
Precaution Dose vs Booster Dose : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि 10 जनवरी से कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज देने की शुरुआत हो जाएगी। इसे लेकर लोगों के मन में सवाल है कि बूस्टर डोज ही प्रीकॉशन डोज है या फिर यह कुछ अलग है?
PM Modis Address To The Nation: पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, यहां देखिए पूरी स्पीच
हाइलाइट्स
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ लोगों को प्रिकॉशन डोज दिए जाने का किया ऐलान
- कोरोना वायरस से बचाव के लिए तीसरी डोज दिए जाने की पीएम ने की घोषणा
- दुनिया तीसरी वैक्सीन डोज को बूस्टर डोज कह रही है, फिर पीएम ने क्यों कहा प्रिकॉशन डोज?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमीक्रोन के बढ़ते खतरे से सतर्क रहने के साथ-साथ इससे लड़ने की तैयारियों का भी जायजा दिया। उन्होंने देश के नाम अपने संबोधन में कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों, अग्रिम मोर्चों पर तैनात कर्मियों, लाइलाज बीमारियों से ग्रस्त मरीजों और बुजुर्गों को कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज भी लगाने को तैयार है। ध्यान रहे कि पीएम ने अपने संबोधन में एक बार भी ‘बूस्टर डोज’ जैसा टर्म का सहारा नहीं लिया जबकि दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज के बाद दी जाने वाली तीसरी डोज को बूस्टर डोज ही कहा जा रहा है।
बूस्टर डोज के बजाय प्रिकॉशन डोज
भारत में ओमीक्रोन के बढ़ते मामलों के बीच एक्सपर्ट्स के बीच वैक्सीन की जिस तीसरी डोज की जरूरत पर गहन मंथन चल रहा है, उसके लिए भी बूस्टर डोज जैसे टर्म ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी सावधानी से ‘बूस्टर डोज’ के बजाय ‘प्रिकॉशन डोज’ के टर्म का इस्तेमाल किया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर भारत सरकार की मंशा क्या है? क्या सरकार बूस्टर डोज को ही प्रिकॉशन डोज के रूप में पेश कर रही है या फिर बूस्टर डोज और प्रिकॉशन डोज में वाकई कुछ अंतर है?
Vaccine For Children In India: 3 जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों को लगेगी कोरोना वैक्सीन, जानें पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की बड़ी बातें
क्या है बूस्टर डोज?
आइए पहले समझते हैं कि बूस्टर डोज क्या है? ध्यान रहे कि कोरोना वायरस के खिलाफ पर्याप्त इम्यूनिटी तैयार करने के लिए दुनियाभर में बनी ज्यादातर वैक्सीन की दो डोज देने की जरूरत है। वो चाहे भारतीय टीका कोवैक्सीन हो या कोवीशील्ड, रूसी वैक्सीन स्पूतनिक हो या फिर अमेरिकी एस्ट्राजेनेका वैक्सीन या कोई और भी। सभी कंपनियों ने ट्रायल में पाया है कि तय समयसीमा में उसकी वैक्सीन की दूसरी डोज लगने से इम्यूनिटी का स्तर बढ़ जाता है। अलग-अलग कंपनियां इसे लेकर अलग-अलग दावे करती हैं। मसलन, फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन के बारे में दावा किया गया है कि उसकी दूसरी डोज लगने के बाद कोरोना के खिलाफ 95% तक सुरक्षा मिलती है।
वैक्सीन डोज के बीच गैप का भी बड़ा महत्व
ध्यान रहे कि वैक्सीन की दोनों डोज के बीच कितने दिनों का गैप हो, इस पर भी अलग-अलग ब्रैंड की वैक्सीन को लेकर अलग-अलग बातें कही गईं। शुरुआती दौर में एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की दो डोज के बीच का गैप 6 से 8 हफ्त रखा गया था जिस बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया गया। द लैंसेट में छपी एक स्टडी में दावा किया गया था कि तीसरे चरण के ट्रायल में जब कोविशील्ड की दूसरी डोज छह हफ्ते के अंदर दे दी गई तो यह 55.1% प्रभावशाली साबित हुआ, लेकिन जब यह गैप बढ़ाकर 12 हफ्ते या इससे ज्यादा कर दिया गया तो वैक्सीन 81.3% असरदार हो गया। दूसरी स्टडी कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने ही की थी जिसमें कहा गया कि मार्च 2021 में यूके के लोगों पर तीसरे चरण का ट्रायल किया गया था। ट्रायल में दो डोज के बीच चार हफ्ते का गैप रखा गया तो कोविड के लक्षण वाले मरीजों में 76% असर देखा गया।
पीएम मोदी ने कर दिया ‘बूस्टर’ डोज का ऐलान, जानें कबसे किसे लगेगी तीसरी डोज?
गैप बढ़ाने-घटाने पर हुई माथापच्ची
इंग्लैंड के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि कोविशील्ड की दो डोज के बीच 8 हफ्ते का अंतर रखा गया तो कोरोना वायरस के डेल्टा वेरियेंट से ग्रसित अस्पताल में भर्ती मरीजों पर 92% असर देखा गया। यूके ने जब अपनी स्टडी में टीकाकरण की तेज गति के असर के पहलू को भी शामिल किया तो इस परिणाम पर पहुंचा कि जल्दी से दूसरी डोज लगा देने से कोरोना मरीजों को अस्पताल जाने और जान गंवाने से बचाया जा सकता है। भारत में केंद्र सरकार ने इस साल 22 मार्च को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे पत्र में कहा था कि कोवीशील्ड के दो डोज 4-6 सप्ताह के बीच देने के बजाय 4-8 सप्ताह के बीच दी जाए।
तीसरी डोज की जरूरत क्यों?
इस बीच, जब दुनिया में कोरोना वायरस की तीसरी लहर आ गई तो वहां एक्सपर्ट्स ने दोनों डोज के बाद तीसरी डोज दिए जाने की भी वकालत की। दलील दी गई कि स्वास्थ्यकर्मियों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को दूसरी डोज लगे भी अच्छा-खासा वक्त हो गया है, इस कारण उनमें कोरोना वायरस के खिलाफ बनी एंटीबॉडी कमजोर पड़ने लगी है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि इनमें बनी एंटीबॉडी को फिर से ताकतवर बनाने यानी उसे बूस्ट करने की जरूरत है। यही वजह है कि वैक्सीन की तीसरी डोज को बूस्टर डोज कहा गया। यानी, वैक्सीन की पहली डोज ने ऐंटीबॉडी बनाई, दूसरी ने उसे उच्च स्तर प्रदान किया और तीसरी ने समय के साथ कम हुई क्षमता को बूस्ट किया या बढ़ाया।
3 जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों को लगेगी कोरोना वैक्सीन, पीएम मोदी बोले- ओमीक्रोन से सतर्क रहने की जरूरत
पीएम मोदी ने प्रिकॉशन डोज पर क्या कहा?
हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, ’60 वर्ष से ऊपर की आयु के कॉ-मॉरबिडिटी वाले नागरिकों को, उनके डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन की प्रिकॉशन का विकल्प उनके लिए भी उपलब्ध होगा। ये भी 10 जनवरी से उपलब्ध होगा।’ उन्होंने इसे समझाते हुए कहा, ‘हम सबका अनुभव है कि जो कॉरोना वॉरियर्स हैं, हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं, इस लड़ाई में देश को सुरक्षित रखने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। वो आज भी कोरोना के मरीजों की सेवा में अपना बहुत समय बिताते हैं। इसलिए प्रिकॉशन की दृष्टि से सरकार ने निर्णय लिया है कि हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन की प्रिकॉशन भी प्रारंभ की जाएगी। इसकी शुरुआत 2022 में, 10 जनवरी, सोमवार के दिन से की जाएगी।’
ओमीक्रोन के मद्देनजर लगेगा एहतियाती टीका?
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन की शुरुआत में ओमीक्रोन के खतरे के प्रति सतर्क रहने की अपील की। पीएम ने इसी कड़ी में बताया कि ओमीक्रोन के संभावित खतरे से सावधान रहने की जरूरत है। मोदी के मुताबिक, सावधानी बरतने की प्रक्रिया में ही वैक्सीन की एक और डोज दी जाएगी। यही वजह है कि पीएम ने वैक्सीन की तीसरी खुराक को बूस्टर डोज कहने की बजाय प्रिकॉशन डोज कहा। हालांकि, दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत में भी शुरुआती दौर के टीकाकरण से अब तक लगभग सालभर का अंतर हो गया है। ध्यान रहे कि देश में 16 जनवरी, 2021 से कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। 10 जनवरी, 2022 को जब तीसरी डोज देनी शुरू होगी तब तक एक साल में सिर्फ छह दिन कम होंगे।
नरेंद्र मोदी का ऐलान- नेजल और कोरोना की पहली डीएनए वैक्सीन की जल्द होगी शुरुआत.. जानिए कैसे काम करते हैं ये टीके?
नाम कुछ भी, मकसद वही
देश के जाने-माने डॉक्टर नरेश त्रेहन ने भी कहा कि शुरुआती दौर में टीका लेने वालों में ऐंटिबॉडी बने एक साल हो गया है और उनकी ऐंटिबॉडी कम हो गई है। पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के तुरंत बाद उन्होंने एक नैशनल न्यूज चैनल से कहा कि बूस्टर डोज को ही प्रधानमंत्री ने प्रिकॉशन डोज कहा है। त्रेहन ने कहा कि बूस्टर डोज कहा जाए या प्रिकॉशन डोज, तीसरी डोज देने का मूल मकसद इम्यूनिटी बढ़ाना है। उन्होंने पीएम के ऐलान की सराहना करते हुए कहा कि भारी मात्रा में वैक्सीन की एक्सपायरी डेट नजदीक आ गई है, उसका इस्तेमाल प्रिकॉशन डोज के रूप में हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में वैक्सीन का उत्पादन भी पर्याप्त मात्रा में हो रहा है। कुल मिलाकर, ओमीक्रॉन का बढ़ता खतरा, वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी की कमजोरी और वैक्सीन की एक्सपायरी डेट नजदीक आने जैसे प्रमुख कारण हैं जिनके चलते तीसरी डोज देने का फैसला किया गया है। अब इसे बूस्टर डोज कहें या फिर प्रिकॉशन डोज, है तो यह तीसरी डोज ही।
![]()
10 जनवरी से लगेगी कोरोना वैक्सीन की प्रीकॉशन डोज। (सांकेतिक तस्वीर)
Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐप
लेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें
Web Title : why pm modi called third dose of corona vaccine as precaution dose instead of booster dose, know the difference
Hindi News from Navbharat Times, TIL Network
Precaution Dose vs Booster Dose : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि 10 जनवरी से कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज देने की शुरुआत हो जाएगी। इसे लेकर लोगों के मन में सवाल है कि बूस्टर डोज ही प्रीकॉशन डोज है या फिर यह कुछ अलग है? PM Modis Address To The Nation: पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, यहां देखिए पूरी स्पीचहाइलाइट्सप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ लोगों को प्रिकॉशन डोज दिए जाने का किया ऐलानकोरोना वायरस से बचाव के लिए तीसरी डोज दिए जाने की पीएम ने की घोषणादुनिया तीसरी वैक्सीन डोज को बूस्टर डोज कह रही है, फिर पीएम ने क्यों कहा प्रिकॉशन डोज?नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमीक्रोन के बढ़ते खतरे से सतर्क रहने के साथ-साथ इससे लड़ने की तैयारियों का भी जायजा दिया। उन्होंने देश के नाम अपने संबोधन में कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों, अग्रिम मोर्चों पर तैनात कर्मियों, लाइलाज बीमारियों से ग्रस्त मरीजों और बुजुर्गों को कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज भी लगाने को तैयार है। ध्यान रहे कि पीएम ने अपने संबोधन में एक बार भी ‘बूस्टर डोज’ जैसा टर्म का सहारा नहीं लिया जबकि दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज के बाद दी जाने वाली तीसरी डोज को बूस्टर डोज ही कहा जा रहा है। बूस्टर डोज के बजाय प्रिकॉशन डोजभारत में ओमीक्रोन के बढ़ते मामलों के बीच एक्सपर्ट्स के बीच वैक्सीन की जिस तीसरी डोज की जरूरत पर गहन मंथन चल रहा है, उसके लिए भी बूस्टर डोज जैसे टर्म ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी सावधानी से ‘बूस्टर डोज’ के बजाय ‘प्रिकॉशन डोज’ के टर्म का इस्तेमाल किया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर भारत सरकार की मंशा क्या है? क्या सरकार बूस्टर डोज को ही प्रिकॉशन डोज के रूप में पेश कर रही है या फिर बूस्टर डोज और प्रिकॉशन डोज में वाकई कुछ अंतर है? Vaccine For Children In India: 3 जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों को लगेगी कोरोना वैक्सीन, जानें पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की बड़ी बातेंक्या है बूस्टर डोज?आइए पहले समझते हैं कि बूस्टर डोज क्या है? ध्यान रहे कि कोरोना वायरस के खिलाफ पर्याप्त इम्यूनिटी तैयार करने के लिए दुनियाभर में बनी ज्यादातर वैक्सीन की दो डोज देने की जरूरत है। वो चाहे भारतीय टीका कोवैक्सीन हो या कोवीशील्ड, रूसी वैक्सीन स्पूतनिक हो या फिर अमेरिकी एस्ट्राजेनेका वैक्सीन या कोई और भी। सभी कंपनियों ने ट्रायल में पाया है कि तय समयसीमा में उसकी वैक्सीन की दूसरी डोज लगने से इम्यूनिटी का स्तर बढ़ जाता है। अलग-अलग कंपनियां इसे लेकर अलग-अलग दावे करती हैं। मसलन, फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन के बारे में दावा किया गया है कि उसकी दूसरी डोज लगने के बाद कोरोना के खिलाफ 95% तक सुरक्षा मिलती है। वैक्सीन डोज के बीच गैप का भी बड़ा महत्वध्यान रहे कि वैक्सीन की दोनों डोज के बीच कितने दिनों का गैप हो, इस पर भी अलग-अलग ब्रैंड की वैक्सीन को लेकर अलग-अलग बातें कही गईं। शुरुआती दौर में एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की दो डोज के बीच का गैप 6 से 8 हफ्त रखा गया था जिस बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया गया। द लैंसेट में छपी एक स्टडी में दावा किया गया था कि तीसरे चरण के ट्रायल में जब कोविशील्ड की दूसरी डोज छह हफ्ते के अंदर दे दी गई तो यह 55.1% प्रभावशाली साबित हुआ, लेकिन जब यह गैप बढ़ाकर 12 हफ्ते या इससे ज्यादा कर दिया गया तो वैक्सीन 81.3% असरदार हो गया। दूसरी स्टडी कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने ही की थी जिसमें कहा गया कि मार्च 2021 में यूके के लोगों पर तीसरे चरण का ट्रायल किया गया था। ट्रायल में दो डोज के बीच चार हफ्ते का गैप रखा गया तो कोविड के लक्षण वाले मरीजों में 76% असर देखा गया। पीएम मोदी ने कर दिया ‘बूस्टर’ डोज का ऐलान, जानें कबसे किसे लगेगी तीसरी डोज?गैप बढ़ाने-घटाने पर हुई माथापच्चीइंग्लैंड के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि कोविशील्ड की दो डोज के बीच 8 हफ्ते का अंतर रखा गया तो कोरोना वायरस के डेल्टा वेरियेंट से ग्रसित अस्पताल में भर्ती मरीजों पर 92% असर देखा गया। यूके ने जब अपनी स्टडी में टीकाकरण की तेज गति के असर के पहलू को भी शामिल किया तो इस परिणाम पर पहुंचा कि जल्दी से दूसरी डोज लगा देने से कोरोना मरीजों को अस्पताल जाने और जान गंवाने से बचाया जा सकता है। भारत में केंद्र सरकार ने इस साल 22 मार्च को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे पत्र में कहा था कि कोवीशील्ड के दो डोज 4-6 सप्ताह के बीच देने के बजाय 4-8 सप्ताह के बीच दी जाए। तीसरी डोज की जरूरत क्यों?इस बीच, जब दुनिया में कोरोना वायरस की तीसरी लहर आ गई तो वहां एक्सपर्ट्स ने दोनों डोज के बाद तीसरी डोज दिए जाने की भी वकालत की। दलील दी गई कि स्वास्थ्यकर्मियों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को दूसरी डोज लगे भी अच्छा-खासा वक्त हो गया है, इस कारण उनमें कोरोना वायरस के खिलाफ बनी एंटीबॉडी कमजोर पड़ने लगी है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि इनमें बनी एंटीबॉडी को फिर से ताकतवर बनाने यानी उसे बूस्ट करने की जरूरत है। यही वजह है कि वैक्सीन की तीसरी डोज को बूस्टर डोज कहा गया। यानी, वैक्सीन की पहली डोज ने ऐंटीबॉडी बनाई, दूसरी ने उसे उच्च स्तर प्रदान किया और तीसरी ने समय के साथ कम हुई क्षमता को बूस्ट किया या बढ़ाया। 3 जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों को लगेगी कोरोना वैक्सीन, पीएम मोदी बोले- ओमीक्रोन से सतर्क रहने की जरूरतपीएम मोदी ने प्रिकॉशन डोज पर क्या कहा?हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, ’60 वर्ष से ऊपर की आयु के कॉ-मॉरबिडिटी वाले नागरिकों को, उनके डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन की प्रिकॉशन का विकल्प उनके लिए भी उपलब्ध होगा। ये भी 10 जनवरी से उपलब्ध होगा।’ उन्होंने इसे समझाते हुए कहा, ‘हम सबका अनुभव है कि जो कॉरोना वॉरियर्स हैं, हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं, इस लड़ाई में देश को सुरक्षित रखने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। वो आज भी कोरोना के मरीजों की सेवा में अपना बहुत समय बिताते हैं। इसलिए प्रिकॉशन की दृष्टि से सरकार ने निर्णय लिया है कि हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन की प्रिकॉशन भी प्रारंभ की जाएगी। इसकी शुरुआत 2022 में, 10 जनवरी, सोमवार के दिन से की जाएगी।’ ओमीक्रोन के मद्देनजर लगेगा एहतियाती टीका?दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन की शुरुआत में ओमीक्रोन के खतरे के प्रति सतर्क रहने की अपील की। पीएम ने इसी कड़ी में बताया कि ओमीक्रोन के संभावित खतरे से सावधान रहने की जरूरत है। मोदी के मुताबिक, सावधानी बरतने की प्रक्रिया में ही वैक्सीन की एक और डोज दी जाएगी। यही वजह है कि पीएम ने वैक्सीन की तीसरी खुराक को बूस्टर डोज कहने की बजाय प्रिकॉशन डोज कहा। हालांकि, दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत में भी शुरुआती दौर के टीकाकरण से अब तक लगभग सालभर का अंतर हो गया है। ध्यान रहे कि देश में 16 जनवरी, 2021 से कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। 10 जनवरी, 2022 को जब तीसरी डोज देनी शुरू होगी तब तक एक साल में सिर्फ छह दिन कम होंगे। नरेंद्र मोदी का ऐलान- नेजल और कोरोना की पहली डीएनए वैक्सीन की जल्द होगी शुरुआत.. जानिए कैसे काम करते हैं ये टीके?नाम कुछ भी, मकसद वहीदेश के जाने-माने डॉक्टर नरेश त्रेहन ने भी कहा कि शुरुआती दौर में टीका लेने वालों में ऐंटिबॉडी बने एक साल हो गया है और उनकी ऐंटिबॉडी कम हो गई है। पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के तुरंत बाद उन्होंने एक नैशनल न्यूज चैनल से कहा कि बूस्टर डोज को ही प्रधानमंत्री ने प्रिकॉशन डोज कहा है। त्रेहन ने कहा कि बूस्टर डोज कहा जाए या प्रिकॉशन डोज, तीसरी डोज देने का मूल मकसद इम्यूनिटी बढ़ाना है। उन्होंने पीएम के ऐलान की सराहना करते हुए कहा कि भारी मात्रा में वैक्सीन की एक्सपायरी डेट नजदीक आ गई है, उसका इस्तेमाल प्रिकॉशन डोज के रूप में हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में वैक्सीन का उत्पादन भी पर्याप्त मात्रा में हो रहा है। कुल मिलाकर, ओमीक्रॉन का बढ़ता खतरा, वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी की कमजोरी और वैक्सीन की एक्सपायरी डेट नजदीक आने जैसे प्रमुख कारण हैं जिनके चलते तीसरी डोज देने का फैसला किया गया है। अब इसे बूस्टर डोज कहें या फिर प्रिकॉशन डोज, है तो यह तीसरी डोज ही। 10 जनवरी से लगेगी कोरोना वैक्सीन की प्रीकॉशन डोज। (सांकेतिक तस्वीर)Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : why pm modi called third dose of corona vaccine as precaution dose instead of booster dose, know the differenceHindi News from Navbharat Times, TIL Network
