मतुआ धर्म महा मेला में बोले PM मोदी:राजनीतिक विरोध के लिए हिंसा ठीक नहीं, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज जरूर उठाएं

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कोलकत्ता6 घंटे पहले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के श्रीधाम ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय की प्रख्यात हस्ति श्री श्री हरिचांद ठाकुर की 211 जयंती पर आयोजित ‘मतुआ धर्म महामेला’ को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संबोधित किया।

पीएम ने इशारों-इशारों में बंगाल हिंसा का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण अगर किसी को हिंसा से डरा-धमकाकर कोई रोकता है तो वो दूसरे के अधिकारों का हनन है। ये हमारा कर्तव्य है कि हिंसा, अराजकता की मानसिकता अगर समाज में कहीं भी है तो उसका विरोध किया जाए।

करप्शन खत्म करने के लिए जागरूक हो समाज
पीएम ने कहा कि आज मैं मतुआ समाज के सभी साथियों से भी कुछ आग्रह करना चाहूंगा। सिस्टम से करप्शन को मिटाने के लिए समाज के स्तर पर आपको जागरूकता को और अधिक बढ़ाना है। अगर कहीं भी किसी का उत्पीड़न हो रहा हो, तो वहां जरूर आवाज उठाएं। आप जब भी कोई काम करें तो एक बार ये जरूर सोच लें कि क्या यह राष्ट्रहित के लिए है। देश के हर नागरिक के लिए राष्ट्रहित सबसे ऊपर होना चाहिए।

पीएम ने कहा कि शांतनु जी के सहयोग से ये परंपरा इस समय और समृद्ध हो रही है।

पीएम ने कहा कि शांतनु जी के सहयोग से ये परंपरा इस समय और समृद्ध हो रही है।

पीएम ने श्री श्री हरिचांद ठाकुर को याद किया
पीएम मोदी ने अपना संबोधन शुरू करते हुए श्री श्री हरिचांद ठाकुर को याद किया। उन्होंने कहा कि ये मतुआ धर्मियो महामेला, मतुआ परंपरा को नमन करने का अवसर है। ये उन मूल्यों के प्रति आस्था व्यक्त करने का अवसर है, जिनकी नींव श्री श्री हरिचांद ठाकुर जी ने रखी थी। इसे गुरुचांद ठाकुर जी और बोरो मां ने सशक्त किया। आज शांतनु जी के सहयोग से ये परंपरा इस समय और समृद्ध हो रही है।

बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ का जिक्र किया
प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हम अक्सर कहते हैं कि हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता महान है। ये महान इसलिए है क्योंकि इसमें निरंतरता है, ये प्रवाहमान है। इसमें खुद को सशक्त करने की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है।

जब समाज में बंटवारे की कोशिश होती है, जब भाषा और क्षेत्र के आधार पर भेद करने की प्रवृत्ति को देखते हैं तो श्री श्री हरिचांद ठाकुर जी का जीवन, उनका दर्शन और महत्वपूर्ण हो जाता है। मतुआ धर्मियो महामेला एक भारत श्रेष्ठ भारत के मूल्यों को भी सशक्त करने वाला है।

कौन हैं श्री श्री हरिचांद ठाकुर
श्री श्री हरिचांद ठाकुर को देश की आजादी से पहले के दौर में अविभाजित बंगाल में उत्पीड़न, समाज के दबे-कुचले और बुनियादी सुविधाओं से वंचित लोगों की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनके द्वारा शुरू किया गया सामाजिक एवं धार्मिक आंदोलन वर्ष 1860 में ओरकांडी (अब बांग्लादेश में) से शुरू हुआ था।

मतुआ मेले में देशभर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

मतुआ मेले में देशभर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

इसके बाद ही मतुआ धर्म की स्थापना हुई थी। इस मेले में असम, कर्नाटक और उत्तराखंड से लोग शामिल होते हैं। असम और उत्तर पूर्व राज्यों में भी मतुआ समुदाय के काफी लोग रहते हैं। कार्यक्रम को देखते हुए रेलवे ने पहले ही विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की थी।

5 अप्रैल तक चलेगा यह मेला
इस मेले का आयोजन श्री श्री हरिचांद ठाकुर की 211 वीं जयंती के मौके पर हो रहा है। मतुआ धर्म महा मेला 2022 अखिल भारतीय मतुआ महासंघ की ओर से आयोजित किया जा रहा है। यह मेला 29 मार्च से शुरू होगा और 5 अप्रैल तक चलेगा।

कोलकत्ता6 घंटे पहलेकॉपी लिंकप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के श्रीधाम ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय की प्रख्यात हस्ति श्री श्री हरिचांद ठाकुर की 211 जयंती पर आयोजित ‘मतुआ धर्म महामेला’ को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संबोधित किया।पीएम ने इशारों-इशारों में बंगाल हिंसा का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण अगर किसी को हिंसा से डरा-धमकाकर कोई रोकता है तो वो दूसरे के अधिकारों का हनन है। ये हमारा कर्तव्य है कि हिंसा, अराजकता की मानसिकता अगर समाज में कहीं भी है तो उसका विरोध किया जाए।करप्शन खत्म करने के लिए जागरूक हो समाजपीएम ने कहा कि आज मैं मतुआ समाज के सभी साथियों से भी कुछ आग्रह करना चाहूंगा। सिस्टम से करप्शन को मिटाने के लिए समाज के स्तर पर आपको जागरूकता को और अधिक बढ़ाना है। अगर कहीं भी किसी का उत्पीड़न हो रहा हो, तो वहां जरूर आवाज उठाएं। आप जब भी कोई काम करें तो एक बार ये जरूर सोच लें कि क्या यह राष्ट्रहित के लिए है। देश के हर नागरिक के लिए राष्ट्रहित सबसे ऊपर होना चाहिए।पीएम ने कहा कि शांतनु जी के सहयोग से ये परंपरा इस समय और समृद्ध हो रही है।पीएम ने श्री श्री हरिचांद ठाकुर को याद कियापीएम मोदी ने अपना संबोधन शुरू करते हुए श्री श्री हरिचांद ठाकुर को याद किया। उन्होंने कहा कि ये मतुआ धर्मियो महामेला, मतुआ परंपरा को नमन करने का अवसर है। ये उन मूल्यों के प्रति आस्था व्यक्त करने का अवसर है, जिनकी नींव श्री श्री हरिचांद ठाकुर जी ने रखी थी। इसे गुरुचांद ठाकुर जी और बोरो मां ने सशक्त किया। आज शांतनु जी के सहयोग से ये परंपरा इस समय और समृद्ध हो रही है।बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ का जिक्र कियाप्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हम अक्सर कहते हैं कि हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता महान है। ये महान इसलिए है क्योंकि इसमें निरंतरता है, ये प्रवाहमान है। इसमें खुद को सशक्त करने की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है।जब समाज में बंटवारे की कोशिश होती है, जब भाषा और क्षेत्र के आधार पर भेद करने की प्रवृत्ति को देखते हैं तो श्री श्री हरिचांद ठाकुर जी का जीवन, उनका दर्शन और महत्वपूर्ण हो जाता है। मतुआ धर्मियो महामेला एक भारत श्रेष्ठ भारत के मूल्यों को भी सशक्त करने वाला है।कौन हैं श्री श्री हरिचांद ठाकुरश्री श्री हरिचांद ठाकुर को देश की आजादी से पहले के दौर में अविभाजित बंगाल में उत्पीड़न, समाज के दबे-कुचले और बुनियादी सुविधाओं से वंचित लोगों की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनके द्वारा शुरू किया गया सामाजिक एवं धार्मिक आंदोलन वर्ष 1860 में ओरकांडी (अब बांग्लादेश में) से शुरू हुआ था।मतुआ मेले में देशभर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।इसके बाद ही मतुआ धर्म की स्थापना हुई थी। इस मेले में असम, कर्नाटक और उत्तराखंड से लोग शामिल होते हैं। असम और उत्तर पूर्व राज्यों में भी मतुआ समुदाय के काफी लोग रहते हैं। कार्यक्रम को देखते हुए रेलवे ने पहले ही विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की थी।5 अप्रैल तक चलेगा यह मेलाइस मेले का आयोजन श्री श्री हरिचांद ठाकुर की 211 वीं जयंती के मौके पर हो रहा है। मतुआ धर्म महा मेला 2022 अखिल भारतीय मतुआ महासंघ की ओर से आयोजित किया जा रहा है। यह मेला 29 मार्च से शुरू होगा और 5 अप्रैल तक चलेगा।

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