फांसी पाने वाले सफदर नागौरी का MP कनेक्शन:कश्मीर पर शोधपत्र लिखा ‘बर्फ की आग कैसे बुझे’, पढ़ते ही उज्जैन के प्रोफेसर्स के होश उड़ गए थे

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आनंद निगम (उज्जैन)5 घंटे पहले

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में सफदर नागौरी के साथ 38 दोषियों को भी फांसी की सजा सुनाई गई है। सफदर, पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट है। पढ़ाई के दौरान ही उसने शोध पत्र के जरिए अपने बगावती मंसूबे जाहिर कर दिए थे। उसने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से पढ़ाई के दौरान ‘बर्फ की आग कैसे बुझे’ के नाम से कश्मीर और वहां के मुद्दों पर विवादित शोध बनाया था। जिसे पढ़कर प्रोफेसरों के होश उड़ गए थे और बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।

साल 2000 में फाइनल ईयर में उसे प्रोजेक्ट वर्क के लिए विषय दिया गया था- उर्दू पत्रकारिता का आयाम। सफदर ने विभाग प्रमुख प्रो. रामराजेश मिश्र से विषय बदलने को कहा। मिश्र की अनुमति पर उसने कश्मीर समस्या को लेकर प्रोजेक्ट लिखा- बर्फ की आग कैसे बुझे। यह प्रोजेक्ट वर्क चार खंडों में लिखा गया- कश्मीर ट्रेजडी, धरती का स्वर्ग: कल और आज, विवादित बिंदू: कुछ तथ्य तथा ऐसे बुझेगी बर्फ की आग। इसमें सफदर ने लिखा- ‘लोकतंत्र का अर्थ बहुमत की तानाशाही नहीं है। कश्मीर का फैसला कश्मीरी ही करें। यह प्रस्ताव जिनके गले नहीं उतर रहा वे वाकई फासीवादी मनोवृत्ति का परिचय दे रहे हैं। उसने लिखा- पक्षी पिंजरे में हो या कुत्ता जंजीर से बंधा हो और आप दुनिया से कहें कि यह तो स्वेच्छा से मेरे साथ है तो कोई अंधा ही इस पर विश्वास कर सकता है।’

पिता पुलिस से रिटायर हुए

नागौरी 1970 में उज्जैन में महिदपुर के नागौरी गांव में पैदा हुआ था। उसके पिता गहिरुद्दीन नागौरी उज्जैन पुलिस क्राइम ब्रांच में थे और 2005 में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हुए। नागौरी ने 1999 में विक्रम यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन कम्प्लीट की। यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही वह सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) से जुड़ गया था। उसे प्रदेश अध्यक्ष का पद मिला था। भाई कमरुद्दीन नागौरी को आंध्र प्रदेश में सिमी प्रमुख की जिम्मेदारी मिली थी। आतंकी संगठन सिमी पर भारत सरकार 2001 में बैन लगा चुकी है।

1993 में बना सिमी का सदस्य
1992 में बाबरी विध्वंस और उसके बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद नागौरी कट्टरपंथी बन गया। 1993 में वह सिमी से जुड़ा। नागौरी के खिलाफ पहला केस 1997 में उज्जैन के महाकाल पुलिस थाने में दर्ज हुआ। 1998 में इंदौर में केस हुआ। इंदौर पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के बाद रिहा कर दिया था। गलत एक्टिविटीज में शामिल होने की वजह से पिता ने उससे संबंध तोड़ लिए थे। 2001 में संगठन पर प्रतिबंध लगने से पहले वह अंडरग्राउंड हो गया। उसे 11 दिसंबर, 2000 को भगोड़ा घोषित किया गया था।

मस्जिदों में करता था भड़काऊ तकरीरें
नागौरी अंडरग्राउंड तो हो गया, लेकिन उज्जैन और आसपास के इलाकों में 2005 से 2007 के बीच एक्टिव रहा। मस्जिदों में भड़काऊ तकरीरें (उपदेश) देता रहा। विवादित पोस्टर चिपकाए। वह देशभर में विस्फोट कर अलकायदा जैसा नाम करना चाहता था। उन्हैल के पास झोपड़ी बनाकर इसकी साजिश रची गई थी। उज्जैन के महाकाल, खारकुंवा और माधवनगर थाने में कई अपराध दर्ज हैं। सिमी पर प्रतिबंध के बाद उज्जैन के तोपखाना क्षेत्र में सिमी के कार्यालय से महाकाल थाना पुलिस ने विवादित किताब और भड़काऊ पोस्टर बरामद किए थे।

अहमदाबाद में 70 मिनट के अंदर हुए सिलसिलेवार धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी।

अहमदाबाद में 70 मिनट के अंदर हुए सिलसिलेवार धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी।

इंदौर में फार्महाउस पर चलाता था ट्रेनिंग कैंप
सफदर नागौरी को 26 मार्च 2008 को इंदौर के संयोगितागंज में एक फ्लैट से मध्यप्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ऑपरेशन में वह, उसका भाई कमरुद्दीन नागौरी समेत 11 सिमी आतंकवादी पकड़े गए थे। ये लोग इंदौर शहर से 35 किलोमीटर दूर चोरल में एक फार्महाउस पर आतंकी ट्रेनिंग कैंप चलाते थे। झारखंड, केरल, कर्नाटक और दूसरे राज्यों के सिमी सदस्यों को यहां ट्रेनिंग दी जाती थी। पुलिस को फार्महाउस से हथियार, गोला-बारूद, उर्दू और हिंदी में कट्टरपंथी साहित्य और विस्फोटक मिले थे। इस केस में नागौरी को छोड़ दिया गया था।

तीन महीने बाद ही 26 जुलाई को दहलाया गुजरात
अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। 70 मिनट के अंदर 56 लोगों की मौत हो गई थी। 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। धमाकों में सफदर नागौरी शामिल था। उसे गुजरात पुलिस ने अरेस्ट कर लिया था। पूछताछ में नागौरी ने STF को बताया था कि सिमी के लड़ाकों को हिजबुल मुजाहिदीन के साथ जम्‍मू-कश्‍मीर में ट्रेनिंग मिली थी। नागौरी ने कहा कि उन्‍हें देशभर में विभिन्‍न तरह के आतंकी ऑपरेशनों के लिए ट्रेंड किया गया था।

भारत के इतिहास में सबसे बड़ी सजा:अहमदाबाद ब्लास्ट के 49 दोषियों में से 38 को फांसी, 11 आखिरी सांस तक सलाखों के पीछे कैद रहेंगे

सफदर को 2017 में इंदौर लाया गया था। दूसरे दिन उसे भोपाल जेल शिफ्ट कर दिया गया था।

सफदर को 2017 में इंदौर लाया गया था। दूसरे दिन उसे भोपाल जेल शिफ्ट कर दिया गया था।

इंदौर केस में CBI ने की जांच
इंदौर में ट्रेनिंग कैंप और फार्म हाउस में मिले गोला-बारूद केस में छूट चुके सफदर नागौरी, उसके भाई और 10 साथियों पर CBI जांच बैठी। इंदौर की CBI कोर्ट ने सभी आरोपों में दोषी ठहराया। 27 फरवरी 2017 को विशेष CBI न्यायाधीश बीके पालोदा ने अवैध हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक रखने और आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गुजरात पुलिस 28 मई 2017 को नागौरी और उसके 10 साथियों को इंदौर लेकर आई थी। दूसरे दिन नागौरी को भोपाल जेल शिफ्ट कर दिया गया था। तब से वह यहीं है।

जिस साबरमती जेल में नागौरी बंद था, वहां मिली थी सुरंग
अहमदाबाद की जिस साबरमती जेल में नागौरी बंद था, वहां 2011 में 18 फीट लंबी सुरंग मिली थी। जेल के ‘छोटा चक्कर’ के बैरक नम्बर 4 से यह सुरंग खोदी गई थी। गार्डनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी से ही आरोपियों ने सुरंग खोद डाली थी।

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‘लोकतंत्र का अर्थ बहुमत की तानाशाही नहीं है। कश्मीर का फैसला कश्मीरी ही करें। यह प्रस्ताव जिनके गले नहीं उतर रहा वे वाकई फासीवादी मनोवृत्ति का परिचय दे रहे हैं। उसने लिखा- पक्षी पिंजरे में हो या कुत्ता जंजीर से बंधा हो और आप दुनिया से कहें कि यह तो स्वेच्छा से मेरे साथ है तो कोई अंधा ही इस पर विश्वास कर सकता है।’पिता पुलिस से रिटायर हुएनागौरी 1970 में उज्जैन में महिदपुर के नागौरी गांव में पैदा हुआ था। उसके पिता गहिरुद्दीन नागौरी उज्जैन पुलिस क्राइम ब्रांच में थे और 2005 में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हुए। नागौरी ने 1999 में विक्रम यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन कम्प्लीट की। यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही वह सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) से जुड़ गया था। उसे प्रदेश अध्यक्ष का पद मिला था। भाई कमरुद्दीन नागौरी को आंध्र प्रदेश में सिमी प्रमुख की जिम्मेदारी मिली थी। आतंकी संगठन सिमी पर भारत सरकार 2001 में बैन लगा चुकी है।1993 में बना सिमी का सदस्य1992 में बाबरी विध्वंस और उसके बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद नागौरी कट्टरपंथी बन गया। 1993 में वह सिमी से जुड़ा। नागौरी के खिलाफ पहला केस 1997 में उज्जैन के महाकाल पुलिस थाने में दर्ज हुआ। 1998 में इंदौर में केस हुआ। इंदौर पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के बाद रिहा कर दिया था। गलत एक्टिविटीज में शामिल होने की वजह से पिता ने उससे संबंध तोड़ लिए थे। 2001 में संगठन पर प्रतिबंध लगने से पहले वह अंडरग्राउंड हो गया। उसे 11 दिसंबर, 2000 को भगोड़ा घोषित किया गया था।मस्जिदों में करता था भड़काऊ तकरीरेंनागौरी अंडरग्राउंड तो हो गया, लेकिन उज्जैन और आसपास के इलाकों में 2005 से 2007 के बीच एक्टिव रहा। मस्जिदों में भड़काऊ तकरीरें (उपदेश) देता रहा। विवादित पोस्टर चिपकाए। वह देशभर में विस्फोट कर अलकायदा जैसा नाम करना चाहता था। उन्हैल के पास झोपड़ी बनाकर इसकी साजिश रची गई थी। उज्जैन के महाकाल, खारकुंवा और माधवनगर थाने में कई अपराध दर्ज हैं। सिमी पर प्रतिबंध के बाद उज्जैन के तोपखाना क्षेत्र में सिमी के कार्यालय से महाकाल थाना पुलिस ने विवादित किताब और भड़काऊ पोस्टर बरामद किए थे।अहमदाबाद में 70 मिनट के अंदर हुए सिलसिलेवार धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी।इंदौर में फार्महाउस पर चलाता था ट्रेनिंग कैंपसफदर नागौरी को 26 मार्च 2008 को इंदौर के संयोगितागंज में एक फ्लैट से मध्यप्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ऑपरेशन में वह, उसका भाई कमरुद्दीन नागौरी समेत 11 सिमी आतंकवादी पकड़े गए थे। ये लोग इंदौर शहर से 35 किलोमीटर दूर चोरल में एक फार्महाउस पर आतंकी ट्रेनिंग कैंप चलाते थे। झारखंड, केरल, कर्नाटक और दूसरे राज्यों के सिमी सदस्यों को यहां ट्रेनिंग दी जाती थी। पुलिस को फार्महाउस से हथियार, गोला-बारूद, उर्दू और हिंदी में कट्टरपंथी साहित्य और विस्फोटक मिले थे। इस केस में नागौरी को छोड़ दिया गया था।तीन महीने बाद ही 26 जुलाई को दहलाया गुजरातअहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। 70 मिनट के अंदर 56 लोगों की मौत हो गई थी। 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। धमाकों में सफदर नागौरी शामिल था। उसे गुजरात पुलिस ने अरेस्ट कर लिया था। पूछताछ में नागौरी ने STF को बताया था कि सिमी के लड़ाकों को हिजबुल मुजाहिदीन के साथ जम्‍मू-कश्‍मीर में ट्रेनिंग मिली थी। नागौरी ने कहा कि उन्‍हें देशभर में विभिन्‍न तरह के आतंकी ऑपरेशनों के लिए ट्रेंड किया गया था।भारत के इतिहास में सबसे बड़ी सजा:अहमदाबाद ब्लास्ट के 49 दोषियों में से 38 को फांसी, 11 आखिरी सांस तक सलाखों के पीछे कैद रहेंगेसफदर को 2017 में इंदौर लाया गया था। दूसरे दिन उसे भोपाल जेल शिफ्ट कर दिया गया था।इंदौर केस में CBI ने की जांचइंदौर में ट्रेनिंग कैंप और फार्म हाउस में मिले गोला-बारूद केस में छूट चुके सफदर नागौरी, उसके भाई और 10 साथियों पर CBI जांच बैठी। इंदौर की CBI कोर्ट ने सभी आरोपों में दोषी ठहराया। 27 फरवरी 2017 को विशेष CBI न्यायाधीश बीके पालोदा ने अवैध हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक रखने और आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गुजरात पुलिस 28 मई 2017 को नागौरी और उसके 10 साथियों को इंदौर लेकर आई थी। दूसरे दिन नागौरी को भोपाल जेल शिफ्ट कर दिया गया था। तब से वह यहीं है।जिस साबरमती जेल में नागौरी बंद था, वहां मिली थी सुरंगअहमदाबाद की जिस साबरमती जेल में नागौरी बंद था, वहां 2011 में 18 फीट लंबी सुरंग मिली थी। जेल के ‘छोटा चक्कर’ के बैरक नम्बर 4 से यह सुरंग खोदी गई थी। गार्डनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी से ही आरोपियों ने सुरंग खोद डाली थी।ये भी पढ़िए:-फांसी वाले 38 आतंकियों में से 6 भोपाल जेल में:सजा की खबर 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