
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री बोले- शांति बनाने में मदद मिलेगी
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री पीटर डटन ने स्काई न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि जब आप देखते हैं कि यूक्रेन में क्या हो रहा है, जब आप देखते हैं कि हिंद-प्रशांत में संघर्ष के लिए क्या संभावनाएं हैं, तब यह हमारे लिए वास्तविक खतरा नजर आता है। हमें यथार्थवादी होने की आवश्यकता है कि हम किसी भी प्रकार की आक्रामकता को कैसे रोकेंगे। हमें अपने क्षेत्र में शांति बनाए रखने में मदद करने के लिए ताकत बढ़ाने पर फोकस करना ही होगा।
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लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों के लिए खरीदी जाएंगी मिसाइलें
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज में बताया है कि वायु सेना के एफ/ए-18 और एफ-35 ए लड़ाकू विमानों के लिए ज्वाइंट एयर टू सरफेस स्टेंडऑफ मिसाइलों के अधिग्रहण में तेजी लाई जाएगी। इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के फ्रिगेट और विध्वंसक के लिए नेवल स्ट्राइक मिसाइलों की खरीद की जाएगी। समुद्री तटों और बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए नेवल माइंस की डील भी की जाएगी। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, नई मिसाइलों के साल 2024 तक ऑपरेशनल होने की उम्मीद है।
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900 किमी तक मार करेंगे ऑस्ट्रेलियाई लड़ाकू विमान
पीटर डटन ने एक बयान में कहा कि ज्वाइंट एयर टू सरफेस स्टेंडऑफ मिसाइल बढ़ी हुई रेंज के साथ आएंगे। अमेरिका में डिजाइन की गई एक एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल स्टील्थ तकनीक से लैस है। इतना ही नहीं, यह मिसाइल फायर करने के बाद अपने लक्ष्य को बदलने में सक्षम होगी। डटन ने कहा कि इस मिसाइल की मदद से ऑस्ट्रेलियाई लड़ाकू विमान 900 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को भेदने में सक्षम होंगे।
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नौसेना के लिए नॉर्वे से खरीदी जाएगी मिसाइल
वहीं, नौसेना के लिए नेवल स्ट्राइक मिसाइल की खरीद नॉर्वे से की जाएगी। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री ने बताया कि नॉर्वेजियन-डिजाइन नेवल स्ट्राइक मिसाइल समुद्र की सतह के काफी नजदीक उड़ान भरने में सक्षम है। यह मिसाइल 185 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है। ऐसे में इस मिसाइल के ऑस्ट्रेलियाई नौसेना में शामिल होने से युद्धक क्षमता दो गुनी बढ़ जाएगी। डटन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स को संभावित विरोधी ताकतों और उनके बुनियादी ढांचों को दूर से नष्ट करने की ताकत से लैस होना चाहिए।
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चीन के खतरों का सामना करने के लिए तैयार हो रहा ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री पीटर डटन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई वायु सेना और नौसेना के लिए खरीदी जाने वाली दोनों मिसाइलों का इस्तेमाल अमेरिकी सेना पहले से ही करती है। ऐसे में इन मिसाइलों के ऑस्ट्रेलियाई सेना में शामिल होने से उनके देश को को प्रशांत क्षेत्र में गठबंधन संचालन में योगदान करने में मदद मिलेगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के अपग्रेडेड मिसाइल प्रोग्राम के पीछे इंडो पैसिफिक में चीन की बढ़ती गतिविधि जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर के द्वीपों का सैन्यीकरण और पूर्वी चीन सागर में जापानी जल क्षेत्र में चीनी नौसेना की बढ़ती उपस्थिति ने स्पष्ट रूप से हमें बहुत प्रभावित किया है।
केनबरा: ऑस्ट्रेलिया ने चीन के खतरे का मुकाबला करने के लिए अरबों डॉलर के निवेश का प्लान बनाया है। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री ने ऐलान किया है कि उनका देश डिफेंसिव मिसाइलों को अपग्रेड करने के लिए 2.6 बिलियन डॉलर खर्च करने जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चीन की आक्रामक नीतियों के कारण इंडो पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस प्रॉजेक्ट के जरिए ऑस्ट्रेलिया के युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों पर तैनात मिसाइलों को अपग्रेड किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के साथ मिलकर पहले से ही हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास पर काम कर रहा है। इसके अलावा AUKUS समझौते के तहत अमेरिका और ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बी की टेक्नोलॉजी देंगे।ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री बोले- शांति बनाने में मदद मिलेगीऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री पीटर डटन ने स्काई न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि जब आप देखते हैं कि यूक्रेन में क्या हो रहा है, जब आप देखते हैं कि हिंद-प्रशांत में संघर्ष के लिए क्या संभावनाएं हैं, तब यह हमारे लिए वास्तविक खतरा नजर आता है। हमें यथार्थवादी होने की आवश्यकता है कि हम किसी भी प्रकार की आक्रामकता को कैसे रोकेंगे। हमें अपने क्षेत्र में शांति बनाए रखने में मदद करने के लिए ताकत बढ़ाने पर फोकस करना ही होगा।Hypersonic Missile: रूस- चीन को करारा जवाब देगा अमेरिका, महाविनाशक हाइपरसोनिक मिसाइल का किया सीक्रेट टेस्टलड़ाकू विमानों और युद्धपोतों के लिए खरीदी जाएंगी मिसाइलेंऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज में बताया है कि वायु सेना के एफ/ए-18 और एफ-35 ए लड़ाकू विमानों के लिए ज्वाइंट एयर टू सरफेस स्टेंडऑफ मिसाइलों के अधिग्रहण में तेजी लाई जाएगी। इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के फ्रिगेट और विध्वंसक के लिए नेवल स्ट्राइक मिसाइलों की खरीद की जाएगी। समुद्री तटों और बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए नेवल माइंस की डील भी की जाएगी। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, नई मिसाइलों के साल 2024 तक ऑपरेशनल होने की उम्मीद है।Quad Meeting China: क्वाड मीटिंग से 48 घंटे पहले चीन का फूटा गुस्सा, बोला- क्षेत्रीय देशों के बीच दरार डालना बंद करो900 किमी तक मार करेंगे ऑस्ट्रेलियाई लड़ाकू विमानपीटर डटन ने एक बयान में कहा कि ज्वाइंट एयर टू सरफेस स्टेंडऑफ मिसाइल बढ़ी हुई रेंज के साथ आएंगे। अमेरिका में डिजाइन की गई एक एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल स्टील्थ तकनीक से लैस है। इतना ही नहीं, यह मिसाइल फायर करने के बाद अपने लक्ष्य को बदलने में सक्षम होगी। डटन ने कहा कि इस मिसाइल की मदद से ऑस्ट्रेलियाई लड़ाकू विमान 900 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को भेदने में सक्षम होंगे।F-35 Vs J-20: दुनिया में पहली बार F-35 और J-20 की मुठभेड़, आमने-सामने आए अमेरिका और चीन के स्टील्थ लड़ाकू विमाननौसेना के लिए नॉर्वे से खरीदी जाएगी मिसाइलवहीं, नौसेना के लिए नेवल स्ट्राइक मिसाइल की खरीद नॉर्वे से की जाएगी। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री ने बताया कि नॉर्वेजियन-डिजाइन नेवल स्ट्राइक मिसाइल समुद्र की सतह के काफी नजदीक उड़ान भरने में सक्षम है। यह मिसाइल 185 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है। ऐसे में इस मिसाइल के ऑस्ट्रेलियाई नौसेना में शामिल होने से युद्धक क्षमता दो गुनी बढ़ जाएगी। डटन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स को संभावित विरोधी ताकतों और उनके बुनियादी ढांचों को दूर से नष्ट करने की ताकत से लैस होना चाहिए। परमाणु पनडुब्बी के बाद ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर, चीन के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की सैन्य तैयारी तो देखिएचीन के खतरों का सामना करने के लिए तैयार हो रहा ऑस्ट्रेलियाऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री पीटर डटन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई वायु सेना और नौसेना के लिए खरीदी जाने वाली दोनों मिसाइलों का इस्तेमाल अमेरिकी सेना पहले से ही करती है। ऐसे में इन मिसाइलों के ऑस्ट्रेलियाई सेना में शामिल होने से उनके देश को को प्रशांत क्षेत्र में गठबंधन संचालन में योगदान करने में मदद मिलेगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के अपग्रेडेड मिसाइल प्रोग्राम के पीछे इंडो पैसिफिक में चीन की बढ़ती गतिविधि जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर के द्वीपों का सैन्यीकरण और पूर्वी चीन सागर में जापानी जल क्षेत्र में चीनी नौसेना की बढ़ती उपस्थिति ने स्पष्ट रूप से हमें बहुत प्रभावित किया है।