Old Pension सैन्य बलों, पुलिस को नहीं तो फिर MPs, MLAs कैसे ले लेते हैं?

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Assembly Election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रायबरेली से विभिन्न दलों के उम्मीदवारों से जनता ने सवाल-जवाब किया तो वे हंस कर टालने लगे।

UP Election 2022: उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के नेताओं से जनता सवाल पूछ रही है, लेकिन नेता उनका जवाब देने के बजाए बातों को टालने में लगे हैं। खास बात यह है कि न्यूज चैनलों के कार्यक्रम में विभिन्न दलों के नेताओं से उनके अपने ही कार्यकर्ता सवाल-जवाब कर रहे हैं। रायबरेली में आयोजित आज तक न्यूज चैनल के कार्यक्रम ‘राजतिलक’ में एंकर अंजना ओम कश्यप के साथ मंच पर मौजूद भाजपा, कांग्रेस और सपा के नेताओं से वहां मौजूद जनता ने पूछा कि पुरानी पेंशन केवल सांसदों और विधायकों को ही क्यों मिलती है?

एक भाजपा कार्यकर्ता ने सवाल उठाया कि “जब पैरा मिलिट्री फोर्सेज के हमारे जवान पुरानी पेंशन नहीं पा सकते हैं, पुलिस के सिपाही पुरानी पेंशन नहीं पा सकते हैं तो एमपी-एमएलए किस तरह से तीन-तीन, चार-चार पेंशन ले रहे हैं।” इस सवाल के जवाब में मंच पर मौजूद भाजपा नेता ने कहा कि “वन रैंक, वन पेंशन” का कानून भाजपा सरकार ने बनाया है। कहा कि हमारी सरकार इस पर काम कर रही है।

जनता देश के सांसदों और विधायकों समेत जनप्रतिनिधियों से यह जानना चाहती है कि उन्हें विशेष सुविधाएं मिलती हैं, जबकि हमारे सैन्य बलों और पुलिस विभाग के लोगों को ऐसी सुविधाओं से वंचित रखा जाता है। हालत यह है कि देश में होने वाले विधानसभा चुनावों में हफ्तों और महीनों चुनाव के संचालन पर भारी खर्च होने के बाद कई राज्यों में एक साल में मुश्किल से 30 दिन विधानसभा बैठती हैं।

ये आंकड़े खुद में हैरान करते हैं। इसमें हरियाणा और पंजाब जैसे कुछ क्षेत्रों में, औसत लगभग एक पखवाड़े का है। वहीं अगर पिछले एक दशक में एक साल में विधानसभा बैठने में सबसे अधिक औसत देखें तो ओडिशा में 46 और केरल 43 है। हालांकि ये राज्य भी लोकसभा के 63 के औसत से बहुत कम हैं।

उदाहरण के लिए, यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, 2020 में 163 दिनों और 2021 में 166 दिनों के लिए और सीनेट में दोनों सालों में 192 दिनों के लिए था। वहीं यूके हाउस ऑफ कॉमन्स की 2020 में 147 बैठकें हुईं, जो पिछले दशक में लगभग 155 के वार्षिक औसत के अनुरूप थी। जापान की डाइट, या हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की बात करें तो किसी भी असाधारण या विशेष सत्र के अलावा साल में 150 दिन मिलते हैं।

Assembly Election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रायबरेली से विभिन्न दलों के उम्मीदवारों से जनता ने सवाल-जवाब किया तो वे हंस कर टालने लगे। UP Election 2022: उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के नेताओं से जनता सवाल पूछ रही है, लेकिन नेता उनका जवाब देने के बजाए बातों को टालने में लगे हैं। खास बात यह है कि न्यूज चैनलों के कार्यक्रम में विभिन्न दलों के नेताओं से उनके अपने ही कार्यकर्ता सवाल-जवाब कर रहे हैं। रायबरेली में आयोजित आज तक न्यूज चैनल के कार्यक्रम ‘राजतिलक’ में एंकर अंजना ओम कश्यप के साथ मंच पर मौजूद भाजपा, कांग्रेस और सपा के नेताओं से वहां मौजूद जनता ने पूछा कि पुरानी पेंशन केवल सांसदों और विधायकों को ही क्यों मिलती है? एक भाजपा कार्यकर्ता ने सवाल उठाया कि “जब पैरा मिलिट्री फोर्सेज के हमारे जवान पुरानी पेंशन नहीं पा सकते हैं, पुलिस के सिपाही पुरानी पेंशन नहीं पा सकते हैं तो एमपी-एमएलए किस तरह से तीन-तीन, चार-चार पेंशन ले रहे हैं।” इस सवाल के जवाब में मंच पर मौजूद भाजपा नेता ने कहा कि “वन रैंक, वन पेंशन” का कानून भाजपा सरकार ने बनाया है। कहा कि हमारी सरकार इस पर काम कर रही है। जनता देश के सांसदों और विधायकों समेत जनप्रतिनिधियों से यह जानना चाहती है कि उन्हें विशेष सुविधाएं मिलती हैं, जबकि हमारे सैन्य बलों और पुलिस विभाग के लोगों को ऐसी सुविधाओं से वंचित रखा जाता है। हालत यह है कि देश में होने वाले विधानसभा चुनावों में हफ्तों और महीनों चुनाव के संचालन पर भारी खर्च होने के बाद कई राज्यों में एक साल में मुश्किल से 30 दिन विधानसभा बैठती हैं। ये आंकड़े खुद में हैरान करते हैं। इसमें हरियाणा और पंजाब जैसे कुछ क्षेत्रों में, औसत लगभग एक पखवाड़े का है। वहीं अगर पिछले एक दशक में एक साल में विधानसभा बैठने में सबसे अधिक औसत देखें तो ओडिशा में 46 और केरल 43 है। हालांकि ये राज्य भी लोकसभा के 63 के औसत से बहुत कम हैं। उदाहरण के लिए, यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, 2020 में 163 दिनों और 2021 में 166 दिनों के लिए और सीनेट में दोनों सालों में 192 दिनों के लिए था। वहीं यूके हाउस ऑफ कॉमन्स की 2020 में 147 बैठकें हुईं, जो पिछले दशक में लगभग 155 के वार्षिक औसत के अनुरूप थी। जापान की डाइट, या हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की बात करें तो किसी भी असाधारण या विशेष सत्र के अलावा साल में 150 दिन मिलते हैं।

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