फ्री बिजली, खाते में 1000 रुपये… केजरीवाल का दिल्‍ली मॉडल हर जगह काम आएगा?

फ्री बिजली, खाते में 1000 रुपये… केजरीवाल का दिल्‍ली मॉडल हर जगह काम आएगा?

news image

नई दिल्‍ली
आम आदमी पार्टी (AAP) सिर्फ दिल्‍ली तक सिमटकर नहीं रहना चाहती। उसके इरादे साफ हैं। वह देशभर में अपनी मौजूदगी दर्ज करने के लिए तैयार है। अगले साल पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनाव हैं। उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड से लेकर पंजाब और गोवा तक वह सियासी गणित बिगाड़ने का दमखम रखती है। इन राज्‍यों में अपने ‘दिल्‍ली फॉर्मूले’ के साथ पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दस्‍तक दी है। इसमें सौगातों की बरसात है। मुफ्त बिजली-पानी और इलाज का वादा है। छौंक के लिए कुछ और भी चीजें हैं।

फिलहाल, केजरीवाल दो दिवसीय दौरे पर पंजाब में हैं। दिल्‍ली के सीएम आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के सत्ता में आने पर पंजाब में हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, 24 घंटे बिजली आपूर्ति और सरकारी अस्पतालों में इलाज और दवाएं मुफ्त मुहैया कराने का वादा कर चुके हैं। मुफ्त सेवाओं के अपने वादों की लिस्‍ट में अब उन्‍होंने एक और वादा जोड़ा है।

केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि अगर पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो राज्य में हर महिला के खाते में प्रति माह एक हजार रुपये डाले जाएंगे। जिन बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन मिल रही है, उन्हें भी यह रकम दी जाएगी। पार्टी के ‘मिशन पंजाब’ के तहत केजरीवाल आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए समर्थन जुटाने के मकसद से अगले एक महीने में राज्य के अलग-अलग स्थानों का दौरा करेंगे।

AAP के नेताओं को करतारपुर गुरुद्वारे जाने की इजाजत नहीं! केजरीवाल बोले- ऐसी राजनीति देश के लिए अच्छी नहीं
तेजी से बढ़ रही पार्टी
2012 में गठित पार्टी तेजी से देशभर में पांव पसार रही है। पंजाब में यह पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बनी थी, लेकिन पार्टी नेताओं ने स्वीकार किया था कि उन्हें पंजाब में पार्टी से और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। हाल में आए कई सर्वेक्षणों से पता चलता है कि पंजाब में कांग्रेस की कलह से देश की सबसे पुरानी पार्टी को नुकसान होने के आसार हैं। इसका फायदा आप को होगा।

दिल्‍ली में क्‍या-क्‍या फ्री?
आप सरकार दिल्‍ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस की सवारी, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और 400 यूनिट तक सब्सिडी, 20,000 लीटर प्रति माह तक मुफ्त पानी और गरीब बच्चों को फ्री एजुकेशन देती है। इसके अलावा मुफ्त वाई-फाई के साथ नए पानी और सीवर कनेक्शन के लिए डेवलपमेंट चार्ज में छूट देती है। मोहल्ला क्लीनिक में मुफ्त इलाज, दवाएं और जांच की सुविधा और पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त सर्जरी भी ऑफर करती है। सड़क हादसों और आग की घटनाओं में पीड़ितों के इलाज का खर्च भी सरकार उठाती है।

केजरीवाल कर रहे हैं मिलते-जुलते ऐलान
पंजाब ही नहीं, उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड और गोवा में भी केजरीवाल ने अपना दिल्‍ली मॉडल पेश किया है। इन राज्‍यों में भी बिजली, पानी और शिक्षा को लेकर कुछ-कुछ ऐसे ही ऐलान किए गए हैं। लोगों को मुफ्त शब्‍द खींचता है। खासतौर से जब केजरीवाल ऐसा कहते हैं तो यकीन बढ़ जाता है। कारण है कि दिल्‍ली में वह इसको अमल कर रहे हैं। याद हो कि गुजरात मॉडल को सामने रखकर ही नरेंद्र मोदी ने सीएम से पीएम तक का सफर तय किया था।

Delhi Clean Yamuna News : मैं जुबान का पक्का हूं, वादा पूरा करूंगा… स्वच्छ यमुना के लिए केजरीवाल ने बताई समयसीमा

क्‍या काम करेगा ‘दिल्‍ली फॉर्मूला’?
केजरीवाल का ‘दिल्‍ली फॉर्मूला’ दमदार है। यह हर वोटर को लुभाता है। दस साल से भी कम पुरानी पार्टी का राष्‍ट्रीय फलक में आ जाना इसी के बूते संभव हुआ है। यह अलग बात है कि अभी उसे उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड और पंजाब जैसे राज्‍यों में अपनी जड़ें मजबूत करने में थोड़ा और वक्‍त लगेगा। खासतौर से अगर उत्‍तर प्रदेश की बात करें तो प्रदेश में बुनियादी मसलों के बजाय और भी कई मुद्दे हावी रहते हैं। यहां जातियों के समीकरण भी अहम होते हैं।

फ्रीबीज पर आप सरकार का क्‍या है तर्क?
बुनियादी सेवाओं को मुफ्त देने के पीछे हाल में केजरीवाल ने तर्क दिया था। उन्‍होंने एक ट्विटर पोस्ट में लिखा था कि सीमित मुफ्त सुविधाएं समाज के गरीब वर्गों को अधिक पैसा उपलब्ध कराती हैं और मांग को बढ़ावा देती हैं। हालांकि, इसे ऐसी सीमाओं में किया जाना चाहिए ताकि कोई अतिरिक्त टैक्‍स न लगाया जाए और इससे बजट घाटा न हो।

दूसरे राज्‍य दिल्‍ली से कैसे हैं अलग?
हालांकि, दिल्‍ली मॉडल को दूसरे राज्‍यों में रेप्‍लीकेट करना आसान नहीं है। कारण है कि दिल्‍ली और दूसरे राज्‍यों की स्थितियां बिल्‍कुल अलग हैं। इसे 2013-18 के कैग के फाइनेंशियल ऑडिट के निष्‍कर्षों से समझा जा सकता है। इसमें कहा गया था कि दिल्‍ली के साथ कर्ज को लेकर मसले नहीं हैं। कारण है कि इसका जीएसडीपी (ग्रॉस स्‍टेट डोमेस्टिक प्रोडक्‍ट) अपने सार्वजनिक कर्ज के मुकाबले तेजी से बढ़ा है। इसे मोटे तौर पर ऐसे समझ सकते हैं कि दिल्‍ली के हाथ खर्च को लेकर बंधे नहीं हैं। वहीं, दूसरे राज्यों में इस बफर की कमी है। अर्थशास्‍त्र में एक बात कही जाती है। कोई भी चीज मुफ्त नहीं मिलती है। देर-सवेर उसकी कीमत देनी ही पड़ती है। आज नहीं तो कल टैक्‍स के रूप में यह कीमत वसूली ही जाएगी।

नई दिल्‍लीआम आदमी पार्टी (AAP) सिर्फ दिल्‍ली तक सिमटकर नहीं रहना चाहती। उसके इरादे साफ हैं। वह देशभर में अपनी मौजूदगी दर्ज करने के लिए तैयार है। अगले साल पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनाव हैं। उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड से लेकर पंजाब और गोवा तक वह सियासी गणित बिगाड़ने का दमखम रखती है। इन राज्‍यों में अपने ‘दिल्‍ली फॉर्मूले’ के साथ पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दस्‍तक दी है। इसमें सौगातों की बरसात है। मुफ्त बिजली-पानी और इलाज का वादा है। छौंक के लिए कुछ और भी चीजें हैं।फिलहाल, केजरीवाल दो दिवसीय दौरे पर पंजाब में हैं। दिल्‍ली के सीएम आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के सत्ता में आने पर पंजाब में हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, 24 घंटे बिजली आपूर्ति और सरकारी अस्पतालों में इलाज और दवाएं मुफ्त मुहैया कराने का वादा कर चुके हैं। मुफ्त सेवाओं के अपने वादों की लिस्‍ट में अब उन्‍होंने एक और वादा जोड़ा है। केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि अगर पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो राज्य में हर महिला के खाते में प्रति माह एक हजार रुपये डाले जाएंगे। जिन बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन मिल रही है, उन्हें भी यह रकम दी जाएगी। पार्टी के ‘मिशन पंजाब’ के तहत केजरीवाल आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए समर्थन जुटाने के मकसद से अगले एक महीने में राज्य के अलग-अलग स्थानों का दौरा करेंगे। AAP के नेताओं को करतारपुर गुरुद्वारे जाने की इजाजत नहीं! केजरीवाल बोले- ऐसी राजनीति देश के लिए अच्छी नहींतेजी से बढ़ रही पार्टी2012 में गठित पार्टी तेजी से देशभर में पांव पसार रही है। पंजाब में यह पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बनी थी, लेकिन पार्टी नेताओं ने स्वीकार किया था कि उन्हें पंजाब में पार्टी से और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। हाल में आए कई सर्वेक्षणों से पता चलता है कि पंजाब में कांग्रेस की कलह से देश की सबसे पुरानी पार्टी को नुकसान होने के आसार हैं। इसका फायदा आप को होगा। दिल्‍ली में क्‍या-क्‍या फ्री?आप सरकार दिल्‍ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस की सवारी, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और 400 यूनिट तक सब्सिडी, 20,000 लीटर प्रति माह तक मुफ्त पानी और गरीब बच्चों को फ्री एजुकेशन देती है। इसके अलावा मुफ्त वाई-फाई के साथ नए पानी और सीवर कनेक्शन के लिए डेवलपमेंट चार्ज में छूट देती है। मोहल्ला क्लीनिक में मुफ्त इलाज, दवाएं और जांच की सुविधा और पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त सर्जरी भी ऑफर करती है। सड़क हादसों और आग की घटनाओं में पीड़ितों के इलाज का खर्च भी सरकार उठाती है। केजरीवाल कर रहे हैं मिलते-जुलते ऐलानपंजाब ही नहीं, उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड और गोवा में भी केजरीवाल ने अपना दिल्‍ली मॉडल पेश किया है। इन राज्‍यों में भी बिजली, पानी और शिक्षा को लेकर कुछ-कुछ ऐसे ही ऐलान किए गए हैं। लोगों को मुफ्त शब्‍द खींचता है। खासतौर से जब केजरीवाल ऐसा कहते हैं तो यकीन बढ़ जाता है। कारण है कि दिल्‍ली में वह इसको अमल कर रहे हैं। याद हो कि गुजरात मॉडल को सामने रखकर ही नरेंद्र मोदी ने सीएम से पीएम तक का सफर तय किया था। Delhi Clean Yamuna News : मैं जुबान का पक्का हूं, वादा पूरा करूंगा… स्वच्छ यमुना के लिए केजरीवाल ने बताई समयसीमाक्‍या काम करेगा ‘दिल्‍ली फॉर्मूला’?केजरीवाल का ‘दिल्‍ली फॉर्मूला’ दमदार है। यह हर वोटर को लुभाता है। दस साल से भी कम पुरानी पार्टी का राष्‍ट्रीय फलक में आ जाना इसी के बूते संभव हुआ है। यह अलग बात है कि अभी उसे उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड और पंजाब जैसे राज्‍यों में अपनी जड़ें मजबूत करने में थोड़ा और वक्‍त लगेगा। खासतौर से अगर उत्‍तर प्रदेश की बात करें तो प्रदेश में बुनियादी मसलों के बजाय और भी कई मुद्दे हावी रहते हैं। यहां जातियों के समीकरण भी अहम होते हैं। फ्रीबीज पर आप सरकार का क्‍या है तर्क?बुनियादी सेवाओं को मुफ्त देने के पीछे हाल में केजरीवाल ने तर्क दिया था। उन्‍होंने एक ट्विटर पोस्ट में लिखा था कि सीमित मुफ्त सुविधाएं समाज के गरीब वर्गों को अधिक पैसा उपलब्ध कराती हैं और मांग को बढ़ावा देती हैं। हालांकि, इसे ऐसी सीमाओं में किया जाना चाहिए ताकि कोई अतिरिक्त टैक्‍स न लगाया जाए और इससे बजट घाटा न हो।दूसरे राज्‍य दिल्‍ली से कैसे हैं अलग? हालांकि, दिल्‍ली मॉडल को दूसरे राज्‍यों में रेप्‍लीकेट करना आसान नहीं है। कारण है कि दिल्‍ली और दूसरे राज्‍यों की स्थितियां बिल्‍कुल अलग हैं। इसे 2013-18 के कैग के फाइनेंशियल ऑडिट के निष्‍कर्षों से समझा जा सकता है। इसमें कहा गया था कि दिल्‍ली के साथ कर्ज को लेकर मसले नहीं हैं। कारण है कि इसका जीएसडीपी (ग्रॉस स्‍टेट डोमेस्टिक प्रोडक्‍ट) अपने सार्वजनिक कर्ज के मुकाबले तेजी से बढ़ा है। इसे मोटे तौर पर ऐसे समझ सकते हैं कि दिल्‍ली के हाथ खर्च को लेकर बंधे नहीं हैं। वहीं, दूसरे राज्यों में इस बफर की कमी है। अर्थशास्‍त्र में एक बात कही जाती है। कोई भी चीज मुफ्त नहीं मिलती है। देर-सवेर उसकी कीमत देनी ही पड़ती है। आज नहीं तो कल टैक्‍स के रूप में यह कीमत वसूली ही जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *