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उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण की 5 सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में से 4 सपा का गढ़ हैं। एक सीट भाजपा के कब्जे वाली भी है। मोदी से लेकर मुलायम तक सभी बड़े नेता इन विधानसभा सीटों पर बड़ी-बड़ी रैलियां कर चुके हैं। आइए एक-एक कर इन विधानसभा सीटों के बारे में जानते हैं…
1. मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट, अखिलेश यादव और पूर्व सब इंस्पेक्टर के बीच मुकाबला
ये सिर्फ तीसरे चरण नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश चुनाव की सबसे हॉट सीट में से एक हैं। यहां से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव चुनावी मैदान में हैं। अखिलेश को कड़ी टक्कर देने के लिए यहां से बीजेपी ने आगरा के सांसद और कैबिनेट मंत्री एस.पी. सिंह बघेल को मैदान में उतारा है। 1993 से लेकर अब तक सिर्फ यादव ही चुनाव जीतते आये हैं, पार्टी चाहे कोई भी रही हो।
कहा जा रहा है, इस सीट पर गुरु के बेटे और शिष्य के बीच की लड़ाई है। दरअसल, एसपी सिंह बघेल मुलायम के राजनीतिक शिष्य हैं और अखिलेश बेटे। साल 2014 में भाजपा ज्वाइन करने से पहले एसपी सिंह लंबे समय तक सपा में ही थे। मुलायम से राजनीतिक बारीकियां सीखीं। सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ राजनीति में आए एसपी सिंह सपा के टिकट पर ही 3 बार सांसद रह रह चुके हैं।

भाजपा के एसपी सिंह बघेल (बाएं) और सपा के अखिलेश यादव (दाएं)
करहल विधानसभा में करीब 3 लाख 71 हजार वोटर हैं। इसमें यादव वोटरों की संख्या लगभग 1 लाख 44 हजार है, जो कि कुल मतों का 38 फीसदी बैठता है। जबकि 14183 वोटर मुस्लिम हैं। इसके अलावा शाक्य (34946), ठाकुर (24737), ब्राह्मण (14300), लोधी (10833) और जाटव (33688) वोटर्स का भी दबदबा है।
2017 के चुनाव में सपा के सोबरन सिंह यादव को यहां 1 लाख 4 हजार 221 वोट मिले थे। भाजपा की रमा शाक्य को 65 हजार 816 वोट मिले थे। जबकि 29 हजार 676 वोट बीएसपी के दलवीर सिंह तीसरे नंबर पर रहे थे।
2. इटावा जिले की जसवंत नगर विधानसभा सीट, अखिलेश के चाचा शिवपाल के युवा प्रत्याशी के बीच मुकाबला
पिछले 5 विधानसभा चुनावों से इस सीट पर केवल समाजवादी पार्टी का कब्ज़ा है। मुलायम सिंह यादव भी पहली बार इसी सीट को जीत कर विधायक बने थे। इस बार फिर अखिलेश के चाचा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने यहां से युवा नेता विनय शाक्य को मैदान में उतारा है। 32 साल के विनय जसवंतनगर क्षेत्र के चर्चित चेहते हैं। इनके पिता मनोज शाक्य भी जाने-माने समाजसेवी हैं।

लेफ्ट में भाजपा के विनय शाक्य और राइट में पीएसपी के शिवपाल यादव।
इस विधानसभा सीट में 3,82,477 मतदाता हैं। जिनमें से 1 लाख 40 हजार यादव, 85 हजार दलित, 16000 पाल बघेल, 45000 शाक्य, 42 हजार ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और 14 हजार मुसलमान हैं।
यहां 2017 में शिवपाल सिंह यादव को 1 लाख 26 हजार 834 वोट मिले थे। बीजेपी उम्मीदवार मनीष यादव पात्रे को 74 हजार 218 वोट मिले थे। बीएसपी उम्मीदवार दुर्वेश कुमार शाक्य को 24 हजार 509 वोट हासिल हुए थे।
3. हाथरस जिले की सादाबाद विधानसभा सीट, पिछले महीने भाजपा में आये रामवीर और गुड्डू चौधरी के बीच मुकाबला
बीजेपी और आरएलडी के बीच कड़ी टक्कर है। इस सीट पर 15 जनवरी को बसपा छोड़ भाजपा में आए रामवीर उपाध्याय चुनावी मैदान में हैं। उनको सपा के समर्थन वाले आरएलडी के प्रदीप चौधरी गुड्डू कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। जहां एक ओर रामवीर बसपा के बड़े नेता और सरकार में पूर्व मंत्री रहे हैं। हाथरस जिले में 3 विधानसभा सीटें हैं, सभी सीटों से विधायक बन चुके हैं। वहीं गुड्डू भी यहां से जिला पंचायत सदस्य और चर्चित नाम हैं। उनको सीट की सबसे बड़ी जाट आबादी का समर्थन प्राप्त है।

लेफ्ट में आरएलडी के प्रदीप चौधरी और राइट में भाजपा के रामवीर उपाध्याय।
सादाबाद सीट पर 3 लाख 58 हजार वोट हैं। जिनमें 90 हजार जाट वोटर्स, 55 हजार ब्राह्मण वोटर्स, 32 हजार मुसलमान वोटर्स , 58 हजार बघेल और ठाकुर वोटर्स, 12 हजार यादव वोटर्स, 48 हजार वैश्य, धोबी, नाई, काछी वोटर्स और करीब 63 हजार दलित वोटर्स हैं।
2017 के चुनावों में रामवीर उपाध्याय को 91,365 वोट मिले थे। कांग्रेस उम्मीदवार अनिल चौधरी के 64,775 वोट मिले थे। बीजेपी की प्रत्याशी प्रीति चौधरी 36,134 मतों के साथ तीसरे स्थान पर थीं।
4.कन्नौज जिले की कन्नौज सदर विधानसभा सीट, पूर्व कमिश्नर इस्तीफा दे कर भाजपा को जिताने के मकसद से आए हैं
दुनियाभर में इत्र नगरी के नाम से जानी जाने वाली कन्नौज वो सीट है जहां से अखिलेश और डिंपल यादव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। इत्र व्यापारी के घर छापे के बाद से ये शहर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इस सीट में सपा और भाजपा में कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।

लेफ्ट में सपा के अनिल दोहरे और राइट में भाजपा के असीम अरुण।
यहां सपा के तीन बार विधायक रहे अनिल दोहरे चौथी बार चुनावी मैदान में हैं। वहीं भाजपा ने कानपूर के पूर्व पुलिस कमिश्नर असीम अरुण को मैदान में उतरा है। इस बार भाजपा को इस सीट से बड़ी उम्मीदें हैं। क्योंकि पिछले चुनावों में प्रत्याशी बनवारी लाल केवल 2454 वोटों से हारे थे।
कन्नौज विधानसभा सीट पर 4 लाख 27 हजार वोटर्स हैं। जिनमें, 98 हजार ब्राह्मण वोटर्स, 71 हजार दलित वोटर्स, 60 हजार मुस्लिम, 62 हजार गैर-यादव ओबीसी वोटर्स और करीब 37 हजार यादव वोटर्स शामिल हैं। 2017 में सपा के अनिल दोहरे को 99, 635 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के बनवारी लाल को 97, 181 वोट मिले थे। इस बार भी कांटे का मुलाबला देखने को मिल सकता है।
5. कानपुर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट, पिछले 20 साल से इंतजार में भाजपा, अब प्रदेश उपाध्यक्ष मैदान में
सपा का मजबूत किला मानी जाती है। मोदी लहर में भी भाजपा इस सीट पर कब्ज़ा नहीं कर पाई। बीजेपी पिछले 20 साल से इस सीट में जीत का इंतजार कर रही है। सपा के टिकट पर 2012 से लगातार विधायक बन रहे हाजी इरफान सोलंकी फिर चुनावी मैदान में हैं। वहीं भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष और एमएलसी सलिल विश्नोई को मैदान में उतारा है। सलिल विश्नोई आर्यनगर और जनरलगंज से 3 बार के विधायक हैं।

लेफ्ट में भाजपा के सलिल विश्नोई और राइट में सपा के इरफान सोलंकी।
सीसामऊ विधानसभा सीट में कुल वोटरों की संख्या 2 लाख 71 हजार 413 है। जिनमें 80 हजार मुस्लिम वोटर्स, 35 हजार दलित वोटर्स, 55 हजार ब्राह्मण वोटर्स, 20 हजार कायस्थ वोटर्स, 15 हजार वैश्य वोटर्स, 16 हजार यादव वोटर्स और करीब 30 हजार से ज्यादा दलित वोटर्स हैं।
2017 में भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. सपा के इरफान सोलंकी को 73,030 वोट के साथ जीत हसित की थी। वहीं भाजपा के सुरेश अवस्थी को 67,204 वोट मिले थे।
उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण की 5 सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में से 4 सपा का गढ़ हैं। एक सीट भाजपा के कब्जे वाली भी है। मोदी से लेकर मुलायम तक सभी बड़े नेता इन विधानसभा सीटों पर बड़ी-बड़ी रैलियां कर चुके हैं। आइए एक-एक कर इन विधानसभा सीटों के बारे में जानते हैं…1. मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट, अखिलेश यादव और पूर्व सब इंस्पेक्टर के बीच मुकाबलाये सिर्फ तीसरे चरण नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश चुनाव की सबसे हॉट सीट में से एक हैं। यहां से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव चुनावी मैदान में हैं। अखिलेश को कड़ी टक्कर देने के लिए यहां से बीजेपी ने आगरा के सांसद और कैबिनेट मंत्री एस.पी. सिंह बघेल को मैदान में उतारा है। 1993 से लेकर अब तक सिर्फ यादव ही चुनाव जीतते आये हैं, पार्टी चाहे कोई भी रही हो।कहा जा रहा है, इस सीट पर गुरु के बेटे और शिष्य के बीच की लड़ाई है। दरअसल, एसपी सिंह बघेल मुलायम के राजनीतिक शिष्य हैं और अखिलेश बेटे। साल 2014 में भाजपा ज्वाइन करने से पहले एसपी सिंह लंबे समय तक सपा में ही थे। मुलायम से राजनीतिक बारीकियां सीखीं। सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ राजनीति में आए एसपी सिंह सपा के टिकट पर ही 3 बार सांसद रह रह चुके हैं।भाजपा के एसपी सिंह बघेल (बाएं) और सपा के अखिलेश यादव (दाएं)करहल विधानसभा में करीब 3 लाख 71 हजार वोटर हैं। इसमें यादव वोटरों की संख्या लगभग 1 लाख 44 हजार है, जो कि कुल मतों का 38 फीसदी बैठता है। जबकि 14183 वोटर मुस्लिम हैं। इसके अलावा शाक्य (34946), ठाकुर (24737), ब्राह्मण (14300), लोधी (10833) और जाटव (33688) वोटर्स का भी दबदबा है।2017 के चुनाव में सपा के सोबरन सिंह यादव को यहां 1 लाख 4 हजार 221 वोट मिले थे। भाजपा की रमा शाक्य को 65 हजार 816 वोट मिले थे। जबकि 29 हजार 676 वोट बीएसपी के दलवीर सिंह तीसरे नंबर पर रहे थे।2. इटावा जिले की जसवंत नगर विधानसभा सीट, अखिलेश के चाचा शिवपाल के युवा प्रत्याशी के बीच मुकाबलापिछले 5 विधानसभा चुनावों से इस सीट पर केवल समाजवादी पार्टी का कब्ज़ा है। मुलायम सिंह यादव भी पहली बार इसी सीट को जीत कर विधायक बने थे। इस बार फिर अखिलेश के चाचा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने यहां से युवा नेता विनय शाक्य को मैदान में उतारा है। 32 साल के विनय जसवंतनगर क्षेत्र के चर्चित चेहते हैं। इनके पिता मनोज शाक्य भी जाने-माने समाजसेवी हैं।लेफ्ट में भाजपा के विनय शाक्य और राइट में पीएसपी के शिवपाल यादव।इस विधानसभा सीट में 3,82,477 मतदाता हैं। जिनमें से 1 लाख 40 हजार यादव, 85 हजार दलित, 16000 पाल बघेल, 45000 शाक्य, 42 हजार ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और 14 हजार मुसलमान हैं।यहां 2017 में शिवपाल सिंह यादव को 1 लाख 26 हजार 834 वोट मिले थे। बीजेपी उम्मीदवार मनीष यादव पात्रे को 74 हजार 218 वोट मिले थे। बीएसपी उम्मीदवार दुर्वेश कुमार शाक्य को 24 हजार 509 वोट हासिल हुए थे।3. हाथरस जिले की सादाबाद विधानसभा सीट, पिछले महीने भाजपा में आये रामवीर और गुड्डू चौधरी के बीच मुकाबलाबीजेपी और आरएलडी के बीच कड़ी टक्कर है। इस सीट पर 15 जनवरी को बसपा छोड़ भाजपा में आए रामवीर उपाध्याय चुनावी मैदान में हैं। उनको सपा के समर्थन वाले आरएलडी के प्रदीप चौधरी गुड्डू कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। जहां एक ओर रामवीर बसपा के बड़े नेता और सरकार में पूर्व मंत्री रहे हैं। हाथरस जिले में 3 विधानसभा सीटें हैं, सभी सीटों से विधायक बन चुके हैं। वहीं गुड्डू भी यहां से जिला पंचायत सदस्य और चर्चित नाम हैं। उनको सीट की सबसे बड़ी जाट आबादी का समर्थन प्राप्त है।लेफ्ट में आरएलडी के प्रदीप चौधरी और राइट में भाजपा के रामवीर उपाध्याय।सादाबाद सीट पर 3 लाख 58 हजार वोट हैं। जिनमें 90 हजार जाट वोटर्स, 55 हजार ब्राह्मण वोटर्स, 32 हजार मुसलमान वोटर्स , 58 हजार बघेल और ठाकुर वोटर्स, 12 हजार यादव वोटर्स, 48 हजार वैश्य, धोबी, नाई, काछी वोटर्स और करीब 63 हजार दलित वोटर्स हैं।2017 के चुनावों में रामवीर उपाध्याय को 91,365 वोट मिले थे। कांग्रेस उम्मीदवार अनिल चौधरी के 64,775 वोट मिले थे। बीजेपी की प्रत्याशी प्रीति चौधरी 36,134 मतों के साथ तीसरे स्थान पर थीं।4.कन्नौज जिले की कन्नौज सदर विधानसभा सीट, पूर्व कमिश्नर इस्तीफा दे कर भाजपा को जिताने के मकसद से आए हैंदुनियाभर में इत्र नगरी के नाम से जानी जाने वाली कन्नौज वो सीट है जहां से अखिलेश और डिंपल यादव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। इत्र व्यापारी के घर छापे के बाद से ये शहर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इस सीट में सपा और भाजपा में कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।लेफ्ट में सपा के अनिल दोहरे और राइट में भाजपा के असीम अरुण।यहां सपा के तीन बार विधायक रहे अनिल दोहरे चौथी बार चुनावी मैदान में हैं। वहीं भाजपा ने कानपूर के पूर्व पुलिस कमिश्नर असीम अरुण को मैदान में उतरा है। इस बार भाजपा को इस सीट से बड़ी उम्मीदें हैं। क्योंकि पिछले चुनावों में प्रत्याशी बनवारी लाल केवल 2454 वोटों से हारे थे।कन्नौज विधानसभा सीट पर 4 लाख 27 हजार वोटर्स हैं। जिनमें, 98 हजार ब्राह्मण वोटर्स, 71 हजार दलित वोटर्स, 60 हजार मुस्लिम, 62 हजार गैर-यादव ओबीसी वोटर्स और करीब 37 हजार यादव वोटर्स शामिल हैं। 2017 में सपा के अनिल दोहरे को 99, 635 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के बनवारी लाल को 97, 181 वोट मिले थे। इस बार भी कांटे का मुलाबला देखने को मिल सकता है।5. कानपुर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट, पिछले 20 साल से इंतजार में भाजपा, अब प्रदेश उपाध्यक्ष मैदान मेंसपा का मजबूत किला मानी जाती है। मोदी लहर में भी भाजपा इस सीट पर कब्ज़ा नहीं कर पाई। बीजेपी पिछले 20 साल से इस सीट में जीत का इंतजार कर रही है। सपा के टिकट पर 2012 से लगातार विधायक बन रहे हाजी इरफान सोलंकी फिर चुनावी मैदान में हैं। वहीं भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष और एमएलसी सलिल विश्नोई को मैदान में उतारा है। सलिल विश्नोई आर्यनगर और जनरलगंज से 3 बार के विधायक हैं।लेफ्ट में भाजपा के सलिल विश्नोई और राइट में सपा के इरफान सोलंकी।सीसामऊ विधानसभा सीट में कुल वोटरों की संख्या 2 लाख 71 हजार 413 है। जिनमें 80 हजार मुस्लिम वोटर्स, 35 हजार दलित वोटर्स, 55 हजार ब्राह्मण वोटर्स, 20 हजार कायस्थ वोटर्स, 15 हजार वैश्य वोटर्स, 16 हजार यादव वोटर्स और करीब 30 हजार से ज्यादा दलित वोटर्स हैं।2017 में भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. सपा के इरफान सोलंकी को 73,030 वोट के साथ जीत हसित की थी। वहीं भाजपा के सुरेश अवस्थी को 67,204 वोट मिले थे।