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नई दिल्ली31 मिनट पहलेलेखक: प्रेम प्रताप सिंह
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यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनाव में जीत से बीजेपी ने कई नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी ने नया इतिहास रच दिया है। यूपी में साढ़े तीन दशक बाद किसी पार्टी की सरकार रिपीट हुई है। आजादी के बाद ये पहली बार होगा कि अपनी पार्टी को सत्ता में वापसी कराने वाले योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार सीएम बनेंगे। वहीं आम आदमी पार्टी ऐसी पहली क्षेत्रीय पार्टी बन गई है, जो एक राज्य से आगे बढ़कर दूसरे राज्य यानी दिल्ली से आगे बढ़कर पंजाब में सरकार बनाएगी। वहीं केंद्र की सियासत में भी इस चुनाव के नतीजों का असर दिखेगा।
आइए जानते हैं कि बीजेपी की इस जीत से क्या दूरगामी नतीजे देखने को मिल सकते हैं…
इस चुनाव से अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी को एक कदम और आगे बढ़ा ले गए हैं।
पंजाब जीतने के बाद AAP दूसरे राज्यों में करेगी विस्तार
आम आदमी पार्टी पहली ऐसी क्षेत्रीय पार्टी बन गई है, जो एक राज्य से निकलकर दूसरे राज्य में सरकार बनाएगी। इससे एक और संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस जहां-जहां नीचे की ओर जा रही है, वहां आम आदमी पार्टी उभर रही है।
पंजाब चुनाव में जीत के बाद AAP को बीजेपी के विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है। इस चुनाव में सबसे अधिक झटका कांग्रेस को लगा है। पांच साल की सत्ता विरोधी लहर के बाद भी कांग्रेस उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में सरकार नहीं बना पाई।
पंजाब में जहां जीतने की संभावना थी, कांग्रेस ने आपसी गुटबाजी के कारण थाली में परोस कर सत्ता आम आम आदमी पार्टी को सौंप दिया। हालांकि आम आदमी पार्टी पंजाब में लंबे समय से काम कर रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की उम्मीद थी, लेकिन तब कांग्रेस की जीत हुई थी।
राज्यसभा में निखरेगी बीजेपी, AAP के भी नंबर बढ़ेंगे
अप्रैल से एक अगस्त के बीच राज्यसभा की 70 सीटों के लिए चुनाव होंगे। इसमें बीजेपी को पांच सीटों का नुकसान हो रहा था, लेकिन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में सरकार बनने से इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है। इसमें से यूपी की 11, पंजाब की सात और उत्तराखंड की एक सीट पर चुनाव होंगे। पार्टी की यूपी और उत्तराखंड से दो से तीन सीटें बढ़ सकती हैं। वहीं पंजाब में AAP की सरकार बनने से पार्टी को राज्यसभा में 6 सीटों का फायदा हो सकता है। फिलहाल राज्यसभा में AAP के पास 3 सीटें हैं।
बंगाल की करारी हार से उबर जाएगी बीजेपी
पश्चिम बंगाल की हार से बीजेपी उबर जाएगी। अब यह धारणा बनेगी कि बीजेपी को हराना मुश्किल होगा। अन्य राज्यों में बीजेपी को इसका फायदा मिलेगा। फोकस अब अरविंद केजरीवाल पर शिफ्ट होगा। कांग्रेस जहां-जहां नीचे जा रही है, वहां आम आदमी पार्टी उभर रही है।
इस चुनाव में सबसे अधिक झटका कांग्रेस को लगा है। पांच साल के सत्ता विरोधी लहर के बाद भी कांग्रेस उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा में सरकार नहीं बना पाई। साथ ही पंजाब में जहां जीतने संभावना थी, उसे भी थाली में परोस कर आम आम आदमी पार्टी को दे दिया।

इस चुनाव में जीत के बाद योगी आदित्यनाथ बीजेपी में मोदी और शाह के बाद तीसरे बड़े नेता बन गए।
योगी का कद बढ़ेगा, मोदी-शाह के बाद तीसरे ताकतवर नेता होंगे
यूपी किला फतेह के बाद योगी आदित्यनाथ भाजपा में पूरी तरह से स्थापित हो जाएंगे। मोदी और अमित शाह के बाद तीसरे नंबर के सबसे बड़े नेता बन जाएंगे। आजादी के बाद योगी ऐसे पहले नेता होंगे, जिन्हें यूपी में सरकार रिपीट कराने के बाद दूसरी बार सीएम बनने का मौका मिलेगा। गुजरात मॉडल की तरह बीजेपी यूपी मॉडल का भी देशभर में प्रचार कर सकती है। खासतौर पर उन राज्यों में जहां बीजेपी कमजोर है, वहां बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाया जा सकता है।
एकतरफा साबित होगा राष्ट्रपति चुनाव
राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से अभी बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पास विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव पर भी बीजेपी का असर रहेगा। बीजेपी जिसे प्रत्याशी बनाएगी, उसकी जीत तय मानी जा रही है।
चुनावी राज्यों के लिए रोडमैप तैयार
इस साल के आखिर में हिमाचल प्रदेश की 68 और गुजरात की 182 सीटों पर चुनाव होंगे। यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव में जीत से बीजेपी को इन राज्यों में आक्रामक प्रचार का मौका मिलेगा। 2023 में कर्नाटक की 225, राजस्थान की 200, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मेघालय, त्रिपुरा, नगालैंड और तेलंगाना में चुनाव होंगे, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बीजेपी के रणनीतिकारों को पता है कि लोगों में तमाम मुद्दों पर नाराजगी है, लेकिन उनके पास मजबूत विकल्प न होने से बीजेपी के लिए राह आसान है।

इस चुनाव ने फिर साबित किया कि बीजेपी ने लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी है।
2024 के आम चुनाव के लिए भी आसानी
पंजाब को छोड़कर चार राज्यों में मिली जीत से बीजेपी को लोकसभा चुनाव के लिए भी मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल जाएगी। चुनावों की संवेदनशीलता के चलते अभी कई मुद्दों पर केंद्र सरकार कड़े फैसले नहीं ले पा रही है। विधानसभा चुनावों में मिली जीत से विनिवेश की रफ्तार तेज हो सकती है। बीजेपी को ये नैरेटिव बनाने में भी सफलता मिली है कि विपक्ष नेशनल मुद़्दों पर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश में लगा रहता है।

हिंदुत्व का एजेंडा और मजबूत होगा
यूपी में बीजेपी की वापसी से हिंदुत्व का एजेंडा और मजबूत होगा। मई में संभावित कर्नाटक विधानसभा चुनाव में इसका स्वरूप देखने को मिल सकता है। नवंबर और दिसंबर में संभावित हिमाचल और गुजरात में भी ये प्रयोग किया जा सकता है।
विपक्ष को इमेज बिल्डिंग की जरूरत
पांच राज्यों के चुनाव नतीजों में विपक्ष के लिए भी सबक छिपे हैं। ऐसा नहीं कि विपक्ष मौके भुना नहीं पाया। केंद्र की कोरोना काल की विफलताएं, बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने काफी काम किया। समाजवादी पार्टी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व में काफी हद तक अपनी इमेज को मजबूत किया है। इसका असर भी दिखा। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन की तरफ से अखिलेश यादव को पीएम पद के कैंडिडेट के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा सकता है।

Hindi NewsNationalUP Election Results 2022 BJP Yogi Adityanath VS Narendra Modi Amit Shah | Aam Aadmi Party Punjab Seatsनई दिल्ली31 मिनट पहलेलेखक: प्रेम प्रताप सिंहकॉपी लिंकवीडियोयूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनाव में जीत से बीजेपी ने कई नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी ने नया इतिहास रच दिया है। यूपी में साढ़े तीन दशक बाद किसी पार्टी की सरकार रिपीट हुई है। आजादी के बाद ये पहली बार होगा कि अपनी पार्टी को सत्ता में वापसी कराने वाले योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार सीएम बनेंगे। वहीं आम आदमी पार्टी ऐसी पहली क्षेत्रीय पार्टी बन गई है, जो एक राज्य से आगे बढ़कर दूसरे राज्य यानी दिल्ली से आगे बढ़कर पंजाब में सरकार बनाएगी। वहीं केंद्र की सियासत में भी इस चुनाव के नतीजों का असर दिखेगा।आइए जानते हैं कि बीजेपी की इस जीत से क्या दूरगामी नतीजे देखने को मिल सकते हैं…इस चुनाव से अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी को एक कदम और आगे बढ़ा ले गए हैं।पंजाब जीतने के बाद AAP दूसरे राज्यों में करेगी विस्तारआम आदमी पार्टी पहली ऐसी क्षेत्रीय पार्टी बन गई है, जो एक राज्य से निकलकर दूसरे राज्य में सरकार बनाएगी। इससे एक और संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस जहां-जहां नीचे की ओर जा रही है, वहां आम आदमी पार्टी उभर रही है।पंजाब चुनाव में जीत के बाद AAP को बीजेपी के विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है। इस चुनाव में सबसे अधिक झटका कांग्रेस को लगा है। पांच साल की सत्ता विरोधी लहर के बाद भी कांग्रेस उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में सरकार नहीं बना पाई।पंजाब में जहां जीतने की संभावना थी, कांग्रेस ने आपसी गुटबाजी के कारण थाली में परोस कर सत्ता आम आम आदमी पार्टी को सौंप दिया। हालांकि आम आदमी पार्टी पंजाब में लंबे समय से काम कर रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की उम्मीद थी, लेकिन तब कांग्रेस की जीत हुई थी।राज्यसभा में निखरेगी बीजेपी, AAP के भी नंबर बढ़ेंगेअप्रैल से एक अगस्त के बीच राज्यसभा की 70 सीटों के लिए चुनाव होंगे। इसमें बीजेपी को पांच सीटों का नुकसान हो रहा था, लेकिन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में सरकार बनने से इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है। इसमें से यूपी की 11, पंजाब की सात और उत्तराखंड की एक सीट पर चुनाव होंगे। पार्टी की यूपी और उत्तराखंड से दो से तीन सीटें बढ़ सकती हैं। वहीं पंजाब में AAP की सरकार बनने से पार्टी को राज्यसभा में 6 सीटों का फायदा हो सकता है। फिलहाल राज्यसभा में AAP के पास 3 सीटें हैं।बंगाल की करारी हार से उबर जाएगी बीजेपीपश्चिम बंगाल की हार से बीजेपी उबर जाएगी। अब यह धारणा बनेगी कि बीजेपी को हराना मुश्किल होगा। अन्य राज्यों में बीजेपी को इसका फायदा मिलेगा। फोकस अब अरविंद केजरीवाल पर शिफ्ट होगा। कांग्रेस जहां-जहां नीचे जा रही है, वहां आम आदमी पार्टी उभर रही है।इस चुनाव में सबसे अधिक झटका कांग्रेस को लगा है। पांच साल के सत्ता विरोधी लहर के बाद भी कांग्रेस उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा में सरकार नहीं बना पाई। साथ ही पंजाब में जहां जीतने संभावना थी, उसे भी थाली में परोस कर आम आम आदमी पार्टी को दे दिया।इस चुनाव में जीत के बाद योगी आदित्यनाथ बीजेपी में मोदी और शाह के बाद तीसरे बड़े नेता बन गए।योगी का कद बढ़ेगा, मोदी-शाह के बाद तीसरे ताकतवर नेता होंगेयूपी किला फतेह के बाद योगी आदित्यनाथ भाजपा में पूरी तरह से स्थापित हो जाएंगे। मोदी और अमित शाह के बाद तीसरे नंबर के सबसे बड़े नेता बन जाएंगे। आजादी के बाद योगी ऐसे पहले नेता होंगे, जिन्हें यूपी में सरकार रिपीट कराने के बाद दूसरी बार सीएम बनने का मौका मिलेगा। गुजरात मॉडल की तरह बीजेपी यूपी मॉडल का भी देशभर में प्रचार कर सकती है। खासतौर पर उन राज्यों में जहां बीजेपी कमजोर है, वहां बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाया जा सकता है।एकतरफा साबित होगा राष्ट्रपति चुनावराष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से अभी बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पास विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव पर भी बीजेपी का असर रहेगा। बीजेपी जिसे प्रत्याशी बनाएगी, उसकी जीत तय मानी जा रही है।चुनावी राज्यों के लिए रोडमैप तैयारइस साल के आखिर में हिमाचल प्रदेश की 68 और गुजरात की 182 सीटों पर चुनाव होंगे। यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव में जीत से बीजेपी को इन राज्यों में आक्रामक प्रचार का मौका मिलेगा। 2023 में कर्नाटक की 225, राजस्थान की 200, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मेघालय, त्रिपुरा, नगालैंड और तेलंगाना में चुनाव होंगे, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बीजेपी के रणनीतिकारों को पता है कि लोगों में तमाम मुद्दों पर नाराजगी है, लेकिन उनके पास मजबूत विकल्प न होने से बीजेपी के लिए राह आसान है।इस चुनाव ने फिर साबित किया कि बीजेपी ने लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी है।2024 के आम चुनाव के लिए भी आसानीपंजाब को छोड़कर चार राज्यों में मिली जीत से बीजेपी को लोकसभा चुनाव के लिए भी मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल जाएगी। चुनावों की संवेदनशीलता के चलते अभी कई मुद्दों पर केंद्र सरकार कड़े फैसले नहीं ले पा रही है। विधानसभा चुनावों में मिली जीत से विनिवेश की रफ्तार तेज हो सकती है। बीजेपी को ये नैरेटिव बनाने में भी सफलता मिली है कि विपक्ष नेशनल मुद़्दों पर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश में लगा रहता है।हिंदुत्व का एजेंडा और मजबूत होगायूपी में बीजेपी की वापसी से हिंदुत्व का एजेंडा और मजबूत होगा। मई में संभावित कर्नाटक विधानसभा चुनाव में इसका स्वरूप देखने को मिल सकता है। नवंबर और दिसंबर में संभावित हिमाचल और गुजरात में भी ये प्रयोग किया जा सकता है।विपक्ष को इमेज बिल्डिंग की जरूरतपांच राज्यों के चुनाव नतीजों में विपक्ष के लिए भी सबक छिपे हैं। ऐसा नहीं कि विपक्ष मौके भुना नहीं पाया। केंद्र की कोरोना काल की विफलताएं, बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने काफी काम किया। समाजवादी पार्टी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व में काफी हद तक अपनी इमेज को मजबूत किया है। इसका असर भी दिखा। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन की तरफ से अखिलेश यादव को पीएम पद के कैंडिडेट के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा सकता है।