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नई दिल्ली11 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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अब कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की वापसी का रास्ता कठिन हो गया है। वजह है, पांच राज्यों के चुनाव नतीजों में मिली करारी हार। पार्टी में भीतरी लोकतंत्र की मांग कर रहे 23 वरिष्ठ नेताओं का गुट यानी जी-23 इस मौके की तलाश में था। कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष का चुनाव 21 अगस्त से 20 सितम्बर के बीच होना है।
पार्टी 15 अप्रैल तक अपने AICC सदस्यों की लिस्ट जारी करेगी, इसके एक महीने के भीतर ब्लाॅक कमेटी के चुनाव होंगे। जिला अध्यक्षों के चुनाव जुलाई में पूरे होंगे। कांग्रेस को गैर गांधी परिवार के सुपुर्द करने के हिमायती गुट की आवाज मुखर होगी। साथ ही राहुल गांधी का अध्यक्ष बनने का नैतिक बल कमजोर होगा।

राज्यों में मिली हार के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट कर जनता का धन्यवाद देकर अपनी पार्टी की हार को स्वीकारा है।
लंबे समय से गैर गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग
कांग्रेस में पिछले काफी समय से गैर गांधी परिवार के किसी नेता को अध्यक्ष बनाने की मांग चल रही है। कश्मीर के बड़े नेता गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे नेता इस बात को समय-समय पर उठा चुके हैं। पंजाब में सरकार गंवाने के बाद कांग्रेस के लिए फेस सेविंग और भी मुश्किल होने वाली है। कांग्रेस की ओर से पंजाब में मुख्यमंत्री परिवर्तन से लेकर अन्य कई पॉलिटिकल सर्जरी की गई, लेकिन ये काम नहीं आई। पंजाब में पार्टी को करारी हार का मुंह देना पड़ा। उत्तराखंड में भी जीत से दूर रह गई।
यूपी में प्रियंका का महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने का फॉर्मूला फेल
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी का महिलाओं को 40 फीसदी टिकट का फॉर्मूलर फेल रहा। कांग्रेस एक वरिष्ठ नेता ने कहा, राज्य में महिलाएं कांग्रेस के लिए वोट बैंक नहीं बन पाईं। ऐसा होना भी संभव नहीं था। इससे पार्टी के वे उम्मीदवार पीछे छूट गए जो टक्कर दे सकते थे।

यूपी में मिली हार के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने हार स्वीकारते हुए कहा है कि वे कांग्रेस यूपी में विपक्ष की भूमिका निभाती रहेगी।
उत्तराखंड में कांग्रेस की हार के 5 बड़े कारण
- पार्टी ने सीएम चेहरे का ऐलान नहीं किया। आखिरी समय तक हरीश रावत को अपना मुख्यमंत्री घोषित नहीं किया।
- आखिरी मौके पर भाजपा से आए हरक सिंह रावत को लेने से कांग्रेस के सीएम उम्मीदवारों के चेहरे को लेकर असमंजस पैदा हुआ।
- कांग्रेस ने नौकरी, गैस और स्वास्थ्य सुविधाओं पर दांव खेला, जबकि भाजपा राष्ट्रवाद के कार्ड पर कायम रही।
- हरीश रावत ने खुद को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया। रावत का ये कदम मतदाताओं में विपरीत प्रभाव वाला साबित हुआ।
- उत्तराखंड में हरीश रावत के अलावा कोई और बड़ा प्रचारक नहीं था। राहुल और प्रियंका गांधी की रैलियां बहुत कम हुईं। कांग्रेस ने 4 से 5 प्रतिशत वोट अधिक हासिल किए, लेकिन सीटों में यह प्रतिशत तब्दील नहीं हो पाया।

सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद जी-23 की क्षणिक शांति ने पांचों राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के विघटन को ही सतह पर लाने का काम किया है।
गोवा में कांग्रेस ने वापसी का अवसर 3 कारणों से गंवाया
1. मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान नहीं किया।
2. 2017 में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद सरकार न बना पाने की कमजोरी को गोवा के वोटरों ने माफ नहीं किया।
3. वोट काट रही टीएमसी के साथ हाथ नहीं मिलाए और अपनी प्रतिष्ठा गिरा चुकी गोवा फारवर्ड पार्टी का दामन थाम लिया।
Hindi NewsNationalPolitics Rahul Gandhi President G 23 Re emerge Election Result Congress BJPनई दिल्ली11 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिककॉपी लिंकअब कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की वापसी का रास्ता कठिन हो गया है। वजह है, पांच राज्यों के चुनाव नतीजों में मिली करारी हार। पार्टी में भीतरी लोकतंत्र की मांग कर रहे 23 वरिष्ठ नेताओं का गुट यानी जी-23 इस मौके की तलाश में था। कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष का चुनाव 21 अगस्त से 20 सितम्बर के बीच होना है।पार्टी 15 अप्रैल तक अपने AICC सदस्यों की लिस्ट जारी करेगी, इसके एक महीने के भीतर ब्लाॅक कमेटी के चुनाव होंगे। जिला अध्यक्षों के चुनाव जुलाई में पूरे होंगे। कांग्रेस को गैर गांधी परिवार के सुपुर्द करने के हिमायती गुट की आवाज मुखर होगी। साथ ही राहुल गांधी का अध्यक्ष बनने का नैतिक बल कमजोर होगा।राज्यों में मिली हार के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट कर जनता का धन्यवाद देकर अपनी पार्टी की हार को स्वीकारा है।लंबे समय से गैर गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांगकांग्रेस में पिछले काफी समय से गैर गांधी परिवार के किसी नेता को अध्यक्ष बनाने की मांग चल रही है। कश्मीर के बड़े नेता गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे नेता इस बात को समय-समय पर उठा चुके हैं। पंजाब में सरकार गंवाने के बाद कांग्रेस के लिए फेस सेविंग और भी मुश्किल होने वाली है। कांग्रेस की ओर से पंजाब में मुख्यमंत्री परिवर्तन से लेकर अन्य कई पॉलिटिकल सर्जरी की गई, लेकिन ये काम नहीं आई। पंजाब में पार्टी को करारी हार का मुंह देना पड़ा। उत्तराखंड में भी जीत से दूर रह गई।यूपी में प्रियंका का महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने का फॉर्मूला फेलउत्तर प्रदेश में कांग्रेस की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी का महिलाओं को 40 फीसदी टिकट का फॉर्मूलर फेल रहा। कांग्रेस एक वरिष्ठ नेता ने कहा, राज्य में महिलाएं कांग्रेस के लिए वोट बैंक नहीं बन पाईं। ऐसा होना भी संभव नहीं था। इससे पार्टी के वे उम्मीदवार पीछे छूट गए जो टक्कर दे सकते थे।यूपी में मिली हार के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने हार स्वीकारते हुए कहा है कि वे कांग्रेस यूपी में विपक्ष की भूमिका निभाती रहेगी।उत्तराखंड में कांग्रेस की हार के 5 बड़े कारणपार्टी ने सीएम चेहरे का ऐलान नहीं किया। आखिरी समय तक हरीश रावत को अपना मुख्यमंत्री घोषित नहीं किया।आखिरी मौके पर भाजपा से आए हरक सिंह रावत को लेने से कांग्रेस के सीएम उम्मीदवारों के चेहरे को लेकर असमंजस पैदा हुआ।कांग्रेस ने नौकरी, गैस और स्वास्थ्य सुविधाओं पर दांव खेला, जबकि भाजपा राष्ट्रवाद के कार्ड पर कायम रही।हरीश रावत ने खुद को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया। रावत का ये कदम मतदाताओं में विपरीत प्रभाव वाला साबित हुआ।उत्तराखंड में हरीश रावत के अलावा कोई और बड़ा प्रचारक नहीं था। राहुल और प्रियंका गांधी की रैलियां बहुत कम हुईं। कांग्रेस ने 4 से 5 प्रतिशत वोट अधिक हासिल किए, लेकिन सीटों में यह प्रतिशत तब्दील नहीं हो पाया।सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद जी-23 की क्षणिक शांति ने पांचों राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के विघटन को ही सतह पर लाने का काम किया है।गोवा में कांग्रेस ने वापसी का अवसर 3 कारणों से गंवाया1. मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान नहीं किया।2. 2017 में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद सरकार न बना पाने की कमजोरी को गोवा के वोटरों ने माफ नहीं किया।3. वोट काट रही टीएमसी के साथ हाथ नहीं मिलाए और अपनी प्रतिष्ठा गिरा चुकी गोवा फारवर्ड पार्टी का दामन थाम लिया।