सीते पुकार कर सीता की खोज कर रहे थे।शिव जी ने दूर से ही राम का ये दृश्य देखा और विचार किया कि जिन श्रीराम की कथा सुनकर हम आ रहे हैं, उन्हीं की लीला के दर्शन हो गए। शिव जी ने सोचा कि अगर राम के पास जाएंगे तो लीला में भंग पड़ेगा, इसलिए उन्होंने दूर से ही श्रीराम को प्रणाम किया। शिव जी ने देवी सती से कहा कि आप भी श्रीराम को प्रणाम कीजिए।सती प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। उनका जीवन तर्क प्रधान था। वे हर बात में तर्क देखती थीं। उन्होंने शिव जी से कह दिया कि मैं इन्हें प्रणाम नहीं करूंगी, क्योंकि मैं तो पहले परीक्षा लूंगी। ये रोता हुआ युवक भगवान कैसे हो सकता है?शिव जी ने बहुत समझाया कि भगवान जिज्ञासा का विषय हैं, संदेह का नहीं, लेकिन देवी सती ने शिव जी की बात नहीं मानी। देवी सती ने सीता का रूप धारण किया और श्रीराम के सामने पहुंच गईं।श्रीराम ने देवी सती को पहचान लिया तो वे लज्जित होकर अपने पति शिव जी के पास पहुंचीं। शिव जी उस समय आंखें बंद करके विचार कर रहे थे कि इस संसार में बहुत कुछ ऐसा होता है, जिसको होना ही होता है। इसलिए हमें आपस में तर्क नहीं करना चाहिए। मैंने अपनी पत्नी को बहुत समझाया था, लेकिन वह नहीं मानी और श्रीराम की परीक्षा लेने गई। इस घटना के बाद शिव जी ने सती का मानसिक त्याग कर दिया था। कुछ समय बाद देवी सती ने पिता दक्ष के यहां यज्ञ कुंड में कूदकर आत्म दाह करके देह त्याग दी थी। शिव जी अकेले रह गए।सीखजब देवी सती ने शिव जी की बात नहीं मानी तो शिव जी ने कहा था कि पति-पत्नी के बीच बहुत ज्यादा तर्क, बहस अच्छी नहीं होती है। एक हद तक पति-पत्नी को एक-दूसरे को समझाना चाहिए, लेकिन जब बात बढ़ जाए तो धैर्य बनाए रखें और हालात परमात्मा पर छोड़ दें। वैवाहिक जीवन में कलह होगा तो पूरे परिवार को नुकसान हो सकता है।

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