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देश के सबसे बड़े बैंक की पहली महिला मुखिया बनने का गौरव हासिल करने वाली अरूंधती भट्टाचार्य एक ऐसी शख्सियत बन चुकी हैं जिन्होंने बैंकिंग, कॉर्पोरेट और लेखन के क्षेत्र में लगातार एक से बढ़कर एक काम किया है। हाल ही में उनकी ऑटोबायोग्राफी- इनडोमिटेबल- ए वर्किंग वुमन्स नोट्स ऑन लाइफ, वर्क एंड लीडरशिप’ प्रकाशित हुई है। 65 वर्षीय अरुंधती का करिअर उन युवतियों और महिलाओं को इंस्पायर करने वाला है जो कि घर की चार दिवारी से निकलकर मेल डॉमिनेंट इंडस्ट्रियल युग में अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कभी अरुंधती की रुचि का विषय बैंक और कॉर्पोरेट की नौकरी नहीं था। उनका मानना है कि हर अच्छे काम में जरूरी वक्त लगता है, शॉर्टकट किसी समस्या का समाधान नहीं है।

ग्लोबल इकोनॉमी प्राइज- 2017
शुरुआती दौर
18 मार्च 1956 को कोलकाता में जन्मी अरुंधती भट्टाचार्य के पिता प्रद्युम्न कुमार पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और मां कल्याणी मुखर्जी एक होम्योपैथी कंसल्टेंट। अरुंधती ने अपनी पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल बोकारो, लेडी ब्रोबॉन कॉलेज, कोलकाता और जादवपुर यूनिवर्सिटी से पूरी की थी।
बैंकिंग क्षेत्र में बनाई पहचान
कोलकाता के प्रतिष्ठित लेडी ब्रोबॉन कॉलेज और जादवपुर यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में ऑनर्स करने वाली अरुंधती भट्टाचार्य ने कभी सोचा नहीं था कि वे बैंकिंग या फाइनेंस के क्षेत्र में जाएंगी। उन्होंने न इकोनॉमिक्स पढ़ा था और न ही अकाउंटेंसी का कोई कोर्स किया था। वे साहित्य की स्टूडेंट थीं। उनकी पसंद और प्राथमिकताओं में कीट्स और शेक्सपियर की रचनाएं थीं। लेकिन, अचानक बड़ा बदलाव आया।
अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई के दौरान उनके कुछ दोस्तों की जोर-जबर्दस्ती के कारण वे भी बैंक की पीओ परीक्षा देने के लिए राजी हो गईं।
उन दिनों को याद करते हुए अरुंधती ने स्वयं एक इंटरव्यू में कहा कि, मैंने प्रोबेशनरी ऑफिसर की परीक्षा को उतना गंभीरता से नहीं लिया था, जितना मेरे दोस्तों ने’ लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।

सेल्सफोर्स इंडिया की सीईओ
अरुंधति भट्टाचार्य ने चार साल तक देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन के तौर पर काम किया और ऐसे समय में बैंक का नेतृत्व किया जब दूसरे सरकारी बैंक लोन के मोर्चे पर काफी दिक्कतों का सामना कर रहे थे। उस दौरान अरुंधती फॉर्च्यून की टॉप महिलाओं की सूची में दूसरे स्थान पर जगह बना रही थी।
सेल्सफोर्स इंडिया की सीईओ
अप्रैल 2020 में अरुंधति भट्टाचार्य ने सेल्सफोर्स इंडिया के चेयरमैन और सीईओ का पदभार संभाला। सेल्सफोर्स इंडिया कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट (सीआरएम) सॉफ्टवेयर की दुनिया भर की टॉप की कंपनियों में शामिल है।
अरुंधति भट्टाचार्य अमेरिका की इस क्लाउड बेस्ड सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के इंडिया ऑपरेशंस की हेड और चेयरमैन और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर बेहद अहम जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
कई भारतीय कंपनियों में किया काम
अरुंधति भट्टाचार्य ने साल 2017 में एसबीआई के चेयरपर्सन के पद को छोड़ा था। इसके बाद भट्टाचार्य ने 7 भारतीय कंपनियों में डायरेक्टर के तौर पर काम किया है। इसमें से अजय पीरामल के नेतृत्व वाली पीरामल इंटरप्राइजेज लिमिटेड और मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा अरुंधति भट्टाचार्य ने
Hindi NewsNationalArundhati, One Of The Most Powerful Women In The World, Is Now Showing Her Strength In Corporate After Bankingदेश के सबसे बड़े बैंक की पहली महिला मुखिया बनने का गौरव हासिल करने वाली अरूंधती भट्टाचार्य एक ऐसी शख्सियत बन चुकी हैं जिन्होंने बैंकिंग, कॉर्पोरेट और लेखन के क्षेत्र में लगातार एक से बढ़कर एक काम किया है। हाल ही में उनकी ऑटोबायोग्राफी- इनडोमिटेबल- ए वर्किंग वुमन्स नोट्स ऑन लाइफ, वर्क एंड लीडरशिप’ प्रकाशित हुई है। 65 वर्षीय अरुंधती का करिअर उन युवतियों और महिलाओं को इंस्पायर करने वाला है जो कि घर की चार दिवारी से निकलकर मेल डॉमिनेंट इंडस्ट्रियल युग में अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रही हैं।दिलचस्प बात यह है कि कभी अरुंधती की रुचि का विषय बैंक और कॉर्पोरेट की नौकरी नहीं था। उनका मानना है कि हर अच्छे काम में जरूरी वक्त लगता है, शॉर्टकट किसी समस्या का समाधान नहीं है।ग्लोबल इकोनॉमी प्राइज- 2017शुरुआती दौर18 मार्च 1956 को कोलकाता में जन्मी अरुंधती भट्टाचार्य के पिता प्रद्युम्न कुमार पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और मां कल्याणी मुखर्जी एक होम्योपैथी कंसल्टेंट। अरुंधती ने अपनी पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल बोकारो, लेडी ब्रोबॉन कॉलेज, कोलकाता और जादवपुर यूनिवर्सिटी से पूरी की थी।बैंकिंग क्षेत्र में बनाई पहचानकोलकाता के प्रतिष्ठित लेडी ब्रोबॉन कॉलेज और जादवपुर यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में ऑनर्स करने वाली अरुंधती भट्टाचार्य ने कभी सोचा नहीं था कि वे बैंकिंग या फाइनेंस के क्षेत्र में जाएंगी। उन्होंने न इकोनॉमिक्स पढ़ा था और न ही अकाउंटेंसी का कोई कोर्स किया था। वे साहित्य की स्टूडेंट थीं। उनकी पसंद और प्राथमिकताओं में कीट्स और शेक्सपियर की रचनाएं थीं। लेकिन, अचानक बड़ा बदलाव आया।अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई के दौरान उनके कुछ दोस्तों की जोर-जबर्दस्ती के कारण वे भी बैंक की पीओ परीक्षा देने के लिए राजी हो गईं।उन दिनों को याद करते हुए अरुंधती ने स्वयं एक इंटरव्यू में कहा कि, मैंने प्रोबेशनरी ऑफिसर की परीक्षा को उतना गंभीरता से नहीं लिया था, जितना मेरे दोस्तों ने’ लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।सेल्सफोर्स इंडिया की सीईओअरुंधति भट्टाचार्य ने चार साल तक देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन के तौर पर काम किया और ऐसे समय में बैंक का नेतृत्व किया जब दूसरे सरकारी बैंक लोन के मोर्चे पर काफी दिक्कतों का सामना कर रहे थे। उस दौरान अरुंधती फॉर्च्यून की टॉप महिलाओं की सूची में दूसरे स्थान पर जगह बना रही थी।सेल्सफोर्स इंडिया की सीईओअप्रैल 2020 में अरुंधति भट्टाचार्य ने सेल्सफोर्स इंडिया के चेयरमैन और सीईओ का पदभार संभाला। सेल्सफोर्स इंडिया कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट (सीआरएम) सॉफ्टवेयर की दुनिया भर की टॉप की कंपनियों में शामिल है।अरुंधति भट्टाचार्य अमेरिका की इस क्लाउड बेस्ड सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के इंडिया ऑपरेशंस की हेड और चेयरमैन और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर बेहद अहम जिम्मेदारी संभाल रही हैं।कई भारतीय कंपनियों में किया कामअरुंधति भट्टाचार्य ने साल 2017 में एसबीआई के चेयरपर्सन के पद को छोड़ा था। इसके बाद भट्टाचार्य ने 7 भारतीय कंपनियों में डायरेक्टर के तौर पर काम किया है। इसमें से अजय पीरामल के नेतृत्व वाली पीरामल इंटरप्राइजेज लिमिटेड और मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा अरुंधति भट्टाचार्य ने