सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास इंडियन आर्मी की एक्सरसाइज:चीनी विदेश मंत्री के भारत दौरे के बीच दिखाई ताकत, अभ्यास में फ्री-फॉल टेक्निक शामिल रही

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भारतीय सेना ने संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर में एक और एयरबोर्न इंसर्शन एंड रैपिड रिस्पांस अभ्यास किया है। ये कॉरिडोर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमा का हिस्सा है। इसमें विभिन्न एयरबेस से एयरलिफ्ट किए गए 600 पैराट्रूपर्स को 24 और 25 मार्च को सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास भारतीय वायुसेना के विमान से ऊंचाई से छलांग लगाई। खास बात यह है कि यह अभ्यास तब हुआ, जब चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे पर थे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ हुई बैठक के दौरान वांग को स्पष्ट रूप से चीन की सेनाओं को पूरी तरह से पीछे ले जाने के लिए कहा और साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए चरण में ले जाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एलएसी पर गतिरोध को रोकने के लिए दोनों देशों को काम करना होगा।

अभ्यास में फ्री फॉल टेक्निक शामिल रही
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभ्यास में एडवांस फ्री-फॉल टेक्निक, इंसर्शन, सर्विलांस, ​​टारगेट प्रैक्टिस और महत्वपूर्ण लक्ष्यों की निगरानी करना शामिल रहा। भारतीय सेना ने इस अभ्यास का वीडियो अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास भारत-तिब्बत-भूटान ट्राई-जंक्शन है, जहां चीन ने 2016 में डोकलाम गतिरोध के बाद से सैन्य बुनियादी ढांचे को बढ़ाया है। ये कॉरिडोर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमा का हिस्सा है और भारत के पूर्वोत्तर सीमावर्ती तिब्बत तक पहुंचने के लिए जरूरी है।

मार्च में यह दूसरा अभ्यास
इसी महीने 4 मार्च को सेना के विशेष बलों ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर इसी तरह का अभ्यास किया था, जबकि जनरल एम एम नरवने ने अलग से उत्तरी सीमाओं के लिए फिर से उन्मुख एक स्ट्राइक कोर के युद्ध के खेल की समीक्षा की। इंडियन आर्मी ने पिछले साल नवंबर में 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर लद्दाख में भी एयर एक्सरसाइज की थी।

LAC पर अभी भी गतिरोध जारी
बता दें कि अप्रैल 2020 में सीमा पर चीन की कार्रवाइयों के दौरान दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ा। गलवान, गोगरा, पैंगोंग और पीपी 15 के आसपास के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में अभी भी तनाव बना हुआ है। फिलहाल, LAC पर अभी भी गतिरोध जारी है।

भारतीय सेना ने संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर में एक और एयरबोर्न इंसर्शन एंड रैपिड रिस्पांस अभ्यास किया है। ये कॉरिडोर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमा का हिस्सा है। इसमें विभिन्न एयरबेस से एयरलिफ्ट किए गए 600 पैराट्रूपर्स को 24 और 25 मार्च को सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास भारतीय वायुसेना के विमान से ऊंचाई से छलांग लगाई। खास बात यह है कि यह अभ्यास तब हुआ, जब चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे पर थे।विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ हुई बैठक के दौरान वांग को स्पष्ट रूप से चीन की सेनाओं को पूरी तरह से पीछे ले जाने के लिए कहा और साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए चरण में ले जाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एलएसी पर गतिरोध को रोकने के लिए दोनों देशों को काम करना होगा।अभ्यास में फ्री फॉल टेक्निक शामिल रहीसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभ्यास में एडवांस फ्री-फॉल टेक्निक, इंसर्शन, सर्विलांस, ​​टारगेट प्रैक्टिस और महत्वपूर्ण लक्ष्यों की निगरानी करना शामिल रहा। भारतीय सेना ने इस अभ्यास का वीडियो अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है।सिलीगुड़ी कॉरिडोरसिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास भारत-तिब्बत-भूटान ट्राई-जंक्शन है, जहां चीन ने 2016 में डोकलाम गतिरोध के बाद से सैन्य बुनियादी ढांचे को बढ़ाया है। ये कॉरिडोर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमा का हिस्सा है और भारत के पूर्वोत्तर सीमावर्ती तिब्बत तक पहुंचने के लिए जरूरी है।मार्च में यह दूसरा अभ्यासइसी महीने 4 मार्च को सेना के विशेष बलों ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर इसी तरह का अभ्यास किया था, जबकि जनरल एम एम नरवने ने अलग से उत्तरी सीमाओं के लिए फिर से उन्मुख एक स्ट्राइक कोर के युद्ध के खेल की समीक्षा की। इंडियन आर्मी ने पिछले साल नवंबर में 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर लद्दाख में भी एयर एक्सरसाइज की थी।LAC पर अभी भी गतिरोध जारीबता दें कि अप्रैल 2020 में सीमा पर चीन की कार्रवाइयों के दौरान दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ा। गलवान, गोगरा, पैंगोंग और पीपी 15 के आसपास के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में अभी भी तनाव बना हुआ है। फिलहाल, LAC पर अभी भी गतिरोध जारी है।

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