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नई दिल्लीएक घंटा पहले
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यूक्रेन में फंसे भारतीयों को ऑपरेशन गंगा चलाकर निकाला जा रहा है। यूक्रेन के विभिन्न शहरों में फंसे भारतीय काफी संघर्ष करके बॉर्डर वाले देशों में पहुंच रहे हैं, जहां से उन्हें एयरलिफ्ट किया जा रहा है। भास्कर ने इन भारतीयों से बात की…
शुभम की यूक्रेन-टू-पोलैंड 78 घंटे की यात्रा

भागलपुर का शुभम मंगलवार सुबह पोलैंड पहुंच गया। जैसे ही इंडियन एंबेसी पहुंचा उसने वॉट्सऐप पर मैसेज छोड़ा। शुभम ने यूक्रेन और पोलैंड बॉर्डर की आपबीती सुनाई। बताया कि मुझे नहीं लग रहा था मैं पोलैंड पहुंच पाऊंगा। घर पहुंचने की उम्मीद भी टूटने लगी थी। वहां पर 3 दिनों से बिना सोए लाइन में लगा हुआ था। ताकि जल्दी पोलैंड पहुंच जाऊं। पर मुझे पोलैंड पहुंचने में 78 घंटे से ज्यादा का समय लग गया। इस दौरान कुछ भी खाने को नसीब नहीं था।
यूक्रेन में फंसी बेटियां, रो-रोकर मां का बुरा हाल

क्रेन में पढ़ने गए स्टूडेंट्स बमबारी के बीच फंसे हैं। उनके हालात सुनकर माता-पिता के आंखों से आंसू बह रहे हैं। बेटियां बंकर में अंधेरे में रहकर जी रही हैं और दहशत में है। उन्हें खाने-पीने की दिक्कतें हो रही है। पोहा और पानी पीकर रह रही हैं। ऐसे में माता-पिता के गले से भी निवाला नहीं उतर रहा है। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने जांजगीर की आकांक्षा तंबोली के माता-पिता से बात की। उन्होंने बताया कि आकांक्षा और उसकी बहन बहुत मुश्किल से कीव से लविव पहुंचे हैं। हम तो उनके यहां पहुंचने की चिंता में ना खा पा रहे हैं ना सो पा रहे हैं।
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किसी को न देखना पड़े यूक्रेन सा खौफनाक मंजर

यूक्रेन से लौटे अब्दुस्समद ने वहां के छह दिनों की खौफनाक दास्तां सुनाई, तो हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए। दादी अपने लाडले को कलेजे से लिपटाकर फफक-फफक कर रो पड़ी। मां की आंखों में भी आंसू थे, तो दोनों मासूम बहनें भी भाई से लिपट गईं। अब्बू ने हिम्मत बंधाई तो अब्दुस्समद ने बताया कि ये हालात यूक्रेन के निवासियों के लिए भी किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं।
नई दिल्लीएक घंटा पहलेकॉपी लिंकयूक्रेन में फंसे भारतीयों को ऑपरेशन गंगा चलाकर निकाला जा रहा है। यूक्रेन के विभिन्न शहरों में फंसे भारतीय काफी संघर्ष करके बॉर्डर वाले देशों में पहुंच रहे हैं, जहां से उन्हें एयरलिफ्ट किया जा रहा है। भास्कर ने इन भारतीयों से बात की…शुभम की यूक्रेन-टू-पोलैंड 78 घंटे की यात्राभागलपुर का शुभम मंगलवार सुबह पोलैंड पहुंच गया। जैसे ही इंडियन एंबेसी पहुंचा उसने वॉट्सऐप पर मैसेज छोड़ा। शुभम ने यूक्रेन और पोलैंड बॉर्डर की आपबीती सुनाई। बताया कि मुझे नहीं लग रहा था मैं पोलैंड पहुंच पाऊंगा। घर पहुंचने की उम्मीद भी टूटने लगी थी। वहां पर 3 दिनों से बिना सोए लाइन में लगा हुआ था। ताकि जल्दी पोलैंड पहुंच जाऊं। पर मुझे पोलैंड पहुंचने में 78 घंटे से ज्यादा का समय लग गया। इस दौरान कुछ भी खाने को नसीब नहीं था।यूक्रेन में फंसी बेटियां, रो-रोकर मां का बुरा हालक्रेन में पढ़ने गए स्टूडेंट्स बमबारी के बीच फंसे हैं। उनके हालात सुनकर माता-पिता के आंखों से आंसू बह रहे हैं। बेटियां बंकर में अंधेरे में रहकर जी रही हैं और दहशत में है। उन्हें खाने-पीने की दिक्कतें हो रही है। पोहा और पानी पीकर रह रही हैं। ऐसे में माता-पिता के गले से भी निवाला नहीं उतर रहा है। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने जांजगीर की आकांक्षा तंबोली के माता-पिता से बात की। उन्होंने बताया कि आकांक्षा और उसकी बहन बहुत मुश्किल से कीव से लविव पहुंचे हैं। हम तो उनके यहां पहुंचने की चिंता में ना खा पा रहे हैं ना सो पा रहे हैं।ये भी पढ़ेंकिसी को न देखना पड़े यूक्रेन सा खौफनाक मंजरयूक्रेन से लौटे अब्दुस्समद ने वहां के छह दिनों की खौफनाक दास्तां सुनाई, तो हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए। दादी अपने लाडले को कलेजे से लिपटाकर फफक-फफक कर रो पड़ी। मां की आंखों में भी आंसू थे, तो दोनों मासूम बहनें भी भाई से लिपट गईं। अब्बू ने हिम्मत बंधाई तो अब्दुस्समद ने बताया कि ये हालात यूक्रेन के निवासियों के लिए भी किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं।