![]()
कपूरथलाएक घंटा पहले
- कॉपी लिंक

आर्मी के अफसरों ने शहीद की पत्नी को तिरंगे में लिपटी जसविंदर सिंह की वर्दी सौंपी ।
जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकी हमले में शहीद हुए JCO जसविंदर सिंह का संस्कार बुधवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ कर दिया गया। बुधवार सुबह शहीद का पार्थिव शरीर कपूरथला जिले में स्थित उनके पैतृक गांव माना तलवंडी लाया गया। गांव के श्मशान घाट में दोपहर एक बजे शहीद की चिता को अग्नि दी गई।
शहीद की मां मनजीत कौर ने बड़े ही गर्व के साथ अपने बेटे का मुंह देखकर उसे सैल्यूट किया। 11 साल की बेटी हरनूर कौर ने भी अपने पिता के पार्थिव शरीर को सैल्यूट किया।
बुधवार सुबह शहीद जसविंदर सिंह का पार्थिव शरीर घर पहुंचने के बाद उनकी बीमार मां मनजीत कौर के चेहरे पर बेटे के जाने का गम साफ झलक रहा था। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया और पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे सिख रेजिमेंट के जवानों और अधिकारियों से बातचीत की। बेटे की कुर्बानी पर गर्व करते हुए मनजीत कौर ने कहा कि वह जसविंदर की ही नहीं बल्कि फौजियों की पूरी पलटन की मां हैं। जसविंदर ने उनके दूध की लाज रखते हुए देश और पंजाब का नाम रोशन किया है।

पिता के पार्थिव शरीर को सैल्यूट करती 11 साल की हरनूर कौर।
मनजीत कौर ने कहा, ‘मेरा पोता और जसविंदर सिंह का बेटा विक्रमजीत अभी थोड़ा छोटा है। जिस दिन विक्रमजीत 10वीं कर लेगा, मैं उसे भी फौज में भेजूंगी। वह हमारे परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएगा। देश की सेवा करना हमारे परिवार का धर्म है।’ गौरतलब है कि जसविंदर के पिता हरभजन सिंह आर्मी से बतौर कैप्टन रिटायर हुए। पिता हरभजन सिंह का 2 महीने पहले ही कोरोना से निधन हो चुका है। पिता की बीमारी के वक्त ही जसविंदर आखिरी बार गांव आए थे। जसविंदर अपने पिता को देखकर ही 21 साल पहले सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। 2007 में जसविंदर को आतंकियों के साथ बहादुरी से मुकाबला करने पर सेना मेडल से सम्मानित किया गया।

शहीद का शव लेकर गांव माना तलवंडी पहुंची सेना की गाड़ी।
शहीद जसविंदर सिंह के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर घर से श्मशान घाट तक ले जाया गया। इस दौरान पूरा गांव मौजूद रहा। अंतिम संस्कार से पहले सिख रेजिमेंट के जवानों ने शहीद को सलामी दी। इससे पहले शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की ओर से कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने उसे श्रद्धांजलि दी। पंजाब के राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में कपूरथला की DC दीप्ति उप्पल सुबह ही माना तलवंडी गांव पहुंच गईं और शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। भुलत्थ के विधायक सुखापाल खैहरा और SGPC प्रधान व अकाली नेता जागीर कौर ने भी गांव पहुंचकर शहीद के परिवार से संवेदना जताई।
जम्मू के पुंछ में बीते सोमवार को आतंकियों के घुसपैठ की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान घात लगाकर बैठे आतंकियों की फायरिंग में एक ऑफिसर समेत 5 जवान शहीद हो गए। इनमें नायब सूबेदार जसबिंदर सिंह, नायक मंदीप सिंह, सिपाही गज्जन सिंह, सिपाही सरज सिंह और सिपाही वैसाख सिंह शामिल रहे। शहीद जसविंदर सिंह कपूरथला जिले के माना तलवंडी गांव के रहने वाले थे। जसविंदर सिंह के परिवार में पत्नी सुखप्रीत कौर के अलावा दो बच्चे, 13 साल का बेटा विक्रमजीत और 11 साल की बेटी हरनूर कौर हैं। उनकी मां मनजीत कौर कई महीनों से बीमार चल रही हैं।

जसविंदर सिंह की शहादत पर पूरे गांव में शोक का माहौल है।

शहीद की पत्नी सुखप्रीत कौर को ढांढ़स बंधातीं SGPC प्रधान जागीर कौर।
कैप्टन पिता से प्रेरित होकर सेना में भर्ती हुए थे जसविंदर
शहीद जसविंदर के मामा गुरनरिंदर सिंह भी आर्मी से बतौर सूबेदार रिटायर्ड हैं। गुरनरिंदर सिंह ने बताया कि चूंकि जसविंदर के पिता फौज में थे इसलिए वह बचपन में ज्यादातर अपने नानके में ही रहा। जसविंदर अपने पिता कैप्टन हरभजन सिंह व उनको (मामा को) देखकर फौज में गया।

शहीद JCO जसविंदर सिंह।
कपूरथलाएक घंटा पहलेकॉपी लिंकआर्मी के अफसरों ने शहीद की पत्नी को तिरंगे में लिपटी जसविंदर सिंह की वर्दी सौंपी ।जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकी हमले में शहीद हुए JCO जसविंदर सिंह का संस्कार बुधवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ कर दिया गया। बुधवार सुबह शहीद का पार्थिव शरीर कपूरथला जिले में स्थित उनके पैतृक गांव माना तलवंडी लाया गया। गांव के श्मशान घाट में दोपहर एक बजे शहीद की चिता को अग्नि दी गई।शहीद की मां मनजीत कौर ने बड़े ही गर्व के साथ अपने बेटे का मुंह देखकर उसे सैल्यूट किया। 11 साल की बेटी हरनूर कौर ने भी अपने पिता के पार्थिव शरीर को सैल्यूट किया।बुधवार सुबह शहीद जसविंदर सिंह का पार्थिव शरीर घर पहुंचने के बाद उनकी बीमार मां मनजीत कौर के चेहरे पर बेटे के जाने का गम साफ झलक रहा था। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया और पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे सिख रेजिमेंट के जवानों और अधिकारियों से बातचीत की। बेटे की कुर्बानी पर गर्व करते हुए मनजीत कौर ने कहा कि वह जसविंदर की ही नहीं बल्कि फौजियों की पूरी पलटन की मां हैं। जसविंदर ने उनके दूध की लाज रखते हुए देश और पंजाब का नाम रोशन किया है।पिता के पार्थिव शरीर को सैल्यूट करती 11 साल की हरनूर कौर।मनजीत कौर ने कहा, ‘मेरा पोता और जसविंदर सिंह का बेटा विक्रमजीत अभी थोड़ा छोटा है। जिस दिन विक्रमजीत 10वीं कर लेगा, मैं उसे भी फौज में भेजूंगी। वह हमारे परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएगा। देश की सेवा करना हमारे परिवार का धर्म है।’ गौरतलब है कि जसविंदर के पिता हरभजन सिंह आर्मी से बतौर कैप्टन रिटायर हुए। पिता हरभजन सिंह का 2 महीने पहले ही कोरोना से निधन हो चुका है। पिता की बीमारी के वक्त ही जसविंदर आखिरी बार गांव आए थे। जसविंदर अपने पिता को देखकर ही 21 साल पहले सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। 2007 में जसविंदर को आतंकियों के साथ बहादुरी से मुकाबला करने पर सेना मेडल से सम्मानित किया गया।शहीद का शव लेकर गांव माना तलवंडी पहुंची सेना की गाड़ी।शहीद जसविंदर सिंह के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर घर से श्मशान घाट तक ले जाया गया। इस दौरान पूरा गांव मौजूद रहा। अंतिम संस्कार से पहले सिख रेजिमेंट के जवानों ने शहीद को सलामी दी। इससे पहले शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की ओर से कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने उसे श्रद्धांजलि दी। पंजाब के राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में कपूरथला की DC दीप्ति उप्पल सुबह ही माना तलवंडी गांव पहुंच गईं और शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। भुलत्थ के विधायक सुखापाल खैहरा और SGPC प्रधान व अकाली नेता जागीर कौर ने भी गांव पहुंचकर शहीद के परिवार से संवेदना जताई।जम्मू के पुंछ में बीते सोमवार को आतंकियों के घुसपैठ की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान घात लगाकर बैठे आतंकियों की फायरिंग में एक ऑफिसर समेत 5 जवान शहीद हो गए। इनमें नायब सूबेदार जसबिंदर सिंह, नायक मंदीप सिंह, सिपाही गज्जन सिंह, सिपाही सरज सिंह और सिपाही वैसाख सिंह शामिल रहे। शहीद जसविंदर सिंह कपूरथला जिले के माना तलवंडी गांव के रहने वाले थे। जसविंदर सिंह के परिवार में पत्नी सुखप्रीत कौर के अलावा दो बच्चे, 13 साल का बेटा विक्रमजीत और 11 साल की बेटी हरनूर कौर हैं। उनकी मां मनजीत कौर कई महीनों से बीमार चल रही हैं।जसविंदर सिंह की शहादत पर पूरे गांव में शोक का माहौल है।शहीद की पत्नी सुखप्रीत कौर को ढांढ़स बंधातीं SGPC प्रधान जागीर कौर।कैप्टन पिता से प्रेरित होकर सेना में भर्ती हुए थे जसविंदरशहीद जसविंदर के मामा गुरनरिंदर सिंह भी आर्मी से बतौर सूबेदार रिटायर्ड हैं। गुरनरिंदर सिंह ने बताया कि चूंकि जसविंदर के पिता फौज में थे इसलिए वह बचपन में ज्यादातर अपने नानके में ही रहा। जसविंदर अपने पिता कैप्टन हरभजन सिंह व उनको (मामा को) देखकर फौज में गया।शहीद JCO जसविंदर सिंह।
