यूक्रेन को लेकर भारत तटस्थ क्यों?:जब भारत ने 1998 में परमाणु परीक्षण किया, तब यूक्रेन ने UN में नहीं दिया था साथ; अब मदद की उम्मीद क्यों?

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नई दिल्ली9 घंटे पहले

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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध पर पूरी दुनिया की नजरे हैं। इस समय सबसे बड़ा सवाल भी यही है कि कौन-कौन से देश रूस के साथ या खिलाफ हैं। वहीं, यूक्रेन मुद्दे पर रूस और अमेरिका के आमने-सामने आ जाने से भारत भी असमंजस की स्थित में है। क्योंकि, रूस हमेशा से ही भारत का अच्छा दोस्त रहा है। जबकि राजनीतिक रूप से अमेरिका भी भारत के लिए मायने रखता है। इसलिए भारत किसी भी पाले में नहीं जाना चाहता। हालांकि, इतिहास और वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो रूस ने हर मुश्किल समय पर भारत का खुलकर समर्थन किया है।

भारत ने 11 मई 2020 को अपने पहला सफल परमाणु परीक्षण किया था।

भारत ने 11 मई 2020 को अपने पहला सफल परमाणु परीक्षण किया था।

परमाणु परीक्षण पर रूस भारत के साथ तो यूक्रेन विरोध में था
भारत ने जब साल 1998 में परमाणु परीक्षण किया, तो उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। भारत के इस कदम को लेकर यूएन में भी लंबी चर्चा हुई और कई देशों ने भारत के कदम को गलत ठहराया। ठीक इसके उलट रूस ने यूएन सिक्युरिटी काउंसिल में भारत के पक्ष में वीटो का उपयोग किया था। इस दौरान यूक्रेन ने कहा था कि सोवियत यूनियन के दौरान जो परमाणु हथियार हमारे पास थे, वे रूस को मिल गए और रूस के दम पर ही अब भारत परमाणु परीक्षण कर रहा है, जिसे हम समर्थन नहीं दे सकते।

31 साल में भारत और यूक्रेन के खास संबंध नहीं रहे
वर्ष 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ था। इसी दौरान यूक्रेन भी सोवियत से अलग हुआ। यानी कि यूक्रेन को अलग देश बने करीब 31 साल का समय हो चुका है। इस लंबे समय के दौरान भी भारत के यूक्रेन से खास संबंध नहीं रहे। भारत का झुकाव हमेशा रूस की ओर ही रहा। क्योंकि, रूस भी समय-समय पर भारत की हर तरह से मदद करता रहा है। भारत और यूक्रेन के बीच व्यापार की बात की जाए तो वह भी न के बराबर ही है।

फरवरी-मार्च 2014 में रूस ने क्रीमिया आईलैंड पर कब्जा कर लिया था।

फरवरी-मार्च 2014 में रूस ने क्रीमिया आईलैंड पर कब्जा कर लिया था।

क्रीमिया मुद्दे पर भारत ने दिया था रूस का साथ
परमाणु परीक्षण पर रूस ने भारत का साथ दिया तो इसके बदले में भारत ने भी क्रीमिया के मुद्दे पर रूस का साथ दिया था। यह बात फरवरी-मार्च 2014 की है। इस दौरान रूस ने यूक्रेन के महत्वपूर्ण आईलैंड क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था। यूक्रेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने रूस के इक कदम की कठोर निंदा करते हुए रूस के खिलाफ कई आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इस दौरान जी-8 ग्रुप से भी रूस को बाहर कर दिया गया था। इस दौरान भी भारत ने यह कहकर रूस का सपोर्ट किया था कि वह रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करेगा।

आर्टिकल 370 पर रूस ने यह कहकर भारत का सपोर्ट किया था कि यह भारत का आंतरिक मामला है।

आर्टिकल 370 पर रूस ने यह कहकर भारत का सपोर्ट किया था कि यह भारत का आंतरिक मामला है।

कश्मीर मुद्दे पर भी रूस रहा भारत के साथ
भारत और रूस से संबंधों की और बात करें तो रूस ने कश्मीर मुद्दे पर भी भारत का हमेशा से खुलकर साथ दिया है। कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के मामले में भी रूस ने भारत का सपोर्ट किया था। जबकि, तुर्की समेत कई देशों ने भारत के इस कदम को भड़काऊ बताया था। भारत के लिए रूस की सबसे बड़ी अहमियत यह भी है कि भारत के 70 फीसदी हथियार रूस से ही इंपोर्ट होते हैं। इसके अलावा मशीनरीज के कलपुर्जे के लिए भी भारत काफी हद तक रूस पर ही निर्भर है। इन्हीं सभी बातों की तरफ ध्यान दें तो साफ है कि रूस से खिलाफ जाना भारत के लिए महंगा सौदा हो सकता है।

Hindi NewsNationalUkraine Had Condemned India After The 1998 Nuclear Tests, Voted Against India At The UNSCनई दिल्ली9 घंटे पहलेकॉपी लिंकरूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध पर पूरी दुनिया की नजरे हैं। इस समय सबसे बड़ा सवाल भी यही है कि कौन-कौन से देश रूस के साथ या खिलाफ हैं। वहीं, यूक्रेन मुद्दे पर रूस और अमेरिका के आमने-सामने आ जाने से भारत भी असमंजस की स्थित में है। क्योंकि, रूस हमेशा से ही भारत का अच्छा दोस्त रहा है। जबकि राजनीतिक रूप से अमेरिका भी भारत के लिए मायने रखता है। इसलिए भारत किसी भी पाले में नहीं जाना चाहता। हालांकि, इतिहास और वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो रूस ने हर मुश्किल समय पर भारत का खुलकर समर्थन किया है।भारत ने 11 मई 2020 को अपने पहला सफल परमाणु परीक्षण किया था।परमाणु परीक्षण पर रूस भारत के साथ तो यूक्रेन विरोध में थाभारत ने जब साल 1998 में परमाणु परीक्षण किया, तो उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। भारत के इस कदम को लेकर यूएन में भी लंबी चर्चा हुई और कई देशों ने भारत के कदम को गलत ठहराया। ठीक इसके उलट रूस ने यूएन सिक्युरिटी काउंसिल में भारत के पक्ष में वीटो का उपयोग किया था। इस दौरान यूक्रेन ने कहा था कि सोवियत यूनियन के दौरान जो परमाणु हथियार हमारे पास थे, वे रूस को मिल गए और रूस के दम पर ही अब भारत परमाणु परीक्षण कर रहा है, जिसे हम समर्थन नहीं दे सकते।31 साल में भारत और यूक्रेन के खास संबंध नहीं रहेवर्ष 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ था। इसी दौरान यूक्रेन भी सोवियत से अलग हुआ। यानी कि यूक्रेन को अलग देश बने करीब 31 साल का समय हो चुका है। इस लंबे समय के दौरान भी भारत के यूक्रेन से खास संबंध नहीं रहे। भारत का झुकाव हमेशा रूस की ओर ही रहा। क्योंकि, रूस भी समय-समय पर भारत की हर तरह से मदद करता रहा है। भारत और यूक्रेन के बीच व्यापार की बात की जाए तो वह भी न के बराबर ही है।फरवरी-मार्च 2014 में रूस ने क्रीमिया आईलैंड पर कब्जा कर लिया था।क्रीमिया मुद्दे पर भारत ने दिया था रूस का साथपरमाणु परीक्षण पर रूस ने भारत का साथ दिया तो इसके बदले में भारत ने भी क्रीमिया के मुद्दे पर रूस का साथ दिया था। यह बात फरवरी-मार्च 2014 की है। इस दौरान रूस ने यूक्रेन के महत्वपूर्ण आईलैंड क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था। यूक्रेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने रूस के इक कदम की कठोर निंदा करते हुए रूस के खिलाफ कई आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इस दौरान जी-8 ग्रुप से भी रूस को बाहर कर दिया गया था। इस दौरान भी भारत ने यह कहकर रूस का सपोर्ट किया था कि वह रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करेगा।आर्टिकल 370 पर रूस ने यह कहकर भारत का सपोर्ट किया था कि यह भारत का आंतरिक मामला है।कश्मीर मुद्दे पर भी रूस रहा भारत के साथभारत और रूस से संबंधों की और बात करें तो रूस ने कश्मीर मुद्दे पर भी भारत का हमेशा से खुलकर साथ दिया है। कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के मामले में भी रूस ने भारत का सपोर्ट किया था। जबकि, तुर्की समेत कई देशों ने भारत के इस कदम को भड़काऊ बताया था। भारत के लिए रूस की सबसे बड़ी अहमियत यह भी है कि भारत के 70 फीसदी हथियार रूस से ही इंपोर्ट होते हैं। इसके अलावा मशीनरीज के कलपुर्जे के लिए भी भारत काफी हद तक रूस पर ही निर्भर है। इन्हीं सभी बातों की तरफ ध्यान दें तो साफ है कि रूस से खिलाफ जाना भारत के लिए महंगा सौदा हो सकता है।

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