पहली बार ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश:हर बड़ी वेबसाइट का क्लोन बनाया, कॉल किया तो बोले

पहली बार ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश:हर बड़ी वेबसाइट का क्लोन बनाया, कॉल किया तो बोले

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भरतपुर9 घंटे पहलेलेखक: गौरव माथुर

राजस्थान में साइबर ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसके लिए ठग नए-नए तरीके खोज रहे हैं। इस बार ठगी के लिए इन्होंने गूगल पर जाल बिछाया है। फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन वाली हर वेबसाइट का क्लोन बना लिया है। समस्या सुलझाने के बहाने ये लोग मिनटों में ही अकाउंट खाली कर देते हैं। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि ये ठग रिमोट एप्लिकेशन के जरिए लोगों के फोन का कंट्रोल ले लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है ठगी का खेल। कुछ ही मिनट में आपके अकाउंट से सारा पैसा गायब कर दिया जाता है।

गूगल पर तैयार किया ठगी का नेटवर्क
आप जब भी किसी ऑनलाइन साइट या सर्विस सेंटर का नंबर गूगल पर सर्च करते हैं तो गूगल कस्टमर केयर का नंबर दिखाता है। ज्यादातर में यह ठगों का नंबर होता है। डायल करने पर यह नंबर सीधे ठग को लगता है। वह दावा करता है कि कंपनी का ऑफिसर है और जाल बिछाना शुरू कर देता है।

दैनिक भास्कर ने कस्टमर बनकर एक ऐसे ही ठग से बातचीत की, ठगी से कैसे बचा जा सकता है?
दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने क्रेडिट कार्ड के ट्रांजेक्शन को लेकर गूगल पर नंबर सर्च किए। गूगल पर बैंक का नाम डालते ही कस्टमर केयर का नंबर आया। नंबर डायल कर बात की तो ठग ने बताया कि वह बैंक के कस्टमर केयर से है। रिपोर्टर ने कहा कि क्रेडिट कार्ड के ट्रांजेक्शन को लेकर परेशानी है। इस पर ठग ने एनी डेस्क डाउनलोड करने को कहा।

रिपोर्टर ने ऐप डाउनलोड किया। इसके बाद ठग ने कोड शेयर करने को कहा, लेकिन रिपोर्टर अलर्ट हो गया और उसने बताया कि यदि कोड शेयर किया तो फोन रिमोट पर चला जाएगा और मेरा सारा डाटा आपके पास शेयर हो जाएगा। ठग ने पहले तो मना किया कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा लेकिन जब उससे सवाल किए गए तो उसने फोन काट दिया।

एक अनुमान के अनुसार, ठगी के मामलों में राजस्थान देश में 6वें नंबर पर है। 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 169 साइबर क्राइम के मामले सामने आए।

भरतपुर9 घंटे पहलेलेखक: गौरव माथुरकॉपी लिंकवीडियोराजस्थान में साइबर ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसके लिए ठग नए-नए तरीके खोज रहे हैं। इस बार ठगी के लिए इन्होंने गूगल पर जाल बिछाया है। फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन वाली हर वेबसाइट का क्लोन बना लिया है। समस्या सुलझाने के बहाने ये लोग मिनटों में ही अकाउंट खाली कर देते हैं। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि ये ठग रिमोट एप्लिकेशन के जरिए लोगों के फोन का कंट्रोल ले लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है ठगी का खेल। कुछ ही मिनट में आपके अकाउंट से सारा पैसा गायब कर दिया जाता है।गूगल पर तैयार किया ठगी का नेटवर्कआप जब भी किसी ऑनलाइन साइट या सर्विस सेंटर का नंबर गूगल पर सर्च करते हैं तो गूगल कस्टमर केयर का नंबर दिखाता है। ज्यादातर में यह ठगों का नंबर होता है। डायल करने पर यह नंबर सीधे ठग को लगता है। वह दावा करता है कि कंपनी का ऑफिसर है और जाल बिछाना शुरू कर देता है।दैनिक भास्कर ने कस्टमर बनकर एक ऐसे ही ठग से बातचीत की, ठगी से कैसे बचा जा सकता है?दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने क्रेडिट कार्ड के ट्रांजेक्शन को लेकर गूगल पर नंबर सर्च किए। गूगल पर बैंक का नाम डालते ही कस्टमर केयर का नंबर आया। नंबर डायल कर बात की तो ठग ने बताया कि वह बैंक के कस्टमर केयर से है। रिपोर्टर ने कहा कि क्रेडिट कार्ड के ट्रांजेक्शन को लेकर परेशानी है। इस पर ठग ने एनी डेस्क डाउनलोड करने को कहा।रिपोर्टर ने ऐप डाउनलोड किया। इसके बाद ठग ने कोड शेयर करने को कहा, लेकिन रिपोर्टर अलर्ट हो गया और उसने बताया कि यदि कोड शेयर किया तो फोन रिमोट पर चला जाएगा और मेरा सारा डाटा आपके पास शेयर हो जाएगा। ठग ने पहले तो मना किया कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा लेकिन जब उससे सवाल किए गए तो उसने फोन काट दिया।एक अनुमान के अनुसार, ठगी के मामलों में राजस्थान देश में 6वें नंबर पर है। 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 169 साइबर क्राइम के मामले सामने आए।

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