इन देशों में यूक्रेन वॉर से खत्म हो गई 8 साल की मंदी, जीडीपी में 6% उछाल की उम्मीद, हैरान मत हों ये सच है

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नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Apr 5, 2022, 12:10 PM

Russia Ukraine War Updates: MUFG द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार तेल की कीमतों में इजाफे के चलते गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देशों की साल 2022 में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसद रहने का अनुमान है। साथ ही साल 2014 के बाद पहली बार राजस्व के सरप्लस रहने का अनुमान है। जीसीसी के देशों में सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और बहरीन शामिल हैं।

Gulf nations
गल्फ देशों की जीडीपी ग्रोथ में आएगा अच्छा उछाल
नई दिल्ली: मार्च की शुरूआत से ही रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine war) के रूप में उपजे भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया को परेशान कर रखा है। यूक्रेन पर हमला करने के चलते अमेरिका और यूरोप के देश लगातार रूस पर बेहद कड़े प्रतिबंध (Sanctions on Russia) लगा रहे हैं। युद्ध और इन प्रतिबंधों से वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) गड़बड़ा गई है। कई कमोडिटीज (Commodities) के दाम आसमान छू चुके हैं और दुनिया भर की कई अर्थव्यवस्थाओं में कोरोना के बाद की रिकवरी प्रभावित हुई है। वहीं, कुछ देश ऐसे भी हैं, जिनके लिए रूस-यूक्रेन युद्ध एक वरदान बनके आया है। इस युद्ध से इन देशों की लॉटरी लग गई है। इनकी आठ साल की मंदी खत्म हो गई है और जीडीपी (GDP) में बढ़िया उछाल देखने को मिला है। ये मध्य-पूर्व (Middle East) के कुछ देश हैं।रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल की कीमतों (Oil Prices) में आए बंपर उछाल से दुनिया के कुछ सबसे बड़े हाइड्रोकार्बन उत्पादक (Hydrocarbon Producers), गल्फ देशों (Gulf nations) ने अरबों डॉलर अपने खजाने में डाले हैं। आठ साल की तेल की मंदी और फिर कोरोना के चलते आई गिरावट के बाद पहली बार इन देशों को अपना बजट सरप्लस रहने की उम्मीद है।

2014 के बाद पहली बार सरप्लस रहेगा राजस्व
एक फाइनेंशियल ग्रुप MUFG द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार तेल की कीमतों में इजाफे के चलते गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देशों की साल 2022 में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसद रहने का अनुमान है। साथ ही साल 2014 के बाद पहली बार राजस्व सरप्लस रहने का अनुमान है। जीसीसी के देशों में सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और बहरीन शामिल हैं। एमयूएफजी ने कहा, ‘इससे गल्फ देशों का कुल राजस्व साल 2022 में 27 अरब डॉलर सरप्लस रहने का अनुमान है।’
Russia और Ukraine के बीच कम हुआ तनाव, क्या गश खाकर गिर जाएंगी खाने के तेल सहित कृषि उत्पादों की कीमतें?
महामारी के समय तेल की मांग में आई थी भारी गिरावट
गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते साल 2020 और 2021 में क्रूड ऑयल (Crude Oil) की मांग काफी घट गई थी। इन दो वर्षों में कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति थी। इससे क्रूड ऑयल की मांग में भारी कमी दर्ज हुई। फलस्वरूप ओवरसप्लाई के चलते क्रूड ऑयल के दाम काफी नीचे चले गए थे। मार्च 2020 में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 22 डॉलर प्रति बैरल पर था। वहीं, इस साल मार्च की शुरुआत में यूक्रेन पर रूस के हमले के चलते कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो कि 14 वर्षों का उच्च स्तर है। गल्फ देशों की आय का प्रमुख स्रोत हाइड्रोकार्बन है। ये देश इसी पर निर्भर हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने इन देशों को मालामाल कर दिया है।

यूएई की जीडीपी ग्रोथ रहेगी सबसे अधिक

आईएमएफ (IMF) के 2022 वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक के अनुसार, गल्फ देशों में यूएई को साल 2022 में सबसे अधिक आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान है। इसके बाद सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था इस साल 4.8 फीसद की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। इससे पहले सुस्ती के दौरान गल्फ देशों को वैल्यू एडेड टैक्स लाने पड़े थे और खर्च कम करने पड़े थे। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र में हायरिंग भी कम हुई थी।

Russia Ukraine War Map: यूक्रेन में कहां-कहां कब्जा जमाए है रूसी सेना, ताजा मैप में देखिए

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Web Title : russia ukraine war updates ukraine war ended 8 years of recession in these countries gdp expected to rise by 6 percent
Hindi News from Navbharat Times, TIL Network

Curated by पवन जायसवाल | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Apr 5, 2022, 12:10 PMRussia Ukraine War Updates: MUFG द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार तेल की कीमतों में इजाफे के चलते गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देशों की साल 2022 में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसद रहने का अनुमान है। साथ ही साल 2014 के बाद पहली बार राजस्व के सरप्लस रहने का अनुमान है। जीसीसी के देशों में सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और बहरीन शामिल हैं।गल्फ देशों की जीडीपी ग्रोथ में आएगा अच्छा उछालनई दिल्ली: मार्च की शुरूआत से ही रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine war) के रूप में उपजे भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया को परेशान कर रखा है। यूक्रेन पर हमला करने के चलते अमेरिका और यूरोप के देश लगातार रूस पर बेहद कड़े प्रतिबंध (Sanctions on Russia) लगा रहे हैं। युद्ध और इन प्रतिबंधों से वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) गड़बड़ा गई है। कई कमोडिटीज (Commodities) के दाम आसमान छू चुके हैं और दुनिया भर की कई अर्थव्यवस्थाओं में कोरोना के बाद की रिकवरी प्रभावित हुई है। वहीं, कुछ देश ऐसे भी हैं, जिनके लिए रूस-यूक्रेन युद्ध एक वरदान बनके आया है। इस युद्ध से इन देशों की लॉटरी लग गई है। इनकी आठ साल की मंदी खत्म हो गई है और जीडीपी (GDP) में बढ़िया उछाल देखने को मिला है। ये मध्य-पूर्व (Middle East) के कुछ देश हैं।रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल की कीमतों (Oil Prices) में आए बंपर उछाल से दुनिया के कुछ सबसे बड़े हाइड्रोकार्बन उत्पादक (Hydrocarbon Producers), गल्फ देशों (Gulf nations) ने अरबों डॉलर अपने खजाने में डाले हैं। आठ साल की तेल की मंदी और फिर कोरोना के चलते आई गिरावट के बाद पहली बार इन देशों को अपना बजट सरप्लस रहने की उम्मीद है। 2014 के बाद पहली बार सरप्लस रहेगा राजस्वएक फाइनेंशियल ग्रुप MUFG द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार तेल की कीमतों में इजाफे के चलते गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देशों की साल 2022 में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसद रहने का अनुमान है। साथ ही साल 2014 के बाद पहली बार राजस्व सरप्लस रहने का अनुमान है। जीसीसी के देशों में सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और बहरीन शामिल हैं। एमयूएफजी ने कहा, ‘इससे गल्फ देशों का कुल राजस्व साल 2022 में 27 अरब डॉलर सरप्लस रहने का अनुमान है।’Russia और Ukraine के बीच कम हुआ तनाव, क्या गश खाकर गिर जाएंगी खाने के तेल सहित कृषि उत्पादों की कीमतें?महामारी के समय तेल की मांग में आई थी भारी गिरावटगौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते साल 2020 और 2021 में क्रूड ऑयल (Crude Oil) की मांग काफी घट गई थी। इन दो वर्षों में कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति थी। इससे क्रूड ऑयल की मांग में भारी कमी दर्ज हुई। फलस्वरूप ओवरसप्लाई के चलते क्रूड ऑयल के दाम काफी नीचे चले गए थे। मार्च 2020 में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 22 डॉलर प्रति बैरल पर था। वहीं, इस साल मार्च की शुरुआत में यूक्रेन पर रूस के हमले के चलते कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो कि 14 वर्षों का उच्च स्तर है। गल्फ देशों की आय का प्रमुख स्रोत हाइड्रोकार्बन है। ये देश इसी पर निर्भर हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने इन देशों को मालामाल कर दिया है।यूएई की जीडीपी ग्रोथ रहेगी सबसे अधिकआईएमएफ (IMF) के 2022 वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक के अनुसार, गल्फ देशों में यूएई को साल 2022 में सबसे अधिक आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान है। इसके बाद सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था इस साल 4.8 फीसद की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। इससे पहले सुस्ती के दौरान गल्फ देशों को वैल्यू एडेड टैक्स लाने पड़े थे और खर्च कम करने पड़े थे। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र में हायरिंग भी कम हुई थी।Russia Ukraine War Map: यूक्रेन में कहां-कहां कब्जा जमाए है रूसी सेना, ताजा मैप में देखिए Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : russia ukraine war updates ukraine war ended 8 years of recession in these countries gdp expected to rise by 6 percentHindi News from Navbharat Times, TIL Network

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