
दशहरे पर जब भी रावण के दस सिर के बारे में सोचता हूं, तो ये सोचकर सिहर उठता हूं कि अगर आज रावण को…
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बिना हेल्मेट पकड़े जाने पर सौ-पचास देकर उसकी जान नहीं छूटती। उसे सिर के हिसाब से बारगेनिंग करनी पड़ती। भइया, लेफ्ट वाले 5 सिर का माफ कर दो। आगे से ख्याल रखूंगा। ट्रैफिक पुलिसवाला भी अकड़कर कहता, तुम्हारा तो रोज-रोज का लफड़ा है। कल भी तुमने बाएं से चौथे सिर में हेल्मेट नहीं पहना था और दाएं से तीसरे सिर में तो आज तक नहीं पहना और रावण ये कहकर सफाई देता कि उस सिर में तो मेरे जुओं की वजह से जख्म हो रखे हैं, इसलिए नहीं पहन पाता।
एक साथ दस सिर की फोटो न खिंचवा पाने के कारण रावण का कभी आधार कार्ड नहीं बन पाता। वह फेसबुक पर मेघनाद और कुंभकर्ण की फोटूएं देख-देखकर कुढ़ता रहता मगर खुद कभी सेल्फी नहीं ले पाता।
जहां लोग सेल्फी स्टिक का प्रयोग सेल्फी खींचने के लिए करते हैं, वहीं उसे अपने लास्ट वाले सिर को मोमोज खिलाने के लिए सेल्फी स्टिक का प्रयोग करना पड़ता।
उसे हमेशा मेट्रो में परेशानियों का सामना करना पड़ता। अनाउंसर के घोषणा करने पर कि अगला स्टेशन फलाना है। जब तक आवाज उसके लास्ट सिर तक पहुंचती, उतनी देर में तो मेट्रो 5 स्टेशन आगे निकल जाती।
ऐसे किसी भी डांस बार में जाना उसके लिए असंभव हो जाता जहां ‘पर हेड’ 2000 रुपये वसूले जाते हैं।
चार घंटे लगाकर रावण के सभी दस सिरों के बाल काटने के बाद नाई उस समय बेहोश होकर गिर पड़ता जब रावण कहता, ऐसा करो…अब हेड मसाज कर दो!
कृपया सिर खिड़की से बाहर न निकालें। बस में लिखी इस हिदायत को मानना उसके लिए नामुमकिन होता। अब इतने सिर होते, तो 2-4 तो दाएं-बाएं से अपने आप ही बाहर निकल जाते।
थिअटर में फिल्म देखने जाने पर रावण का या तो पूरी ‘रो’ (लाइन) बुक करनी पड़ती या फिर ये कहकर उसके बाकी नौ सिर पर पट्टी बांध दी जाती कि एक टिकट पर एक ही आदमी फिल्म देख सकता है!
यही नहीं सबसे बड़ी परेशानी तो उसे सुबह-सुबह अपने लास्ट वाले सिर को अखबार पढ़वाने में आती। जब उसे इसके लिए भी दूरबीन का प्रयोग करना पड़ता।
मगर रावण आज होता तो हम कभी भी दशहरा नहीं मना पाते क्योंकि उसकी दया याचिका आज भी राष्ट्रपति के पास लंबित पड़ी होती और भगवान राम कभी उसका वध नहीं कर पाते!
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Web Title : satire on ravans ten heads
Hindi News from Navbharat Times, TIL Network
दशहरे पर जब भी रावण के दस सिर के बारे में सोचता हूं, तो ये सोचकर सिहर उठता हूं कि अगर आज रावण को…दशहरे पर जब भी रावण के दस सिर के बारे में सोचता हूं, तो यह सोचकर सिहर उठता हूं कि अगर आज रावण को दस सिर के साथ गुज़ारा करना पड़ता तो उसे क्या कुछ झेलना पड़ता।आज रावण अगर बाइक चलाने की सोचता तो बाइक से ज़्यादा उसका खर्चा हेल्मेट पर हो जाता। यही वजह होती कि बैंक उसकी बाइक फाइनैंश करने के लिए तो तैयार हो जाते मगर दस हेल्मेट के लिए यह कहकर मना कर दिया जाता कि कंपनी के पास ऐसी कोई स्कीम नहीं है।बिना हेल्मेट पकड़े जाने पर सौ-पचास देकर उसकी जान नहीं छूटती। उसे सिर के हिसाब से बारगेनिंग करनी पड़ती। भइया, लेफ्ट वाले 5 सिर का माफ कर दो। आगे से ख्याल रखूंगा। ट्रैफिक पुलिसवाला भी अकड़कर कहता, तुम्हारा तो रोज-रोज का लफड़ा है। कल भी तुमने बाएं से चौथे सिर में हेल्मेट नहीं पहना था और दाएं से तीसरे सिर में तो आज तक नहीं पहना और रावण ये कहकर सफाई देता कि उस सिर में तो मेरे जुओं की वजह से जख्म हो रखे हैं, इसलिए नहीं पहन पाता।एक साथ दस सिर की फोटो न खिंचवा पाने के कारण रावण का कभी आधार कार्ड नहीं बन पाता। वह फेसबुक पर मेघनाद और कुंभकर्ण की फोटूएं देख-देखकर कुढ़ता रहता मगर खुद कभी सेल्फी नहीं ले पाता।जहां लोग सेल्फी स्टिक का प्रयोग सेल्फी खींचने के लिए करते हैं, वहीं उसे अपने लास्ट वाले सिर को मोमोज खिलाने के लिए सेल्फी स्टिक का प्रयोग करना पड़ता।उसे हमेशा मेट्रो में परेशानियों का सामना करना पड़ता। अनाउंसर के घोषणा करने पर कि अगला स्टेशन फलाना है। जब तक आवाज उसके लास्ट सिर तक पहुंचती, उतनी देर में तो मेट्रो 5 स्टेशन आगे निकल जाती।ऐसे किसी भी डांस बार में जाना उसके लिए असंभव हो जाता जहां ‘पर हेड’ 2000 रुपये वसूले जाते हैं।चार घंटे लगाकर रावण के सभी दस सिरों के बाल काटने के बाद नाई उस समय बेहोश होकर गिर पड़ता जब रावण कहता, ऐसा करो…अब हेड मसाज कर दो!कृपया सिर खिड़की से बाहर न निकालें। बस में लिखी इस हिदायत को मानना उसके लिए नामुमकिन होता। अब इतने सिर होते, तो 2-4 तो दाएं-बाएं से अपने आप ही बाहर निकल जाते।थिअटर में फिल्म देखने जाने पर रावण का या तो पूरी ‘रो’ (लाइन) बुक करनी पड़ती या फिर ये कहकर उसके बाकी नौ सिर पर पट्टी बांध दी जाती कि एक टिकट पर एक ही आदमी फिल्म देख सकता है!यही नहीं सबसे बड़ी परेशानी तो उसे सुबह-सुबह अपने लास्ट वाले सिर को अखबार पढ़वाने में आती। जब उसे इसके लिए भी दूरबीन का प्रयोग करना पड़ता।मगर रावण आज होता तो हम कभी भी दशहरा नहीं मना पाते क्योंकि उसकी दया याचिका आज भी राष्ट्रपति के पास लंबित पड़ी होती और भगवान राम कभी उसका वध नहीं कर पाते! Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : satire on ravans ten headsHindi News from Navbharat Times, TIL Network
