केंद्र ने कहा

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देश में साइबर अपराध और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं बड़ा मुद्दा हैं। इसी क्रम में तमिलनाडु से डीएमके सांसद कथिर आनंद ने साइबर अपराध की रोकथाम में उठाए जा रहे कदमों के बारे में लोकसभा में सरकार से सवाल पूछे थे।

तमिलनाडु से डीएमके सांसद कथिर आनंद ने देश में साइबर क्राइम और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम संबंधी विषय पर गृह मंत्रालय से जवाब मांगा था। ऐसे में सांसद कथिर आनंद के सवालों पर देश के गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने संबंधित विषय में कई सारे सवालों के जवाब दिए है।

सांसद ने मांगा था जवाब: देश में साइबर धोखाधड़ी और बढ़ते साइबर अपराध के तहत डीएमके सांसद कथिर आनंद ने गृह मंत्रालय से कुछ सवाल पूछे थे। सांसद ने पूछा था कि सरकार के पास इन घटनाओं की रोकथाम के लिए कितने अत्याधुनिक गैजेट्स व तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही सरकार के पास साइबर अपराध से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं हैं तो पिछले तीन सालों में खर्च की गई धनराशि का राज्यवार ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए।

केंद्र सरकार ने दिया यह जवाब: देश में साइबर सुरक्षा से जुड़े सवालों के जवाब में गृह मंत्रालय की तरफ से गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने पक्ष रखा। इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा कहा गया कि “भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य के अंतर्गत निहित हैं। ऐसे में लोगों को साइबर क्राइम से बचाने के उपाय करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।” केंद्र सरकार केवल राज्यों को अपराध की रोकथाम को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय सहायता देने का काम करती है।

इस योजना में बजट की भारी कमी: जानकारी में गृह मंत्रालय ने देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान देने की बात तो कही पर अपराध रोकथाम योजना के तहत गृह मंत्रालय ने मात्र 96.13 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की। बता दें कि, गृह मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम के लिए दी गई वित्तीय सहायता के जो आंकड़े दिए वह मार्च 2021 तक के ही थे।

इस राज्य को कोई वित्तीय मदद नहीं: देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को जहां 4.71 करोड़ रुपए दिए गए, तो वहीं लद्दाख को कोई भी वित्तीय सहायता नहीं दी गई। केंद्र की तरफ से सबसे ज्यादा वित्तीय सहायता पाने वाले राज्यों में यूपी के अलावा महाराष्ट्र (4.58 करोड़), कर्नाटक (4.46 करोड़), आंध्रप्रदेश (4.42 करोड़), केरल (4.34 करोड़), पश्चिम बंगाल (4.32 करोड़ रूपये) और राजस्थान (4.40 करोड़ रुपए) जैसे राज्य शामिल रहे।

3 सालों में इतना बजट हुआ आवंटित: गृह मंत्रालय ने पिछले 3 वित्तीय वर्षों के दौरान वितरित सहायता राशि के बारे में जानकारी देते बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों/ संघ क्षेत्रों को साल 2018-19 में 769 करोड़ रूपये, साल 2019-20 के दौरान 791.30 करोड़ रुपये और साल 2020-21 में 770.76 करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे। साल 2020-21 में अधिकांश राज्यों/ संघ क्षेत्रों को आवंटन के बदले निधि जारी नहीं की जा सकी, क्योंकि राज्यों के रूप में उनके पास पर्याप्त अव्ययित धनराशि पहले से ही बची हुई थी।

देश में साइबर अपराध और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं बड़ा मुद्दा हैं। इसी क्रम में तमिलनाडु से डीएमके सांसद कथिर आनंद ने साइबर अपराध की रोकथाम में उठाए जा रहे कदमों के बारे में लोकसभा में सरकार से सवाल पूछे थे। तमिलनाडु से डीएमके सांसद कथिर आनंद ने देश में साइबर क्राइम और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम संबंधी विषय पर गृह मंत्रालय से जवाब मांगा था। ऐसे में सांसद कथिर आनंद के सवालों पर देश के गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने संबंधित विषय में कई सारे सवालों के जवाब दिए है। सांसद ने मांगा था जवाब: देश में साइबर धोखाधड़ी और बढ़ते साइबर अपराध के तहत डीएमके सांसद कथिर आनंद ने गृह मंत्रालय से कुछ सवाल पूछे थे। सांसद ने पूछा था कि सरकार के पास इन घटनाओं की रोकथाम के लिए कितने अत्याधुनिक गैजेट्स व तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही सरकार के पास साइबर अपराध से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं हैं तो पिछले तीन सालों में खर्च की गई धनराशि का राज्यवार ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए। केंद्र सरकार ने दिया यह जवाब: देश में साइबर सुरक्षा से जुड़े सवालों के जवाब में गृह मंत्रालय की तरफ से गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने पक्ष रखा। इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा कहा गया कि “भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य के अंतर्गत निहित हैं। ऐसे में लोगों को साइबर क्राइम से बचाने के उपाय करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।” केंद्र सरकार केवल राज्यों को अपराध की रोकथाम को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय सहायता देने का काम करती है। इस योजना में बजट की भारी कमी: जानकारी में गृह मंत्रालय ने देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान देने की बात तो कही पर अपराध रोकथाम योजना के तहत गृह मंत्रालय ने मात्र 96.13 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की। बता दें कि, गृह मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम के लिए दी गई वित्तीय सहायता के जो आंकड़े दिए वह मार्च 2021 तक के ही थे। इस राज्य को कोई वित्तीय मदद नहीं: देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को जहां 4.71 करोड़ रुपए दिए गए, तो वहीं लद्दाख को कोई भी वित्तीय सहायता नहीं दी गई। केंद्र की तरफ से सबसे ज्यादा वित्तीय सहायता पाने वाले राज्यों में यूपी के अलावा महाराष्ट्र (4.58 करोड़), कर्नाटक (4.46 करोड़), आंध्रप्रदेश (4.42 करोड़), केरल (4.34 करोड़), पश्चिम बंगाल (4.32 करोड़ रूपये) और राजस्थान (4.40 करोड़ रुपए) जैसे राज्य शामिल रहे। 3 सालों में इतना बजट हुआ आवंटित: गृह मंत्रालय ने पिछले 3 वित्तीय वर्षों के दौरान वितरित सहायता राशि के बारे में जानकारी देते बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों/ संघ क्षेत्रों को साल 2018-19 में 769 करोड़ रूपये, साल 2019-20 के दौरान 791.30 करोड़ रुपये और साल 2020-21 में 770.76 करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे। साल 2020-21 में अधिकांश राज्यों/ संघ क्षेत्रों को आवंटन के बदले निधि जारी नहीं की जा सकी, क्योंकि राज्यों के रूप में उनके पास पर्याप्त अव्ययित धनराशि पहले से ही बची हुई थी।

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