रूस-यूक्रेन जंग के बीच भारत पर दबाव:अब रूस से हथियार खरीदने में हो सकती है मुश्किल, अमेरिका लगा सकता है सख्त पाबंदियां

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वॉशिंगटन8 घंटे पहले

रूस-यूक्रेन की जंग 9वें दिन भी जारी है। यूक्रेन पर रूस के हमले पर कई देश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ हो गए हैं। रूस पर कई तरह की पाबंदियां भी लगाई गई हैं। भारत साफ तौर पर हमले को गलत ठहराने से बच रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका और यूरोप रूस के सख्त खिलाफ हो गए हैं। माना जा रहा है कि रूस के खिलाफ पाबंदियों का असर भारत पर भी पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका उन देशों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करेगा जो रूस से हथियार खरीदते हैं। जाहिर है इससे भारत पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

अमेरिकी अखबार ‘द हिल’ के मुताबिक, बाइडेन प्रशासन भारत पर रूस से हथियार खरीदने पर सख्त पाबंदियां लागू करने पर विचार कर रहा है। साउथ एशियाई मामलों के असिस्‍टेंट स्‍टेट सेक्रेटरी डोनाल्ड लू ने कहा – हम यह समझने की कोशिश कर रहें कि जो तकनीक हम भारत के साथ शेयर कर रहे हैं, उसका फायदा रूस न उठा ले, क्योंकि भारत-रूस के रिश्ते अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार यूक्रेन पर रूस के हमले के खिलाफ भारत को अपना रुख साफ करने के लिए कह रहा है। भारतीय छात्र की मौत के बाद भारत का ओपिनियन कुछ बदला भी है।

भारत को होगा नुकसान
वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों के 65% हथियार रूस से आते हैं और भारत इनके कल-पुर्जों के लिए रूस पर निर्भर है। अगर भारत पर हथियारों को खरीदने को लेकर पाबंदियां लगाई गईं तो भारत को नुकसान हो सकता है, क्योंकि गलवान में हुए भारत-चीन झड़प के बाद, भारत को चीन से निपटने के लिए रूस के डिप्लोमेटिक सपोर्ट और हथियारों की जरूरत है।

वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों के 65% हथियार रूस से आते हैं।

वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों के 65% हथियार रूस से आते हैं।

रूस-भारत के रिश्ते
रूस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई फैसलों का समर्थन किया है। हाल ही में रूस ने कश्मीर विवाद को लेकर लिए गए पीएम के फैसले का भी समर्थन किया था। यही कारण है कि मोदी खुले तौर पर रूस का विरोध नहीं कर रहे हैं।

UNSC में भारत का रुख
भारत, यूक्रेन में रूस के हमले की निंदा करने वाले सभी प्रस्तावों को लेकर UNSC में हुई वोटिंग के दौरान भी गैरहाजिर रहा। इस पर विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा था – हम UN में सावधानी से फैसला लेना चाहते हैं। हम रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर सोचेंगे और अपने सर्वोत्तम हित में निर्णय लेंगे।

चीन से मुकाबला करने में भारत और अमेरिका एक साथ हैं।

चीन से मुकाबला करने में भारत और अमेरिका एक साथ हैं।

भारत-अमेरिका के रिश्ते
रूस-यूक्रेन मुद्दे पर पक्ष नहीं रखने पर मोदी सरकार को विश्वास है कि अमेरिका इसे अलग तरह से देखेगा, क्योंकि चीन से मुकाबला करने में भारत, अमेरिका का भागीदार है। भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वॉडर्लैटरल सिक्योरिटी डॉयलॉग यानी QUAD का हिस्सा है। क्वाड को चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के उद्देश्य से बनाया गया।

Hindi NewsNationalIndia Defence Deals Vs Ukraine War; America May Impose New Restrictions On Russiaवॉशिंगटन8 घंटे पहलेकॉपी लिंकवीडियोरूस-यूक्रेन की जंग 9वें दिन भी जारी है। यूक्रेन पर रूस के हमले पर कई देश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ हो गए हैं। रूस पर कई तरह की पाबंदियां भी लगाई गई हैं। भारत साफ तौर पर हमले को गलत ठहराने से बच रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका और यूरोप रूस के सख्त खिलाफ हो गए हैं। माना जा रहा है कि रूस के खिलाफ पाबंदियों का असर भारत पर भी पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका उन देशों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करेगा जो रूस से हथियार खरीदते हैं। जाहिर है इससे भारत पर भी गंभीर असर पड़ेगा।अमेरिकी अखबार ‘द हिल’ के मुताबिक, बाइडेन प्रशासन भारत पर रूस से हथियार खरीदने पर सख्त पाबंदियां लागू करने पर विचार कर रहा है। साउथ एशियाई मामलों के असिस्‍टेंट स्‍टेट सेक्रेटरी डोनाल्ड लू ने कहा – हम यह समझने की कोशिश कर रहें कि जो तकनीक हम भारत के साथ शेयर कर रहे हैं, उसका फायदा रूस न उठा ले, क्योंकि भारत-रूस के रिश्ते अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार यूक्रेन पर रूस के हमले के खिलाफ भारत को अपना रुख साफ करने के लिए कह रहा है। भारतीय छात्र की मौत के बाद भारत का ओपिनियन कुछ बदला भी है।भारत को होगा नुकसानवर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों के 65% हथियार रूस से आते हैं और भारत इनके कल-पुर्जों के लिए रूस पर निर्भर है। अगर भारत पर हथियारों को खरीदने को लेकर पाबंदियां लगाई गईं तो भारत को नुकसान हो सकता है, क्योंकि गलवान में हुए भारत-चीन झड़प के बाद, भारत को चीन से निपटने के लिए रूस के डिप्लोमेटिक सपोर्ट और हथियारों की जरूरत है।वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों के 65% हथियार रूस से आते हैं।रूस-भारत के रिश्तेरूस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई फैसलों का समर्थन किया है। हाल ही में रूस ने कश्मीर विवाद को लेकर लिए गए पीएम के फैसले का भी समर्थन किया था। यही कारण है कि मोदी खुले तौर पर रूस का विरोध नहीं कर रहे हैं।UNSC में भारत का रुखभारत, यूक्रेन में रूस के हमले की निंदा करने वाले सभी प्रस्तावों को लेकर UNSC में हुई वोटिंग के दौरान भी गैरहाजिर रहा। इस पर विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा था – हम UN में सावधानी से फैसला लेना चाहते हैं। हम रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर सोचेंगे और अपने सर्वोत्तम हित में निर्णय लेंगे।चीन से मुकाबला करने में भारत और अमेरिका एक साथ हैं।भारत-अमेरिका के रिश्तेरूस-यूक्रेन मुद्दे पर पक्ष नहीं रखने पर मोदी सरकार को विश्वास है कि अमेरिका इसे अलग तरह से देखेगा, क्योंकि चीन से मुकाबला करने में भारत, अमेरिका का भागीदार है। भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वॉडर्लैटरल सिक्योरिटी डॉयलॉग यानी QUAD का हिस्सा है। क्वाड को चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के उद्देश्य से बनाया गया।

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