पंक्तिबद्ध हस्तक्षेप: एजरा पाउंड

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वेस्ट लैंड’ लिखने के दौर से ही इलियट इसके विस्तार और रचना विधान को लेकर दुविधा में थे।

‘द वेस्ट लैंड’ लिखने के दौर से ही इलियट इसके विस्तार और रचना विधान को लेकर दुविधा में थे। उन्हें पता था कि वे ऐसा रचनात्मक जोखिम उठा रहे हैं जो अनुभव और परंपरा के दायरे से बाहर है। यही वजह है कि अपनी इस कृति के संपादन को लेकर उन्होंने अपने कई समकालीनों से संपर्क साधा। इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण हैं एजरा पाउंड।

एजरा के बारे में मौजूदा समय में बात करने से पहले यह समझना होगा कि उत्तर आधुनिकता का विचार और इससे जुड़ी शब्दावली तो 20वीं सदी के आखिरी दशक में प्रचलन में आई। इसी दौर में उत्तर आधुनिक विमर्श ने भी वैश्विक जोर पकड़ा। पर इससे पहले जिन साहित्यकारों की आलोचना और उनके विचारों को लेकर आधुनिकता से आगे की शब्दावली इस्तेमाल की गई, उनमें एजरा पाउंड का नाम अहम है।

प्रवासी अमेरिकी कवि और आलोचक एजरा के विचार और साहित्य को लेकर जहां एक तरफ काफी विवाद उभरा, वहीं उन्होंने दुनिया के सामने ऐसे क्रांतिकारी विचार रखे, जिन्हें नितांत नवीन माना गया। अंग्रेजी साहित्य की परंपरा और इतिहास में एजरा एक नए वैचारिक उभार के कवि थे। उनकी इसी खासियत ने आज भी साहित्य-प्रेमियों के साथ आलोचकों की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता को बहाल रखा है।

एजरा ने इलियट के बारे में कहा था कि वो अपनी चिंता और सरोकारों में भरपूर और बड़े कवि हैं पर उनकी काव्य पंक्तियां इस स्थापना को बल देने में कई बार कमजोर साबित होती हैं। ‘द वेस्ट लैंड’ कविता के शुरुआती ड्राफ्ट को देखकर पता चलता है कि मूल कविता अंतिम प्रकाशित संस्करण की तुलना में तकरीबन दोगुनी थी।

संपादक के रूप में एजरा पाउंड ने इसमें ‘निर्ममतापूर्वक कतर-ब्योंत’ की और उनके दिए बहुतेरे सुझावों के कारण रचनाकार ने खुद भी इसमें से कई बड़े हिस्से हटाए। अपनी कविता में संपादन की इस निर्मम दरकार को इलियट भी समझते थे। असल में वे अपनी चिंता और सरोकारों के प्रति तो स्पष्ट थे पर कविता में इसकी अभिव्यक्ति को लेकर उनके मन में कई स्तर पर संशय था। यही वजह है कि ‘द वेस्ट लैंड’ न सिर्फ अंग्रेजी बल्कि दुनिया की अन्य भाषा की कविताओं में भी इस लिहाज से आपवादिक है कि खुद कवि ने इसके पाठ और भाष्य के लिए विस्तृत उद्धरण, संदर्भ और पाद टिप्पणियां प्रस्तुत की हैं।

वेस्ट लैंड’ लिखने के दौर से ही इलियट इसके विस्तार और रचना विधान को लेकर दुविधा में थे। ‘द वेस्ट लैंड’ लिखने के दौर से ही इलियट इसके विस्तार और रचना विधान को लेकर दुविधा में थे। उन्हें पता था कि वे ऐसा रचनात्मक जोखिम उठा रहे हैं जो अनुभव और परंपरा के दायरे से बाहर है। यही वजह है कि अपनी इस कृति के संपादन को लेकर उन्होंने अपने कई समकालीनों से संपर्क साधा। इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण हैं एजरा पाउंड। एजरा के बारे में मौजूदा समय में बात करने से पहले यह समझना होगा कि उत्तर आधुनिकता का विचार और इससे जुड़ी शब्दावली तो 20वीं सदी के आखिरी दशक में प्रचलन में आई। इसी दौर में उत्तर आधुनिक विमर्श ने भी वैश्विक जोर पकड़ा। पर इससे पहले जिन साहित्यकारों की आलोचना और उनके विचारों को लेकर आधुनिकता से आगे की शब्दावली इस्तेमाल की गई, उनमें एजरा पाउंड का नाम अहम है। प्रवासी अमेरिकी कवि और आलोचक एजरा के विचार और साहित्य को लेकर जहां एक तरफ काफी विवाद उभरा, वहीं उन्होंने दुनिया के सामने ऐसे क्रांतिकारी विचार रखे, जिन्हें नितांत नवीन माना गया। अंग्रेजी साहित्य की परंपरा और इतिहास में एजरा एक नए वैचारिक उभार के कवि थे। उनकी इसी खासियत ने आज भी साहित्य-प्रेमियों के साथ आलोचकों की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता को बहाल रखा है। एजरा ने इलियट के बारे में कहा था कि वो अपनी चिंता और सरोकारों में भरपूर और बड़े कवि हैं पर उनकी काव्य पंक्तियां इस स्थापना को बल देने में कई बार कमजोर साबित होती हैं। ‘द वेस्ट लैंड’ कविता के शुरुआती ड्राफ्ट को देखकर पता चलता है कि मूल कविता अंतिम प्रकाशित संस्करण की तुलना में तकरीबन दोगुनी थी। संपादक के रूप में एजरा पाउंड ने इसमें ‘निर्ममतापूर्वक कतर-ब्योंत’ की और उनके दिए बहुतेरे सुझावों के कारण रचनाकार ने खुद भी इसमें से कई बड़े हिस्से हटाए। अपनी कविता में संपादन की इस निर्मम दरकार को इलियट भी समझते थे। असल में वे अपनी चिंता और सरोकारों के प्रति तो स्पष्ट थे पर कविता में इसकी अभिव्यक्ति को लेकर उनके मन में कई स्तर पर संशय था। यही वजह है कि ‘द वेस्ट लैंड’ न सिर्फ अंग्रेजी बल्कि दुनिया की अन्य भाषा की कविताओं में भी इस लिहाज से आपवादिक है कि खुद कवि ने इसके पाठ और भाष्य के लिए विस्तृत उद्धरण, संदर्भ और पाद टिप्पणियां प्रस्तुत की हैं।

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