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बगहाएक घंटा पहले
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कश्मीर में गैर कश्मीरी मजदूरों पर हो रहे हमले के बाद दहशत फैल गई है। स्थिति यह है कि दाे जून की रोटी की तलाश में यहां आए बाहरी राज्यों के लोग घाटी से भागने लगे हैं। 40 गैर-कश्मीरी मजदूरों का समूह मंगलवार को श्रीनगर रेलवे स्टेशन पर अपने राज्यों में वापस जाने के लिए इकट्ठा हुआ, जबकि अभी भी चौतरवा थाना स्थित सिकटौर गांव के तकरीबन 200 लोग कश्मीर के लजूरा में फंसे हुए हैं। इसमें ज्यादातर बिहारी हैं।
कश्मीर में फंसे एक मजदूर ने दैनिक भास्कर को फोन पर बताया कि हम वीडियो बनाकर भेजते हैं तो हमें मार देंगे। हमारे क्वार्टर को यहां लोकल लोग घेर रखा है। हम लोग काम कर रहे थे। इसी दौरान गाड़ी से कुछ लोग आए और दो साथियों पर गोली चला दी।
लजूरा में फंसे बिहार के दीना पटेल ने फोन पर बताया कि यहां पर काफी डर का माहौल बन गया है। 24 घंटे से डर की वजह से न तो किसी ने खाना खाया है। खौफ इस कदर है कि सो तक नहीं रहे हैं। डर लगा रहता है कि आतंकी कहीं से आ न जाएं। बता दें कि सोमवार को कश्मीर घाटी में दो बिहारी मजदूरों को आतंकियों ने गोली मार दी थी।
फोन पर बताया- हालात खराब हैं
बिहार के संतोष यादव ने फोन पर बताया कि उनके अलावा बेचू बैठा, सुरेश बैठा, राहुल पटेल, नंद किशोर पटेल आदि 200 लोग फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि सुबह सेना के जवान आए थे, लेकिन पॉकेट में एक भी रुपया नहीं है। यहां पर पैसा मिलने वाला है।
सभी मजदूरों का लगभग 3 लाख बकाया है जो शाम तक मिलेगा। संतोष यादव ने बताया कि हालात खराब हैं। गैर-कश्मीरी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है। हम इन परिस्थितियों में कश्मीर में और नहीं रह सकते।

मजदूरों का समूह मंगलवार को श्रीनगर रेलवे स्टेशन पर अपने राज्यों में वापस जाने के लिए इकट्ठा हुआ
फोन पर बताया- हालात खराब हैं
बिहार के संतोष यादव ने फोन पर बताया कि उनके अलावा बेचू बैठा, सुरेश बैठा, राहुल पटेल, नंद किशोर पटेल आदि 200 लोग फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि सुबह सेना के जवान आए थे, लेकिन पॉकेट में एक भी रुपया नहीं है। यहां पर पैसा मिलने वाला है।
सभी मजदूरों का लगभग 3 लाख बकाया है जो शाम तक मिलेगा। संतोष यादव ने बताया कि हालात खराब हैं। गैर-कश्मीरी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है। हम इन परिस्थितियों में कश्मीर में और नहीं रह सकते।
कश्मीर छोड़ने का ले रहे हैं फैसला
नंद किशोर पटेल ने बताया कि कुछ लोग हमसे कहते हैं कि रुक जाओ, लेकिन हम कश्मीर में कैसे रह सकते हैं। जब हमे अपने कमरों में भी अपनी जान जाने का खतरा है। अगर यह समस्या खत्म हो जाती है और शांति बहाल हो जाती है, तो हम कश्मीर लौटने के बारे में सोचेंगे।’
घर के काम और सेब के बागान में काम करने वाले हैं मजदूर
चौतरवा थाना क्षेत्र के सिकटौर और आसपास के गांव से लगभग 250 लोग कश्मीर गए हैं। सभी लोग दैनिक मजदूरी पर काम करने के लिए गए हैं। फोन पर मजदूरों ने बताया कि सेब के बागान में खाद डालने और निराई करने का काम करते हैं। वहीं कुछ मजदूर घर बनाने के काम में लगे हुए थे, लेकिन सोमवार के घटी घटना के बाद सभी घर आना चाहते हैं।
पुलवामा में आतंकियों ने दो बिहारी को मारी गोली, दोनों काे घायल हालत में ले जाया गया अस्पताल
बगहाएक घंटा पहलेकॉपी लिंकवीडियोकश्मीर में गैर कश्मीरी मजदूरों पर हो रहे हमले के बाद दहशत फैल गई है। स्थिति यह है कि दाे जून की रोटी की तलाश में यहां आए बाहरी राज्यों के लोग घाटी से भागने लगे हैं। 40 गैर-कश्मीरी मजदूरों का समूह मंगलवार को श्रीनगर रेलवे स्टेशन पर अपने राज्यों में वापस जाने के लिए इकट्ठा हुआ, जबकि अभी भी चौतरवा थाना स्थित सिकटौर गांव के तकरीबन 200 लोग कश्मीर के लजूरा में फंसे हुए हैं। इसमें ज्यादातर बिहारी हैं।कश्मीर में फंसे एक मजदूर ने दैनिक भास्कर को फोन पर बताया कि हम वीडियो बनाकर भेजते हैं तो हमें मार देंगे। हमारे क्वार्टर को यहां लोकल लोग घेर रखा है। हम लोग काम कर रहे थे। इसी दौरान गाड़ी से कुछ लोग आए और दो साथियों पर गोली चला दी।लजूरा में फंसे बिहार के दीना पटेल ने फोन पर बताया कि यहां पर काफी डर का माहौल बन गया है। 24 घंटे से डर की वजह से न तो किसी ने खाना खाया है। खौफ इस कदर है कि सो तक नहीं रहे हैं। डर लगा रहता है कि आतंकी कहीं से आ न जाएं। बता दें कि सोमवार को कश्मीर घाटी में दो बिहारी मजदूरों को आतंकियों ने गोली मार दी थी।फोन पर बताया- हालात खराब हैंबिहार के संतोष यादव ने फोन पर बताया कि उनके अलावा बेचू बैठा, सुरेश बैठा, राहुल पटेल, नंद किशोर पटेल आदि 200 लोग फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि सुबह सेना के जवान आए थे, लेकिन पॉकेट में एक भी रुपया नहीं है। यहां पर पैसा मिलने वाला है।सभी मजदूरों का लगभग 3 लाख बकाया है जो शाम तक मिलेगा। संतोष यादव ने बताया कि हालात खराब हैं। गैर-कश्मीरी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है। हम इन परिस्थितियों में कश्मीर में और नहीं रह सकते।मजदूरों का समूह मंगलवार को श्रीनगर रेलवे स्टेशन पर अपने राज्यों में वापस जाने के लिए इकट्ठा हुआफोन पर बताया- हालात खराब हैंबिहार के संतोष यादव ने फोन पर बताया कि उनके अलावा बेचू बैठा, सुरेश बैठा, राहुल पटेल, नंद किशोर पटेल आदि 200 लोग फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि सुबह सेना के जवान आए थे, लेकिन पॉकेट में एक भी रुपया नहीं है। यहां पर पैसा मिलने वाला है।सभी मजदूरों का लगभग 3 लाख बकाया है जो शाम तक मिलेगा। संतोष यादव ने बताया कि हालात खराब हैं। गैर-कश्मीरी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है। हम इन परिस्थितियों में कश्मीर में और नहीं रह सकते।कश्मीर छोड़ने का ले रहे हैं फैसलानंद किशोर पटेल ने बताया कि कुछ लोग हमसे कहते हैं कि रुक जाओ, लेकिन हम कश्मीर में कैसे रह सकते हैं। जब हमे अपने कमरों में भी अपनी जान जाने का खतरा है। अगर यह समस्या खत्म हो जाती है और शांति बहाल हो जाती है, तो हम कश्मीर लौटने के बारे में सोचेंगे।’घर के काम और सेब के बागान में काम करने वाले हैं मजदूरचौतरवा थाना क्षेत्र के सिकटौर और आसपास के गांव से लगभग 250 लोग कश्मीर गए हैं। सभी लोग दैनिक मजदूरी पर काम करने के लिए गए हैं। फोन पर मजदूरों ने बताया कि सेब के बागान में खाद डालने और निराई करने का काम करते हैं। वहीं कुछ मजदूर घर बनाने के काम में लगे हुए थे, लेकिन सोमवार के घटी घटना के बाद सभी घर आना चाहते हैं।पुलवामा में आतंकियों ने दो बिहारी को मारी गोली, दोनों काे घायल हालत में ले जाया गया अस्पताल