हिमाचल में सूखे की चपेट में सेब:जून में झड़ने वाले दाने अप्रैल में गिरने से बागवानों की चिंता बढ़ी, कम ऊंचे क्षेत्रों में ज्यादा खतरा

news image

  • Hindi News
  • Local
  • Himachal
  • Shimla
  • Drought Like Situation In Himachal, Crisis Looming Over Apple Crop, Drooping Due To Drying Of Moisture, Grower Worried, Apple Grower.

शिमला5 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

हिमाचल प्रदेश में “लाल सोने’ के नाम से मशहूर सेब की खेती पर संकट के बादल मंडराने लगे है। भयंकर सूखे की वजह से समुद्र तल से 6000 फीट या इससे कम ऊंचे क्षेत्रों में सेब की ड्रॉपिंग शुरू हो गई है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है, क्योंकि राज्य में अढ़ाई लाख से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी सेब पर निर्भर रहती है। आमतौर पर जून में ड्रॉपिंग हुआ करती थी, लेकिन इस साल अप्रैल महीने में ही सेब की दाने झड़ने लगे है। सूखे के कारण जमीन में दरारें पड़नी शुरू हो गई है।

बगीचों में ड्रॉपिंग शुरू: बिष्ट

PGA यानी प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र बिष्ट ने बताया कि उनका एक बगीचा 5000 फीट की ऊंचाई पर है। वहां बहुत ज्यादा ड्रॉपिंग हो रही है। बगीचे में नमी सूखने सेब की फसल स्ट्रेस में आ गई है। उन्होंने बताया कि 6000 फीट तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की फसल को काफी नुकसान हो चुका है। इससे अधिक ऊंचे क्षेत्रों में भी खासकर छोटे पौधों पर सूखे की मार पड़नी शुरू हो गई है।

कोटखाई के रावला क्यार में सेब के पौधे में मुर्झाएं हुए फूल।

कोटखाई के रावला क्यार में सेब के पौधे में मुर्झाएं हुए फूल।

7000 फीट की ऊंचाई पर भी मुर्झाने लगे सेब के दाने: आतिश

कोटखाई की रावला क्यार पंचायत के उप प्रधान एवं बागवान आतिश चौहान ने बताया कि उनका बगीचा 7000 फीट से भी अधिक ऊंचाई पर है। फिर भी नमी पूरी तरह सूख चुकी है। सेब के जो दाने लगे थें, वह मुर्झाने और झड़ने शुरू हो गया है।

इससे पहले कभी नहीं देखा इतना भयंकर सूखा: नरेश

कोटखाई के बागवान नरेश ने बताया कि सूखे के कारण इस बार सेब की फ्लावरिंग ही नहीं हो पाई है। जो फूल लगे थे वह सूखे के कारण ड्रॉप हो गए हैं। उन्होंने बताया कि सूखे से स्थिति गंभीर होती जा रही है। इससे पहले कभी भी मार्च और अप्रैल में इतना गंभीर सूखा नहीं देखा है।

रोहड़ू में सूखे के कारण ड्रॉप सेब और फूल।

रोहड़ू में सूखे के कारण ड्रॉप सेब और फूल।

40 दिनों में 96% कम हुई बारिश

प्रदेश में बीते 40 दिनों से तापमान सामान्य से 6 से 11 डिग्री सेल्सियस ज्यादा चल रहा है। इसका असर सीधे तौर पर सेब पर पड़ रहा है। मौसम विभाग की माने तो प्रदेश में एक मार्च से 12 अप्रैल के बीच सामान्य 135.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार मात्र 5.4 मिलीमीटर (96 फीसदी कम) बारिश ही हुई है।

अप्रैल के 12 दिनों में 100% कम बरसे मेघ

प्रदेश में एक से 12 अप्रैल तक भी 24.7 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है, लेकिन इस बार ज्यादातर क्षेत्रों में पानी की बूंद तक नहीं गिरी है। यानी 100% की कमी नजर आ रही है। इससे बागवानों के समक्ष भयंकर सूखे जैसी स्थिति अप्रैल में ही पनपनी शुरू हो गई है।

Hindi NewsLocalHimachalShimlaDrought Like Situation In Himachal, Crisis Looming Over Apple Crop, Drooping Due To Drying Of Moisture, Grower Worried, Apple Grower.शिमला5 घंटे पहलेकॉपी लिंकहिमाचल प्रदेश में “लाल सोने’ के नाम से मशहूर सेब की खेती पर संकट के बादल मंडराने लगे है। भयंकर सूखे की वजह से समुद्र तल से 6000 फीट या इससे कम ऊंचे क्षेत्रों में सेब की ड्रॉपिंग शुरू हो गई है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है, क्योंकि राज्य में अढ़ाई लाख से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी सेब पर निर्भर रहती है। आमतौर पर जून में ड्रॉपिंग हुआ करती थी, लेकिन इस साल अप्रैल महीने में ही सेब की दाने झड़ने लगे है। सूखे के कारण जमीन में दरारें पड़नी शुरू हो गई है।बगीचों में ड्रॉपिंग शुरू: बिष्टPGA यानी प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र बिष्ट ने बताया कि उनका एक बगीचा 5000 फीट की ऊंचाई पर है। वहां बहुत ज्यादा ड्रॉपिंग हो रही है। बगीचे में नमी सूखने सेब की फसल स्ट्रेस में आ गई है। उन्होंने बताया कि 6000 फीट तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की फसल को काफी नुकसान हो चुका है। इससे अधिक ऊंचे क्षेत्रों में भी खासकर छोटे पौधों पर सूखे की मार पड़नी शुरू हो गई है।कोटखाई के रावला क्यार में सेब के पौधे में मुर्झाएं हुए फूल।7000 फीट की ऊंचाई पर भी मुर्झाने लगे सेब के दाने: आतिशकोटखाई की रावला क्यार पंचायत के उप प्रधान एवं बागवान आतिश चौहान ने बताया कि उनका बगीचा 7000 फीट से भी अधिक ऊंचाई पर है। फिर भी नमी पूरी तरह सूख चुकी है। सेब के जो दाने लगे थें, वह मुर्झाने और झड़ने शुरू हो गया है।इससे पहले कभी नहीं देखा इतना भयंकर सूखा: नरेशकोटखाई के बागवान नरेश ने बताया कि सूखे के कारण इस बार सेब की फ्लावरिंग ही नहीं हो पाई है। जो फूल लगे थे वह सूखे के कारण ड्रॉप हो गए हैं। उन्होंने बताया कि सूखे से स्थिति गंभीर होती जा रही है। इससे पहले कभी भी मार्च और अप्रैल में इतना गंभीर सूखा नहीं देखा है।रोहड़ू में सूखे के कारण ड्रॉप सेब और फूल।40 दिनों में 96% कम हुई बारिशप्रदेश में बीते 40 दिनों से तापमान सामान्य से 6 से 11 डिग्री सेल्सियस ज्यादा चल रहा है। इसका असर सीधे तौर पर सेब पर पड़ रहा है। मौसम विभाग की माने तो प्रदेश में एक मार्च से 12 अप्रैल के बीच सामान्य 135.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार मात्र 5.4 मिलीमीटर (96 फीसदी कम) बारिश ही हुई है।अप्रैल के 12 दिनों में 100% कम बरसे मेघप्रदेश में एक से 12 अप्रैल तक भी 24.7 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है, लेकिन इस बार ज्यादातर क्षेत्रों में पानी की बूंद तक नहीं गिरी है। यानी 100% की कमी नजर आ रही है। इससे बागवानों के समक्ष भयंकर सूखे जैसी स्थिति अप्रैल में ही पनपनी शुरू हो गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *