UP Chunav: माफिया-बाहुबली मजबूरी भी, पर दिखानी है दूरी भी

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Edited by रीतिका सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Feb 15, 2022, 5:24 AM

चुनावी मजबूरी माने जाने वाले वर्ग विशेष के बाहुबली व माफिया से बड़े दलों ने पूरी तरह दूरी बना ली है। सपा और बसपा ने कुछ एक बाहुबलियों और माफिया को टिकट दिया है, लेकिन प्रदेश के नामी माफिया को चुनावी मुहिम से दूर ही रखा है। 2012 से बाहुबलियों व माफिया को जनता ने नकारना शुरू किया तो वे अभी तक संभल नहीं पाए हैं।

Yogi-Akhilesh

हाइलाइट्स

  • माफिया और बाहुबलियों के टिकट पर भी ‘बुलडोजर’
  • माफिया-बाहुबली सहयोगी दलों के जरिए चुनाव में ताल ठोकने की जुगत भिड़ा रहे
  • 2017 के विधानसभा चुनाव में बाहुबलियों को लेकर खूब खींचतान हुई
लखनऊ: योगी सरकार के अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और बेहतर कानून-व्यवस्था के दावे इस चुनाव में माफिया और बाहुबलियों के टिकट पर भी ‘बुलडोजर’ चला रहे हैं। चुनावी सभाओं में पीएम नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi), योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) समेत भाजपा के अन्य नेताओं के माफिया पर तीखे हमलों के बीच राजनैतिक दल अपनी छवि साफ दिखाने के लिए बाहुबलियों को गले लगाने से बचते दिख रहे हैं। खासतौर से चुनावी मजबूरी माने जाने वाले वर्ग विशेष के बाहुबली व माफिया से बड़े दलों ने पूरी तरह दूरी बना ली है।

हालांकि, सपा और बसपा ने कुछ एक बाहुबलियों और माफिया को टिकट दिया है, लेकिन प्रदेश के नामी माफिया को चुनावी मुहिम से दूर ही रखा है। उधर, मुख्य दलों से टिकट न मिलने के बाद अब माफिया-बाहुबली सहयोगी दलों के जरिए चुनाव में ताल ठोकने की जुगत भिड़ा रहे हैं। अब वे कितना सफल होते हैं, यह 10 मार्च को आने वाले चुनावी नतीजों से पता चलेगा।

इन्हें मिल गया मुख्य दलों से टिकट
वेस्ट यूपी के बड़े बाहुबलियों में शुमार मदन भैया को सपा-रालोद गठबंधन ने गाजियाबाद की लोनी सीट से प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी व बीएसपी ने इसे लेकर सपा-रालोद गठबंधन को घेरा भी। इसी तरह सपा ने अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से बाहुबली अभय सिंह को प्रत्याशी बनाया है। पूर्व बीजेपी विधायक बाहुबली खब्बू तिवारी को सजा होने के बाद उनकी पत्नी आरती तिवारी बीजेपी की तरफ से अभय के गोसाईंगंज से लड़ रही हैं। वहीं बीएसपी ने बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी के हत्यारोपित बेटे अमनमणि त्रिपाठी को महराजगंज की नौतनवा सीट से प्रत्याशी बनाया है। अमनमणि बीजेपी के सहयोगी दल निषाद पार्टी से टिकट पाने की जुगत में थे, लेकिन बात नहीं बनी। जेल में बंद बाहुबली बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह को बीजेपी ने सैयदराजा से टिकट दिया है। हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय तिवारी को सपा ने गोरखपुर की चिल्लूपार सीट से प्रत्याशी बनाया है। बीएसपी ने सुलतानपुर की इसौली सीट से बाहुबली चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह को टिकट दिया है। बाहुबली रमाकांत यादव को सपा ने आजमगढ़ की फूलपुर पवई सीट से प्रत्याशी बनाया है।

डीपी यादव ने पत्नी के साथ भरा पर्चा, फिर वापस लिया
वेस्ट यूपी के बाहुबली डीपी यादव ने बदायूं की सहसवान सीट से पत्नी उर्मिलेश यादव और बेटे कुणाल यादव के साथ नामांकन भरा था। बाद में डीपी यादव और उर्मिलेश ने नाम वापस ले लिया। डीपी का बेटा उनकी बनाई पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल से चुनाव लड़ रहा है। साल 2012 में डीपी ने बीएसपी छोड़कर सपा में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन अखिलेश के विरोध के चलते बात नहीं बनी थी।

बैकडोर से बड़े दलों से जुड़ने की जुगाड़ में
गुजरात जेल में बंद बाहुबली माफिया अतीक अहमद अपनी पत्नी को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम से टिकट दिलवाने के जुगाड़ में थे, लेकिन बात नहीं बनी। बांदा जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी सपा के सहयोगी दल सुभासपा से टिकट की जुगत भिड़ा रहे हैं। उनके भाई सिगबतुल्लाह ने सपा जॉइन की है, लेकिन अखिलेश मुख्तार को शामिल करने के पक्ष में नहीं है। जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह भी निषाद पार्टी व अपना दल से चुनाव लड़ने की जुगत में थे। अब चर्चा है कि वह जेडीयू के टिकट पर मलहनी से दावेदारी करने जा रहा है। अम्बेडकरनगर का बाहुबली अजय सिपाही भी निषाद पार्टी से टिकट की जुगत में था, लेकिन बात नहीं बनी।

UP Election News : पहले जिनके लिए लड़ते थे, अब उनके खिलाफ लड़ रहे, जानें किन सीटों पर है दिलचस्प मुकाबला
जनता के धोबी पछाड़ के बाद खड़े नहीं हो पा रहे बाहुबली
2012 से बाहुबलियों व माफिया को जनता ने नकारना शुरू किया तो वे अभी तक संभल नहीं पाए हैं। 2012 के विस चुनाव में हरिशंकर तिवारी, डीपी यादव, अतीक अहमद, बृजेश सिंह, मुन्ना बजरंगी, मदन भैया, यशभद्र सिंह उर्फ सोनू, अमरमणि के बेटे अमनमणि और धनंजय सिंह की पत्नी जागृति सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा था। कुछ ऐसा ही हाल लोकसभा चुनाव 2014 में हुआ। धनजंय सिंह, अतीक अहमद, मित्रसेन यादव, डीपी यादव, अकबर अहमद डंपी, रमाकांत यादव, अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना, जितेंद्र सिंह बबलू, कादिर राणा, कपिल मुनि करवरिया, अजय राय, रिजवान जहीर, विनोद कुमार सिंह पंडित और बाल कुमार पटेल जैसे बाहुबलियों की हार हुई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जनता ने माफिया-बाहुबलियों को नकार दिया था।

2017 में बाहुबलियों को लेकर खूब खींची थी तलवारें
2017 के विधानसभा चुनाव में बाहुबलियों को लेकर खूब खींचतान हुई थी। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने जेल में बंद मुख्तार अंसारी और उनके परिवार को सपा में शामिल किए जाने का विरोध किया था। इसको लेकर अखिलेश और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच तलवारें खिंच गई थीं। क्लीन इमेज को लेकर अखिलेश ने इलाहाबाद के बाहुबली अतीक अहमद, भदोही के विजय मिश्र और एमएलसी चुनावों में क्रॉस वोटिंग करने वाले बुलंदशहर के गुड्डू पंडित व उसके भाई मुकेश शर्मा और अमनमणि का टिकट काट दिया था। इसके बाद ज्यादातर बाहुबलियों ने छोटे दलों के टिकट पर चुनाव लड़ा। कृष्णा पटेल के अपना दल से चुनाव लड़ने वाली माफिया मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह मड़ियाहूं सीट से चौथे स्थान पर रही थी।

धनंजय सिंह निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) से चुनाव लड़े, लेकिन दूसरे स्थान पर रहे। अजय सिपाही भी निषाद पार्टी से कटेहरी सीट से चुनाव लड़ा और चौथे नंबर पर रहा। गुड्डू पंडित और उसका भाई मुकेश शर्मा रालोद के टिकट पर बुलंदशहर और शिकारपुर से चुनाव लड़े, लेकिन करारी हार हुई। संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा ने अपनी पत्नी पायल को रालोद के टिकट पर मुजफ्फरनगर से लड़वाया, लेकिन मात्र 5640 वोट ही मिले। बाहुबली उमाकांत यादव ने बेटे दिनेश कांत को रालोद के टिकट पर जौनपुर की शाहगंज सीट से लड़वाया, लेकिन मात्र 6,462 वोट ही मिले। सुलतानपुर की इसौली सीट से रालोद के टिकट पर लड़ने वाले यशभद्र सिंह उर्फ मोनू तीसरे स्थान पर रहे थे।

ये चाहकर भी नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
कुछ ऐसे दागी और बाहुबली भी हैं, जो अब चाहकर भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसमें सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति हैं, जिन्हें हाल ही में सजा हुई है। वह अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इसी तरह करवरिया बंधु, अशोक सिंह चंदेल, इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी, कुलदीप सिंह सेंगर भी इस चुनाव में ताल नहीं ठोक पाएंगे।

Dhananjay Singh : वो बाहुबली, जो यूपी पुलिस के रिकॉर्ड में 24 साल पहले मर चुका, लेकिन अब चुनाव में उतर रहा

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Web Title : in 2022 up elections, political parties are maintaing a distance from mafia and baahubalis in giving ticket
Hindi News from Navbharat Times, TIL Network

Authored by अंकुर तिवारी | Edited by रीतिका सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Feb 15, 2022, 5:24 AMचुनावी मजबूरी माने जाने वाले वर्ग विशेष के बाहुबली व माफिया से बड़े दलों ने पूरी तरह दूरी बना ली है। सपा और बसपा ने कुछ एक बाहुबलियों और माफिया को टिकट दिया है, लेकिन प्रदेश के नामी माफिया को चुनावी मुहिम से दूर ही रखा है। 2012 से बाहुबलियों व माफिया को जनता ने नकारना शुरू किया तो वे अभी तक संभल नहीं पाए हैं।हाइलाइट्समाफिया और बाहुबलियों के टिकट पर भी ‘बुलडोजर’ माफिया-बाहुबली सहयोगी दलों के जरिए चुनाव में ताल ठोकने की जुगत भिड़ा रहे2017 के विधानसभा चुनाव में बाहुबलियों को लेकर खूब खींचतान हुई लखनऊ: योगी सरकार के अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और बेहतर कानून-व्यवस्था के दावे इस चुनाव में माफिया और बाहुबलियों के टिकट पर भी ‘बुलडोजर’ चला रहे हैं। चुनावी सभाओं में पीएम नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi), योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) समेत भाजपा के अन्य नेताओं के माफिया पर तीखे हमलों के बीच राजनैतिक दल अपनी छवि साफ दिखाने के लिए बाहुबलियों को गले लगाने से बचते दिख रहे हैं। खासतौर से चुनावी मजबूरी माने जाने वाले वर्ग विशेष के बाहुबली व माफिया से बड़े दलों ने पूरी तरह दूरी बना ली है। हालांकि, सपा और बसपा ने कुछ एक बाहुबलियों और माफिया को टिकट दिया है, लेकिन प्रदेश के नामी माफिया को चुनावी मुहिम से दूर ही रखा है। उधर, मुख्य दलों से टिकट न मिलने के बाद अब माफिया-बाहुबली सहयोगी दलों के जरिए चुनाव में ताल ठोकने की जुगत भिड़ा रहे हैं। अब वे कितना सफल होते हैं, यह 10 मार्च को आने वाले चुनावी नतीजों से पता चलेगा।इन्हें मिल गया मुख्य दलों से टिकटवेस्ट यूपी के बड़े बाहुबलियों में शुमार मदन भैया को सपा-रालोद गठबंधन ने गाजियाबाद की लोनी सीट से प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी व बीएसपी ने इसे लेकर सपा-रालोद गठबंधन को घेरा भी। इसी तरह सपा ने अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से बाहुबली अभय सिंह को प्रत्याशी बनाया है। पूर्व बीजेपी विधायक बाहुबली खब्बू तिवारी को सजा होने के बाद उनकी पत्नी आरती तिवारी बीजेपी की तरफ से अभय के गोसाईंगंज से लड़ रही हैं। वहीं बीएसपी ने बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी के हत्यारोपित बेटे अमनमणि त्रिपाठी को महराजगंज की नौतनवा सीट से प्रत्याशी बनाया है। अमनमणि बीजेपी के सहयोगी दल निषाद पार्टी से टिकट पाने की जुगत में थे, लेकिन बात नहीं बनी। जेल में बंद बाहुबली बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह को बीजेपी ने सैयदराजा से टिकट दिया है। हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय तिवारी को सपा ने गोरखपुर की चिल्लूपार सीट से प्रत्याशी बनाया है। बीएसपी ने सुलतानपुर की इसौली सीट से बाहुबली चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह को टिकट दिया है। बाहुबली रमाकांत यादव को सपा ने आजमगढ़ की फूलपुर पवई सीट से प्रत्याशी बनाया है।डीपी यादव ने पत्नी के साथ भरा पर्चा, फिर वापस लियावेस्ट यूपी के बाहुबली डीपी यादव ने बदायूं की सहसवान सीट से पत्नी उर्मिलेश यादव और बेटे कुणाल यादव के साथ नामांकन भरा था। बाद में डीपी यादव और उर्मिलेश ने नाम वापस ले लिया। डीपी का बेटा उनकी बनाई पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल से चुनाव लड़ रहा है। साल 2012 में डीपी ने बीएसपी छोड़कर सपा में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन अखिलेश के विरोध के चलते बात नहीं बनी थी।बैकडोर से बड़े दलों से जुड़ने की जुगाड़ मेंगुजरात जेल में बंद बाहुबली माफिया अतीक अहमद अपनी पत्नी को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम से टिकट दिलवाने के जुगाड़ में थे, लेकिन बात नहीं बनी। बांदा जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी सपा के सहयोगी दल सुभासपा से टिकट की जुगत भिड़ा रहे हैं। उनके भाई सिगबतुल्लाह ने सपा जॉइन की है, लेकिन अखिलेश मुख्तार को शामिल करने के पक्ष में नहीं है। जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह भी निषाद पार्टी व अपना दल से चुनाव लड़ने की जुगत में थे। अब चर्चा है कि वह जेडीयू के टिकट पर मलहनी से दावेदारी करने जा रहा है। अम्बेडकरनगर का बाहुबली अजय सिपाही भी निषाद पार्टी से टिकट की जुगत में था, लेकिन बात नहीं बनी।UP Election News : पहले जिनके लिए लड़ते थे, अब उनके खिलाफ लड़ रहे, जानें किन सीटों पर है दिलचस्प मुकाबलाजनता के धोबी पछाड़ के बाद खड़े नहीं हो पा रहे बाहुबली2012 से बाहुबलियों व माफिया को जनता ने नकारना शुरू किया तो वे अभी तक संभल नहीं पाए हैं। 2012 के विस चुनाव में हरिशंकर तिवारी, डीपी यादव, अतीक अहमद, बृजेश सिंह, मुन्ना बजरंगी, मदन भैया, यशभद्र सिंह उर्फ सोनू, अमरमणि के बेटे अमनमणि और धनंजय सिंह की पत्नी जागृति सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा था। कुछ ऐसा ही हाल लोकसभा चुनाव 2014 में हुआ। धनजंय सिंह, अतीक अहमद, मित्रसेन यादव, डीपी यादव, अकबर अहमद डंपी, रमाकांत यादव, अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना, जितेंद्र सिंह बबलू, कादिर राणा, कपिल मुनि करवरिया, अजय राय, रिजवान जहीर, विनोद कुमार सिंह पंडित और बाल कुमार पटेल जैसे बाहुबलियों की हार हुई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जनता ने माफिया-बाहुबलियों को नकार दिया था।2017 में बाहुबलियों को लेकर खूब खींची थी तलवारें2017 के विधानसभा चुनाव में बाहुबलियों को लेकर खूब खींचतान हुई थी। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने जेल में बंद मुख्तार अंसारी और उनके परिवार को सपा में शामिल किए जाने का विरोध किया था। इसको लेकर अखिलेश और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच तलवारें खिंच गई थीं। क्लीन इमेज को लेकर अखिलेश ने इलाहाबाद के बाहुबली अतीक अहमद, भदोही के विजय मिश्र और एमएलसी चुनावों में क्रॉस वोटिंग करने वाले बुलंदशहर के गुड्डू पंडित व उसके भाई मुकेश शर्मा और अमनमणि का टिकट काट दिया था। इसके बाद ज्यादातर बाहुबलियों ने छोटे दलों के टिकट पर चुनाव लड़ा। कृष्णा पटेल के अपना दल से चुनाव लड़ने वाली माफिया मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह मड़ियाहूं सीट से चौथे स्थान पर रही थी। धनंजय सिंह निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) से चुनाव लड़े, लेकिन दूसरे स्थान पर रहे। अजय सिपाही भी निषाद पार्टी से कटेहरी सीट से चुनाव लड़ा और चौथे नंबर पर रहा। गुड्डू पंडित और उसका भाई मुकेश शर्मा रालोद के टिकट पर बुलंदशहर और शिकारपुर से चुनाव लड़े, लेकिन करारी हार हुई। संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा ने अपनी पत्नी पायल को रालोद के टिकट पर मुजफ्फरनगर से लड़वाया, लेकिन मात्र 5640 वोट ही मिले। बाहुबली उमाकांत यादव ने बेटे दिनेश कांत को रालोद के टिकट पर जौनपुर की शाहगंज सीट से लड़वाया, लेकिन मात्र 6,462 वोट ही मिले। सुलतानपुर की इसौली सीट से रालोद के टिकट पर लड़ने वाले यशभद्र सिंह उर्फ मोनू तीसरे स्थान पर रहे थे।ये चाहकर भी नहीं लड़ पाएंगे चुनावकुछ ऐसे दागी और बाहुबली भी हैं, जो अब चाहकर भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसमें सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति हैं, जिन्हें हाल ही में सजा हुई है। वह अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इसी तरह करवरिया बंधु, अशोक सिंह चंदेल, इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी, कुलदीप सिंह सेंगर भी इस चुनाव में ताल नहीं ठोक पाएंगे।Dhananjay Singh : वो बाहुबली, जो यूपी पुलिस के रिकॉर्ड में 24 साल पहले मर चुका, लेकिन अब चुनाव में उतर रहा Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : in 2022 up elections, political parties are maintaing a distance from mafia and baahubalis in giving ticketHindi News from Navbharat Times, TIL Network

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