RTI पर सुरक्षा का हवाला:केंद्र ने 83% अधिक आवेदन खारिज किए; इसके लिए RTI अधिनियम की धारा 8 (1) का खूब हुआ इस्तेमाल

news image

  • Hindi News
  • National
  • Central Government Rejects 83% More Applications For Security Reasons; For This, Section 8(1) Of The RTI Act Has Been Used Extensively.

नई दिल्ली3 घंटे पहले

राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की ओर से RTI आवेदन खारिज किए जा रहे हैं। साल 2020-21 के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की तरफ से RTI आवेदन खारिज करने में 83% का इजाफा हुआ है। हालांकि, 2020-21 में 2019-20 के मुकाबले ओवरऑल रिजेक्शन रेट 2.95% तक कम हुआ था।

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) के वेंकटेश नायक ने केंद्र सरकार के अलग- अलग मंत्रालयों के तहत आने वाले 2,182 से अधिक विभागों में RTI आवेदन खारिज करने के कारणों का ऐनालिसिस किया। बता दें कि हर मंत्रालय को अपने यहां दायर कुल RTI आवेदनों की ऐनुअल रिपोर्ट केंद्रीय सूचना आयोग (CEC) को देनी होती है।

2019-20 में कुल 1.29 करोड़ आवेदन मिले
इस ऐनुएल रिपोर्ट का एनालिसिस करने पर पता चला कि 2019-20 में केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों में कुल 1.29 करोड़ RTI आवेदन दायर किए गए थे। ये आवेदन फाइनेंशियल ईयर की तुलना में 2.48% कम थे।

CEC के मुताबिक, उस दौरान देश में 1.33 करोड़ RTI आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों में सबसे अधिक इजाफा हेल्थ और स्टील मिनिस्ट्री में हुआ। यहां खारिज किए गए 53,537 में से 1,024 आवेदन राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर थे, जबकि पिछले साल इस आधार पर 557 आवेदन ही खारिज किए गए थे।

RTI अधिनियम की धारा 8 (1) का इस्तेमाल
नायक ने बताया कि कुल रिजेक्शन रेट घटा है, लेकिन सरकार ने आवेदन खारिज करने के लिए RTI अधिनियम की धारा 8 (1) a का खूब इस्तेमाल किया है। इसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली जानकारी देने को लेकर छूट दी गई है।

यहां तक ​​​​कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर महामारी वर्ष में 401 आवेदन खारिज किए। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने RTI आवेदनों को खारिज करने के लिए खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के बारे में जानकारी मांगने से जुड़े एक अन्य प्रावधान का इस्तेमाल किया। मंत्रालय के दायरे में कोई सुरक्षा या खुफिया एजेंसी नहीं आने के बावजूद ऐसा किया गया था।

धारा 24 के तहत 12 हजार आवेदन खारिज
RTI ऐक्ट की धारा 24 में प्रावधान है कि सुरक्षा अधिकारियों से भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी को छोड़कर जानकारी कोई जानकारी नहीं मांगी जा सकती है। नायक ने कहा- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ऐसे मंत्रालय हैं, जिन्होंने महामारी के दौरान सैकड़ों मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर फायदा उठाया ताकि सूचना से इनकार किया जा सके।

पिछले साल की तरह RTI आवेदनों को खारिज करने का सबसे बड़ा कारण धारा 8 (1) j रहा, जिसके तहत व्यक्तिगत जानकारी देने पर रोक है। इस आधार पर 2019-20 में करीब 12 हजार आवेदन खारिज किए गए।

ऐसे मामलों में क्या करें?
RTI कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल के मुताबिक. ‘इस तरह के अधिकांश आवेदन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सेवा और जांच के बारे में जानकारी से जुड़े होते हैं। RTI ऐक्ट के अनुसार, एक बार आवेदन खारिज होने के बाद, आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपील दायर कर सकता है। ये अधिकारी मंत्रालय या विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी होता है। यहां से भी समाधान न मिलने पर CEC में दूसरी अपील दायर की जा सकती है।

Hindi NewsNationalCentral Government Rejects 83% More Applications For Security Reasons; For This, Section 8(1) Of The RTI Act Has Been Used Extensively.नई दिल्ली3 घंटे पहलेकॉपी लिंकवीडियोराष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की ओर से RTI आवेदन खारिज किए जा रहे हैं। साल 2020-21 के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की तरफ से RTI आवेदन खारिज करने में 83% का इजाफा हुआ है। हालांकि, 2020-21 में 2019-20 के मुकाबले ओवरऑल रिजेक्शन रेट 2.95% तक कम हुआ था।कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) के वेंकटेश नायक ने केंद्र सरकार के अलग- अलग मंत्रालयों के तहत आने वाले 2,182 से अधिक विभागों में RTI आवेदन खारिज करने के कारणों का ऐनालिसिस किया। बता दें कि हर मंत्रालय को अपने यहां दायर कुल RTI आवेदनों की ऐनुअल रिपोर्ट केंद्रीय सूचना आयोग (CEC) को देनी होती है।2019-20 में कुल 1.29 करोड़ आवेदन मिलेइस ऐनुएल रिपोर्ट का एनालिसिस करने पर पता चला कि 2019-20 में केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों में कुल 1.29 करोड़ RTI आवेदन दायर किए गए थे। ये आवेदन फाइनेंशियल ईयर की तुलना में 2.48% कम थे।CEC के मुताबिक, उस दौरान देश में 1.33 करोड़ RTI आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों में सबसे अधिक इजाफा हेल्थ और स्टील मिनिस्ट्री में हुआ। यहां खारिज किए गए 53,537 में से 1,024 आवेदन राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर थे, जबकि पिछले साल इस आधार पर 557 आवेदन ही खारिज किए गए थे।RTI अधिनियम की धारा 8 (1) का इस्तेमालनायक ने बताया कि कुल रिजेक्शन रेट घटा है, लेकिन सरकार ने आवेदन खारिज करने के लिए RTI अधिनियम की धारा 8 (1) a का खूब इस्तेमाल किया है। इसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली जानकारी देने को लेकर छूट दी गई है।यहां तक ​​​​कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर महामारी वर्ष में 401 आवेदन खारिज किए। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने RTI आवेदनों को खारिज करने के लिए खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के बारे में जानकारी मांगने से जुड़े एक अन्य प्रावधान का इस्तेमाल किया। मंत्रालय के दायरे में कोई सुरक्षा या खुफिया एजेंसी नहीं आने के बावजूद ऐसा किया गया था।धारा 24 के तहत 12 हजार आवेदन खारिजRTI ऐक्ट की धारा 24 में प्रावधान है कि सुरक्षा अधिकारियों से भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी को छोड़कर जानकारी कोई जानकारी नहीं मांगी जा सकती है। नायक ने कहा- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ऐसे मंत्रालय हैं, जिन्होंने महामारी के दौरान सैकड़ों मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर फायदा उठाया ताकि सूचना से इनकार किया जा सके।पिछले साल की तरह RTI आवेदनों को खारिज करने का सबसे बड़ा कारण धारा 8 (1) j रहा, जिसके तहत व्यक्तिगत जानकारी देने पर रोक है। इस आधार पर 2019-20 में करीब 12 हजार आवेदन खारिज किए गए।ऐसे मामलों में क्या करें?RTI कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल के मुताबिक. ‘इस तरह के अधिकांश आवेदन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सेवा और जांच के बारे में जानकारी से जुड़े होते हैं। RTI ऐक्ट के अनुसार, एक बार आवेदन खारिज होने के बाद, आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपील दायर कर सकता है। ये अधिकारी मंत्रालय या विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी होता है। यहां से भी समाधान न मिलने पर CEC में दूसरी अपील दायर की जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *