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चंडीगढ़35 मिनट पहले
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पंजाब में कांग्रेस के CM चेहरे की घोषणा आज लुधियाना में होगी। इसके लिए राहुल गांधी दाखा में 2 बजे वर्चुअल रैली के जरिए नाम की घोषणा करेंगे। कांग्रेस ने इसके लिए चार विकल्प रखे हैं। पहला मौजूदा सीएम चरणजीत चन्नी को ही आगे CM चेहरा बनाया जा सकता है। दूसरा विकल्प पंजाब कांग्रेस चीफ नवजोत सिद्धू हैं।
तीसरे विकल्प के तौर पर सरकार बनने के बाद चन्नी और सिद्धू को रोटेशन पर ढाई-ढाई साल के लिए सीएम की कुर्सी सौंपी जा सकती है। पहले कौन बनेगा, इसका फैसला चुनकर आए MLA करेंगे। चौथा विकल्प कोई चेहरा न देने का है। राहुल ने स्टेज पर चन्नी और सिद्धू के साथ सुनील जाखड़ को भी बुला रखा है। इनके जरिए संयुक्त लीडरशिप का ऐलान किया जा सकता है।

लुधियाना के मुल्लापुर दाखा में राहुल गांधी रैली को संबोधित करेंगे
सिद्धू और चन्नी ही ठोक रहे दावा
पंजाब कांग्रेस में CM चेहरे के लिए नवजोत सिद्धू और चरणजीत चन्नी दावा ठोक रहे हैं। सिद्धू का कहना है कि पंजाब अगर इस दुविधा से बाहर निकल जाएगा तो कांग्रेस को 60 से 70 सीटें मिलनी तय हैं। चरणजीत चन्नी सीएम की कुर्सी को अलादीन का चिराग बताते हुए 111 दिन के बाद पूरे 5 साल मांग रहे हैं। सुनील जाखड़ की तरफ से ऐसा कोई दावा नहीं किया जा रहा। वह चन्नी के पक्ष में हैं।
सांसद सीएम चेहरे के पक्ष में नहीं
कादियां से चुनाव लड़ रहे सांसद प्रताप सिंह बाजवा और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी सीएम चेहरे के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि सीएम चेहरे की घोषणा से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होगा। मौजूदा स्थिति में ही कांग्रेस को चुनाव लड़ना चाहिए।

कांग्रेस में सीएम कुर्सी की जंग हर बार रही लेकिन ऐसे हालात पहली बार
पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के वक्त सीएम कुर्सी की जंग हर बार रही। हालांकि नवजोत सिद्धू और चरणजीत चन्नी के बीच ऐसा घमासान पहली बार देखा जा रहा है। जिससे कांग्रेस की छवि बिगड़ रही है।
- 2002 : कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम की कुर्सी के सबसे बड़े दावेदार थे क्योंकि वह पंजाब कांग्रेस के प्रधान भी थे। उनके अलावा पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्ठल, प्रताप सिंह बाजवा, शमशेर दूलो इस कुर्सी पर दावा ठोक रहे थे। अंत में कैप्टन सीएम बने।
- 2007 : कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ प्रताप बाजवा और राजिंदर कौर भट्ठल दौड़ में थे। इस चुनाव में कांग्रेस हार गई। पंजाब में शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार बन गई।
- 2012 : कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ राजिंदर कौर भट्ठल, प्रताप बाजवा सीएम बनने की दौड़ में थी। तभी मनप्रीत बादल ने अकाली दल छोड़ पीपल पार्टी ऑफ पंजाब(PPP) बना ली। इससे ऐसा समीकरण बिगड़ा कि कांग्रेस पिछड़ गई और शिअद-भाजपा फिर सत्ता में आ गई।
- 2017 : कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में चुनाव लड़ा गया। चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने प्रचार का जिम्मा संभाला। पूरा प्रचार कैप्टन के ईर्द-गिर्द ही रहा। कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब रही।
Hindi NewsLocalPunjabCharanjit Channi Or Navjot Singh Sidhu; Rahul Gandhi Announce Congress CM Face In Ludhiana Todayचंडीगढ़35 मिनट पहलेकॉपी लिंकपंजाब में कांग्रेस के CM चेहरे की घोषणा आज लुधियाना में होगी। इसके लिए राहुल गांधी दाखा में 2 बजे वर्चुअल रैली के जरिए नाम की घोषणा करेंगे। कांग्रेस ने इसके लिए चार विकल्प रखे हैं। पहला मौजूदा सीएम चरणजीत चन्नी को ही आगे CM चेहरा बनाया जा सकता है। दूसरा विकल्प पंजाब कांग्रेस चीफ नवजोत सिद्धू हैं।तीसरे विकल्प के तौर पर सरकार बनने के बाद चन्नी और सिद्धू को रोटेशन पर ढाई-ढाई साल के लिए सीएम की कुर्सी सौंपी जा सकती है। पहले कौन बनेगा, इसका फैसला चुनकर आए MLA करेंगे। चौथा विकल्प कोई चेहरा न देने का है। राहुल ने स्टेज पर चन्नी और सिद्धू के साथ सुनील जाखड़ को भी बुला रखा है। इनके जरिए संयुक्त लीडरशिप का ऐलान किया जा सकता है।लुधियाना के मुल्लापुर दाखा में राहुल गांधी रैली को संबोधित करेंगेसिद्धू और चन्नी ही ठोक रहे दावापंजाब कांग्रेस में CM चेहरे के लिए नवजोत सिद्धू और चरणजीत चन्नी दावा ठोक रहे हैं। सिद्धू का कहना है कि पंजाब अगर इस दुविधा से बाहर निकल जाएगा तो कांग्रेस को 60 से 70 सीटें मिलनी तय हैं। चरणजीत चन्नी सीएम की कुर्सी को अलादीन का चिराग बताते हुए 111 दिन के बाद पूरे 5 साल मांग रहे हैं। सुनील जाखड़ की तरफ से ऐसा कोई दावा नहीं किया जा रहा। वह चन्नी के पक्ष में हैं।सांसद सीएम चेहरे के पक्ष में नहींकादियां से चुनाव लड़ रहे सांसद प्रताप सिंह बाजवा और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी सीएम चेहरे के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि सीएम चेहरे की घोषणा से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होगा। मौजूदा स्थिति में ही कांग्रेस को चुनाव लड़ना चाहिए।कांग्रेस में सीएम कुर्सी की जंग हर बार रही लेकिन ऐसे हालात पहली बारपंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के वक्त सीएम कुर्सी की जंग हर बार रही। हालांकि नवजोत सिद्धू और चरणजीत चन्नी के बीच ऐसा घमासान पहली बार देखा जा रहा है। जिससे कांग्रेस की छवि बिगड़ रही है।2002 : कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम की कुर्सी के सबसे बड़े दावेदार थे क्योंकि वह पंजाब कांग्रेस के प्रधान भी थे। उनके अलावा पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्ठल, प्रताप सिंह बाजवा, शमशेर दूलो इस कुर्सी पर दावा ठोक रहे थे। अंत में कैप्टन सीएम बने।2007 : कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ प्रताप बाजवा और राजिंदर कौर भट्ठल दौड़ में थे। इस चुनाव में कांग्रेस हार गई। पंजाब में शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार बन गई।2012 : कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ राजिंदर कौर भट्ठल, प्रताप बाजवा सीएम बनने की दौड़ में थी। तभी मनप्रीत बादल ने अकाली दल छोड़ पीपल पार्टी ऑफ पंजाब(PPP) बना ली। इससे ऐसा समीकरण बिगड़ा कि कांग्रेस पिछड़ गई और शिअद-भाजपा फिर सत्ता में आ गई।2017 : कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में चुनाव लड़ा गया। चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने प्रचार का जिम्मा संभाला। पूरा प्रचार कैप्टन के ईर्द-गिर्द ही रहा। कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब रही।
