रेलवे का एक्सीडेंट प्रूफ सुरक्षा कवच:रेलमंत्री और चेयरमेन इंजन में सवार हुए, 50 KM/H स्पीड से आमने-सामने आ रही ये ट्रेनें 380 मीटर पहले रूकीं

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नई दिल्ली12 घंटे पहले

भारतीय रेलवे ने सुरक्षा टेक्नोलॉजी कवच का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण की खास बात ये थी कि पहली बार इस तरह के टेस्ट में रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन टेस्टिंग में शामिल थे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एक ट्रेन के इंजन में और बोर्ड के चेयरमैन विनय कुमार त्रिपाठी दूसरी ट्रेन के इंजन में सवार हुए। दोनों ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थीं। 380 मीटर पहले दोनों ही ट्रेनें खुद रुक गईं।

क्या है सुरक्षा कवच प्रणाली
इस तकनीक की मदद से ओवर स्पीडिंग को कंट्रोल किया जाता है। इस तकनीक में किसी खतरे का अंदेशा होने पर ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाता है। इस तकनीक का मकसद ये है कि ट्रेनों की स्पीड चाहे कितनी भी हो, लेकिन कवच के चलते ट्रेनें टकराएंगी नहीं।

वहीं, जब फाटकों के पास ट्रेन पहुंचेगी तो अपने आप सीटी बज जाएगी। कवच तकनीक लगे दो इंजनों में यह तकनीक टक्कर नहीं होने देगी। इमरजेंसी के दौरान इस तकनीक के जरिए ट्रेन से SOS मैसेज भी जाएगा। रेल मंत्रालय इसके जरिए रेलवे की सेवाओं और तकनीकी को और ज्यादा विस्तार देना चाहती है।

इस कवच को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर लागू करने की योजना है, जिसका कुल रूट लगभग 3000 किमी है।

इस कवच को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर लागू करने की योजना है, जिसका कुल रूट लगभग 3000 किमी है।

केंद्रीय बजट-2022 में कवच तकनीक का जिक्र
संसद में बजट-2022 पेश करने के दौरान केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे में सुरक्षा कवच प्रणाली का जिक्र किया था। वित्त मंत्री के मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत करीब 2 हजार किमी के रेलवे नेटवर्क को कवच तकनीक के अंदर लाया जाएगा। फिलहाल, यह परियोजना दक्षिण मध्य रेलवे में चल रही है। अब तक कवच को 1098 किमी से अधिक मार्ग और 65 इंजनों पर लगाया जा चुका है।

Hindi NewsNationalAshwini Vaishnav Video; Indian Railway Technology Kavach Test Done Successfullyनई दिल्ली12 घंटे पहलेकॉपी लिंकवीडियोभारतीय रेलवे ने सुरक्षा टेक्नोलॉजी कवच का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण की खास बात ये थी कि पहली बार इस तरह के टेस्ट में रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन टेस्टिंग में शामिल थे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एक ट्रेन के इंजन में और बोर्ड के चेयरमैन विनय कुमार त्रिपाठी दूसरी ट्रेन के इंजन में सवार हुए। दोनों ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थीं। 380 मीटर पहले दोनों ही ट्रेनें खुद रुक गईं।क्या है सुरक्षा कवच प्रणालीइस तकनीक की मदद से ओवर स्पीडिंग को कंट्रोल किया जाता है। इस तकनीक में किसी खतरे का अंदेशा होने पर ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाता है। इस तकनीक का मकसद ये है कि ट्रेनों की स्पीड चाहे कितनी भी हो, लेकिन कवच के चलते ट्रेनें टकराएंगी नहीं।वहीं, जब फाटकों के पास ट्रेन पहुंचेगी तो अपने आप सीटी बज जाएगी। कवच तकनीक लगे दो इंजनों में यह तकनीक टक्कर नहीं होने देगी। इमरजेंसी के दौरान इस तकनीक के जरिए ट्रेन से SOS मैसेज भी जाएगा। रेल मंत्रालय इसके जरिए रेलवे की सेवाओं और तकनीकी को और ज्यादा विस्तार देना चाहती है।इस कवच को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर लागू करने की योजना है, जिसका कुल रूट लगभग 3000 किमी है।केंद्रीय बजट-2022 में कवच तकनीक का जिक्रसंसद में बजट-2022 पेश करने के दौरान केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे में सुरक्षा कवच प्रणाली का जिक्र किया था। वित्त मंत्री के मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत करीब 2 हजार किमी के रेलवे नेटवर्क को कवच तकनीक के अंदर लाया जाएगा। फिलहाल, यह परियोजना दक्षिण मध्य रेलवे में चल रही है। अब तक कवच को 1098 किमी से अधिक मार्ग और 65 इंजनों पर लगाया जा चुका है।

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