जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के पैनल की रिपोर्ट:ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन घटने के बजाय 14 फीसदी और बढ़ गया

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नई दिल्ली6 घंटे पहले

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जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के वर्किंग ग्रुप की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इससे पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के मानकों को हासिल करना तो दूर रहा, वातावरण को तबाह करने वाली गैसों के उत्सर्जन में 14% बढ़ोतरी होने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषण के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार माने जाने वाले देश भी खुद को तबाह करने पर तुले हैं और कम से कम आधी मानवता खतरे की जद में आ चुकी है। रिपोर्ट 67 देशों के 270 वैज्ञानिकों ने तैयार की है और 195 देशों की सरकारों ने इसे मंजूरी दी है। रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई।

जलवायु परिवर्तन के खतरों के बारे में इसे अब तक की सबसे भयावह तस्वीर पेश करने वाली रिपोर्ट बताया गया है। इसमें निष्कर्ष निकाला गया है कि जलवायु परिवर्तन के नुकसान इंसानों, जानवरों, प्लांट्स और पूरी पारिस्थितिकी को इस कदर प्रभावित कर रहे हैं कि उन्हें वापस बहाल करना संभव नहीं रह गया है। ऐसे में ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए सभी देशों, विशेषकर प्रदूषण के प्रमुख पावर हाउस माने जाने वालों को ठोस कदम उठाने होंगे।

7 साल में एक बार आकलन रिपोर्ट
जलवायु परिवर्तन की समीक्षा करते हुए संयुक्त राष्ट्र का वर्किंग ग्रुप हर 7 साल बाद अपनी आकलन रिपोर्ट पेश करता है। फरवरी 2015 के 41वें सत्र में यह तय किया गया था कि जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के प्रभावों को शामिल करते हुए नई आकलन रिपोर्ट 2022 में पेश की जाएगी। दुनिया को 2030 तक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 45% कटौती करनी थी। जीरो एमिशन 2050 तक हासिल करने का लक्ष्य है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • आधी मानवता खतरे की जद में आ चुकी है।
  • पारिस्थितिकी के कई मानक ‘प्वाइंट आफ नो रिटर्न’ (PNR) के स्तर पर पहुंच चुके हैं
  • बेकाबू कार्बन प्रदूषण से जोखिम वाले क्षेत्रों को सबसे अधिक खतरा होना तय माना।

दो बातों पर जोर…

  • कोयला और अन्य जैव ईंधनों वाली परियोजनाओं की फंडिंग रोक चुके G-20 देशों को अब घरेलू कोयला प्रोजेक्ट्स को रोकना होगा।
  • कोयला आधारित तमाम परियोजनाओं की प्राइवेट सेक्टर से हो रही फंडिंग पर भी अंकुश लगाया जाए। इससे प्रदूषण की रफ्तार कम होगी।

Hindi NewsNationalUN Review Report 2022 On Climate Change That Greenhouse Gas Emissions Increased By 14 Percentनई दिल्ली6 घंटे पहलेकॉपी लिंकजलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के वर्किंग ग्रुप की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इससे पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के मानकों को हासिल करना तो दूर रहा, वातावरण को तबाह करने वाली गैसों के उत्सर्जन में 14% बढ़ोतरी होने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषण के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार माने जाने वाले देश भी खुद को तबाह करने पर तुले हैं और कम से कम आधी मानवता खतरे की जद में आ चुकी है। रिपोर्ट 67 देशों के 270 वैज्ञानिकों ने तैयार की है और 195 देशों की सरकारों ने इसे मंजूरी दी है। रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई।जलवायु परिवर्तन के खतरों के बारे में इसे अब तक की सबसे भयावह तस्वीर पेश करने वाली रिपोर्ट बताया गया है। इसमें निष्कर्ष निकाला गया है कि जलवायु परिवर्तन के नुकसान इंसानों, जानवरों, प्लांट्स और पूरी पारिस्थितिकी को इस कदर प्रभावित कर रहे हैं कि उन्हें वापस बहाल करना संभव नहीं रह गया है। ऐसे में ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए सभी देशों, विशेषकर प्रदूषण के प्रमुख पावर हाउस माने जाने वालों को ठोस कदम उठाने होंगे।7 साल में एक बार आकलन रिपोर्टजलवायु परिवर्तन की समीक्षा करते हुए संयुक्त राष्ट्र का वर्किंग ग्रुप हर 7 साल बाद अपनी आकलन रिपोर्ट पेश करता है। फरवरी 2015 के 41वें सत्र में यह तय किया गया था कि जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के प्रभावों को शामिल करते हुए नई आकलन रिपोर्ट 2022 में पेश की जाएगी। दुनिया को 2030 तक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 45% कटौती करनी थी। जीरो एमिशन 2050 तक हासिल करने का लक्ष्य है।प्रमुख निष्कर्षआधी मानवता खतरे की जद में आ चुकी है।पारिस्थितिकी के कई मानक ‘प्वाइंट आफ नो रिटर्न’ (PNR) के स्तर पर पहुंच चुके हैंबेकाबू कार्बन प्रदूषण से जोखिम वाले क्षेत्रों को सबसे अधिक खतरा होना तय माना।दो बातों पर जोर…कोयला और अन्य जैव ईंधनों वाली परियोजनाओं की फंडिंग रोक चुके G-20 देशों को अब घरेलू कोयला प्रोजेक्ट्स को रोकना होगा।कोयला आधारित तमाम परियोजनाओं की प्राइवेट सेक्टर से हो रही फंडिंग पर भी अंकुश लगाया जाए। इससे प्रदूषण की रफ्तार कम होगी।

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