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नई दिल्ली20 मिनट पहले
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सोशल मीडिया पर एक किताब के कुछ पन्ने वायरल हो रहे हैं। इसमें दहेज को लेकर कई आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। एक पैराग्राफ में तो यहां तक लिखा है कि ‘दहेज की मदद से बदसूरत लड़कियों की शादी हैंडसम लड़कों से हो जाती है।’
आगे बढ़ने से पहले इस पोल पर अपनी राय साझा करते चलें…
किताब को लेकर महिलाएं सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर रही हैं। वे इसे महिला और संविधान विरोधी बता रही हैं। शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस किताब के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इसमें दखल देने की भी अपील की।
इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने किया किताब से किनारा
विवाद बढ़ने के बाद इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) ने नोटिफिकेशन जारी कर किताब और लेखक से किनारा कर लिया। अपने नोटिफिकेशन में काउंसिल ने कहा कि वे ऐसी किसी किताब या कंटेंट का समर्थन नहीं करते हैं। INC ने देश के कानूनों के पालन करने की भी बात कही है।
प्रियंका ने कहा- शर्म की बात, कार्रवाई करें शिक्षा मंत्री
प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे महिलाओं के लिए अपमानजनक और शर्मनाक बताया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान को पत्र लिख कर ऐसी किताबों को तुरंत सर्कुलेशन से हटाने की भी अपील की। ट्विटर पर उन्होंने लिखा, ‘ऐसी किताबों का हमारे पाठ्यक्रम में होना देश और संविधान के लिए शर्मनाक है।’
राइटर ने गिनाए दहेज के फायदे
बीएससी सेकेंड इयर की किताब ‘Textbook of sociology for nurses’ में राइटर टीके इंद्राणी ने एक तरफ से दहेज के फायदे गिनाए हैं। उन्होंने कई प्वाइंट्स में दहेज प्रथा को सही साबित करने की कोशिश की है। एक पाइंट में उन्होंने लिखा कि ‘दहेज में मिलने वाली टीवी, फ्रीज से गृहस्थी बसाने में मदद मिलती है।’ ऐसे ही एक पाइंट में उन्होंने लिखा है कि ‘कम दहेज देने की लालच में ही माता-पिता अपनी बेटियों को पढ़ाते हैं। किताब के सबसे विवादित हिस्से में उन्होंने लिखा है कि दहेज की मदद से बदसूरत लड़कियों की शादी में आसानी होती है।
देश के लिए अभी भी अभिशाप है दहेज प्रथा
देश में 1961 में ही दहेज प्रथा के खिलाफ कानून बना दिया गया था। लेकिन समाज में यह आज भी बदस्तूर जारी है। थिंक टैंक ‘इंडियन काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ ने 1961 से 2008 के बीच होने वाली 40 हजार शादियों पर रिसर्च की। रिसर्च में पाया गया कि इनमें से 95% शादियों में लड़की पक्ष की ओर से दहेज दिया गया था।
नेशनल क्राइम ब्यूरो ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक दहेज के लिए देश में हर साल लगभग 7 हजार बेटियां मारी जाती हैं। यानी दहेज की लालच में हर दिन 20 लड़कियां मारी जाती हैं।
Hindi NewsWomenShiv Sena’s Priyanka Chaturvedi Glorifies Malpractices In College Book Shamefulनई दिल्ली20 मिनट पहलेकॉपी लिंकसोशल मीडिया पर एक किताब के कुछ पन्ने वायरल हो रहे हैं। इसमें दहेज को लेकर कई आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। एक पैराग्राफ में तो यहां तक लिखा है कि ‘दहेज की मदद से बदसूरत लड़कियों की शादी हैंडसम लड़कों से हो जाती है।’आगे बढ़ने से पहले इस पोल पर अपनी राय साझा करते चलें…किताब को लेकर महिलाएं सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर रही हैं। वे इसे महिला और संविधान विरोधी बता रही हैं। शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस किताब के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इसमें दखल देने की भी अपील की।इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने किया किताब से किनाराविवाद बढ़ने के बाद इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) ने नोटिफिकेशन जारी कर किताब और लेखक से किनारा कर लिया। अपने नोटिफिकेशन में काउंसिल ने कहा कि वे ऐसी किसी किताब या कंटेंट का समर्थन नहीं करते हैं। INC ने देश के कानूनों के पालन करने की भी बात कही है।प्रियंका ने कहा- शर्म की बात, कार्रवाई करें शिक्षा मंत्रीप्रियंका चतुर्वेदी ने इसे महिलाओं के लिए अपमानजनक और शर्मनाक बताया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान को पत्र लिख कर ऐसी किताबों को तुरंत सर्कुलेशन से हटाने की भी अपील की। ट्विटर पर उन्होंने लिखा, ‘ऐसी किताबों का हमारे पाठ्यक्रम में होना देश और संविधान के लिए शर्मनाक है।’राइटर ने गिनाए दहेज के फायदेबीएससी सेकेंड इयर की किताब ‘Textbook of sociology for nurses’ में राइटर टीके इंद्राणी ने एक तरफ से दहेज के फायदे गिनाए हैं। उन्होंने कई प्वाइंट्स में दहेज प्रथा को सही साबित करने की कोशिश की है। एक पाइंट में उन्होंने लिखा कि ‘दहेज में मिलने वाली टीवी, फ्रीज से गृहस्थी बसाने में मदद मिलती है।’ ऐसे ही एक पाइंट में उन्होंने लिखा है कि ‘कम दहेज देने की लालच में ही माता-पिता अपनी बेटियों को पढ़ाते हैं। किताब के सबसे विवादित हिस्से में उन्होंने लिखा है कि दहेज की मदद से बदसूरत लड़कियों की शादी में आसानी होती है।देश के लिए अभी भी अभिशाप है दहेज प्रथादेश में 1961 में ही दहेज प्रथा के खिलाफ कानून बना दिया गया था। लेकिन समाज में यह आज भी बदस्तूर जारी है। थिंक टैंक ‘इंडियन काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ ने 1961 से 2008 के बीच होने वाली 40 हजार शादियों पर रिसर्च की। रिसर्च में पाया गया कि इनमें से 95% शादियों में लड़की पक्ष की ओर से दहेज दिया गया था।नेशनल क्राइम ब्यूरो ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक दहेज के लिए देश में हर साल लगभग 7 हजार बेटियां मारी जाती हैं। यानी दहेज की लालच में हर दिन 20 लड़कियां मारी जाती हैं।