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नई दिल्ली3 घंटे पहले
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गंगा एक बार फिर शर्मसार हुई है। वजह है कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गंगा में बही बेहिसाब लाशों की सरकारी अनदेखी। अनदेखी उस हकीकत की, जिसकी गवाह बनी थी मां गंगा। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान गंगा में तैरती मिलीं हजारों लाशों का हिसाब केंद्र सरकार के पास नहीं है।
TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सरकार से गंगा में कोरोना की दूसरी महामारी के दौरान तैरती मिली लाशों का डेटा मांगा। इसके जवाब में केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने राज्य सभा को बताया कि सरकार के पास ऐसा कोई भी डेटा मौजूद नहीं है।
खैर.. मौत के सवाल पर केंद्र सरकार कुछ भी दावे करे, लेकिन दैनिक भास्कर ने आज से 9 महीने पहले (14 मई 2021) उत्तर प्रदेश के 27 जिलों से एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी। करीब 1140 किलोमीटर के सफर में ही भास्कर की टीम को 2 हजार से ज्यादा शव गंगा नदी में तैरते हुए मिले थे। इस दौरान हमारे 30 रिपोर्टर्स ने उन जिलों की जानकारी जुटाई थी, जहां से गंगा नदी गुजरती है।
भास्कर की टीम ने बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, हापुड़, अलीगढ़, कासगंज, संभल, अमरोहा, बदांयू, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, फतेहपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और बलिया में गंगा किनारे घाट और गांवों का जायजा लिया था।
गंगा उत्तर प्रदेश के इन्हीं जिलों में 1140 किलोमीटर का सफर तय करते हुए बिहार में दाखिल होती है। इनमें कानपुर, कन्नौज, उन्नाव, गाजीपुर और बलिया में हालात बेहद खराब मिले थे, तो बाकी जिलों में हालात काबू में थे। इस खबर के बाद यह साफ हो चुका था कि सरकार जो भी दावे करे, लेकिन सच्चाई ठीक इसके उलट है। ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

गंगा उत्तराखंड से निकलकर उत्तर प्रदेश के इन्हीं जिलों में 1140 किलोमीटर का सफर तय करते हुए बिहार में दाखिल होती है। इसके बाद यह बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है।
विपक्ष के निशाने पर रहा केंद्र
कोरोना महामारी से निपटने को लेकर केंद्र सरकार पिछले दो साल से विपक्ष के निशाने पर है। TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान बिगड़े हालातों पर सोमवार को केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने जल शक्ति राज्य मंत्री से पूछा कि वे गंगा में फेंके गए अनुमानित शवों की संख्या बताएं। इसके साथ ही ब्रायन ने केंद्र सरकार से इन्हें हटाने और कोविड-19 प्रोटोकॉल के मुताबिक किए गए उपायों की जानकारी भी मांगी थी।

कानपुर के शेरेश्चवर घाट के पास आधे घंटे के सफर की दूरी में 400 से ज्यादा लाशें दफन थीं। इन्हें कुत्ते, चील और कौवे नोंचते नजर आए थे।
यूपी और बिहार में सबसे ज्यादा मामले बिश्वेश्वर टुडू ने जवाब में कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान लावारिस/अज्ञात, जले हुए या अधजली लाशें गंगा नदी और आस-पास के इलाकों में तैरते हुए पाए जाने की जानकारी मिली थी। ये मामले खास तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ जिलों में पाए गए थे।

उन्नाव में कोरोना काल में देश का सबसे बड़ा श्मशान बना। शुक्लागंज घाट और बक्सर घाट के पास करीब 900 से ज्यादा लाशें दफन थीं।
राज्यों को जारी की एडवाइजरी
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और जल शक्ति मंत्रालय ने संबंधित राज्य सरकारों से गंगा में मिली लाशों पर रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही गंगा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को लाशों के निस्तारण का आदेश दिया था। इसके लिए उत्तराखंड, झारखंड और बंगाल के मुख्य सचिवों को भी एडवाइजरी जारी की गई थी। बता दें कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई शव गंगा में तैरते हुए पाए गए थे, जिस पर जमकर राजनीति भी हुई थी।

कन्नौज के महादेवी गंगा घाट के पास करीब 350 से ज्यादा शव दफन मिले थे। प्रशासन इन पर मिट्टी डलवा रहा था, ताकि कोई देख न सके।
स्वच्छ गंगा मिशन के प्रमुख बोले- 300 से ज्यादा नहीं थी लाशें
स्वच्छ गंगा मिशन के प्रमुख राजीव रंजन मिश्रा ने अपनी नई किताब ‘गंगा: रीइमैजिनिंग, रीजूवनेटिंग, रीकनेक्टिंग’ में इस बात की जानकारी दी थी कि गंगा में लाशें फेंकी गई थीं। हालांकि उन्होंने यह भी लिखा था कि गंगा में मिली लाशों की कुल संख्या हजारों में नहीं थी बल्कि 300 से ज्यादा नहीं थी।

पूर्वांचल के गाजीपुर में रिपोर्ट के दौरान 280 लाशें मिलीं थीं। इसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। हालांकि सरकार इसे नकारती रही।
डेटा का रोना पुराना है
यह कोई पहला मौका नहीं है जब केंद्र सरकार ने किसी मामले पर डेटा न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ा हो। इससे पहले केंद्र ने कोरोना के दौरान हुए देशव्यापी लॉकडाउन में घर लौटते समय मारे गए मजदूरों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही थी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के बारे में कोई भी स्पष्ट आंकड़ा न होने का दावा किया था। इन मामलों को लेकर कांग्रेस और अन्य पार्टियां सरकार को हर मौके पर घेरती रहती हैं।
नई दिल्ली3 घंटे पहलेकॉपी लिंकवीडियोगंगा एक बार फिर शर्मसार हुई है। वजह है कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गंगा में बही बेहिसाब लाशों की सरकारी अनदेखी। अनदेखी उस हकीकत की, जिसकी गवाह बनी थी मां गंगा। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान गंगा में तैरती मिलीं हजारों लाशों का हिसाब केंद्र सरकार के पास नहीं है।TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सरकार से गंगा में कोरोना की दूसरी महामारी के दौरान तैरती मिली लाशों का डेटा मांगा। इसके जवाब में केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने राज्य सभा को बताया कि सरकार के पास ऐसा कोई भी डेटा मौजूद नहीं है।खैर.. मौत के सवाल पर केंद्र सरकार कुछ भी दावे करे, लेकिन दैनिक भास्कर ने आज से 9 महीने पहले (14 मई 2021) उत्तर प्रदेश के 27 जिलों से एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी। करीब 1140 किलोमीटर के सफर में ही भास्कर की टीम को 2 हजार से ज्यादा शव गंगा नदी में तैरते हुए मिले थे। इस दौरान हमारे 30 रिपोर्टर्स ने उन जिलों की जानकारी जुटाई थी, जहां से गंगा नदी गुजरती है।भास्कर की टीम ने बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, हापुड़, अलीगढ़, कासगंज, संभल, अमरोहा, बदांयू, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, फतेहपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और बलिया में गंगा किनारे घाट और गांवों का जायजा लिया था।गंगा उत्तर प्रदेश के इन्हीं जिलों में 1140 किलोमीटर का सफर तय करते हुए बिहार में दाखिल होती है। इनमें कानपुर, कन्नौज, उन्नाव, गाजीपुर और बलिया में हालात बेहद खराब मिले थे, तो बाकी जिलों में हालात काबू में थे। इस खबर के बाद यह साफ हो चुका था कि सरकार जो भी दावे करे, लेकिन सच्चाई ठीक इसके उलट है। ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…गंगा उत्तराखंड से निकलकर उत्तर प्रदेश के इन्हीं जिलों में 1140 किलोमीटर का सफर तय करते हुए बिहार में दाखिल होती है। इसके बाद यह बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है।विपक्ष के निशाने पर रहा केंद्रकोरोना महामारी से निपटने को लेकर केंद्र सरकार पिछले दो साल से विपक्ष के निशाने पर है। TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान बिगड़े हालातों पर सोमवार को केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने जल शक्ति राज्य मंत्री से पूछा कि वे गंगा में फेंके गए अनुमानित शवों की संख्या बताएं। इसके साथ ही ब्रायन ने केंद्र सरकार से इन्हें हटाने और कोविड-19 प्रोटोकॉल के मुताबिक किए गए उपायों की जानकारी भी मांगी थी।कानपुर के शेरेश्चवर घाट के पास आधे घंटे के सफर की दूरी में 400 से ज्यादा लाशें दफन थीं। इन्हें कुत्ते, चील और कौवे नोंचते नजर आए थे।यूपी और बिहार में सबसे ज्यादा मामले बिश्वेश्वर टुडू ने जवाब में कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान लावारिस/अज्ञात, जले हुए या अधजली लाशें गंगा नदी और आस-पास के इलाकों में तैरते हुए पाए जाने की जानकारी मिली थी। ये मामले खास तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ जिलों में पाए गए थे।उन्नाव में कोरोना काल में देश का सबसे बड़ा श्मशान बना। शुक्लागंज घाट और बक्सर घाट के पास करीब 900 से ज्यादा लाशें दफन थीं।राज्यों को जारी की एडवाइजरीकेंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और जल शक्ति मंत्रालय ने संबंधित राज्य सरकारों से गंगा में मिली लाशों पर रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही गंगा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को लाशों के निस्तारण का आदेश दिया था। इसके लिए उत्तराखंड, झारखंड और बंगाल के मुख्य सचिवों को भी एडवाइजरी जारी की गई थी। बता दें कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई शव गंगा में तैरते हुए पाए गए थे, जिस पर जमकर राजनीति भी हुई थी।कन्नौज के महादेवी गंगा घाट के पास करीब 350 से ज्यादा शव दफन मिले थे। प्रशासन इन पर मिट्टी डलवा रहा था, ताकि कोई देख न सके।स्वच्छ गंगा मिशन के प्रमुख बोले- 300 से ज्यादा नहीं थी लाशेंस्वच्छ गंगा मिशन के प्रमुख राजीव रंजन मिश्रा ने अपनी नई किताब ‘गंगा: रीइमैजिनिंग, रीजूवनेटिंग, रीकनेक्टिंग’ में इस बात की जानकारी दी थी कि गंगा में लाशें फेंकी गई थीं। हालांकि उन्होंने यह भी लिखा था कि गंगा में मिली लाशों की कुल संख्या हजारों में नहीं थी बल्कि 300 से ज्यादा नहीं थी।पूर्वांचल के गाजीपुर में रिपोर्ट के दौरान 280 लाशें मिलीं थीं। इसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। हालांकि सरकार इसे नकारती रही।डेटा का रोना पुराना हैयह कोई पहला मौका नहीं है जब केंद्र सरकार ने किसी मामले पर डेटा न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ा हो। इससे पहले केंद्र ने कोरोना के दौरान हुए देशव्यापी लॉकडाउन में घर लौटते समय मारे गए मजदूरों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही थी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के बारे में कोई भी स्पष्ट आंकड़ा न होने का दावा किया था। इन मामलों को लेकर कांग्रेस और अन्य पार्टियां सरकार को हर मौके पर घेरती रहती हैं।
