मंत्री-विधायकों का आयकर मामला:हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार को दिया नोटिस; याचिकाकर्ता ने सरकारी खजाने से आयकर भरने पर जताई आपत्ति, असंवैधानिक घोषित करने की प्रार्थना

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शिमला6 घंटे पहले

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हिमाचल हाईकोर्ट। - Dainik Bhaskar

हिमाचल हाईकोर्ट।

हिमाचल में सरकारी खजाने से मंत्रियों और विधायकों के आयकर भुगतान का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। यशपाल राणा व अन्य द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते वक्त मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस बाबत जवाब तलब किया है।

याचिकाकर्ता ने सरकारी खजाने से माननीय के आयकर भुगतान को असंवैधानिक करार देने की अपील की है, क्योंकि देश का हर एक टैक्स पेयर स्वयं अपना आयकर भरता है, लेकिन मंत्री और विधायक ही ऐसी क्लास है जिनका इनकम टैक्स सरकार भरती है। उस इनकम टैक्स को आथोराइज करने के लिए विधायिका ने एक एक्ट बना रखा है, जिससे इन्हें अथॉरिटी मिलती है कि इनकी आय पर टैक्स सरकार चुकता करें।

हिमाचल हाईकोर्ट।

हिमाचल हाईकोर्ट।

5 प्रदेशों में विधायक खुद नहीं भरते आयकर
देश में ऐसे पांच राज्य है जहां मंत्री और विधायकों का इनकम टैक्स सरकार द्वारा भरा जाता है। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश शामिल है, जबकि अन्य सभी राज्य में विधायक खुद आयकर भरते हैं। लिहाजा याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि प्रदेश में भी माननीय अपना आयकर खुद भरें। याचिकाकर्ता ने कुछ विधायक महेंद्र सिंह, मुकेश अग्निहोत्री, राकेश सिंघा व एक अन्य को भी पार्टी बनाया है,जो पार्टी व विभिन्न विधायकों को रिप्रजेंट कर रहे हैं।

2018-19 में माननीय के आयकर पर 1.89 करोड़ खर्च

याचिकाकर्ता के मुताबिक हिमाचल में 2018-19 में मंत्री व विधायकों के आयकर पर सरकारी खजाने से 1 करोड़ 89 लाख 30,873 रुपए और 2019-20 में 1 करोड़ 78 लाख 12 हजार 311 रुपए खर्च किए गए, जबकि यह यह पैसा विधायकों को आयकर के रूप में देना था।

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