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- Preparations To Get 16 Thousand Medical Students Returned From Ukraine In Medical Colleges Of The Country, The Central Government Is Looking For A Way
नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: पवन कुमार मिश्र
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रेलवे स्टेशन पर भीड़।
रूस-यूक्रेन युद्ध से संकट में फंसे करीब 16 हजार भारतीय मेडिकल छात्रों को भारत के कॉलेजों में दाखिला दिलाने की तैयारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि संभव है कि शुक्रवार को इस मुद्दे पर अहम बैठक हो सकती है। दरअसल सरकार चाहती है कि यूक्रेन से लौटे इन छात्रों की पढ़ाई पर असर न हो। इसके लिए केंद्र सरकार फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट रेगुलेशन (एफएमजीएल) एक्ट में बदलाव पर विचार कर रही है।
इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को एक चिट्ठी लिखी जा रही है, जिसमें कहा जाएगा कि एफएमजीएल रेगुलेशन एक्ट-2021 में बदलाव किया जाए ताकि बाहर से आने वाले स्टूडेंट्स को दाखिला मिल सके। अभी तक फॉरेन मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने वाले छात्रों को कोर्स की पूरी अवधि के अलावा ट्रेनिंग और इंटर्नशिप भारत सेे बाहर ही करनी होती है। यूक्रेन में 6 साल में एमबीबीएस होता है। फिर 2 साल इंटर्नशिप होती है। ऐसे में पढ़ाई बाधित हुई तो हजारों बच्चों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।
छात्रों को निजी व डीम्ड कॉलेज में दे सकते हैं एडमिशन
यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों के दाखिले का रास्ता कैसे निकलेगा?
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भारत के किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए उसी वर्ष नीट परीक्षा पास करनी होती है जबकि भारत के बाहर के मेडिकल कॉलेज में नीट परीक्षा पास करने के तीन वर्ष के अंदर कभी भी दाखिला ले सकते हैं। विदेशों से जितने भी मेडिकल छात्र देश में आ रहे हैं उनमें ज्यादातर एमबीबीएस स्टूडेंट्स ही हैं।
इन छात्रों को क्या सरकारी कॉलेज में एडमिशन मिल सकता है?
फॉरेन मेडिकल छात्रों को सरकारी कॉलेज में एडमिशन की संभावना नहीं। निजी, डीम्ड कॉलेज में दाखिला मिल सकता है।
इन छात्रों के पास ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प है या नहीं?
नहीं, क्योंकि यूक्रेन में इंफ्रास्ट्रक्चर इस हद तक तबाह हो चुका है कि ऑनलाइन पढ़ाई कराना अभी मुमकिन ही नहीं है।
कोरोनाकाल में चीन से लौटे मेडिकल छात्रों को भी लाभ होगा क्या?
बिल्कुल। चीन और यूक्रेन से लौटे करीब 25 हजार छात्रों को एफएमजीएल एक्ट में बदलाव का लाभ मिल सकता है।
क्रीमिया युद्ध के समय मेडिकल छात्रों ने क्या विकल्प अपनाए थे ?
2014 में दो कॉलेज वार जोन एरिया में आए थे। तब यहां के कुछ बच्चों ने रूस और कुछ ने यूक्रेन में ट्रांसफर ले लिया था।
खारकीव; हमले के बाद देश छोड़ने का अलर्ट, रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़
रूस के ताबड़तोड़ मिसाइल अटैक से लगा, मानो खारकीव बारूद के ढेर में बदल जाएगा। इसी बीच भारतीय दूतावास से अलर्ट जारी होता है कि शाम 6 बजे तक खारकीव छोड़ दें। देखते ही देखते रेलवे स्टेशन पर इतनी भीड़ आ जाती है कि ट्रेन तक पहुंचना भी मुश्किल है। कई स्टूडेंट्स पैदल ही रवाना होते हैं। – डॉ. रामसिंह कस्वा, चूरू (यूक्रेन में पढ़ रहे छात्र के रिश्तेदार ने बताया)
खेरसान पर रूसी काबिज
रूसी सैनिकों का दावा-हमने खेरसान शहर कब्जा लिया है। यूक्रेन ने अभी जवाब नहीं दिया।
एक और स्टूडेंट की मौत
यूक्रेन में पंजाब के 22 वर्षीय चंदन की बीमारी से मौत। 1 माह से स्ट्रोक का इलाज करा रहे थे।
कीव की ओर बढ़ रहे 64 किमी लंबे रूसी काफिले की ताजा सैटेलाइट इमेज आई हैं। पर अभी रूस का मकसद साफ नहीं है कि इसके जरिए वो राजधानी को घेरना चाहता है या नेस्तानाबूद करके अलग-थलग करने का इरादा है।
Hindi NewsNationalPreparations To Get 16 Thousand Medical Students Returned From Ukraine In Medical Colleges Of The Country, The Central Government Is Looking For A Wayनई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: पवन कुमार मिश्रकॉपी लिंकरेलवे स्टेशन पर भीड़।रूस-यूक्रेन युद्ध से संकट में फंसे करीब 16 हजार भारतीय मेडिकल छात्रों को भारत के कॉलेजों में दाखिला दिलाने की तैयारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि संभव है कि शुक्रवार को इस मुद्दे पर अहम बैठक हो सकती है। दरअसल सरकार चाहती है कि यूक्रेन से लौटे इन छात्रों की पढ़ाई पर असर न हो। इसके लिए केंद्र सरकार फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट रेगुलेशन (एफएमजीएल) एक्ट में बदलाव पर विचार कर रही है।इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को एक चिट्ठी लिखी जा रही है, जिसमें कहा जाएगा कि एफएमजीएल रेगुलेशन एक्ट-2021 में बदलाव किया जाए ताकि बाहर से आने वाले स्टूडेंट्स को दाखिला मिल सके। अभी तक फॉरेन मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने वाले छात्रों को कोर्स की पूरी अवधि के अलावा ट्रेनिंग और इंटर्नशिप भारत सेे बाहर ही करनी होती है। यूक्रेन में 6 साल में एमबीबीएस होता है। फिर 2 साल इंटर्नशिप होती है। ऐसे में पढ़ाई बाधित हुई तो हजारों बच्चों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।छात्रों को निजी व डीम्ड कॉलेज में दे सकते हैं एडमिशनयूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों के दाखिले का रास्ता कैसे निकलेगा?स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भारत के किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए उसी वर्ष नीट परीक्षा पास करनी होती है जबकि भारत के बाहर के मेडिकल कॉलेज में नीट परीक्षा पास करने के तीन वर्ष के अंदर कभी भी दाखिला ले सकते हैं। विदेशों से जितने भी मेडिकल छात्र देश में आ रहे हैं उनमें ज्यादातर एमबीबीएस स्टूडेंट्स ही हैं।इन छात्रों को क्या सरकारी कॉलेज में एडमिशन मिल सकता है?फॉरेन मेडिकल छात्रों को सरकारी कॉलेज में एडमिशन की संभावना नहीं। निजी, डीम्ड कॉलेज में दाखिला मिल सकता है।इन छात्रों के पास ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प है या नहीं?नहीं, क्योंकि यूक्रेन में इंफ्रास्ट्रक्चर इस हद तक तबाह हो चुका है कि ऑनलाइन पढ़ाई कराना अभी मुमकिन ही नहीं है।कोरोनाकाल में चीन से लौटे मेडिकल छात्रों को भी लाभ होगा क्या?बिल्कुल। चीन और यूक्रेन से लौटे करीब 25 हजार छात्रों को एफएमजीएल एक्ट में बदलाव का लाभ मिल सकता है।क्रीमिया युद्ध के समय मेडिकल छात्रों ने क्या विकल्प अपनाए थे ?2014 में दो कॉलेज वार जोन एरिया में आए थे। तब यहां के कुछ बच्चों ने रूस और कुछ ने यूक्रेन में ट्रांसफर ले लिया था।खारकीव; हमले के बाद देश छोड़ने का अलर्ट, रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़रूस के ताबड़तोड़ मिसाइल अटैक से लगा, मानो खारकीव बारूद के ढेर में बदल जाएगा। इसी बीच भारतीय दूतावास से अलर्ट जारी होता है कि शाम 6 बजे तक खारकीव छोड़ दें। देखते ही देखते रेलवे स्टेशन पर इतनी भीड़ आ जाती है कि ट्रेन तक पहुंचना भी मुश्किल है। कई स्टूडेंट्स पैदल ही रवाना होते हैं। – डॉ. रामसिंह कस्वा, चूरू (यूक्रेन में पढ़ रहे छात्र के रिश्तेदार ने बताया)खेरसान पर रूसी काबिजरूसी सैनिकों का दावा-हमने खेरसान शहर कब्जा लिया है। यूक्रेन ने अभी जवाब नहीं दिया।एक और स्टूडेंट की मौतयूक्रेन में पंजाब के 22 वर्षीय चंदन की बीमारी से मौत। 1 माह से स्ट्रोक का इलाज करा रहे थे।कीव की ओर बढ़ रहे 64 किमी लंबे रूसी काफिले की ताजा सैटेलाइट इमेज आई हैं। पर अभी रूस का मकसद साफ नहीं है कि इसके जरिए वो राजधानी को घेरना चाहता है या नेस्तानाबूद करके अलग-थलग करने का इरादा है।