अमित शाह कहते हैं चुनाव के बाद सारी मांगें मानेंगे, आपको भरोसा है? राकेश टिकैत से पूछे न्यूज एंकर, मिला ऐसा जवाब

अमित शाह कहते हैं चुनाव के बाद सारी मांगें मानेंगे, आपको भरोसा है? राकेश टिकैत से पूछे न्यूज एंकर, मिला ऐसा जवाब

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किसान नेता राकेश टिकैत ने अमित शाह पर जमकर निशाना साधा और कहा कि जब दिल्ली में किसान थे, तब सरकार कहां थी।

उत्तर प्रदेश की सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। अब लोगों को मनाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह भी मैदान में आ गए हैं। वह खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों व जाटों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को तो साथ आने का मौका दिया ही, साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि चुनाव के बाद किसानों की सभी मांगों को मान लिया जाएगा। इस सिलसिले में भाकियू नेता राकेश टिकैत से भी सवाल-जवाब किया गया था। इसके साथ ही रालोद और भाजपा के गठबंधन पर भी उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई।

न्यूज एंकर ने किसान नेता राकेश टिकैत से पूछा, “क्या किसान चाहेंगे कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल और भाजपा का गठबंधन हो?” इस सवाल का जवाब देते हुए भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा, “हमें नहीं पता कि किसका गठबंधन किससे हो रहा है। हमें केवल अपने आंदोलन का पता है। कोई भी सरकार आए, अगर वह किसानों के खिलाफ कोई बिल या कानून बनाएगी तो हमें उसका विरोध करना है।”

भाकियू नेता से अमित शाह के विषय में सवाल करते हुए न्यूज एंकर ने पूछा, “गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि चुनाव के बाद किसानों की सभी मांगों को मान लेंगे, आपको भरोसा है इसपर?” इस बात का जवाब देते हुए भाकियू नेता ने कहा, “चुनाव से पहले क्यों नहीं मान रहे हैं। जो दिल्ली में किसान बैठा था, अभी भी हमने पिछले 10 दिन में दो बार मैसेज करवाया, लेकिन वह मीटिंग करने के लिए तैयार नहीं हैं।”

किसान नेता ने अपने जवाब में आगे कहा, “अब इन्होंने कौन से किसान बुला लिये। हम कह रहे हैं कि हमें टाइम दो, हम बात करना चाहते हैं, लेकिन यह बात करना नहीं चाहते, जो दिल्ली में समझौता हुआ है, उसे मानना नहीं चाहते हैं। हम सरकार से मिलना चाह रहे हैं, तो वह हमसे मिल नहीं रही। सरकार ने कहा था कि एमएसपी कानून पर कमेटी बनेगी, लेकिन हम सरकार को ढूंढ रहे हैं कि वह है कहां।”

किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार पर तंज कसते हुए आगे कहा, “गलतफहमी में देश का किसान बिल्कुल न रहे। 22 जनवरी, 2021 के बाद सरकार एक भी बार नहीं मिली, एक साल हो गया सरकार को तलाश करते हुए। उनसे जो मिले, वह कोई भी हो सकते हैं लेकिन वे किसान बिल्कुल भी नहीं थे।”

किसान नेता राकेश टिकैत ने अमित शाह पर जमकर निशाना साधा और कहा कि जब दिल्ली में किसान थे, तब सरकार कहां थी। उत्तर प्रदेश की सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। अब लोगों को मनाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह भी मैदान में आ गए हैं। वह खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों व जाटों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को तो साथ आने का मौका दिया ही, साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि चुनाव के बाद किसानों की सभी मांगों को मान लिया जाएगा। इस सिलसिले में भाकियू नेता राकेश टिकैत से भी सवाल-जवाब किया गया था। इसके साथ ही रालोद और भाजपा के गठबंधन पर भी उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई। न्यूज एंकर ने किसान नेता राकेश टिकैत से पूछा, “क्या किसान चाहेंगे कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल और भाजपा का गठबंधन हो?” इस सवाल का जवाब देते हुए भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा, “हमें नहीं पता कि किसका गठबंधन किससे हो रहा है। हमें केवल अपने आंदोलन का पता है। कोई भी सरकार आए, अगर वह किसानों के खिलाफ कोई बिल या कानून बनाएगी तो हमें उसका विरोध करना है।” भाकियू नेता से अमित शाह के विषय में सवाल करते हुए न्यूज एंकर ने पूछा, “गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि चुनाव के बाद किसानों की सभी मांगों को मान लेंगे, आपको भरोसा है इसपर?” इस बात का जवाब देते हुए भाकियू नेता ने कहा, “चुनाव से पहले क्यों नहीं मान रहे हैं। जो दिल्ली में किसान बैठा था, अभी भी हमने पिछले 10 दिन में दो बार मैसेज करवाया, लेकिन वह मीटिंग करने के लिए तैयार नहीं हैं।” किसान नेता ने अपने जवाब में आगे कहा, “अब इन्होंने कौन से किसान बुला लिये। हम कह रहे हैं कि हमें टाइम दो, हम बात करना चाहते हैं, लेकिन यह बात करना नहीं चाहते, जो दिल्ली में समझौता हुआ है, उसे मानना नहीं चाहते हैं। हम सरकार से मिलना चाह रहे हैं, तो वह हमसे मिल नहीं रही। सरकार ने कहा था कि एमएसपी कानून पर कमेटी बनेगी, लेकिन हम सरकार को ढूंढ रहे हैं कि वह है कहां।” किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार पर तंज कसते हुए आगे कहा, “गलतफहमी में देश का किसान बिल्कुल न रहे। 22 जनवरी, 2021 के बाद सरकार एक भी बार नहीं मिली, एक साल हो गया सरकार को तलाश करते हुए। उनसे जो मिले, वह कोई भी हो सकते हैं लेकिन वे किसान बिल्कुल भी नहीं थे।”

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