BJP के समर्थन वाले इकलौते मुस्लिम प्रत्याशी का क्या हुआ:पहले कांग्रेस से टिकट लिया, चुनाव के 25 दिन पहले बीजेपी गठबंधन में आ गए; सीट पर 60% मुस्लिम वोटर फिर भी हारे

news image

  • Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • First Took Ticket From Congress, 25 Days Before Elections Came Into BJP Alliance; 60% Muslim Voters Still Lost On The Seat

यूपी चुनाव 2022 में बीजेपी के समर्थन वाले इलकौते मुस्लिम उम्मीदवार को करारी हार मिली है। जिस सीट पर 3 लाख वोटरों में से 1.8 लाख सिर्फ मुस्लिम हैं, वहां हमजा मियां को सिर्फ 65 हजार वोट मिले, जबकि उनकी हार का अंतर 61 हजार था। हमजा, अपना दल सोनेलाल से चुनाव लड़े थे। ये पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में थी। आइए, आपको इस कैंडिडेट की पूरी कहानी बताते हैं…

मालदार शख्स हैं हमजा मियां
इनके पास 2 अरब 96 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। कुल संपत्ति में से 2 करोड़ घटा देंगे तो बाकी संपत्ति इन्हे पुश्तैनी मिली है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम चेहरे हैदर अली खान ऊर्फ हमजा मियां को रामपुर के स्वार विधानसभा सीट पर सपा के अब्दुल्ला आजम खान से करारी हार मिली है।

विदेश से पढ़-लिखकर आए तो पापा की पार्टी छोड़ दी
लंदन के ऑक्सफोर्ड और एसेक्स यूनिवर्सिटी से पढ़ कर आए हमज मियां को स्वार की जनता ने अपना नेता नहीं चुना। उनकी जगह उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी से बीटेक और गलगोटिया यूनिवर्सिटी से एमटेक किए अब्दुल्ला आजम खान को स्वार का विधायक चुना। हमजा ने विदेश से आते ही कांग्रेस छोड़ भाजपा गठबंधन का हाथ थाम लिया था।

हमजा ने विदेश से आते ही कांग्रेस छोड़ भाजपा गठबंधन का हाथ थाम लिया।

हमजा ने विदेश से आते ही कांग्रेस छोड़ भाजपा गठबंधन का हाथ थाम लिया।

सिर्फ 30.52% मिला वोट
स्वार सीट पर कुल 2,13,160 पड़े। इनमें से मात्र 65,059 वोट ही हमज़ा मियां को मिले, जो कुल वोटों का 30.52% है। वहीं, 1,26,162 वोट और 59.19% वोट शेयर पाकर अब्दुल्ला नंबर 1 पर रहे। चुनाव से पहले हमज़ा मियां जब कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा के उम्मीदवार बने तभी से मुस्लिम समुदाय उनसे नाराज हो गया था।

60% मुस्लिम वोटर हैं स्वार सीट पर
जाति समीकरण के हिसाब से स्वार सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है।

कुल वोटर 2 लाख 98 हजार
मुस्लिम वोटर 1 लाख 80 हजार
सैनी वोटर 60 हजार
सिख वोटर 10 हजार
अन्य 57990

14 फरवरी को स्वार में वोट पड़े थे। यहां का वोटिंग प्रतिशत 71.53 % रहा था।

एक और मजेदार बात हैं, हमजा के पापा भी हारे हैं, वो भी विरोधी के ही पापा से
रामपुर सीट से सपा के आजम खान ने हमजा मियां के पिता नवाब काजिम अली खां को बुरी तरह से हरा दिया। आजम खान को कुल पड़े 2,19,757 वोटों में से 1,31,225 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े उनके पिता नवाब काजिम अली खां को मात्र 4,000 वोट ही मिले और वो चौथे स्थान पर रहे। बता दें कि हमजा मियां के पिता नवाब काज़िम अली खां 2002 से 2017 तक 4 बार विधायक रहे।

रामपुर से आजम खान ने 1,31,225 वोट पाकर जीत दर्ज की। वहीं, नवाब काजिम अली खां को सिर्फ 4000 वोट मिले।

रामपुर से आजम खान ने 1,31,225 वोट पाकर जीत दर्ज की। वहीं, नवाब काजिम अली खां को सिर्फ 4000 वोट मिले।

जो सीट हमजा ने गंवा दी, वो कभी भाजपा का गढ़ थी
स्वार विधानसभा सीट कभी बीजेपी का गढ़ हुआ करती थी. इस सीट से बीजेपी के शिव बहादुर सक्सेना ने चार बार जीत हासिल की थी। बाद में यह सीट नवाब खानदान का मजबूत किला बनी। इसे भेद पाना बीजेपी के लिए मुश्किल रहा। धीरे-धीरे समय बीता और स्वार विधानसभा सीट पर आजम खान के परिवार का दबदबा दिखने लगा। आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने 2017 में यहां से जीत दर्ज की थी।

2012 और 2017 में बीजेपी को मिली हार, अबतक नहीं हो सकी वापसी
2017 के विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला आजम खान ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। उस चुनाव में आजम को 1,06,443 वोट मिले और बीजेपी के लक्ष्मी सैनी को 53,096 वोटों से करारी शिकस्त दी। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नवाब कासिम अली खान उर्फ नावेद मियां ने बीजेपी के ही लक्ष्मी सैनी को हराया था। तमाम कोशिशों के बावजूद 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद 2022 में भी बीजेपी को स्वार विधानसभा सीट पर जीत नहीं मिल पाई है।

ये स्टोरी विकास सिंह ने की है। विकास दैनिक भास्कर के साथ इंटर्नशिप कर रहे हैं।

Hindi NewsLocalUttar pradeshFirst Took Ticket From Congress, 25 Days Before Elections Came Into BJP Alliance; 60% Muslim Voters Still Lost On The Seatयूपी चुनाव 2022 में बीजेपी के समर्थन वाले इलकौते मुस्लिम उम्मीदवार को करारी हार मिली है। जिस सीट पर 3 लाख वोटरों में से 1.8 लाख सिर्फ मुस्लिम हैं, वहां हमजा मियां को सिर्फ 65 हजार वोट मिले, जबकि उनकी हार का अंतर 61 हजार था। हमजा, अपना दल सोनेलाल से चुनाव लड़े थे। ये पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में थी। आइए, आपको इस कैंडिडेट की पूरी कहानी बताते हैं…मालदार शख्स हैं हमजा मियांइनके पास 2 अरब 96 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। कुल संपत्ति में से 2 करोड़ घटा देंगे तो बाकी संपत्ति इन्हे पुश्तैनी मिली है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम चेहरे हैदर अली खान ऊर्फ हमजा मियां को रामपुर के स्वार विधानसभा सीट पर सपा के अब्दुल्ला आजम खान से करारी हार मिली है।विदेश से पढ़-लिखकर आए तो पापा की पार्टी छोड़ दीलंदन के ऑक्सफोर्ड और एसेक्स यूनिवर्सिटी से पढ़ कर आए हमज मियां को स्वार की जनता ने अपना नेता नहीं चुना। उनकी जगह उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी से बीटेक और गलगोटिया यूनिवर्सिटी से एमटेक किए अब्दुल्ला आजम खान को स्वार का विधायक चुना। हमजा ने विदेश से आते ही कांग्रेस छोड़ भाजपा गठबंधन का हाथ थाम लिया था।हमजा ने विदेश से आते ही कांग्रेस छोड़ भाजपा गठबंधन का हाथ थाम लिया।सिर्फ 30.52% मिला वोटस्वार सीट पर कुल 2,13,160 पड़े। इनमें से मात्र 65,059 वोट ही हमज़ा मियां को मिले, जो कुल वोटों का 30.52% है। वहीं, 1,26,162 वोट और 59.19% वोट शेयर पाकर अब्दुल्ला नंबर 1 पर रहे। चुनाव से पहले हमज़ा मियां जब कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा के उम्मीदवार बने तभी से मुस्लिम समुदाय उनसे नाराज हो गया था।60% मुस्लिम वोटर हैं स्वार सीट परजाति समीकरण के हिसाब से स्वार सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है।कुल वोटर2 लाख 98 हजारमुस्लिम वोटर1 लाख 80 हजारसैनी वोटर60 हजारसिख वोटर10 हजारअन्य5799014 फरवरी को स्वार में वोट पड़े थे। यहां का वोटिंग प्रतिशत 71.53 % रहा था।एक और मजेदार बात हैं, हमजा के पापा भी हारे हैं, वो भी विरोधी के ही पापा सेरामपुर सीट से सपा के आजम खान ने हमजा मियां के पिता नवाब काजिम अली खां को बुरी तरह से हरा दिया। आजम खान को कुल पड़े 2,19,757 वोटों में से 1,31,225 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े उनके पिता नवाब काजिम अली खां को मात्र 4,000 वोट ही मिले और वो चौथे स्थान पर रहे। बता दें कि हमजा मियां के पिता नवाब काज़िम अली खां 2002 से 2017 तक 4 बार विधायक रहे।रामपुर से आजम खान ने 1,31,225 वोट पाकर जीत दर्ज की। वहीं, नवाब काजिम अली खां को सिर्फ 4000 वोट मिले।जो सीट हमजा ने गंवा दी, वो कभी भाजपा का गढ़ थीस्वार विधानसभा सीट कभी बीजेपी का गढ़ हुआ करती थी. इस सीट से बीजेपी के शिव बहादुर सक्सेना ने चार बार जीत हासिल की थी। बाद में यह सीट नवाब खानदान का मजबूत किला बनी। इसे भेद पाना बीजेपी के लिए मुश्किल रहा। धीरे-धीरे समय बीता और स्वार विधानसभा सीट पर आजम खान के परिवार का दबदबा दिखने लगा। आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने 2017 में यहां से जीत दर्ज की थी।2012 और 2017 में बीजेपी को मिली हार, अबतक नहीं हो सकी वापसी2017 के विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला आजम खान ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। उस चुनाव में आजम को 1,06,443 वोट मिले और बीजेपी के लक्ष्मी सैनी को 53,096 वोटों से करारी शिकस्त दी। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नवाब कासिम अली खान उर्फ नावेद मियां ने बीजेपी के ही लक्ष्मी सैनी को हराया था। तमाम कोशिशों के बावजूद 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद 2022 में भी बीजेपी को स्वार विधानसभा सीट पर जीत नहीं मिल पाई है।ये स्टोरी विकास सिंह ने की है। विकास दैनिक भास्कर के साथ इंटर्नशिप कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *