‘पर्यावरण के नाम पर भारत पर कई तरह के दबाव डाले गए, ये औपनिवेशक मानसिकता का परिणाम’ :  पीएम मोदी

‘पर्यावरण के नाम पर भारत पर कई तरह के दबाव डाले गए, ये औपनिवेशक मानसिकता का परिणाम’ : पीएम मोदी

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नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने सुप्रीम कोर्ट के संविधान दिवस (Constitution Day) समारोह के कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को लेकर भारत पर पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन को लेकर दबाव डालने वाले अमीर देशों को आड़े हाथों लिया. पीएम मोदी ने कहा, पर्यावरण के नाम पर भारत पर कई तरह के दबाव डाले गए, ये औपनिवेशक मानसिकता का परिणाम है. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हम सभी अलग-अलग भूमिका निभाते हैं. हमारे काम की प्रकृति अलग है. लेकिन हमारा मार्गदर्शक स्रोत और दिशानिर्देश संविधान है. आज बहुत अच्छा दिन है. हमें अपने संविधान निर्माताओं के उस सपने को पूरा करने की जरूरत है, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी. हमें बहुत कुछ हासिल करना है. हमारा संविधान समावेश की अवधारणा पर जोर देता है. इस कार्यक्रम में चीफ जस्टिस एनवी रमना, कानून मंत्री किरेन रिजीजू और अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल भी उपस्थित थे.

पर्यावरण संरक्षण और कॉर्बन उत्सर्जन पर भारत को भाषण देने वाले विकसित देशों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आड़े हाथों लिया। कहा कि भारत में कुछ लोग अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर विकास में रोड़े अटकाते हैं। pic.twitter.com/QzwxxEV4M5

— Akhilesh Sharma (@akhileshsharma1) November 26, 2021

हमने उन लोगों के लिए सबसे अच्छा करने की कोशिश की है, जिनके घरों में शौचालय या बिजली नहीं है. हमें और करने की जरूरत है. हम बहिष्करण को समावेश में बदलने की कोशिश कर रहे हैं. इसे ही मैं संविधान निर्माताओं का सपना पूरा करना कहता हूं.

जजों पर शारीरिक ही नहीं सोशल मीडिया के जरिये भी हो रहे हमले, संविधान दिवस पर बोले चीफ जस्टिस

पीएम ने कहा कि जब गरीबों को समानता और समान अवसर मिले तो इसे राष्ट्र निर्माण कहते हैं. दिव्यांगों के अधिकार, जब तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो यह अधिकारों को बढ़ाता है. यह कई बहनों की जीत है. सबका साथ, सबका विकास हमारा आदर्श वाक्य है. हम इसका सख्ती से पालन करते हैं.

उन्होंने कहा कि गुजरात में नर्मदा में सरदार पटेल बांध देखना चाहते थे. पंडित नेहरू ने इसका शिलान्यास किया. लेकिन पर्यावरण के नाम पर आंदोलन चलाया गया. अदालतों में भी मामला कई दशकों तक उलझा रहा, अदालतें भी आदेश जारी करने में हिचकिचाती रहीं.

औपनिवेशिक मानसिकता जारी है. भारत को पर्यावरण के नाम पर उपदेश दिए जाते हैं. भारत पर तरह तरह के दबाव बनाए जाते हैं. देश के भीतर भी कुछ लोग ऐसी मानसिकता वाले हैं. बोलने की आजादी के नाम पर कुछ भी करते हैं. ये औपनिवेशिक मानसिकता वाले देश के विकास में बाधा हैं, इनको दूर करना ही होगा.

पीएम मोदी ने कहा कि दुख की बात है कि हमारे देश में ऐसे लोग भी हैं, जो अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर बिना सोचे समझे देश के विकास को रोक देते हैं. इसका खामियाजा ऐसे लोगों को नहीं भुगतना पड़ता है. लेकिन उन माताओं को झेलना पड़ता है जिनके पास अपने बच्चे के लिए बिजली नहीं है.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने सुप्रीम कोर्ट के संविधान दिवस (Constitution Day) समारोह के कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को लेकर भारत पर पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन को लेकर दबाव डालने वाले अमीर देशों को आड़े हाथों लिया. पीएम मोदी ने कहा, पर्यावरण के नाम पर भारत पर कई तरह के दबाव डाले गए, ये औपनिवेशक मानसिकता का परिणाम है. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हम सभी अलग-अलग भूमिका निभाते हैं. हमारे काम की प्रकृति अलग है. लेकिन हमारा मार्गदर्शक स्रोत और दिशानिर्देश संविधान है. आज बहुत अच्छा दिन है. हमें अपने संविधान निर्माताओं के उस सपने को पूरा करने की जरूरत है, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी. हमें बहुत कुछ हासिल करना है. हमारा संविधान समावेश की अवधारणा पर जोर देता है. इस कार्यक्रम में चीफ जस्टिस एनवी रमना, कानून मंत्री किरेन रिजीजू और अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल भी उपस्थित थे.पर्यावरण संरक्षण और कॉर्बन उत्सर्जन पर भारत को भाषण देने वाले विकसित देशों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आड़े हाथों लिया। कहा कि भारत में कुछ लोग अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर विकास में रोड़े अटकाते हैं। pic.twitter.com/QzwxxEV4M5 — Akhilesh Sharma (@akhileshsharma1) November 26, 2021हमने उन लोगों के लिए सबसे अच्छा करने की कोशिश की है, जिनके घरों में शौचालय या बिजली नहीं है. हमें और करने की जरूरत है. हम बहिष्करण को समावेश में बदलने की कोशिश कर रहे हैं. इसे ही मैं संविधान निर्माताओं का सपना पूरा करना कहता हूं.जजों पर शारीरिक ही नहीं सोशल मीडिया के जरिये भी हो रहे हमले, संविधान दिवस पर बोले चीफ जस्टिसपीएम ने कहा कि जब गरीबों को समानता और समान अवसर मिले तो इसे राष्ट्र निर्माण कहते हैं. दिव्यांगों के अधिकार, जब तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो यह अधिकारों को बढ़ाता है. यह कई बहनों की जीत है. सबका साथ, सबका विकास हमारा आदर्श वाक्य है. हम इसका सख्ती से पालन करते हैं.उन्होंने कहा कि गुजरात में नर्मदा में सरदार पटेल बांध देखना चाहते थे. पंडित नेहरू ने इसका शिलान्यास किया. लेकिन पर्यावरण के नाम पर आंदोलन चलाया गया. अदालतों में भी मामला कई दशकों तक उलझा रहा, अदालतें भी आदेश जारी करने में हिचकिचाती रहीं.औपनिवेशिक मानसिकता जारी है. भारत को पर्यावरण के नाम पर उपदेश दिए जाते हैं. भारत पर तरह तरह के दबाव बनाए जाते हैं. देश के भीतर भी कुछ लोग ऐसी मानसिकता वाले हैं. बोलने की आजादी के नाम पर कुछ भी करते हैं. ये औपनिवेशिक मानसिकता वाले देश के विकास में बाधा हैं, इनको दूर करना ही होगा.पीएम मोदी ने कहा कि दुख की बात है कि हमारे देश में ऐसे लोग भी हैं, जो अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर बिना सोचे समझे देश के विकास को रोक देते हैं. इसका खामियाजा ऐसे लोगों को नहीं भुगतना पड़ता है. लेकिन उन माताओं को झेलना पड़ता है जिनके पास अपने बच्चे के लिए बिजली नहीं है.

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