![]()
- Hindi News
- National
- RSS Chief Mohan Bhagwat Said That Netaji Did Not Fight Despite Differences With The People Of His Country, There Is Always A Need For Such A Person In India
इंफाल7 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मणिपुर की राजधानी इंफाल के विष्णुपुर जिले के मोइरंग में नेताजी के योगदानों को याद करते हुए उन्होंने आज की पीढ़ी से नेताजी के आदर्शों पर चलने की अपील की।
संघ प्रमुख ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नेताजी अंग्रेजों से तो लड़ ही रहे थे, साथ ही पूरे देश के लोगों को एक साथ जोड़ भी रहे थे। उन्होंने कहा कि सुभाष बाबू में पूरे देश को एक करने की शक्ति थी। वो पूरे देश को अपना मानते थे। भारत में ऐसे व्यक्ति की जरूरत हमेशा रहती है।
नेताजी को श्रद्धाजंलि देते हुए संघ प्रमुख ने कहा, ‘सुभाष बाबू ने अंग्रेजों के साथ इतना कड़ा संघर्ष किया तो सोचिए उनके पास कितना पराक्रम होगा। लेकिन उन्होंने एक भी झगड़ा अपने लोगों से नहीं किया। देशभक्ति क्या होती है? पूरे देश के लिए काम करना, अपने देश के लोगों से मतभेद होने के बावजूद झगड़ा नहीं करना।’

नेताजी चाहते तो लड़ाई कर सकते थे
नेताजी को याद करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘नेताजी कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे, कुछ कारण होगा, पता नहीं क्या था, गांधी जी की इच्छा नहीं थी। बहुमत नेताजी के साथ था, वो झगड़ा कर सकते थे, लेकिन उन्होंने नहीं किया। वो विड्रा हो गए। क्योंकि विदेशी सत्ता के खिलाफ लड़ना है तो देश को एक होना चाहिए, एक रहना चाहिए। तेरा-मेरा, छोटे-छोटे स्वार्थ को भूलना, अपने स्वार्थ का बलिदान देकर देश के स्वार्थ के लिए, देश के हित के लिए लड़ाई करना। पूरे भारतवर्ष के लोग उनकी सेना में थे, जाति, पंथ, मत, प्रांत कुछ नहीं। पूरे देश को एक करने की उनकी शक्ति थी। क्योंकि, वह स्वयं पूरे भारत को अपना देश मानते थे। यह राष्ट्रीय प्रवृत्ति है।’
हम सब नेताजी की तरह नहीं बन सकते
भागवत ने कहा, ‘हम सब लोग उनके रास्ते पर स्वयं चलें, हम सुभाष बाबू नहीं बन सकते, लेकिन आज जो हैं, उससे पांच कदम ज्यादा अच्छे तो बन सकते हैं। क्योंकि, ऐसा बनने से अपने जीवन में भी और राष्ट्र के जीवन में भी जो परिवर्तन आता है, वह सबके लिए हितकारी होता है। और जब सब सुखी होते हैं तो मेरे अपने सुख के लिए अलग से प्रयास करना नहीं पड़ता। इसलिए नेताजी का यह देशभक्ति का, राष्ट्रीय एकात्मता का, सर्वस्व समर्पण का संदेश, उनके जीवन के निमित्त आज हम याद करें और उसका अनुकरण हम अपने जीवन में करने का प्रयास करें, उनके लिए यही सच्ची स्मरणांजलि होगी।’
पीएम मोदी ने इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया। PM मोदी ने कहा कि यह कालखंड ऐतिहासिक है। यह स्थान जहां हम मौजूद हैं, यह भी ऐतिहासिक है। आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं। नेताजी की भव्य प्रतिमा डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट पर स्थापित हो रही है। जल्द ही इसकी जगह ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा लगेगी। यह प्रतिमा आजादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है।
Hindi NewsNationalRSS Chief Mohan Bhagwat Said That Netaji Did Not Fight Despite Differences With The People Of His Country, There Is Always A Need For Such A Person In Indiaइंफाल7 घंटे पहलेकॉपी लिंकसंघ प्रमुख मोहन भागवत ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मणिपुर की राजधानी इंफाल के विष्णुपुर जिले के मोइरंग में नेताजी के योगदानों को याद करते हुए उन्होंने आज की पीढ़ी से नेताजी के आदर्शों पर चलने की अपील की।संघ प्रमुख ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नेताजी अंग्रेजों से तो लड़ ही रहे थे, साथ ही पूरे देश के लोगों को एक साथ जोड़ भी रहे थे। उन्होंने कहा कि सुभाष बाबू में पूरे देश को एक करने की शक्ति थी। वो पूरे देश को अपना मानते थे। भारत में ऐसे व्यक्ति की जरूरत हमेशा रहती है।नेताजी को श्रद्धाजंलि देते हुए संघ प्रमुख ने कहा, ‘सुभाष बाबू ने अंग्रेजों के साथ इतना कड़ा संघर्ष किया तो सोचिए उनके पास कितना पराक्रम होगा। लेकिन उन्होंने एक भी झगड़ा अपने लोगों से नहीं किया। देशभक्ति क्या होती है? पूरे देश के लिए काम करना, अपने देश के लोगों से मतभेद होने के बावजूद झगड़ा नहीं करना।’नेताजी चाहते तो लड़ाई कर सकते थेनेताजी को याद करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘नेताजी कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे, कुछ कारण होगा, पता नहीं क्या था, गांधी जी की इच्छा नहीं थी। बहुमत नेताजी के साथ था, वो झगड़ा कर सकते थे, लेकिन उन्होंने नहीं किया। वो विड्रा हो गए। क्योंकि विदेशी सत्ता के खिलाफ लड़ना है तो देश को एक होना चाहिए, एक रहना चाहिए। तेरा-मेरा, छोटे-छोटे स्वार्थ को भूलना, अपने स्वार्थ का बलिदान देकर देश के स्वार्थ के लिए, देश के हित के लिए लड़ाई करना। पूरे भारतवर्ष के लोग उनकी सेना में थे, जाति, पंथ, मत, प्रांत कुछ नहीं। पूरे देश को एक करने की उनकी शक्ति थी। क्योंकि, वह स्वयं पूरे भारत को अपना देश मानते थे। यह राष्ट्रीय प्रवृत्ति है।’हम सब नेताजी की तरह नहीं बन सकतेभागवत ने कहा, ‘हम सब लोग उनके रास्ते पर स्वयं चलें, हम सुभाष बाबू नहीं बन सकते, लेकिन आज जो हैं, उससे पांच कदम ज्यादा अच्छे तो बन सकते हैं। क्योंकि, ऐसा बनने से अपने जीवन में भी और राष्ट्र के जीवन में भी जो परिवर्तन आता है, वह सबके लिए हितकारी होता है। और जब सब सुखी होते हैं तो मेरे अपने सुख के लिए अलग से प्रयास करना नहीं पड़ता। इसलिए नेताजी का यह देशभक्ति का, राष्ट्रीय एकात्मता का, सर्वस्व समर्पण का संदेश, उनके जीवन के निमित्त आज हम याद करें और उसका अनुकरण हम अपने जीवन में करने का प्रयास करें, उनके लिए यही सच्ची स्मरणांजलि होगी।’पीएम मोदी ने इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण कियाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया। PM मोदी ने कहा कि यह कालखंड ऐतिहासिक है। यह स्थान जहां हम मौजूद हैं, यह भी ऐतिहासिक है। आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं। नेताजी की भव्य प्रतिमा डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट पर स्थापित हो रही है। जल्द ही इसकी जगह ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा लगेगी। यह प्रतिमा आजादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है।
