DMRC-अनिल अंबानी विवाद: एस्क्रो खाते में जमा हो चुके हैं 1678 करोड़, जानें कंस्ट्रक्शन डिफेक्ट पर क्या बोले हरदीप सिंह पुरी

DMRC-अनिल अंबानी विवाद: एस्क्रो खाते में जमा हो चुके हैं 1678 करोड़, जानें कंस्ट्रक्शन डिफेक्ट पर क्या बोले हरदीप सिंह पुरी

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नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Feb 3, 2022, 7:07 PM

डीएएमईपीएल (DAMEPL), अनिल अंबानी (Anil Ambani) की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) की अनुषंगी इकाई है। डीएएमईपीएल, डीएमआरसी (DMRC) की एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के विकास से अगस्त 2008 में जुड़ी थी

anil ambani- delhi metro

हाइलाइट्स

  • मध्यस्थता पंचाट ने DMRC को आदेश दिया था कि वह DAMEPL को 4,600 करोड़ का भुगतान करे
  • मध्यस्थता पंचाट के फैसले के एग्जीक्यूशन का मुद्दा दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित
  • DAMEPL, DMRC की एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के विकास से जुड़ी थी
नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) और अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (DAMEPL) के बीच विवाद मामले में एस्क्रो खाते में अब तक 1678.4 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। ये पैसे डीएमआरसी द्वारा डीएएमईपीएल को 4,600 करोड़ रुपये के भुगतान के मध्यस्थता पंचाट के आदेश (Arbitrational Order) का हिस्सा हैं। हालांकि फिलहाल मध्यस्थता पंचाट के फैसले के एग्जीक्यूशन का मुद्दा दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। यह जानकारी आवास व शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने संसद में दी।

लोकसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान सौगत राय के सवाल के जवाब में पुरी ने यह जानकारी दी। सवाल डीएमआरसी और अनिल अंबानी की कंपनी के बीच हुई गड़बड़ी से जुड़ा था। डीएएमईपीएल, डीएमआरसी की एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के विकास में शुरुआत में 2008 में जुड़ी थी लेकिन 2012 में यह कॉन्ट्रैक्ट से बाहर निकल गई। कहा गया कि सेफ्टी इश्यूज के चलते कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया गया। ट्रैक्स में कई क्रैक्स थे।

इस पर पुरी ने संसद में जवाब दिया कि डीएएमईपीएल के साथ अगस्त 2008 में कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। जिस कंपनी को शुरुआती फेज में कॉन्ट्रैक्ट दिया गया, वह वायबल नहीं थी और इस अरेंजमेंट से बाहर निकलने का मौका तलाश रही थी। उनका कहना था कि कुछ सिविल कंस्ट्रक्शन डिफेक्ट थे और अरेंजमेंट के नियमों के मुताबिक, नोटिस दिए जाने के 90 दिनों के अंदर इन डिफेक्ट्स को दूर करने के लिए कदम उठाए जाने थे।

90 दिन के अंदर दूर कर लिए गए थे डिफेक्ट
पुरी ने आगे कहा कि ऐसा हुआ भी, डिफेक्ट्स दूर कर लिए गए। रेलवे सिक्योरिटी कमिश्नर ने सर्टिफाई किया कि लाइन परफेक्टली सेफ है। इतना ही नहीं डीएमआरसी ने इसके बाद उस लाइन को काफी वक्त तक ऑपरेट भी किया। ऐसे में फॉल्टी कॉन्ट्रैक्ट का कोई सवाल नहीं था। पुरी ने आगे कहा कि डीएमआरसी और डीएएमईपीएल विवाद में आर्बिट्रल अवॉर्ड के इंप्लीमेंटेशन और एग्जीक्यूशन का मुद्दा दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। हालांकि दिल्ली मेट्रो द्वारा 1678.4 करोड़ रुपये एस्क्रो अकाउंट में जमा कराए जा चुके हैं।

Union Budget 2022: मेट्रो प्रोजेक्‍टों के लिए सरकार ने खोले दोनों हाथ, बजट में म‍िले 19,130 करोड़ रुपये
डीएएमईपीएल और डीएमआरसी का पूरा विवाद
डीएएमईपीएल, अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की अनुषंगी इकाई है। डीएएमईपीएल, डीएमआरसी की एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के विकास से अगस्त 2008 में जुड़ी थी और दिल्ली मेट्रो के साथ देश का पहला प्राइवेट सिटी रेल प्रॉजेक्ट 2038 तक चलाने का अनुबंध किया था। 2012 में शुल्क और संचालन पर विवादों के बाद, अंबानी की फर्म ने राजधानी के एयरपोर्ट मेट्रो प्रॉजेक्ट का संचालन बंद कर दिया और अनुबंध के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दिल्ली मेट्रो के खिलाफ मध्यस्थता का मामला (Arbitration Case) शुरू किया। साथ ही टर्मिनेशन फीस भी मांगी।

मध्यस्थता पंचाट ने डीएमआरसी को आदेश दिया था कि वह डीएएमईपीएल को 4,600 करोड़ रुपये का भुगतान करे। इस बारे में डीएमआरसी की तरफ से दायर तमाम याचिकाएं निरस्त हो चुकी हैं। उच्चतम न्यायालय ने भी गत 23 नवंबर 2021 को अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद DAMEPL ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि DMRC जानबूझकर 4,600 करोड़ रुपये से अधिक देने के मध्यस्थ फैसले के निष्पादन में देरी करने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) के साथ अदालत से बाहर बातचीत करने पर डीएएमईपीएल (DAMEPL) से नाराजगी जताई थी।

4600 करोड़ रुपये का भुगतान कैसे होगा, स्पष्ट निर्देश लेकर आएं… DMRC को दिल्ली हाई कोर्ट की खरी-खरी

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Web Title : know what union minister hardeep singh puri said on dmrc and anil ambani damepl case in parliament
Hindi News from Navbharat Times, TIL Network

Authored by रीतिका सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Feb 3, 2022, 7:07 PMडीएएमईपीएल (DAMEPL), अनिल अंबानी (Anil Ambani) की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) की अनुषंगी इकाई है। डीएएमईपीएल, डीएमआरसी (DMRC) की एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के विकास से अगस्त 2008 में जुड़ी थीहाइलाइट्समध्यस्थता पंचाट ने DMRC को आदेश दिया था कि वह DAMEPL को 4,600 करोड़ का भुगतान करेमध्यस्थता पंचाट के फैसले के एग्जीक्यूशन का मुद्दा दिल्ली हाई कोर्ट में लंबितDAMEPL, DMRC की एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के विकास से जुड़ी थीनई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) और अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (DAMEPL) के बीच विवाद मामले में एस्क्रो खाते में अब तक 1678.4 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। ये पैसे डीएमआरसी द्वारा डीएएमईपीएल को 4,600 करोड़ रुपये के भुगतान के मध्यस्थता पंचाट के आदेश (Arbitrational Order) का हिस्सा हैं। हालांकि फिलहाल मध्यस्थता पंचाट के फैसले के एग्जीक्यूशन का मुद्दा दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। यह जानकारी आवास व शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने संसद में दी। लोकसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान सौगत राय के सवाल के जवाब में पुरी ने यह जानकारी दी। सवाल डीएमआरसी और अनिल अंबानी की कंपनी के बीच हुई गड़बड़ी से जुड़ा था। डीएएमईपीएल, डीएमआरसी की एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के विकास में शुरुआत में 2008 में जुड़ी थी लेकिन 2012 में यह कॉन्ट्रैक्ट से बाहर निकल गई। कहा गया कि सेफ्टी इश्यूज के चलते कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया गया। ट्रैक्स में कई क्रैक्स थे। इस पर पुरी ने संसद में जवाब दिया कि डीएएमईपीएल के साथ अगस्त 2008 में कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। जिस कंपनी को शुरुआती फेज में कॉन्ट्रैक्ट दिया गया, वह वायबल नहीं थी और इस अरेंजमेंट से बाहर निकलने का मौका तलाश रही थी। उनका कहना था कि कुछ सिविल कंस्ट्रक्शन डिफेक्ट थे और अरेंजमेंट के नियमों के मुताबिक, नोटिस दिए जाने के 90 दिनों के अंदर इन डिफेक्ट्स को दूर करने के लिए कदम उठाए जाने थे। 90 दिन के अंदर दूर कर लिए गए थे डिफेक्टपुरी ने आगे कहा कि ऐसा हुआ भी, डिफेक्ट्स दूर कर लिए गए। रेलवे सिक्योरिटी कमिश्नर ने सर्टिफाई किया कि लाइन परफेक्टली सेफ है। इतना ही नहीं डीएमआरसी ने इसके बाद उस लाइन को काफी वक्त तक ऑपरेट भी किया। ऐसे में फॉल्टी कॉन्ट्रैक्ट का कोई सवाल नहीं था। पुरी ने आगे कहा कि डीएमआरसी और डीएएमईपीएल विवाद में आर्बिट्रल अवॉर्ड के इंप्लीमेंटेशन और एग्जीक्यूशन का मुद्दा दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। हालांकि दिल्ली मेट्रो द्वारा 1678.4 करोड़ रुपये एस्क्रो अकाउंट में जमा कराए जा चुके हैं।Union Budget 2022: मेट्रो प्रोजेक्‍टों के लिए सरकार ने खोले दोनों हाथ, बजट में म‍िले 19,130 करोड़ रुपयेडीएएमईपीएल और डीएमआरसी का पूरा विवादडीएएमईपीएल, अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की अनुषंगी इकाई है। डीएएमईपीएल, डीएमआरसी की एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के विकास से अगस्त 2008 में जुड़ी थी और दिल्ली मेट्रो के साथ देश का पहला प्राइवेट सिटी रेल प्रॉजेक्ट 2038 तक चलाने का अनुबंध किया था। 2012 में शुल्क और संचालन पर विवादों के बाद, अंबानी की फर्म ने राजधानी के एयरपोर्ट मेट्रो प्रॉजेक्ट का संचालन बंद कर दिया और अनुबंध के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दिल्ली मेट्रो के खिलाफ मध्यस्थता का मामला (Arbitration Case) शुरू किया। साथ ही टर्मिनेशन फीस भी मांगी।मध्यस्थता पंचाट ने डीएमआरसी को आदेश दिया था कि वह डीएएमईपीएल को 4,600 करोड़ रुपये का भुगतान करे। इस बारे में डीएमआरसी की तरफ से दायर तमाम याचिकाएं निरस्त हो चुकी हैं। उच्चतम न्यायालय ने भी गत 23 नवंबर 2021 को अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद DAMEPL ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि DMRC जानबूझकर 4,600 करोड़ रुपये से अधिक देने के मध्यस्थ फैसले के निष्पादन में देरी करने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) के साथ अदालत से बाहर बातचीत करने पर डीएएमईपीएल (DAMEPL) से नाराजगी जताई थी।4600 करोड़ रुपये का भुगतान कैसे होगा, स्पष्ट निर्देश लेकर आएं… DMRC को दिल्ली हाई कोर्ट की खरी-खरीNavbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : know what union minister hardeep singh puri said on dmrc and anil ambani damepl case in parliamentHindi News from Navbharat Times, TIL Network

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