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बेंगलुरु5 घंटे पहले
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कर्नाटक हाईकोर्ट कहा है कि महिला की जाति पिता की जाति से तय की जाती है, ना कि पति की जाति से। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की सिंगल बेंच ने कहा कि महिलाएं कई बार सामाजिक स्वीकृति से पति की जाति को हासिल कर लेती है। हालांकि यह अपवाद है।
शिवमोगा के ग्राम अधिकारी की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने महाभारत का श्लोक ‘दैव यत्नाम कुले जन्मा, पुरुषा यत्नाम पौरुशम’ का भी जिक्र किया। सुनवाई के दौरान महिला ने कहा कि मुझे चुनाव प्राधिकरण के सामने अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला
अर्चना एमजी नामक याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर शिवमोगा सिविल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि वे ट्राइबल रिजर्व सीट से ग्राम पंचायत सदस्य हैं, लेकिन शिवमोगा कोर्ट ने कास्ट सर्टिफिकेट के आधार पर उसे पद से हटा दिया। महिला का तर्क था कि उसने अनुसूचित जनजाति से आने वाले व्यक्ति से शादी की है। ऐसे में वो भी इसी जाति की हो गई है, जिस वजह से उसे रिजर्व सीट के पद से नहीं हटाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया था ऑर्डर
20 जनवरी 2020 को एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा और एमएम शांतनागौदर की बेंच ने भी कहा था कि महिला की जाति जन्म से ही तय होती है। कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा था कि जाति अपरिवर्तनीय है। ऐसे में शादी के बाद इसका लाभ नहीं उठाया जा सकता है।

Hindi NewsNationalKarnataka High Court Caste Case Order Panchayat Seat Shivamogga St Reservationबेंगलुरु5 घंटे पहलेकॉपी लिंककर्नाटक हाईकोर्ट कहा है कि महिला की जाति पिता की जाति से तय की जाती है, ना कि पति की जाति से। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की सिंगल बेंच ने कहा कि महिलाएं कई बार सामाजिक स्वीकृति से पति की जाति को हासिल कर लेती है। हालांकि यह अपवाद है।शिवमोगा के ग्राम अधिकारी की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने महाभारत का श्लोक ‘दैव यत्नाम कुले जन्मा, पुरुषा यत्नाम पौरुशम’ का भी जिक्र किया। सुनवाई के दौरान महिला ने कहा कि मुझे चुनाव प्राधिकरण के सामने अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।क्या है पूरा मामलाअर्चना एमजी नामक याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर शिवमोगा सिविल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि वे ट्राइबल रिजर्व सीट से ग्राम पंचायत सदस्य हैं, लेकिन शिवमोगा कोर्ट ने कास्ट सर्टिफिकेट के आधार पर उसे पद से हटा दिया। महिला का तर्क था कि उसने अनुसूचित जनजाति से आने वाले व्यक्ति से शादी की है। ऐसे में वो भी इसी जाति की हो गई है, जिस वजह से उसे रिजर्व सीट के पद से नहीं हटाया जा सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया था ऑर्डर20 जनवरी 2020 को एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा और एमएम शांतनागौदर की बेंच ने भी कहा था कि महिला की जाति जन्म से ही तय होती है। कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा था कि जाति अपरिवर्तनीय है। ऐसे में शादी के बाद इसका लाभ नहीं उठाया जा सकता है।